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Thursday, 3 October 2024

बिहारी ने चूत का भेदन किया

 

मैं आशिक राहुल आज आपके सामने एक बार फिर प्रस्तुत हूँ एक नई सच्ची कहानी के साथ।

सबसे पहले मैं आप दोस्तों का शुक्रिया करना चाहूँगा जिन्होंने मेरी पिछली कहानियो को खूब सराहा और मुझे इतने ईमेल किये।

यहाँ आकर मुझे कई बहुत अच्छी दोस्त भी मिली।

तो दोस्तो, जैसा कि आपने पिछली कहानी बिहारी ने पंजाबन कमसिन की सील तोड़ीमें पढ़ा था कि कैसे एक बिहारी नौकर ने सिमरनजीत कौर उर्फ़ सिम्मी की चूत की सील तोड़ी।

आज इस कहानी में सिमी की बड़ी बहन हरप्रीत की कहानी को बयाँ करने जा रहा हूँ।

आगे की कहानी हरप्रीत कौर के शब्दों में…

मेरा नाम हरप्रीत कौर है, मैं सिमी की बड़ी बहन हूँ, मेरी उम्र 21 वर्ष है।

मैं सिमी से थोड़ी ज्यादा ही सेक्सी हूँ, 5 फुट 6 इंच हाइट, फिगर 34 30 34 का है मेरा।

दोस्तो, कहते है न जो एक बार सेक्स का स्वाद चख ले उसे फिर इसकी आदत हो जाती है।

ऐसा ही हुआ मेरी बहन सिमी के साथ।
अब वो रोज छुप छुपकर दिनेश के साथ सेक्स करने के बहाने और जगह ढूंढती रहती थी।

एक दिन खेत में लगे ट्यूबेल पर मैंने उसे दिनेश के साथ सेक्स करते रंगे हाथों पकड़ लिया।

उस दिन मैंने दोनों को बहुत डांटा और घर आ गये।

घर आकर सिमी मेरे आगे हाथ पैर जोड़ने लगी कि मैं घर पर किसी को इस बारे में न बताऊँ वरना उसकी बदनामी तो होगी ही साथ में बहुत पिटाई भी होगी।

आखिर अपनी बहन के प्रति प्यार ने उस दिन मुझे चुप करा दिया।

फिर उसने बताया कि वो ये सब पिछले तीन महीनों से कर रही है और उसे बहुत मज़ा आता है दिनेश के साथ सेक्स करने में।

उसकी बातें सुनकर उस रात मेरे दिल मे एक अजीब सी हलचल होने लगी, मेरे जिस्म में एक सुरसुरी सी होने लगी थी।

फिर अगले दिन से मैंने देखा कि पहले तो दिनेश मुझसे कुछ नज़रें छुपाने लगा था।

लेकिन 4-5 दिन में सब सामान्य हो गया।

अब मैंने न जाने क्यूँ दिनेश से उसकी और सिमी की कहानी उसके मुँह से जाननी चाही।

तो दिनेश ने थोड़ा सा शर्माते हुए सब सच बता दिया कि कैसे उसने सिमी के साथ सेक्स किया।

अब मेरे दिल में भी कुछ कुछ होने लगा था।

रात में सोते वक़्त दिनेश और सिमी के बारे में सोचते हुए अक्सर मेरी उंगली मेरी चूत में चली जाती थी।

किस्मत भी अजीब है दोस्तो, कुछ दिनों बाद जब घर पर कोई नहीं था तो मैंने सिमी को फिर दिनेश के साथ सेक्स करते हुए पाया।

वो दोनों बिल्कुल नंगे थे।

जैसे ही मैंने उन्हें इस हालत में देखा मेरा सब्र का बाँध भी टूटने लगा था।

मैं अन्दर कमरे में गई तो दिनेश और सिमी दोनों चौंक कर अलग हो गये।

दिनेश का काला करीब 7″ का लंड मेरे सामने फड़फड़ा रहा था।

एक बार तो मैं उसके लंड को देखती रह गई दोस्तो, फिर मैंने उन दोनों को डांटना शुरू किया तो दोनों माफ़ी मांगने लगे।

मैंने सिमी को दूसरे कमरे में भेज दिया और कहा- जब तक मैं ना कहूँ बाहर न आना।

दिनेश कपड़े पहन चुका था किन्तु आज मेरे अन्दर भी हवस का कीड़ा जाग चुका था दोस्तो, इसलिए मैंने पहले दिनेश को डांटा तो वो कहने लगा- बीवी जी, आप प्लीज भैयाजी को कुछ मत कहना, आप जो कहोगी मैं वो करूँगा। वरना भैयाजी मुझे काम से तो निकलेंगे ही साथ मे बहुत मारेंगे भी।

तो मैंने उसे कहा- जो मैं कहूँगी वो करोगे?

तो उसने हाँ भर दी।

तो मैंने उसे तुरंत उसके कपड़े उतारने को कहा।

तो पहले तो वो थोड़ा घबराया किन्तु बाद में उसे भी शायद एहसास हो ग्या था कि मैं अब क्या चाहती हूँ।

अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा था, उसका लंड थोडा ढीला पड़ गया था।

जब मैंने उस से पूछा- यह इसे क्या हो गया अभी तक तो तेरा ये बहुत बड़ा था अब ऐसे मुरझा क्यूँ गया है?

तो वो बोला- आपकी वजह से डरकर।

तो मैंने उसे कहा कि वो मुझसे डरे नही और मुझे उसके लंड का वही कड़क रूप देखना है।

दिनेश बोला कि इसके लिए मुझे उसका साथ देना होगा तो मैं मान गई।

फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख लिया और इशारा किया उसे सहलाने का।

तो मैंने भी धीरे धीरे उसके लंड को सहलाना शुरू किया।

अब उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।

मैंने उसके मांस को थोड़ा सा नीचे सरकाया तो उसका लाल सा लंड मुख चमकने लगा।

उसे देखकर मेरे पूरे जिस्म में आग सी लग गई।

फिर मैंने उसे कहा कि आज मेरे साथ वो सब करे जो वो सिमी के साथ करता है।

तो उसने मुझे मेरे भी कपड़े उतारने को बोला।

मैंने उसे कहा कि सिमी के कौन उतारता है?

तो उसने कहा- मैं…

तब मैंने उसे मेरे कपड़े उतारने को कहा।

सबसे पहले उसने मेरा सूट उतारा उसकी निगाहें एक पल के लिए मेरी ब्रा में कैद मेरी चूचियों पर गई।

मैंने उसे टोकते हुए कहा- क्या हुआ? पहले देखी नहीं है क्या सिमी की?

