Wednesday, 3 September 2025
बचपन का प्यार पड़ोसन कुंवारी लड़की की चुदाई
सहेली के भाई के बड़े लंड से चुदकर मजा लिया
दोस्तो, मेरा नाम अंकिता सिंह है और मैं 19 साल की हूँ.
मेरा फिगर 32-28-34 की है.
लड़के मेरी जवानी पर मरने को रेडी रहते हैं.
मैंने राह चलते कुछ बूढ़ों को भी लंड सहलाते हुए देखा है.
मुझे उस वक्त बहुत अच्छा लगता था कि मर्द मेरी जवानी लूटने के लिए मचलते हैं.
मैं बी.ए. सेकंड ईयर में पढ़ती हूँ और दिल्ली के करोल बाग में रहती हूँ.
मेरा एक ब्वॉयफ्रेंड भी है और मैं अक्सर उसके साथ चुदाई करती रहती हूँ.
लेकिन आज की यह Xxx लड़की चुदाई स्टोरी मेरी सहेली के भाई के साथ की है जिसके साथ चुदाई करके मैं उसकी दीवानी हो गई हूँ.
समय बर्बाद न करते हुए मैं अपनी कहानी शुरू करती हूँ.
यह बात कुछ महीनों पहले की है.
मैं अपनी सहेली शिप्रा की बहन की शादी में गई थी, जिसका नाम प्रीति है.
प्रीति की शादी में जाकर मैं अपनी बाकी सहेलियों से और शिप्रा से भी मिली.
कुछ देर के बाद शिप्रा ने मुझे अपने पेरेंट्स और अपने भाई से मिलवाया.
मैंने उसके भाई से हाथ मिलाया तो उसने हल्के से मेरा हाथ दबाया और थोड़ी देर बाद छोड़ा.
मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन मैंने इसे इग्नोर कर दिया.
बीच-बीच में उसका भाई मेरे और मेरी फ्रेंड्स के पास आया और खाने के लिए पूछने लगा.
फिर वह हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स भी ले आया.
जब मैंने उससे वॉशरूम का रास्ता पूछा, तो वह बोला- चलो, मैं ले चलता हूँ!
मैं उसके साथ चल दी.
रास्ते में उसने मेरी तारीफ की और मुझसे एक बात पूछने की इजाजत मांगी.
मैंने हां बोल दिया.
उसने मेरे ब्वॉयफ्रेंड के बारे में पूछा.
मैंने हंस कर मना कर दिया कि नहीं मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है.
वह मजाक में बोला- इतनी खूबसूरत लड़की का कोई ब्वॉयफ्रेंड कैसे नहीं हो सकता. वैसे, अगर आप चाहें तो मुझे फ्रेंड बना सकती हैं!
मैंने हंसकर ‘ओके’ बोल दिया और वॉशरूम चली गई.
वापस आई तो उसने मुझे एक पर्ची दी, जिस पर उसका नंबर लिखा था.
मैंने हंसकर ‘ठीक है’ कहा और अपने ग्रुप में वापस आ गई.
मैंने नोटिस किया कि वह मुझे ही घूरे जा रहा था.
फिर शादी अटेंड करके मैं घर आ गई.
मैं उसके बारे में सोचने लगी.
वह भी अच्छा खासा मर्द लग रहा था और सच कहूँ तो वह मुझे अपने ब्वॉयफ्रेंड से ज्यादा आकर्षक लगा था.
मैंने उसे सोच कर एक ब्लूफिल्म देखी और अपनी चुत में उंगली करके झड़ गई.
दो दिन बाद मेरे व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया.
मैंने पूछा- कौन?
तो उसने बताया- सिड!
मैंने फिर पूछा- कौन सिड?
तब वह बोला- शिप्रा का भाई सिड यानि सिद्धार्थ!
अब मैं समझी कि मुझसे कौन बात कर रहा है.
अब हमने कुछ देर बात की.
वह मुझसे यूं ही बातें कर रहा था.
मुझे भी समझ में आ गया था कि यह मुझ पर डोरे डालने की कोशिश कर रहा है.
चूंकि मुझे खुद भी वह भा गया था तो मैं भी उसके साथ बात करती रही.
उसने अचानक से मुझसे कहीं घूमने चलने के लिए कहा.
मैं पहले तो चुप हो गई.
फिर उसने किसी मॉल में चल कर कुछ चाट पकौड़ी खाने के लिए कहा.
इस पर मैं राजी हो गई क्योंकि मुझे गोलगप्पे खाना बहुत पसंद हैं.
अब वह अपनी बाइक से मुझे लेने आने की कहने लगा.
तो मैंने उसे मना कर दिया और कहा कि मैं अपने घर से किसी लड़के के साथ बाइक
पर नहीं जा सकती. आस पास के परिचितों को मैं क्या जबाव दूँगी कि यह लड़का
कौन है.
वह बोला- तो फिर आप मुझे बाहर किसी चौराहे पर मिल जाएं.
मैंने ओके कहते हुए उससे अपने घर से आगे पड़ने वाले सिग्नल पर मिलने का कह दिया.
वह आ गया और मैं उसके साथ सलीके से बैठ कर एक बड़े से मॉल में चली गई.
उधर हम दोनों काफी देर तक साथ घूमे और काफी बातें की.
सिड एक हंसमुख लड़का था और मुझे काफी पसंद आ गया था.
वह बातचीत भी बड़े सलीके से करता था.
इस घटना के बाद हमारी रोज़ाना बात होने लगी.
हमारे बीच धीरे धीरे अडल्ट जोक भी साझा होने लगे … और फिर एक दिन सिड के साथ मेरी सेक्स की बातें होने लगीं.
उस दिन उसने बिना पूछे अपनी न्यूड पिक भेज दी जिसमें उसका लपलपाता हुआ लंड मस्त लग रहा था.
शायद यह करीब आठ इंच या उससे ज्यादा बड़ा लंड था.
ऐसा लंड मैंने अब तक सिर्फ ब्लूफिल्म्स में ही देखा था.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड का लंड सामान्य साइज़ का लंड है.
मैंने नापा तो नहीं है पर शायद पांच इंच या उससे थोड़ा कम ही लंबा होगा.
उसका लंड सामान्य मोटाई का ही है. जब ढीला होता है तो आगे से कुछ नुकीला सा रहता है और उसके बाद कुछ फूला सा … फिर कुछ कम मोटा होता हुआ लटका सा रहता है.
हालांकि जब मैं अपने ब्वॉयफ्रेंड के लंड को चूस कर खड़ा करती हूँ, तब वह काफी सुंदर लगता है.
फिर जब उसके लौड़े को मैं अपनी चुत में लेती हूँ … तो वह मेरी मस्त चुदाई भी करता है.
पर आज सिड के लंड को देख कर मेरी चुत में आग लग गई थी.
मैं Xxx लड़की तो उसे देखकर ललचाने लगी लेकिन सिड के सामने मैंने नॉर्मल बिहेव किया.
वह भी मुझसे मेरी चूचियों को देखने की मांग करने लगा.
मैंने उसे एकदम से अपने दूध नहीं दिखाए.
पहले मैंने उसे तरसाया, झुक कर उसे अपने मम्मों की झांकी दिखाई.
फिर एक दिन गहरे गले वाले टॉप से आधी झांकती हुई चूचियों के नजारे करवाए.
उसके बाद मैंने उसे अपनी एक चूची दिखाई तो वह गाली देने लगा.
मैं हंस दी.
हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होते समय गाली होना सामान्य बात हो गई थी.
उस दिन उसने कहा- आपकी एक चूची से मेरे लौड़े की मां चुद गई … इसमें आग लग गई अंकिता जी … अब जल्दी से आप मुझे अपनी दोनों नोकें दिखा दें … तो मैं ढंग से मुठ मार सकूँ.
मैंने उस दिन वीडियो कॉल पर उसे अपनी दोनों चूचियां दिखाईं तो उसने मेरे सामने ही अपने लौड़े की मुठ मारनी शुरू कर दी.
उस दिन मुझे भी मेरे छेद में लंड की जरूरत होने लगी थी लेकिन मैं मोमबत्ती से चुत की मुठ मार कर रह गई.
कुछ दिन बाद मम्मी, पापा और भाई एक शादी में गए हुए थे.
घर में सिर्फ़ मैं और मेरी छोटी बहन चारू थी.
चारू के साथ मेरी सब बात खुली थी और मेरा ब्वॉयफ्रेंड कई बार मुझे उसके
सामने अपनी गोदी में उठा कर मेरे कमरे में मुझे चोदने भी ले गया था.
मुझे अपनी बहन चारू की कोई चिंता नहीं थी.
यही सब सोच कर मैंने अपने ब्वॉयफ्रेंड को रात में बुलाने का प्रोग्राम बनाया.
लेकिन किसी कारण से वह आ नहीं आ पा रहा था.
इधर मूड बन गया था तो मेरी चूत में चुदाई की आग लग चुकी थी.
फिर मैंने सिड को बुलाने का प्लान बनाया.
लेकिन उसे सीधे सीधे चोदने के लिए कैसे बोलूँ, ये समझ नहीं आ रहा था.
मैंने उसे फोन किया और कुछ देर उससे इधर उधर की बात करती रही.
वह भी बहुत पहुंची हुई चीज था, तो साला समझ गया कि आज मैंने उसे सामने से फोन किया है और वह भी रात के वक्त तो जरूर कुछ न कुछ बात तो होगी ही!
उसने कहा- यह तो मेरे लिए बड़े नसीब खुल जाने जैसी बात है कि मुझे तुमसे रात को बात करने का मौका मिल रहा है.
मैंने कहा- क्यों … तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है!
वह बोला- यार आप जैसी खूबसूरत लड़की मुझे रात को फोन करेगी तो मेरे लिए तो भाग्य की बात होगी ही न!
मैं हंस दी.
काफी देर बाद मैंने उससे बस यूं ही बोल दिया कि घर में सब गए हुए हैं और मैं अकेली हूँ. थोड़ा डर लग रहा है.
वह तुरंत आने को बोला.
पहले मैंने झूठा नाटक किया कि नहीं आना … लेकिन बाद में उसे आने के लिए हां बोल दिया.
रात को सिड घर आया.
मैंने गेट खोला और उसे अन्दर ले आई.
अन्दर आते ही उसने मुझे हग कर लिया और अभी मैं कुछ समझ पाती कि उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.
वह मुझे चूमने लगा तो मेरे पास कुछ कहने को ही नहीं बचा.
मैंने उसके चुंबन का साथ देते हुए कहा- दरवाजा तो लगा देने दो!
उसने अपनी लात से दरवाजे को ठोकर माती और मुझे चूमते हुए ही दरवाजे से टिक गया.
जिससे दरवाजा बंद हो गया और मैंने उसकी गोदी में लटके हुए ही दरवाजे की सिटकनी लगा दी.
फिर मैंने उसे रास्ता बताया तो हम दोनों मेरे कमरे में आ गए.
कमरे में आते ही उसने मुझे बिस्तर पर लुढ़काया और पलट कर दरवाजा बंद करने चला गया.
सिड तो पूरे चुदाई के मूड में आया था.
उसने दरवाजा बंद करके अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे सामने नंगा हो गया.
मैं पहली बार उसे अपनी आंखों के सामने नंगा देख रही थी.
उसका लंबा, खड़ा लंड देखकर मैं बस देखती रह गई.
मैंने हैरान होकर उसे देखते हुए कहा- ये क्या कर रहे हो?