तो वो बोला कि मेरी चूचियाँ सिमी की चूचियों से ज्यादा मस्त और गोरी हैं।

उसके मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना महसूस हुई।

फिर उसने मेरी ब्रा को भी उतार दिया और मेरी चूचियो को चूसने लगा।

वो एकदम से मेरी एक चूची को मुख में लेकर चूसने लगा था।

उसके ऐसा करने से मुझे बहुत मजा आने लगा था और मैं उसका सर पकड़ कर अपनी चूचियों पर रगड़ने लगी।

वो मेरे निप्पल को कुतरने लगा।

मैंने एक हाथ से उसका लंड पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी।

फिर वो मुझे किस करता हुआ नीचे की ओर बढ़ने लगा।

उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया।
फिर उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया।
इसके बाद उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी।

अब हम दोनों पर ही हवस का नशा पूरी तरह चढ़ चुका था।

फिर वो मेरी चूत को चाटने लगा।

पहली बार कोई मेरी चूत को चाट रहा था।
एक अजीब सी ख़ुशी दिल में छाए जा रही थी।

करीब 5 मिनट तक वो मेरी चूत चाटता रहा और अचानक मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया।

इसके बाद वो मेरे ऊपर लेट गया और मेरी चूचियों को चूसने लगा।

उसका काला 7 इंच का लंड मेरी चूत से टकरा रहा था।

मैं भी आज उसके लंड को अपनी चूत में लेने के लिए भी बेचैन था।

इसलिए मैंने खुद ही उसका लंड पकड़कर अपनी चूत से सटा दिया।

वो मेरा इशारा समझ गया था, उसने पहला झटका मारा और उसका आधा के करीब लंड मेरी चूत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर चला गया।

मेरे मुँह से बरबस ही चीख निकल गई।

मैंने उसे रुकने को बोला पर अब वो कहाँ मानने वाला था, उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में लिया और तेज़ी से धक्के मारने लगा।
उसका काला लंड अब मेरी चूत में पूरी तरह से समां चुका था।

कुछ ही पलों के बाद मुझे भी अब मजा आने लगा था और मैं भी नीचे से अपने कोमल चूतड़ उठाकर उसका साथ देने लगी थी।

वो पूरी तेज़ी से धक्के मारे जा रहा था।

करीब दस मिनट तक हमारी यह पहली चुदाई चलती रही और दस मिनट के बाद दिनेश ने अपने लंड का पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेट गया।

मेरा भी इस चुदाई में दो बार पानी छुट चुका था।

तभी अचानक सिमी कमरे के दूसरे दरवाजे से बाहर निकलकर हमारे सामने आ गई और हम दोनों को इस अवस्था में देखकर चौंक गई।

बिहारी ने पंजाबन कमसिन की सील तोड़ी

 

दोस्तो, मेरा नाम सिमरनजीत कौर है, सभी प्यार से मुझे सिमी बुलाते हैं।

मैं पंजाब के मोगा जिले के एक छोटे गाँव से हूँ।
मेरी उम्र 19 साल है। मैंने +2 की है और अब घर के काम ही करती हूँ।
मेरे जिस्म का आकार है 32-28-34

दोस्तो, हमारे परिवार में पापा, मम्मी, दो भाई और दो बहन और मैं हूँ।
पापा और भाई खेती करते हैं, एक बहन बड़ी 21 साल और एक छोटी है 17 साल।

दोनों भाई बड़े हैं और पापा के साथ ही काम करते हैं।

तो दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि पंजाब में ज्यादातर बिहारियों को काम पर रखते हैं सभी।

ये लोग सस्ते में काम करते हैं।

तो हमारे यहाँ भी पापा ने दो बिहारी नौकरों को रखा हुआ है, दिनेश की उम्र 18, तो दूसरा रमेश 23 साल का है।

वो हमारे घर में पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं।

जब मैं और मेरी बहने स्कूल जाती थी तो वो दोनों में से कोई एक हमें रोज स्कूल छोड़ने जाता था।

दिनेश का काम था रोज भैंसों का दोनों वक़्त दूध दुहना।

जब दिनेश दूध निकलता तो मेरी मम्मी मुझे उसके पास भेज देती थी  कि मैं देखूँ कि कहीं वो दूध में कुछ गड़बड़ तो नहीं करता।
इसलिए मैं वहाँ उसके पास खड़ी होकर देखा करती थी।

उस वक़्त दिनेश जानबूझकर सिर्फ नीचे एक लुंगी पहनकर रखता था और ऊपर कुछ नहीं पहनता था।

जब वो दूध निकालता था तो वो बीच बीच में मेरी तरफ देख के मुस्कराता था और फिर जब वो देखता मैं उसे देख रही हूँ तो बड़े प्यार से भैंस के थन को सहलाने लगता और फिर मेरे 32 साइज़ के मस्त स्तनों को घूरने लगता।

मुझे भी उसका इस तरह से घूरना अच्छा सा लगने लगा था।

मैं भी उसे देखकर धीरे से मुस्करा देती थी।

मेरे जिस्म में भी अजीब सी सरसराहट होने लगती थी।
सेक्स के प्यारे प्यारे ख्वाब पूरे बदन को रोमांचित कर देते थे।

कई दिन ऐसे ही चलता रहा।

अब मैंने नोट किया कि दिनेश मेरे आस पास रहने की कोशिश करता था।
एक दिन वो हमें स्कूल से लाने के लिए आया।

उसने साइकिल पर आगे मुझे बैठाया और पीछे बड़ी दी को।
क्योंकि छोटी बहन उस दिन नही आई थी।

रास्ते में मैंने देखा कि दिनेश जानबूझकर पैडल मारते वक़्त अपनी टांगों से मेरे चूतड़ों को रगड़ रहा था।

वो हौले हौले से अपने पैर से मेरे कूल्हों को सहला रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मेरी कुंवारी चूत में खुजली सी होने लगी थी जैसे हजारों चीटियाँ रेंग रही हों।

बीच बीच में वो खड़े होकर साइकिल चलाने की कोशिश करता था। जिससे उसका तना हुआ लंड मेरी गाण्ड से छू रहा था।

पहली बार मुझे मेरी गाण्ड पर उसके लंड के एहसास ने बहुत ज्यादा उत्तेजित कर दिया था।

मैंने बीच में उसे मुड़कर देखा और उसे स्माइल की तो वो समझ गया कि मुझे भी अच्छा लग रहा है उसका यूँ छूना।

फिर शाम को जब वो दूध निकालने लगा तो मैंने उसे मुझको भी सिखाने को कहा।

तो वो तुरन्त मान गया और उसने मुझे अपने आगे बैठा लिया।

फिर मैंने भैंस के थनों को पकड़ा तो उसने मेरे हाथ को थामकर अपने हाथ में ले लिया और मेरे हाथों को भींचकर भैंस के थनों को दबाकर दूध निकालना सिखाने लगा।

उसका लंड फिर से खड़ा हो चुका था और सिर्फ लुंगी में था तो उसका लुंगी में उठा हुआ लंड मेरी कोमल नरम गाण्ड से टकराने लगा।

मुझे अपनी गांड में उसके लंड का यूँ रगड़ना अच्छा लग रहा था तो मैंने कोई विरोध नहीं किया बल्कि उसे स्माइल देने लगी।
जिससे उसकी हिम्मत बढ़ रही थी।

फिर ऐसे ही तीन चार दिन चलता रहा।

अब हम जब अकेले में मौका मिलता तो थोड़ी बातें करने लगे थे।

फिर एक दिन जबी वो दूध निकलना सिखा रहा था तो धीरे से उसने पीछे से एक हाथ से मेरा स्तन पकड़ लिया।

मुझे उसकी इस पहल का कब से इंतजार था।
तो मैंने भी उसे मना नहीं किया।

धीरे धीरे उसने कमीज के ऊपर से ही मेरे दोनों स्तनों को खूब मसला।
पीछे से उसका खड़ा लंड मेरे चूतड़ों में फंसा हुआ था।

लेकिन इतने में मम्मी की आवाज आई और हमें जाना पढ़ा।

लेकिन अब वो समझ गया था कि मैं भी पूरी तरह से तैयार हूँ।
और वो मेरे साथ सब कुछ कर सकता है।

4-5 दिनों बाद पापा कहीं बाहर गये थे दोनों भाइयों और रमेश के साथ खेत का समान लेने।
दोनों बहनें स्कूल गई थी लेकिन मैंने छुट्टी ले रखी थी।

जब मम्मी दिन में अपनी सहेली के गई स्वेटर बुनने के लिए तो मुझे पता था वो घंटे से पहले नहीं आएँगी।

दिनेश को पापा ने घर छोड़ा हुआ था भैंसों की रखवाली और कुछ और कामों के लिए।

उस दिन मैंने लोअर और टी शर्ट पहन रखी थी जिसमें मेरे 32 साइज़ के गोर कसे स्तन बाहर झाँक रहे थे।

मैं कमरे में अकेली थी।
मैंने दिनेश को बुलाया और कहा कि मुझे किसी कीड़े ने काट लिया है शायद कंधे पर… तो वो देखे।

वो समझ गया था कि आज इस मौके का फायदा उठाना है।

उसने पहले पीछे जाकर एक हाथ से मेरे कंधे की हल्की सी मालिश की, फिर पूछा- आराम लग रहा है?