वह अपने लौड़े को सहलाता हुआ बोला- आपको प्यार!
मैंने उसके लंड पर नजरें टिकाईं और पूछा- वह क्यों?
तो वह बोला- आज जो मौका मिला है, उसे ऐसे ही थोड़े जाने दूँगा!
यह कहते हुए वह मेरे पास आया और मेरे होंठों को किस करने लगा.
फिर उसने मेरे पजामे के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा.
जैसे ही उसने मेरी चुत में उंगली घुसाई, मैंने उसे जकड़ लिया और उसका साथ देने लगी.
उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे पूरे नंगे बदन को चूमने लगा.
अब वह मेरे दूध चूस रहा था और मैं भी बेशर्म रंडी की तरह उसे अपने मम्मों पर खींच रही थी.
मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से खींचते हुए चूसने के बाद वह मेरी आंखों में नशीले अंदाज से देखने लगा.
फिर वह नीचे आया और मेरी चूत को चाटने लगा, जिससे मैं और पागल हो रही थी.
उसने मेरी चूत को उंगली से चोदना शुरू किया और अपना लंड मेरे मुँह में डालकर मेरा मुँह चोदने लगा.
उसका लंड मेरे मुँह में फिट नहीं हो रहा था. उसका लंड बहुत लंबा और मोटा था.
कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसाया.
जैसे ही उसका लंड अन्दर गया, मेरी ‘अःह्ह्ह्ह’ की आवाज़ निकली.
दूसरे धक्के में उसने पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया.
मुझे दर्द हो रहा था लेकिन उसने लंड बाहर नहीं निकाला और धक्के लगाने लगा.
पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़-तेज़.
उसने मुझे हर पोज़ में, हर तरह से चोदा और उस रात को यादगार बना दिया.
उसने मुझे उस रात तीन बार चोदा.
उसके बाद हमने कई बार चुदाई की.
मैं उसके लंबे और मोटे लंड की मुरीद हो गई थी और अब मुझे अपने ब्वॉयफ्रेंड का लंड लेना अच्छा नहीं लगता था.
पहली चुदाई फेसबुक वाली लड़की के साथ
मेरे मन में हमेशा से सेक्स को लेकर गहरी रुचि रही है.
लेकिन 25 वर्ष की उम्र होने के बावजूद मुझे अब तक पूर्ण रूप से सेक्स का अनुभव नहीं हुआ था.
हालांकि मेरी कई गर्लफ्रेंड्स रहीं हैं, उनके साथ मैंने ऊपरी-ऊपरी तौर पर सब कुछ किया है, यहां तक कि उनकी चूत का स्वाद भी चखा है.
लेकिन वह जो पूर्ण अनुभव होता है, उससे मैं अब तक वंचित था.
मैं अपने बारे में बता दूँ.
मेरी हाइट 5 फुट 11 इंच है, बॉडी ठीक-ठाक है और मेरे लंड की लंबाई साढ़े पांच इंच है.
मुझे सेक्स कहानी लिखने का बहुत शौक है और साथ ही मुझे बड़े बूब्स वाली लड़कियां, महिलाएं आदि बहुत पसंद हैं.
मैंने अब तक चार महिलाओं के साथ अपना हाथ चलाया है.
उनमें से दो लड़कियां थीं जिन्होंने मेरे लंड को पकड़ा था और मैंने उनकी चूत को मसला था.
एक लड़की ने मुझसे चूत चटवाई भी थी लेकिन उसने झड़ने के बाद मुझसे पल्ला झाड़ लिया था.
दो भाभियां भी मेरे संपर्क में आई थीं.
एक मुझे चलती बस में मिली थीं और वे उधर मुझसे मजाक कर रही थीं.
उन्होंने मेरे लंड के अंडकोष टटोल कर मुझे आगे बढ़ने से रोक दिया था.
मैंने उनसे पूछा था कि आपने मेरे बाल्स पकड़ कर क्या चैक किया … प्लीज बताओ?
वे कुछ नहीं बोलीं और हंसती हुई चुप हो गई थीं और फिर जैसे ही उनका स्टॉप आया तो वे उतर कर चली गई थीं.
दूसरी भाभी ने भी मेरे लंड को टटोल कर मुझसे मना कर दिया था.
इन अनुभवों के बाद मैं अपने लंड को लेकर सशंकित था कि क्या मेरे लौड़े में कोई कमी है.
दोस्तो, मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है क्योंकि इस Xxx गर्ल चुदाई स्टोरी में ही मेरा पहला सेक्स अनुभव छुपा हुआ है.
बात जून 2021 की है मुझे फेसबुक पर नए-नए दोस्त बनाना बहुत पसंद आने लगा था.
उसी दौरान मैंने एक लड़की को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी, जिसका नाम काव्या है (बदला हुआ नाम).
वह अब भी मेरे साथ है.
उसने मेरी रिक्वेस्ट स्वीकार की और मैंने उसे ‘हाय’ का मैसेज किया.
उसने तुरंत जवाब दिया- अभी थोड़ी बिजी हूँ, लेकिन थोड़ी देर में आपको मैसेज करूँगी!
मैंने ‘ओके’ लिख कर बात करना रोक दी.
फिर ऐसे ही हमारी बात शुरू हुई.
अगले दिन हम दोनों किसी चीज़ को लेकर बात कर रहे थे.
तभी उसने बताया कि उसकी पूरी बॉडी में दर्द रहता है.
मैंने तपाक से कह दिया- मेरे पास आ जाओ, मैं तुम्हारी मालिश कर दूँगा.
उसने जवाब दिया- हां मैं आ सकती हूँ पर क्या तुम्हारे पास रूम है?
उसने जिस तत्परता से मुझे हां कहते हुए जवाब दिया था, उसे सुनकर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया.
मैंने भी एक दो पल सोचने के बाद उससे कह दिया- हां आ जाओ, मालिश करने के
लिए रूम की क्या ज़रूरत? वैसे ये काम तो मैं तुम्हारे घर भी आकर कर सकता
हूँ!
उसने कहा- सच्ची? तुम मेरी मालिश मेरे घर में कर दोगे?
मैंने हां में जवाब दिया- हां कर सकता हूँ … यह काम तो तुम मेरे साथ किसी पार्क या पब्लिक प्लेस में भी करवा सकती हो!
यह सुनकर वह चुप हो गई.
उसने मुझे कोई जबाव नहीं दिया.
खैर … मैंने उससे ये कहकर बात टाल दी कि मालिश के लिए रूम की क्या ज़रूरत है.
अगले दिन जब मैंने उसे ‘हाय’ कहा.
तो वह नाराज थी.
वह बोली- तुम्हें रूम में मसाज करने से क्या प्रॉब्लम है?
मैं समझ नहीं पाया लेकिन तभी उसने साफ-साफ कह दिया- मुझे तुम्हारे साथ फिजिकल होना है.
यह सुनकर मेरे तो जैसे होश उड़ गए.
सच बताऊं दोस्तो, ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अपनी ज़मीन मेरे नाम कर दी हो और मुझे यकीन नहीं हो रहा हो.
मैंने उससे दो बार कन्फर्म किया- क्या तुम सही बोल रही हो?
उसने कहा- हां, मैं सही बोल रही हूँ!
मैं तो कब से इसी मौके के इंतज़ार में था, लेकिन आज वह अनुभव मेरे सामने रेडी था, हालांकि उसमें थोड़ा टाइम था.
खैर … ऐसे ही हमारी गंदी-गंदी बातें शुरू हो गईं.
उसने अपने न्यूड फोटोज मुझे भेजे.
अब मैं आपको काव्या के बारे में बता देता हूँ.
उसकी हाइट 5 फुट 5 इंच है और बॉडी एकदम गदराई हुई है.
उसके बूब्स 36 इंच के हैं, जो एकदम टाइट हैं और गांड 38 इंच की बड़ी ही मादक पहाड़ी सी है.
उसकी उम्र उस वक्त सिर्फ 19 साल थी, जब हमने सेक्स किया.
फिर एक दिन हम पास की किसी मार्केट में मिले.
जाते-जाते मैंने उसके बूब्स दबा दिए.
सच में उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा सा खरबूज़ मेरे हाथ में आ गया हो.
जब मैंने उसका एक दूध दबाया तो वह भी हंस दी.
फिर वह दिन आया, जब हमें सेक्स करने के लिए मिलना था.
ये जुलाई माह का एक दिन था.
मैंने एक दिन पहले ही अपने दोस्त से उसके रूम की चाबी मांग ली थी और रूम को एकदम साफ करवा दिया था.
अगले दिन हमें एक मेट्रो स्टेशन पर मिलना था और वहां से मेरे दोस्त के रूम जाना था.
मैंने एक घंटा तक उसके आने का इंतज़ार किया.
बीच में मुझे लगा कि शायद वह आज नहीं आएगी लेकिन वह थोड़ा लेट आई.
मैंने उसे वहीं गले लगा लिया.
सच पूछो दोस्तो, वह बड़ी मस्त फीलिंग थी.
मुझे अपने सीने में दो बड़े बड़े नारियल धँसते से महसूस हुए थे.
फिर हम दोनों साथ में मेरे दोस्त के कमरे की ओर चल पड़े.
मैंने उसे बाहर खड़ा किया और कहा- जब मैं फोन करूँ, तो सीधे रूम में आ जाना, दरवाजा खुला होगा.
मैं अन्दर गया, सब कुछ सैट किया और फिर उसे फोन किया.
थोड़ी ही देर में वह सीधे रूम में आ गई.
मैंने आते ही दरवाजा लॉक कर दिया और उसे बिठा कर पानी पिलाया.
थोड़ी देर बैठने के बाद हम दोनों गले लगे.
मुझसे तो बर्दाश्त ही नहीं हो रहा था पर मैंने खुद को रोका हुआ था.
जैसे ही हम गले लगकर अलग हुए, मैंने तुरंत उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
क्या रसीले होंठ थे उसके … मैं तो जैसे उनमें खो ही गया.
हम दोनों ने करीबन दस मिनट तक लगातार चुंबन किया.
फिर मैं उससे अलग हुआ.
अब मैंने उसे लेटा दिया और उसके ऊपर आ गया, उसे चूमा … साथ ही उसके कपड़े खोलने शुरू कर दिए.
सबसे पहले मैंने उसका टॉप उतारा और जैसे ही उसका टॉप उसके मम्मों से उतरा, मेरे सामने पहाड़ जैसे स्तन फुदक रहे थे.
उसके चूचे देख कर मेरे तो जैसे होश ही उड़ गए.
उसके दूध क्रीम रंग की ब्रा में इतने सेक्सी लग रहे थे कि मन कर रहा था कि यहीं काटकर खा जाऊं.
पर मैंने थोड़ा सब्र किया और सोचा कि अब तो ये लड़की मेरे हाथ में है; आराम से इसके दूध चूस चूस कर इनका रस पियूँगा.
उसके बाद उसने मेरी शर्ट खोल दी और फिर मेरी पैंट खोल दी.
उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड को ऊपर नीचे करने लगी.
मैं तो जैसे जन्नत में था.
फिर मैंने जल्दी से उसके सारे कपड़े उतार दिए और चुंबन करते करते उसकी गुलाबी चूत के पास पहुंच गया.
हाय, क्या गुलाबी चूत थी वह … मैंने हौले से उसमें अपनी उंगली डाली, तो लगा कि उसकी बुर कितनी टाइट थी.
वह आह कर उठी. उसकी चूत रस छोड़ रही थी तो मेरी उंगली आराम से अन्दर सरकती चली गई.