तो मैंने कहा- हाँ… अच्छा लग रहा है।

तो वो मेरे कंधे पर चुम्बन करने लगा।

मेरे मुहँ से सिसकारियाँ निकलने लगी।

फिर वो दोनों हाथ पीछे से लाकर मेरे दोनों बूब्स दबाने लगा।

मैं भी पूरी तरह गर्म हो गई थी।

फिर उसने मेरी टीशर्ट निकाल दी और ब्रा भी उतार दी।

अब वो आगे की साइड आकर मेरे दोनों स्तनों को चूसने लगा।

फिर उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी लोअर भी उतार दी।

मैंने पैंटी नहीं पहनी थी तो मैं पूरी तरह उसके सामने नंगी थी।

उसने फटाफट अपनी बनियान और लुंगी उतार दी।

उसका 6 इंच का काला फनफनाता लंड मेरे सामने था।

उसने मुझे चूसने को बोला तो पहले तो मैंने मना किया किन्तु फिर न जाने क्या सोचकर एक बार मुँह में लिया और दो तीन मिनट चूसा।
फिर वो फटाफट मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चूमते हुए अपना लंड मेरी चूत पर सेट करके धक्का मारा।

उसका लंड का काफी हिस्सा मेरी चूत में समा गया और मेरी जान सी निकल गई।

मेरे मना करने पर भी वो हटा नही, बोला- बीबी जी, बस एक बार दर्द होगा, थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो बस।

दो मिनट बाद वो फिर से धक्के मारने लगा।

फिर धीरे धीरे मुझे भी अच्छा सा लगना शुरू हो गया।
अब मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी।

दस मिनट की चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया।

जब वो हटा तो देखा मेरी चूत से थोड़ा खून भी निकला हुआ था।

एक बिहारी मने एक कमसिन पंजाबन की सील तोड़ दी थी।

फिर हमने अपने कपड़े पहने और बिस्तर साफ़ किया।

आगे की कहानियों में मैं आपको बताऊँगी कि कैसे रमेश और दिनेश ने मिलकर हम तीनों बहनों को चोदा।