वह अपने होंठ दांतों से दबा कर और आंखों को बंद करके चूत में उंगली का आनन्द ले रही थी.
मैंने उसके एक चूचे को अपने होंठों से दबाया और चूत में उंगली करना चालू कर दिया.
फिर वह मस्त हुई तो मैं सरक कर नीचे आ गया और मैंने धीरे धीरे उंगली करते हुए अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी.
जीभ का अहसास पाते ही वह एकदम से सिहर उठी और उसने मेरे सिर को जोर से अपनी चूत में दबा लिया.
क्या मज़ा था वह … मैं तो जैसे जन्नत में था.
करीबन दस मिनट तक उसकी चूत में जीभ करने के बाद वह झड़कर शांत हो गई.
फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे उसे चूसने लगी.
मैं तो जैसे पागल ही हो गया.
वह क्या मस्ती से लौड़े को चूस रही थी, जैसे पॉर्न मूवी में सेक्स गर्ल करती हैं, वैसे ही.
कभी मेरे टोपे को जीभ से छूती, कभी मेरे अंडकोष को … और लंड को ऊपर-नीचे करटी हुई क्या मस्त रंडी लग रही थी वह!
फिर पंद्रह मिनट बाद मैं अपने चरम सुख पर था और मैंने उसके मुँह में अपना वीर्य भर दिया.
उसने उसे गटक कर पी लिया.
मैं उसके ऊपर थोड़ी देर लेटा रहा, फिर हाथ नीचे करके उसकी चूत में उंगली करने लगा और वह मेरे लंड के साथ खेलने लगी.
कुछ ही देर में हम दोनों फिर से तैयार हो गए.
उसने चूसकर मेरे लंड को फिर से खड़ा किया और उसने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया.
मैं अपने पहले अनुभव को लेकर बहुत उत्साहित था.
मैंने उसे लेटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रखकर उसकी चूत पर अपना लंड लगा दिया.
अब हम दोनों चुदाई के ओलंपिक की रेस में दौड़ने के लिए तैयार थे.
मैंने धीरे से जैसे ही उसकी चूत में लंड डाला, वह चीख पड़ी.
थोड़ी देर बाद मैंने दोबारा कोशिश की और इस बार धीरे-धीरे लंड अन्दर डाला.
वह दर्द भरी आवाज़ निकाल रही थी.
फिर मैंने कोशिश करके उसकी चूत में आधा लंड डाल दिया और वह दर्द के मारे कांपने लगी.
मैं थोड़ी देर रुका और उसके होंठों पर चुंबन करने लगा.
जैसे ही उसका दर्द कम हुआ, मैंने तुरंत एक तेज झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर समा गया.
उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरी पीठ पर नाखूनों से निशान बना दिए.
अब मैंने कुछ इंतज़ार किया और उसे चूमता सहलाता रहा.
इसी दौरान मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.
जब उसका दर्द कम हुआ, तो मैंने थोड़े तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए.
अब कमरा उसकी आवाज़ से गूंज रहा था.
वह कभी तेज़ आवाज़ में ‘हम्म … ऊम्म … ईईईई …!’ करती हुई मेरा उत्साह बढ़ा रही थी.
वह मुझे गालियां भी दे रही थी- साले, चोद भोंसड़ी के … आह और तेज़ तेज़ चोद मादरचोद … आह फाड़ दे मेरी चूत को अपने लंड से!
उसकी ऐसी हरकतें मेरा उत्साह बढ़ा रही थीं और हमारी पच-पच की आवाज़ पूरे कमरे को मनमोहक बना रही थी.
कभी मैं तेज़-तेज़ चुदाई करता, तो कभी एकदम धीरे हो जाता.
मेरी ये हरकत उसे पागल बना रही थी और उसकी आवाज़ मुझे पागल कर रही थी.
Xxx गर्ल चुदाई करते हुए करीबन पंद्रह मिनट बाद मैं अपने चरम पर था.
इस बीच वह भी दो बार झड़ चुकी थी.
फिर मैंने भी अपने धक्के तेज़ कर दिए और लगातार तेज़-तेज़ करते-करते हुए ही उससे पूछा- कहां निकालूं? कंडोम में ही या मुँह में लेगी!
उसने कहा- मुँह में!
मैंने धक्के मारते-मारते कंडोम हटाया और सीधा उसके मुँह के पास आ गया.
जल्दी से उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और आगे-पीछे करने लगी.
थोड़ी देर में मैंने सारा वीर्य उसके स्तनों और मुँह पर डाल दिया.
उसने मुँह में आए हुए वीर्य को गटक कर पूरा खा लिया और स्तनों पर लगा हुआ वीर्य उंगली से उठा कर चाट लिया और साफ कर दिया.
उस दिन हम दोनों ने चार बार अलग-अलग तरीके से संभोग किया और उसके बाद हम अपने-अपने घर चले गए.
आगे भी हमने कई बार चुदाई की है उसकी सेक्स कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड से बहन और अम्मी भी चुदीं
नमस्ते साथियो … मेरा नाम शहनाज़ है, मेरी उम्र 26 वर्ष है.
मेरा कद 5 फुट 6 इंच है, आंखें नीली और बड़ी हैं.
मेरा रंग बिल्कुल दूध सा सफेद है और त्वचा गुलाब की पंखुड़ियों सी नाज़ुक है.
मेरा फिगर 34-30-36 है, जो किसी को भी मदहोश कर देता है.
इस समय मैं एक निजी कंपनी में कार्यरत हूँ और अपने शौहर के साथ बहुत खुश हूँ.
ये तब की बात है, जब मैं एम.बी.ए. की पढ़ाई कर रही थी और कॉलेज में नया दाखिला हुआ था.
मैं अपना पूरा परिचय दे दूँ. मेरे परिवार में मैं, मेरे अब्बू (खालिद), अम्मी (साजिया) और मेरी आपा (मुमताज़) हैं.
हम चार लोग हैं.
मेरे अब्बू का ट्रांसपोर्ट का बिज़नेस है और उन्होंने दो शादियां की हैं.
मेरी अम्मी और आपा को मेरी सौतेली बहन सुज़ैन और उसकी अम्मी नाज बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं.
लेकिन मेरी उन दोनों से अच्छी बनती है.
हमारे कॉलेज शुरू हुए 10-12 दिन हो गए थे.
एक दिन क्लास में एक नए लड़के ने कदम रखा.
उसका कद 6 फुट 3 इंच था, सुडौल बॉडी, गोरा रंग, बिल्कुल हीरो जैसा लग रहा था.
उसके मसल्स देखकर लगता था, वह ज़रूर जिम जाता होगा.
सारा क्लास उसे ही देख रहा था, यहां तक कि हमारी इकोनॉमिक्स की टीचर भी उसे देखती रह गईं.
उसने अन्दर आने की इजाज़त मांगी.
मैडम ने उसे आने को कहा.
सारी लड़कियां उसे ताक रही थीं और अपने साथ बिठाने की सोच रही थीं.
लेकिन वह बिना किसी पर ध्यान दिए आगे बढ़ा और मेरे पीछे आकर सबसे आखिरी बेंच पर जा बैठा.
पहले दिन उससे कोई पहचान नहीं हुई क्योंकि वह बिल्कुल चुप रहता था.
दो दिन बाद हमारी मैडम ने किताब के पन्ने देखने को कहा और बताया कि ये महत्वपूर्ण विषय है, आगे काम आएगा.
वह इधर-उधर देख रहा था.
मैडम ने किताब देखने को कहा, तो उसने बोला- मेरे पास ये किताब नहीं है.
हमारी मैडम बहुत गुस्सैल थीं.
सबको लगा कि अब वह उसे खूब सुनाएंगी.
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. बल्कि मैडम ने बड़े अदब से उसे किताब खरीदने को कहा.
मैडम के पूछने पर उसने बताया- मेरा नाम कुणाल है, मैं अभी नया हूँ.
शायद मैडम भी कुणाल पर फ़िदा हो गई थीं.
वह था ही इतना हैंडसम.
कुछ दिन बीत गए.
लेकिन वह किसी से ज़्यादा बात नहीं करता था.
सिर्फ़ दो लड़कों से उसकी दोस्ती थी, जिनसे वह कैंपस में मिलता तो बात करता.
कुछ लड़कियों ने उसे ज़्यादा एटीट्यूड वाला या घमंडी कह डाला.
मैंने देखा कि हमारी इकोनॉमिक्स की मैडम अक्सर उससे क्लास के बाहर बात करती थीं.
मैंने इस पर ख़ास ध्यान नहीं दिया लेकिन वहां कुछ नया पक रहा था.
इसके बारे में बाद में बताऊंगी कि दोनों के बीच क्या हुआ.
फिर हमें पहले सेमेस्टर का प्रोजेक्ट बनाने को कहा गया.
इसमें टीम बनानी थी.
मुझे कुणाल के साथ टीम में लिया गया.
ये सुनकर मैं बहुत खुश हो गई जैसे मेरी लॉटरी लग गई हो.
हम अपने विषय पर काम करने लगे और साथ ही परीक्षा की तैयारी भी शुरू की.
मेरा ध्यान पढ़ाई पर था इसलिए मैं प्रोजेक्ट को समझ नहीं पा रही थी.
कुणाल ने मेरी मदद की.
एक दिन समझाते हुए उसने पूछा- इस डबल मेहनत के लिए मुझे क्या मिलेगा?
मैंने जवाब दिया- जो तुम चाहो!
परीक्षा ख़त्म हो गई और हमारा प्रोजेक्ट भी सबमिट हो गया.
हमें कॉलेज से काफ़ी सराहना मिली.
इस दौरान मैं और कुणाल काफी नजदीक आ गए थे, रोमांस करने लगे थे और अब खुलकर बातें करते थे.
मैं भी उसे रिझाने के लिए काफी टाइट कपड़े पहनती या फिर उसके पसंद के रंगों वाले कपड़े पहनकर उसके सामने जाती थी.
एक दिन कुणाल ने कहा- तुम अपना वादा तो नहीं भूली हो न!
मैंने पूछा- कौन-सा?
तो उसने प्रोजेक्ट में मदद मांगने वाली बात याद दिलाई.
मैंने कहा- तुम बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?
उसने जवाब दिया- यहां नहीं, थोड़ा पीछे चलो.
हम एक गलियारे में आ गए. वहां उसने मुझसे किस करने को कहा.
मैं थोड़ा सोच में पड़ गई कि ये क्या कह रहा है?
फिर भी मैं उसे चूमने के लिए तैयार हो गई.
लेकिन तभी उसने मुझे हाथ से रोका और बोला- मैं तो मजाक कर रहा था.
मैंने उसके गाल पकड़ते हुए कहा- लेकिन मैं मजाक नहीं कर रही.
सच बताऊं तो मैं यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी.
मैंने उसके दोनों गालों पर बारी-बारी से चूमा.
इस पर वह बोला- बस दो ही?
मैंने जोश में आकर उसके होंठों को चूम लिया और कुछ देर तक ऐसे ही उसे चूसती रही.
फिर हम दोनों अलग हुए और अपनी-अपनी क्लास में चले गए.
जैसे ही क्लास में मैडम आईं, वे मुझ पर नाराज़ होकर डाँटने लगीं-
शहनाज़, तुम यहां पढ़ने आई हो या फैशन करने? ये लिपस्टिक और मेकअप के सामान
की मार्केटिंग बंद करो.