Wednesday, 2 October 2024

बंगाली बिहारी दोनों ने मेरी बुर फाड़ी

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मजदूरन की खेत में फाड़ी

 मेरा नाम विजय है और मैं मेहसाणा के एक गाँव में रहता हूँ, घर पर सब लोग मुझे जॉन कहकर बुलाते हैं क्यूँकि मेरी बॉडी और चेहरा जॉन अब्राहम से मिलता है।
मेरे पापा एक किसान हैं और हमारी बहुत सारी ज़मीन है। खेती के लिए हम खेत में काम करने के लिए बहुत सारे मजदूर रखते हैं।
मेरे लौड़े का आकार 9 इंच है।
मैंने अपने कॉलेज की बहुत सारी लड़कियों की चूत फाड़ी है और इसी कारण से मुझसे दूसरी बार कोई लड़की नहीं चुदवाती है। मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता हूँ इसलिए मैं यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहता हूँ।
मैं एक बार घर गया तो मैंने देखा कि एक मजदूर परिवार रहने के लिए आया था। वो दोनों ही थे और उसकी बीवी मस्त माल लगती थी।
उसे देखने के बाद आप बोलेंगे क्या यह असल में मजदूरन है..!
उसे देखते ही मेरा लंड टाइट हो गया था। बस उस दिन से उसे चोदने का मन बना लिया था, पर बदनसीबी से कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।
एक दिन मैं टीवी देख रहा था, तभी मेरी मम्मी ने आवाज़ लगाई कि काली (उसका नाम) को खेत में से चारा लाने के लिए उसकी मदद करो। मैं उसके पीछे-पीछे चलने लगा उसकी मटकती गाण्ड देख कर मेरा लंड टाइट हो गया और चलते-चलते मेरे पैर से ना जाने क्या टकराया.. मैं उसे जा टकराया और मेरे हाथ सीधे उसके मम्मों पर गए।
‘ऐ कुछ किया.. तो मैं तुम्हारी मम्मी को बता दूँगी..’
उसके बाद वो मेरी कैपरी की तरफ देखने लगी जो कि मेरे पैरों के बीच में टेंट बन चुका था। वो मुस्कुरा कर चलने लगी और चली गई। उस बात को दस दिन हो चुके थे।
एक रात को मेरी मम्मी ने कहा- तुम्हारे पापा बाहर गए हैं और रात को नहीं आने वाले हैं, तो तुम खेत में सोने के लिए चले जाओ..!
और मैं टॉर्च लेकर लेकर खेत में चला गया।
मैं आपको बता दूँ कि नॉर्थ-गुजरात में जंगली नील गाय और भुंड का बहुत भय रहता है, वो फसल को खा जाते हैं और नुकसान पहुँचाते हैं।
मैं जाकर खटिया पर लेटा ही था कि मुझे कहीं से रोने की आवाज़ सुनाई दी।
मैं फ़ौरन उठ कर उस आवाज़ की तरफ बढ़ा तो मैंने देखा की वहाँ तो काली हगने बैठी थी। मैंने तुरंत टॉर्च चलाई तो वो हड़बड़ा कर कर खड़ी हो गई। मैंने उसकी उभरी हुई चूत देख ली थी।
वो बोली- तुम यहाँ क्या कर रहे हो..?
तो मैंने कहा- आज मेरे पापा बाहर गए हैं, तो मैं खेत में सोने के लिए आया हूँ।
और फिर मैंने उससे पूछा- तुम रो क्यों रही हो..!
तो वो बोली- मेरी शादी को 8 साल हो गए हैं और मुझे एक भी बच्चा नहीं हैं। उनको उस सब में कुछ मन ही नहीं है।
तो मैंने कहा- मैं तुम्हें औलाद का तोहफा दे सकता हूँ..!
तो वो पहले तो मना करने लगी पर मेरे बहुत कहने के बाद वो मान गई और बोली- ठीक है.. पर ये सब मैं अपने बच्चे के लिए कर रही हूँ।
तो मैंने कहा- ठीक है.. पर तुम्हें ज़रूर संतुष्ट करूँगा, मुझे पता है कि तुम्हारा पति नपुंसक है।
मैं उसे गोद में उठा कर अपनी खटिया पर ले गया। उसे लिटाया और उसे चूमने लगा। धीरे-धीरे वो गर्म होने लगी। मैंने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया।
तब तक मेरा हथियार भी खड़ा हो चुका था और उसकी गाण्ड को छूने लगा था।
उसकी गाण्ड पर लौड़े का अहसास होते ही मैंने शॉट मारना शुरू कर दिया और तुरंत मुझे दूर धकेल दिया और बोली- जॉन ये तुम क्या कर रहे हो?
अगली बार मैं उसके मम्मों दबाने लगा और साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसल रहा था। उसकी चूत की गर्माहट मुझे साफ़ महसूस होने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने उसका ब्लाउज उतारा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
वो अजीब-अजीब सी आवाजें निकालने लगी, कहने लगी- ..ह्ह्ह.. जॉन दबाओ.. उसका सारा रस पी जाओ..
फिर मैंने उसका घाघरा भी उतार दिया और उसकी चूत को देखने लगा।
फिर उससे कहा- तुम्हारा पति साला मादरचोद है… उसने तुम्हें कभी चोदा ही नहीं है। ऐसा लगता है कि तुम्हारी चूत अभी तक कुँवारी ही है।
वो बोली- तुम सही कह रहे हो… हम लोग सिर्फ़ नाम के पति-पत्नी हैं, पर पति पत्नी के बीच जो होता है, वैसा बिल्कुल नहीं होता है। सुहागरात के दिन भी उन्होंने कुछ भी नहीं किया था और मैं करवट बदल कर रोने लगी थी। तुम मुझे चोदने वाले पहले आदमी बनोगे..!
और फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा और वो आवाज़ निकालने लगी- आह चूऊऊदो मुझे, इसका सारा रस निकाल दो..!
फिर मैंने अपना 9 इंच का लंड निकाला तो वो देखकर ही डर गई और बोली- इतना बड़ा लंड तो मैं नहीं ले पाऊँगी। मेरे पति का लंड तो 3 इंच भी मुश्किल से होगा..!
मैं बोला- डरो मत हनी.. इस छोटे से छेद में से तो एक दिन बच्चा भी निकलेगा, तो इस लंड की तो क्या औकात है..! लो इसे चूसो और इसका सारा माल निकाल दो..!”
वो मना करने लगी और बोली- मैं तुमसे इस लिए चुदवा रही हूँ, क्यूँकि तुमसे मुझे एक बच्चा मिलेगा और तुम तो अपने मज़े के लिए ये करवा रहे हो..!
मैंने उसके बाल पकड़े और कहा- चाट इसे… साली रंडी… बहुत नाटक कर रही है..!
और मैंने अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया और एक ही झटके में पूरा लंड उसके गले तक डाल दिया। वो सांस भी नहीं ले पा रही थी, फिर मैंने बाहर निकाला।
फिर वो बोली- तुम जबरदस्ती मत करो.. मैं चूसती हूँ..!
और वो चाटने लगी और मैं तो स्वर्ग में पहुँच गया और फिर मैं झड़ने वाला था, तो उसका सिर पकड़ कर ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा और एक शॉट में मेरा लंड उसके गले में उतर गया और मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में ही छोड़ दिया।
वो भी उसे पी गई और बोली- इसका स्वाद बहुत ही अच्छा है..!
मेरे लौड़े से पानी निकल जाने के कारण लौड़ा कुछ शिथिल जरूर हो गया था पर उसने मेरे लौड़े को फिर से चूसा तो वो फिर से खड़ा हो कर लहराने लगा।
मैंने उसे रोका तो बोली- क्या हुआ और चूसूँ..?
मैंने कहा- नहीं बस ठीक है.. चल अब तेरी चूत को भी इसका स्वाद चखाता हूँ।
फिर मैं अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। मुझे उसकी चूत की जगह कोई लावा जैसा महसूस हो रहा था। फिर मैंने अपना लंड धीरे से उसकी चूत में पेला, मुश्किल से मेरे लंड का सुपारा ही अन्दर गया और वो चिल्लाने लगी। मैंने अपने होंठ उसके होंठ पर रख कर चूसने लगा और फिर एक जोरदार शॉट मारा। अबकी बार 3 इंच अन्दर गया और उसकी चूत में से खून बहने लगा।
फिर वो दर्द से कराहते हुए बोली- अब मुझसे नहीं सहा जाता..!
पर मैंने फिर एक शॉट मारा और पूरा लंड अन्दर चला गया और वो जोर से चीख पड़ी और बेहोश हो गई..!
और मैंने उसके होश में आने तक कुछ नहीं किया। साली ने मुझे बहुत तड़पाया था, अब उसकी बारी थी। फिर दस मिनट बाद उसको होश आया और मैं आगे-पीछे होने लगा।
आह.. क्या मज़ा था.. सुनसान रात और खटिया की चूँ..चूँ की आवाज़ मुझे मदहोश कर रही थी..!
फिर थोड़ी देर कराहने के बाद वो भी मुझे गाण्ड उँची करवा कर चुदवाने लगी। करीब आधे घंटे की धकापेल के बाद वो झड़ गई और उसका लावा मुझे महसूस हो रहा था। उसके माल की गर्मी से मुझे बड़ा उत्तेजक लग रहा था। करीब दस मिनट के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा ली और फिर मैं और वो साथ में झड़ गए और फिर उस रात मैंने उसे करीब 6 बार चोदा।
उसके बाद तो वो मेरे लौड़े पर फ़िदा हो गई और हम एक साल तक वैसे ही मौका मिलते ही एक-दूसरे में खो जाते थे। फिर 9 महीने और 4 दिन बाद उसे एक बच्चा भी हुआ। उसके पति को भी पता चल गया कि वो मेरा बच्चा था।
फिर वो उसे मेरे पास खुद ही चुदवाने लाता था और बोलता था- मैंने इसे कभी नहीं चोदा और मैं इसके पास नहीं जाता हूँ, क्यूँकि यह जब गर्म हो जाती हैं तो मैं इसे संभाल नहीं पाता हूँ

मेरा नौकर रामू

 

मेरा नाम नीता मेहता है। मैं 26 वर्ष की खूबसूरत विवाहित महिला हूँ।

जीवन में मुझे हर सुख मिला, मगर एक वो सुख नहीं मिल पाया, जो एक औरत चाहती है, शारीरिक सुख।

मेरे पति एक बड़े बिज़नसमैन हैं, और बिज़नस के चलते वो हमेशा घर से बाहर ही रहते हैं।

मेरे पास सुख साधन संपत्ति सब है, मगर जिस चीज़ को हमेशा अपने साथ चाहती हूँ, वो मेरे पास नहीं है, वो है मेरे पति… और उनका प्यार और सुख।
पिछले साल की बात है, मेरे पति जब घर आये थे, एक दिन रुके और पूरे दिन फोन पर लगे रहे और रात में मुझे बोले कि वो एक महीने के लिए लन्दन जा रहे हैं बिज़नस के सिलसिले में !

उस रात मैं फूट फूट कर रोई थी  कि यह भी कोई रिश्ता है।

उनके घर से जाने के बाद मैंने खूब शराब पी, कि मेरी तबियत खराब हो गई।

मेरे नौकर रामू ने मुझे अस्पताल भर्ती कराया, इलाज़ के बाद मुझे घर ले आया और बहुत सेवा की। तबियत ठीक होने के बाद मैंने एक दिन उसे बुलाकर उसे धन्यवाद दिया।
रामू बोला- मेमसाब हम तो आपके मुलाजिम हैं, आपकी खातिरदारी हमारा धर्म है। हम अपनी गरीबी के चलते बीवी बच्चो से दूर हियाँ कमाई के लिए पड़े है और आप सब कुछ होते हुए भी अपने पति से दूर हैं। माफ करना मेमसाब ज्यादा बोल दिया, दू साल से आपन घरवाली से नहीं मिले हैं, बहुत याद आती है उसकी। मगर कमाएंगे नहीं तो घर नहीं चल पायी हमार।
मैंने उसे दो हज़ार रुपये दिए और कहा, जाओ अपने घर हो आओ.. तो वो बोला- नहीं मेमसाब, हम ई पैसा घर भेजूंगा कि हमरा घर चलता रहे। हम आपकी सेवा में यहीं रहेंगे। आपका बहुत धन्यवाद।
रामू की बातें मेरे दिल को छू गई, कि यह गरीब इंसान अपनी पत्नी को इतना प्यार करता है और एक मेरे पति हैं कि उन्हें मेरी याद भी नहीं आती। कितना तड़पता होगा वो यहाँ पर अपनी बीवी के बिना, ठीक वैसे ही जैसे मैं अपने पति के बगैर।

तभी मुझे एक बुरा ख़याल आया कि हम दोनों एक दूसरे की तड़प भी तो शांत कर सकते हैं!