उन्होंने इसके अलावा और भी बहुत कुछ सुनाया.
मैं सोच में पड़ गई कि मैडम मुझ पर इतना गुस्सा क्यों हैं?
दरअसल, मैडम ने मुझे और कुणाल को एक साथ किस करते देख लिया था.
हमने भी ध्यान नहीं दिया कि कुणाल के गालों पर मेरी होंठों की लाली छप गई थी.
ये बात कॉलेज के बाद कुणाल ने ही मुझे बताई.
फिर हम बाहर ही मिलते या फोन पर बातें करते थे.
उसके पापा आर्मी में थे और वह यहां अपनी मां के साथ रहता था.
मैंने भी उसे अपने परिवार के बारे में बताया.
कभी-कभी वह नॉनवेज जोक्स भेजता था पर सेक्स तक बात अभी नहीं पहुंची थी.
ऐसे ही हमारी बातें चलती थीं.
एक दिन मैंने कहा- कहीं घूमने चलते हैं.
इस पर कुणाल भी तैयार हो गया.
फिर उसने कहा- लेकिन बारिश के मौसम में कैसे?
मैंने जवाब दिया- इसी में तो ज़्यादा मज़ा आता है.
पर वह नहीं मान रहा था.
मेरे बार-बार कहने पर आखिरकार वह मान गया.
अगले दिन मैं स्किन कलर की लेगिंग और पीले रंग की ट्रांसपेरेंट कुर्ती पहनकर निकली.
मेरी अम्मी को ऐसे कपड़े पसंद नहीं थे, पर अब्बू की तरफ से हमें पूरी छूट थी.
कुणाल ने मुझे मेरे घर के पास से ही लिया और हम दोनों निकल पड़े.
जैसे ही शहर से बाहर हुए, तेज़ बारिश शुरू हो गई.
कुणाल ने बाइक रोकी, पर मैंने कहा- रोको मत. ऐसे भीगने में ही तो मज़ा है.
इस पर वह बोला- तुम्हारे मज़े के चक्कर में बीमार पड़ जाएंगे.
लेकिन मैं परवाह न करते हुए बाइक की सीट पर उछल रही थी.
कहीं ऐसी जगह भी नहीं दिख रही थी जहां हम बारिश से बच सकें.
तभी एक पेड़ के पास उसने बाइक रोक दी और हम खड़े हो गए.
लेकिन बारिश से बच नहीं पा रहे थे.
थोड़ी दूरी पर एक घर जैसा कुछ दिखा तो कुणाल ने वहां चलने को कहा.
हम बाइक से वहां पहुंच गए.
जैसे ही मैं आगे बढ़ी, मेरा पैर फिसला और मैं पानी में गिर गई.
तभी कुणाल ने मुझे सहारा देकर खड़ा किया और अपनी गोद में उठा लिया.
उसका एक हाथ तब मेरे बूब्स पर था जिसे उसने मुझे बचाने के लिए ज़ोर से दबा रखा था.
बारिश की वजह से मेरी कुर्ती बिल्कुल ट्रांसपेरेंट हो गई थी और मेरी नीली ब्रा व निप्पल साफ-साफ दिख रहे थे.
जब वह आगे बढ़ने लगा, तो मैं उसके सीने में घुसने लगी.
मेरे हाथ से उसका लंड टच हो रहा था जो अभी खड़ा तो नहीं था फिर भी बड़ा लग रहा था.
मैं उसे बार-बार रगड़ने लगी और हंस रही थी.
कुणाल ने इसे मेरी तरफ से खुली छूट का सिग्नल समझा और मुझे थोड़ा खिसका दिया जिससे मेरा हाथ उसके लंड पर हो गया.
जिस घर में हम दोनों गए थे, वह एक खाली गैरेज था.
बादलों से बिल्कुल अंधेरा हो गया था और काफी दूर तक कुछ दिख नहीं रहा था.
चारों ओर सिर्फ खेत ही खेत थे.
मैं नीचे बैठी थी और वह अपनी शर्ट उतार कर पानी निचोड़ रहा था.
ये देख मैं भी कुर्ती उतार कर निचोड़ने का नाटक करने लगी जैसे मैं कर नहीं पा रही.
उसने मेरी कुर्ती मुझसे ले ली और निचोड़ने लगा.
मैं अब ऊपर से आधी नंगी थी और सिर्फ ब्रा में थी.
मैं यही सोच रही थी कि बस, ऐसे ही ये मुझे भी निचोड़ दे एक बार.
तभी वह नीचे बैठकर मेरे पैर देखने लगा और पूछने लगा- ज़्यादा चोट तो नहीं लगी?
मैंने न में सिर हिलाया. वह मेरे पैर सहलाने लगा.
मेरी कराह अब सिसकियों में बदल गई. मैं बस ‘ओह … उम … आह … आह … ओह …’ करने लगी.
सच बताऊं तो उसके स्पर्श से मेरे अन्दर झुनझुनी होने लगी थी.
मैंने देखा कि उस पर भी असर हो रहा था लेकिन वह पहल नहीं कर रहा.
तो मैंने उससे पैर छोड़ने को कहा.
फिर वह मेरे बगल में बैठकर बारिश देखने लगा.
मैं सोच रही थी कि इसके पास इतनी खूबसूरत लड़की बैठी है और ये बारिश देख रहा है.
फिर मैंने सोचा कि अगर ये कुछ नहीं कर रहा, तो मैं ही सेक्स अफेयर की शुरुआत करती हूँ.
मैंने उसकी जांघ पर हाथ फेरना शुरू किया तो उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर बारिश में खो गया.
मैंने भी ठान लिया कि आज तो इसे जलवा दिखा ही दूँगी.
फिर जोश के साथ उसके पैंट की चेन खोल दी.
जिस पर वह कुछ नहीं बोला, जैसे वह भी यही चाह रहा था.