तब से मेरी नजरें उसके लिए बदल गई।
एक दिन वो घर में सफाई कर रहा था, उस समय वो उघारे बदन था, सिर्फ नीचे एक हाफ-पेंट पहन रखी थी। उसकी मांसल भुजायें और बदन को देख मुझे कुछ कुछ होने लगा।

मैंने ठान लिया रामू के साथ उसकी और अपनी दोनों की तड़प मिटा लूंगी।
उस रात रामू मेरे कमरे में आया और बोला – मेमसाब खाना लगा दें?
मैंने कहा- रामू मेरा एक काम करोगे?
रामू- बिलकुल करेंगे मेमसाब..
मैंने कहा- रामू, मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही, थोडा तेल गर्म कर लाओ, मेरे हाथ पैर दबा दोगे?
रामू- ठीक मेमसाब, हम तेल गर्म कर लाते हैं..
मैं उस समय गाउन पहने थी, मैं बिस्तर पर लेट गई।

रामू 5 मिनट में तेल गरमा कर कमरे में आ गया और वहीं खड़ा हो गया।
मैंने अपना गाउन जाँघों तक उठा दिया और कहा- रामू, मेरे पैर तेल लगा कर मालिश कर दो।
रामू ‘जी! मेमसाब’ कह कर मेरे पैर पर तेल की मालिश करने लगा।

मैंने जानबूझकर अपना गाउन कमर तक उठा दिया था, ताकि रामू को अपने जलवे दिखा सकूं।

रामू मेरे पैरों की मालिश करते हुए मेरी जाँघों के जोड़ को घूर रहा था, जहां मेरी पैंटी ने मेरी दौलत को छिपा रखा था।

रामू की उँगलियों की पकड़ मेरी जाँघों पर पहले से तेज हो गई।

फिर मैं पलट गई और बोली- रामू! अब मेरा गाउन उठा दो, और मेरी पीठ की मालिश कर दो, बहुत दर्द हो रहा है।
रामू ने मेरा गाउन पीठ से उठा कर पीठ की मालिश चालू कर दी। मैंने दीवार पर लगे शीशे में देख लिया कि अब वो मेरी पैंटी से ढके मेरे चूतड़ों की उठान और पीठ से चपके मेरी ब्रा के स्ट्रेप को घूर रहा था।

मैंने जानबूझ कर फेंसी ब्रा और पैंटी अंदर पहन रखी थी, कि उसकी मर्दानगी को जगी सकूं…
मैंने कहा- रामू! मेरी ब्रा का हुक खोल दे, फिर पीठ पर ठीक से मसाज कर…
कांपते हाथों से उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और पीठ को सहलाने लगा।

उसके हाथ काँप रहे थे।
थोड़ी देर बाद मैं पलट के सीधी हो गई, मैंने खुद ही अपना गाउन निकाल दिया और चित लेट गई और बोली- रामू! अब मेरी चूचियों की मालिश करो…
रामू- मेमसाब! क्या कह रही हैं?
मैंने कहा- मेरी चूचियों की मालिश कर दो…
रामू काँप रहा था और हिचकिचा रहा था। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर अपने स्तनों पर रख दिए और बोला- रामू! डरो मत! इनकी मालिश करके देखो, कैसा लगता है तुम्हे? बोलो अच्छा लग रहा है ना?
रामू कांपते हुए हाथो से मेरे स्तन दबाने लगा। वो हिचकिचा रहा था, मगर उसकी हाफपेंट में उसके लिंग की उठान देख के मैं उसके मन की इच्छा जान गई थी।
मैंने रामू से कहा- रामू, मैं अपने पति से सुख नहीं पा रही और तुम अपनी पत्नी का सुख नहीं पा रहे। तो क्यों न हम दोनों एक दूसरे को वो सुख दे दें, जिसके लिए हम दोनों तड़प रहे हैं। मना मत करना रामू, वरना मैं जी नहीं पाऊँगी। यूं समझ लो आज की रात मैं ही तुम्हारी घरवाली हूँ और तुम्हारा मुझ पर पूरा अधिकार है..
इतना कहकर मैंने उसके उत्तेजित लिंग को हाफपेंट से बाहर निकाल के पकड़ लिया और तुरंत मुख में ले लिया। रामू का लिंग मेरे मुंह में जाते ही फूल गया, कि उसका सुपारा लाल हो गया।

मैंने धीरे से उसकी पैंट की बटन खोल के उतार दिया। अब मैं उसके पूरे लिंग को चूस रही थी।

रामू का लिंग इतना बड़ा था कि एक बार में बस एक तिहाई लिंग ही मैं मुंह में ले पा रही थी।

मैंने उसके अंडकोष को सहलाया फिर उन्हें भी चूमते हुए खूब चूसा।

रामू जब उत्तेजित हो गया तो उसने मेरा सर पकड़ लिया और वो मेरे मुंह में ही झटके लगाने लगा।

मुझे खांसी आने लगी तो मैंने उसका लिंग अपने मुंह से बाहर निकाल दिया और कहा- धीरे धीरे करो!
उसने हामी में सर हिलाया तो मैंने फिर से रामू का लिंग मुंह में ले लिया। पहले तो उसने धीरे धीरे लिंग को मेरे मुंह में अंदर बाहर करते हुए लिंग चुसवाने का मजा लिया, फिर दुबारा वो पहले की तरह मेरा सर पकड़ के मेरे मुंह में जोर जोर से अपना लिंग घुसाने लगा तो मैंने उसके हाथ पकड़ लिए।

वो लिंग मेरे मुंह से नहीं निकाल रहा था, मैंने जोर लगा कर अपना सर पीछे किया और किसी तरह उसका लिंग मुंह से निकाल कर जोर की सांस ली।

जी में उस पार गुस्सा बहुत आया, मगर कुछ कहा नहीं, क्योकि अभी अपनी गरज थी।
मैंने कहा- तुम तो जालिम हो जाते हो, दम घुट जाता मेरा तो?
रामू बोला- माफ कर देना मेमसाब! हमसे रुका नहीं गया।
मैंने कहा- वो दूसरी जगह है, जहाँ रुका नहीं जाता !
रामू बोला- मेमसाब हम समझे नाही!
मैंने कहा- तू भी न! देखेगा?
रामू बोला- जी मेमसाब!
मैंने धीरे से अपनी फैंसी पैंटी उतार के अपनी टाँगे फैला कर उसे बोला- लो जी भर के देखो!
रामू मेरी योनि को आँखे फाड़ फाड़ के देख रहा था। उसकी शकल देख के ऐसा लगा जैसे वो आश्चर्यचकित हो गया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
रामू बोला- मैडम आपकी चूत इतनी गोरी कैसे है?
‘चूत’ सुनकर मुझे अजीब लगा, खैर! मैंने पूछा- क्यों! अच्छी नहीं है?
रामू बोला- नहीं मेमसाब, बहुत प्यारी है। हम आज तक किसी की इतनी गोरी चूत नहीं देखे। बहुत सुन्दर है।
मैंने उसे और उत्तेजित करने के लिए उसका लिंग पकड़ के कहा- ख़ाक सुन्दर है! हम तुम्हारे ‘इसके’ लिए इसे इतना सजा संवार के रखे और ये है कि दूर दूर भाग रहा।
साला देहाती खुशी के मारे बौरा गया, उसकी आँखों और मुंह से लार टपकने लगी और बोला- मेमसाब! आप हमरे लंड खातिर आपन चूत संवार के रखी थी?
मैं बिस्तर पर चित लेट गई और मैंने उसे और उत्तेजित करने के लिए अपने ऊपर लिटा लिया, फिर अपनी टांग फैलाते हुए कहा- और क्या? एक तुम हो कि देर कर रहे हो, क्यों नहीं मिलवा देते इन्हें? डालो न इसे?
इतना कह कर मैंने उसके लिंग मुंड अपनी योनिमुंख से सटा दिया। उस देहाती ने इतनी जोर का थाप मारा कि एक बार में ही आधा लिंग मेरी योनि के अंदर घुस गया।

मुझे बहुत दर्द हुआ कि मैं कराह उठी। वो साला सोचा कि मुझे मजा आ रहा है, और देखते ही देखते वो मेरी योनि पर पिल पड़ा।

मैंने अपनी टांगों से उसकी कमर को जकड़ लिया ताकि वो और झटके न मार पाए। लेकिन वो झटका मारना चालू रखे रहा। उसका लिंग बहुत बड़ा था, जैसे अंगरेजी ब्लू फिल्मो में होते हैं, पहले ही झटके में जैसे उसका लिंग मेरी बच्चेदानी पर टकरा रहा था।
मैंने कराहते हुए कहा- रामू! धीरे धीरे कर, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
रामू बोला- माफ कर देना, मेमसाब! हम धीरे धीरे करते हैं।
वो मेरे ऊपर चित लेट कर धीरे धीरे लिंग को मेरी योनि में अंदर बाहर करने लगा। मुझमे अब उत्तेजना संचार होने लगी।

मेरी योनि की दीवारें रस छोड़ने लगी, जिसमे भीग कर रामू का लिंग आराम से अंदर बाहर जा रहा था।

रामू बीच बीच में अपना लिंग बाहर निकाल कर फिर से योनि में डाल देता, तब मैं उत्तेजना से सराबोर हो जाती थी, क्योंकि हर बार उसका मोटा लिंग मुंड मेरी योनि के संकरे द्वार को फैलाकर कर भगशिश्न को रगड़ते हुए अंदर जाता था।

कसम से, वो मंजर बहुत ही उत्तेजक लगता था। मैंने अपने होठों को रामू के होठों से चिपका के पहले खूब किस किया, फिर अपनी जीभ उसके मुंह में दे दी।

रामू ने भी मेरे होठों का खूब रसपान किया।
फिर रामू मेरी गर्दन को, कानों को और गर्दन को चूमते हुए मेरे स्तनों तक आ गया। मैंने खुद अपने बांया निप्पल उसके मुंह में दे दिया।

पहले रामू ने मेरे निप्पल को हलके हलके काटा, फिर जोर जोर से चूसने लगा। उसकी  हरकत से मेरे बदन में आग गई, उत्तेजना अधिक होने पर मैं अपना निप्पल उसके मुंह से छुड़ाने लगी, तो रामू ने निप्पल को छोड़कर दूसरे निप्पल को मुंह में भर लिया।

मैंने उसका सर पकड़ कर इस निप्पल को भी छुड़ाने की चेष्टा की, तो रामू ने निप्पल को छोड़कर अपने दोनों हाथों से मेरे स्तनों को कसकर पकड़ लिया और भींचने लगा।

मुझे उसका मेरे स्तनों से खेलना आनंददायी लगा। स्तनों में अजब सी सुरसुरी मच रही थी। वो जितनी जोर से उन्हें दबाता, मुझे उतना सुख मिलता।
रामू ने झटकों की गति बढ़ा दी। मेरी साँसें तेज होने लगीं और मेरा जिस्म भी गरम होने लगा।

मेरी योनि इतनी गीली और उत्तेजित हो चुकी थी कि अब वो रामू का पूरा लिंग अंदर ले पाने में समर्थ थी। रामू के लिंग के हर झटके के साथ योनिमुख छल्ले के तरह अकड़ जाता था, फिर उसका लिंग योनि की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर दाखिल होता था।

मेरी योनि अब और झटके नहीं झेल पाई, देखते ही देखते मेरे अंदर रिसाव होने लगा।

मैं स्खलित हो रही थी, सच में यह पल मेरी जिंदगी का पहला चरम आनंद का पल था। वो अजीब सा मीठा दर्द था।

मेरी सिसकारियों से कमरा गूंज उठा। कुछ ही पलों में मैं निढाल हो गई।
रामू अभी भी मेरी योनि में जोर जोर सी लिंग को घुसा रहा था।

वो भी अब काफी तेज तेज सांस ले रहा था, मैं स्खलित होते हुए भी उसे साथ दे रही थी ताकि वो भी चरम आनंद पा जाए।

मैंने उसके होठों को अपने होठों से चिपका लिया और अपनी टांगों को फैला दिया। तभी उसका जिस्म कांपने लगा और दो तीन जोरदार झटके मारने के बाद उसने अपना लिंग कसके मेरी योनि में डाल दिया और रुक गया।

उसके लिंग से निकले गरम गरम स्राव को मैं अपनी योनि में महसूस कर रही थी। यह भी अत्यंत सुखदायी अनुभव था।

रामू मेरे ऊपर ही थका हुआ निढाल हो गया। मैंने प्यार से उसके सिर को अपने सीने से लगा लिया और उसके बालो में उंगलियां फिराने लगी। वो पसीने में लथपथ गहरी साँसें लेते हुए सुस्ता रहा था।
मैंने धीरे से उसे चूमा और पूछा- रामू! कैसा लगा।
रामू- मेमसाब, बहुत प्यारा था। आपको कैसा लगा?
मैंने कहा- तुमने दिल जीत लिया मुझे संतुष्ट करके।
थोड़ी देर बाद मैंने रामू से कहा- रामू, बाथरूम से तौलिया ला दो।
रामू ‘जी, मेमसाब’ कहकर मेरे ऊपर से उठा, जब उसका लिंग मेरी योनि से निकला तो वो वीर्य में सना था, लिंग के निकलते ही उसका वीर्य और मेरी योनि का स्राव रिसकर मेरी गुदा की घाटी से होता हुआ बिस्तर पर गिर गया।

रामू दौड़ कर तौलिया उठा लाया। मैंने पहले अपनी योनि को पोंछा और फिर तौलिये को योनि मुख पर दबा लिया।

मैं अभी भी उसके लिंग को देख रही थी। मैंने उसके लिंग को मुंह में लेकर चूसा और उस पर लगे वीर्य को साफ़ कर दिया।
फिर मैं रामू को अपने बगल में लिटाकर उसके सीने पर सिर रखकर सो गई।

अब अगले दिन सुबह फिर से प्यार का वही सिलसिला जारी हो जाता है…. उसकी कहानी फिर आपको प्रेषित करूंगी।
मेरी कहानी कैसी लगी आप सबको … जरूर बताइयेगा।

सेठानी का पालतू चोदू

 

आज मैं आपको अपने जीवन की एक छोटी सी घटना, जो आज से लगभग 3 साल पहले 2009 में हुई थी, बताता हूँ।

मैं उस समय एक सेठजी के यहाँ दुकान पर काम करता था। सेठ की दुकान घर के बाहर ही थी, जिसका एक दरवाजा घर के अन्दर ही खुलता था।

जब मैं नया-नया दुकान पर काम करने गया, तो मैं घर के अन्दर जाते हुए शर्माता था, पर जल्द ही सबके साथ परिचय हो गया और मैं सबसे घुल-मिल गया।

अब मैं घर के अन्दर जाने लगा।

सेठजी का एक लड़का है जो शहर से बाहर पढ़ता है।

सेठजी दुकान के काम के लिए कई बार शहर से बाहर जाते थे और दो-तीन दिन में लौटते थे।

सेठजी एक बार दुकान के काम से शहर से बाहर गए। मैं दुकान पर अकेला था, उस दिन रविवार का दिन था।

रविवार को दुकान जल्दी ही बंद कर देते थे, तो मैंने भी दोपहर 12 बजे दुकान बंद कर दी और चाबी देने सेठानी के पास गया।

मैंने आवाज़ लगाई पर सेठानी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने सोचा कि अपने कमरे में कोई काम कर रही होंगी, मैं उनके कमरे में चला गया।

सेठानी सोई हुई थीं और उन्होंने गाउन पहन रखा था और उनकी जांघ तक का नजारा दिख रहा था।
जब मैंने आवाज़ दी तो वो उठीं।

मैंने पूछा- आपको क्या हुआ, आपकी तबियत तो सही है?

सेठानी बोलीं- मेरे सर में दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- मैं डॉक्टर को बुला लाता हूँ।

वो बोलीं- डॉक्टर को मत बुलाओ, मेडिकल स्टोर से गोली ले आ.. अभी सही हो जाएगा।

मैंने कहा- ठीक है अभी लाता हूँ।

मैं मेडिकल से दवा ले कर पांच मिनट में आया और सेठानी को दवा दे दी।

उन्होंने कहा- मेरे पैर दुःख रहे हैं, जरा दबा दे..!

वो बेड पर लेट गईं।

मैंने उनके पैर दबाने शुरू किए। पांच मिनट बाद उन्होंने अपना एक पैर मोड़ लिया, जिससे मुझे उनकी नीले रंग की पैंटी साफ़ दिख रही थी।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैं धीरे-धीरे पैर दबाते हुए कई बार हाथ घुटनों से ऊपर ले जाने लगा, उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा तो धीरे-धीरे कर मैंने गाउन को ऊपर कर दिया जिससे कि मुझे उनकी पैंटी साफ़ दिख रही थी।

तभी मैंने सामने शीशे में देखा की सेठानी मेरी आँख बचा कर आँख खोल कर मुझे देख रही थीं।

मैं सोच रहा था कि उन्हें नीद आ गई है, पर अब मुझे मालूम हुआ कि यह तो सोने का नाटक कर रही है।

मैं सब समझ गया सेठानी की चूत कुलबुला रही है, सो मैंने भी देर न करते हुए उनकी जाँघों पर हाथ फिराना शुरू किया और अब कभी-कभी मेरा हाथ उनकी चूत को भी छू रहा था।

उन्होंने अपनी दोनों टाँगें फैला दीं, बस मुझे हरी झंडी मिल गई। मैं अब उनकी चूत को हर बार जोर से दबा देता।

फिर हाथ फेरते-फेरते मैंने एक हाथ उनकी पैंटी के अन्दर चूत में डाल दिया। सेठानी की चूत को हाथ लगते ही वो सिसक पड़ी।

मैंने अब ठीक से बेड पर बैठ कर उनकी पैंटी को नीचे खींच दिया और चूत को सहलाने लगा। उसने भी मेरी जाँघों पर हाथ फेर कर मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और पैन्ट के अन्दर से ही सहलाने लगी।

मैंने अन्तर्वासना पर पढ़ा था कि अगर औरत को गर्म करना है, तो चूत को जीभ से रगड़ना सबसे अच्छा तरीका है। तो बिना देर किए मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी और जोर-जोर से चाटने लगा।

सेठानी पांच मिनट में पूरी गरम हो गई और एक बार झड़ गई।

अब उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरा लंड चूसने लगी।

मैंने कभी पहले न तो किसी को चोदा था और न लंड चुसवाया था तो मैं भी पांच मिनट में ही झड़ गया।

अब उसने पहला अपना गाउन उतारा और फिर एक-एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए और बेड पर चित्त लेट गई।

मैं भी बेड पर चढ़ गया और उसके मम्मों को निचोड़ कर अपना लौड़ा उसकी चूत की दरार में फँसा कर उसे चोदने लगा।

‘दे धमाधम दे धमा धम’ घस्सों का दौर चला।

मैं ऊपर से और सेठानी नीचे से… दोनों घस्से मार रहे थे।

लगभग 15 मिनट जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए, मैं उसके ऊपर ही निढाल हो गया।

मैं उसके बड़े-बड़े मम्मे मुँह में लेकर चूसने लगा, उसने मेरा लंड पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया।

मैं फिर तैयार हो गया और फिर उसके ऊपर चढ़ गया।

15 मिनट बाद वो झड़ गई और उसके पांच मिनट बाद मैं भी झड़ गया।

उस दिन मैंने पहली बार किसी को चोदा था, मुझे बहुत मजा आया।

उस दिन के बाद मैंने बहुत बार उनको चोदा।

उसने भी मुझे अपना पालतू चोदू बना कर रखा था। कभी कभी तो मैं सेठ के किसी काम से अन्दर जाता था और दस मिनट में सेठानी की पुंगी बजा कर आ जाता था। सेठानी भी मुझे अलग से पैसे देने लगी थी।

चुदाई नौकरानी की, गोद भरी

 मैं सभी लोगों की तरह ये बिल्कुल नहीं लिखना चाहूँगा कि मेरा लंड 8 या 9 इंच का है, न ही मुझे योनि चाटने में कोई दिलचस्पी है। ये सब मुझे पसंद नहीं है।
हम आप लोगों को अपने बारे में बता देना ज़रूरी है कि मेरा नाम पवन है। मैं लखनऊ में रहता हूँ। एक कंपनी में बड़ी पोजीशन पर काम करता हूँ। मेरे सेलरी भी ठीक है। मैं यहाँ एक फ्लैट में अकेले ही रहता हूँ। मेरा लंड सिर्फ़ 5 इंच का है और दो इंच मोटा है।
अब सीधे कहानी पर आते हैं। आप लोग बोर हो रहे हैं, मुझे पता है… मेरे साथ भी यही होता है।
मैं चूंकि अकेले ही रहता था। ऑफिस से आकर खाना बनाना मुश्किल था। फिर घर की सफाई भी नहीं हो पाती थी। अकेले क्या-क्या करता तो सोचा कि एक नौकरानी रख लेता हूँ। फिर क्या था सुबह ही मैंने अपने बिल्डिंग के गार्ड को नौकरानी के लिए बोल दिया।
दूसरे ही दिन एक औरत आई। उस मैंने देखा वो थोड़ा सांवली थी, उसका फिगर 32-30-32 का रहा होगा। उसकी लंबाई पाँच फुट रही होगी। तब तक मेरे दिमाग में कोई ग़लत विचार नहीं थे। मैंने उसे बता दिया कि एक टाइम का खाना, चाय नाश्ता, 3000 रुपए नकद दूँगा, वो तैयार हो गई।
वो पास की ही कॉलोनी में रहती थी, वो काम पर आने लगी। मैंने उससे कह दिया था कि जो सही लगे, वो बना लिया करो।
पैसे लेकर सब्जी, समान सब ले आती थी।
मेरी हमेशा नाइट-शिफ्ट ही रहती थी, इसलिए मैं सुबह 8 बजे तक रूम पर आ जाता था। उसके आ जाने के बाद से मुझे अपना घर थोड़ा अच्छा लगने लगा था।
एक दिन मेरे साथ किस्मत ने ऐसा किया, जो मैंने सोचा भी नहीं था।
सुबह मैं रोज की तरह ऑफिस से आया, उसने मुझे नाश्ता और दूध दिया।
मैं सोफे पर बैठा था, मैंने उस से कहा- तुम भी नाश्ता करो।
तो उसने कहा- मैं बाद में कर लूँगी।
मेरी ज़िद पर वो तैयार हो गई। एक बात आपको बताना भूल गया, वो शादीशुदा थी। तब तक मैंने उस के पहले जिंदगी के बारे में कुछ नहीं पूछा था।
उस दिन नाश्ता करने के बाद मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर मे कितने लोग हैं?
तो उसने कहा- सिर्फ़ दो, मैं और मेरे पति।
मैंने पूछा- वो क्या करता है?
तो उसने कहा- वो रिक्शा चलाते हैं।
फिर मैंने कहा- तुम्हारी शादी को कितना समय हो गया?
तो उसने कहा- जब मैं 17 साल की थी, तभी हो गई थी। 6 साल हो गए मेरे शादी को। अभी मैं 23 साल की हो गई हूँ।
अभी मेरे उमर भी 24 की थी। यह घटना 2010 की है।
मैंने उससे पूछा- तुम्हारा कोई बच्चा नहीं है?
वो थोड़ी देर चुप रही, फिर रोने लगी।
हम लोग बाहर सोफे पर बैठे थे, मैंने सोचा बगल में कोई इसका रोना-पीटना सुन लेगा तो समस्या हो सकती है।
मैंने उसको बांह पकड़ कर उठाया, उसके बाद उस बेडरूम में ले गया, मेरे पास डबलबेड है, उस पर बैठा दिया।
मैं उसको समझाने लगा और उसको ढांढस बंधाते हुए अपने गले से लगा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा, वो सिमट गई।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ? तुम्हारे पति कुछ ‘करते’ नहीं क्या?
तो उसने रोते हुए कहा- सुबह 7 बजे घर से रिक्शा लेकर चले जाते हैं, जितना कमाते हैं उतने की शराब पी कर शाम को दस बजे तक घर आकर सो जाते हैं। कभी अगर कुछ ‘करते’ भी हैं, तो ना ही मेरे को चूमते हैं, न ही कुछ और करते हैं। बस अपना ‘वो’ निकाला, मेरे साड़ी और पेटीकोट उठा कर ‘डाल’ दिया। एक मिनट में ही खेल ख़तम..! इसके बाद टांग पसार कर सो जाते हैं और मुझे उनके मुँह से शराब की महक भी नहीं पसंद आती है, लेकिन क्या करूँ, मेरी किस्मत में शायद यही लिखा है।
ये सब वो मुझे वो रो-रो कर बता रही थी।
मैंने उसे चुप कराया।
उसे देख कर मेरे अन्दर भी कुछ होने लगा था। मेरे लंड महाराज को भी ओखली की ज़रूरत थी।
क्या करता मैं भी तो एक जवान ही था और कुँवारा भी था।
मैंने उससे कहा- चिंता की कोई बात नहीं है, सब सही हो हो जाएगा, मैं हूँ न..!
यह कहानी आप लोग अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं, यह मेरी सच्ची कहानी है।
मैंने उससे हिम्मत करके कहा- अगर तुम्हारी इच्छा हो, तो तुम भी माँ बन सकती हो। तुम्हारी बदनामी भी नहीं होगी।
उसने बड़ी उत्सुकता से पूछा- कैसे..?
मैंने कहा- देखो मुझे एक साथी की ज़रूरत है और तुम्हें बच्चे की। मेरा अभी शादी करने का मूड नहीं है, तुम मेरा साथ दो, मैं तुम्हारा..!
तो उसने कहा- अपने पति को क्या कहूँगी?
मैंने- कह देना कि यह आपका ही है। उनकी किसी दिन की ‘मेहनत’ का फल बता देना कि बच्चा रूक गया।
उसने कहा- बदनामी हो सकती है?
मैंने कहा- कैसे..? किसी को पता ही नहीं चलेगा तो कैसे..? तुम यहाँ दिन में काम कर रही हो। मेरे साथ मेरी बीवी बन कर रहो। जिंदगी भर बिना बच्चे से तो अच्छा ही है।
वो कुछ नहीं बोली, चुप रही।
मैंने उससे कहा- सोच लो फिर बताना…!
फिर मैं सो गया, वो रसोई में चली गई।
दो घंटे बाद मैं उठा, खाना खाने लगा।
तो उसने कहा- जो आप कह रहे थे शायद वो ठीक ही है।
फिर क्या था मेरे मन की मुराद पूरी हो गई। तब शायद दो बज रहे थे। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसको जी भर कर चूमा और धीरे-धीरे उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने ना ही ब्रा पहनी थी और न ही कच्छी…!
उसकी योनि पर बड़े बड़े बाल थे, शायद उसने काफ़ी दिनों से बनाए भी नहीं थे।
मुझ पर तो जवानी का भूत सवार था सो इस सब को देखने की फुरसत किसे थी।
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए।
मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा, कहीं नहीं छोड़ा। सर से लेकर पाँव तक उसको खूब उत्तेजित किया। वो पूरी गर्म हो चुकी थी।
मैंने अपने लंड महाराज को उसकी चूत की दरार पर रख दिया, वो इतनी गीली हो गई थी कि लंड महाराज ने अपना रास्ता खुद ही बना लिया।
दो इंच जाने के बाद उसके मुँह से चीख निकल गई- अई..दर्द हो रहा है…!
मैंने उसके मुँह को अपने मुँह में भर लिया। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी पतले मुँह की बोतल में अपना लौड़ा डाल रहा होऊँ।
वो शादीशुदा लग ही नहीं रही थी।
मैंने उसके साथ जम कर दस मिनट तक चुदाई की, हम दोनों पसीने से भीग गए थे, मैंने अपना माल अन्दर ही डाल दिया।
वो भी अपनी गर्मी खो चुकी थी और उसके मुँह पर ख़ुशी दिख रही थी, उसने मेरे शरीर पर कई जगह नाखून से और दाँत से निशान बना दिए थे।
अब तो बस रोज सुबह आते ही हम दोनों बिस्तर पर ‘दो जिस्म एक जान’ हो जाते हैं।
आज वो एक बेटे की माँ है, जो मेरा ही बेटा है।
आज वो खुश है और आज भी मेरे यहाँ काम करती है। उसके साथ आज भी चुदाई होती है।
आप लोग अपनी राय भेजें, कैसी लगी आपको उसके बाद उसने कई ‘माल’ मुझे दिलाए। वो कहानी आप लोगों के मेल के बाद भेजूँगा।

ज्योतिषी बन कर भाभी को बच्चा दिया

  मेरे पास जॉब नहीं थी, मैं फर्जी ज्योतिषी बनकर हाथ देख कर कमाई करने लगा. एक भाभी मेरे पास बच्चे की चाह में आई. वह माल भाबी थी. भाभी की रंड...