मैंने उसका लंड बाहर निकाल लिया.
इस पर कुणाल ने मेरा हाथ पकड़ा.
तो मैंने कहा- क्या हुआ, देखें तो कैसा है तुम्हारा?
इस पर वह बोला- और किसका देखा है?
मैंने गुस्से से उसकी ओर देखा, पर वह चुप रहा.
उस पर कोई असर ही नहीं हो रहा था.
वहीं मैं उसके शरीर और सीने की चौड़ाई देखकर फिदा हो रही थी.
अचानक से मैंने उसके सामने बैठ कर उसका 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
इसके लिए वह तैयार नहीं था और मेरे इस वार से खुद को बचा न सका.
मैं उसके लंड को चूस रही थी और वह मदहोश होकर बस ‘आह … हां… ओह शहनाज … आह … जान.’ कर रहा था.
मतलब अब वह मेरे काबू में आ गया था.
कुछ देर चूसने के बाद वह झड़ने को हुआ तो मुझे हटाने लगा.
लेकिन मैंने उसके लंड को गप से अपने होंठों में दबा लिया और तेजी से चूसने लगी.
करीब 15 मिनट बाद वह झड़ गया और मैंने सारा वीर्य पी लिया.
कुणाल उठा और अचानक से उसने मेरी ब्रा निकाल दी और मेरे चूचों को दबाने लगा.
मुझे एक मीठा दर्द हो रहा था.
वह बड़े ध्यान से मेरे चूचे देख रहा था.
मैंने कहा- क्या देख रहे हो? पीना है तो पी लो.
यह सुनते ही वह भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मेरे बूब्स ऐसे चूस रहा था जैसे पहली बार मिले हों.
वह बारी-बारी से मेरे दोनों चूचे चूस रहा था, एक को मुँह में लेता तो दूसरे को मसलने लगता.
करीब 15 मिनट बाद वह हटा, मेरे बूब्स बिल्कुल लाल हो गए थे.
उसने तुरंत मेरी लेगिंग घुटनों तक उतार दी, साथ में पैंटी भी नीचे आ गई.
उसने मेरी चूत को देखते हुए कहा- इन्हें इतना गुलाबी कैसे बनाया है तुमने?
मैं शर्मा गई.
तभी उसने मेरी टांगों को फैलाते हुए मेरी खुली चुत में अपनी दो उंगलियां एक साथ डाल दीं.
मेरी जोर से कराह निकल गई- आ…ह उई … अ…म्मी!
मेरे होंठों पर उंगली फिराते हुए वह बोला- बहुत आग है तेरी चूत में!
अब वह अपने दूसरे हाथ की उंगली से मेरी चुत को चोदने लगा.
मैं बस मजे से ‘आह … आह … ओह … यस …’ कर रही थी.
कुणाल फिर से मेरे चूचे चूसने लगा, कभी-कभी उन पर दांत लगा देता तो कभी पूरा मुँह में लेने की कोशिश करता.
कुछ देर बाद जब मैं भी झड़ गई तो हम दोनों को सुखद अहसास हुआ और हम एक-दूसरे की बांहों में भरकर प्यार करने लगे.
अब शाम हो गई थी और बारिश भी थोड़ी हल्की हो गई थी.
हम दोनों वहां से निकल लिए.
मैं पीछे उससे बिल्कुल चिपकी हुई थी और मेरे बूब्स उसकी पीठ पर दबे हुए थे.
कुणाल को मजा आ रहा था लेकिन बारिश में बाइक चलाने में परेशानी भी हो रही थी.
वह बोला- शहनाज, प्लीज ये मत करो.
मैं हट गई, लेकिन उसे कसकर जकड़ रखा था.
फिर मैंने पूछा- इतना बड़ा कैसे बनाया तुमने?
वह बोला- क्या बड़ा है?
मैंने उसके लंड पर हाथ फेर कर कहा- तुम्हारा ये लंड … जिस लड़की के अन्दर जाएगा, उसकी चूत फाड़ देगा.
उसने कहा- किस लड़की की चूत फाड़ेगा? जो पीछे बैठी है या किसी और की?
मैंने कहा- फाड़ तो सबकी देगा … पर मैं कैसे ले पाऊंगी, यही सोच रही हूँ.
इस पर वह बोला- तुमने जो नीचे वाले गुलाबी होंठ दिखाए हैं, ये उसी में जाएगा.
ऐसे ही चुदाई की बातें करते हुए हम दोनों गर्म हो गए थे.
इसके बाद उसने मुझे घर ड्रॉप किया और वह अपने घर चला गया.
अम्मी ने मुझे इस हालत में देखकर बहुत नाराजगी दिखाई और खूब सुनाया भी.
अब हम दोनों एक साथ बैठते थे.
मैं मौका मिलते ही उसका लंड दबाने लगती पर बाहर नहीं निकाल पाती क्योंकि ये मुमकिन नहीं था.
एक दिन उसने मुझे कैंपस में एक जगह बताई जहां हमारा मिलना सही से हो पाता.
फिर हम दोनों खाली समय में वहीं मिलते और अपनी मुहब्बत की आग को हवा देते.
वह मेरी चुत में उंगली करता और मैं उसके लंड को चूस लेती.
मैं कई बार उसे क्लास बंक करने को कहती पर वह मना कर देता क्योंकि कुणाल बहुत अनुशासित था.
लेकिन फोन चैट में वह इतनी सेक्सी बातें करता कि मुझे अपनी चूत की खुजली उंगली से ही मिटानी पड़ती.
इसके आगे क्या हुआ, कैसे मेरी सील टूटी ये अगले भाग में बताउंगी.
आप तैयार रहिएगा क्योंकि इस सेक्स कहानी में अभी बहुत कुछ होने वाला है.
अब तक बताया था कि कुणाल और मैं कैसे एक-दूसरे के करीब आए. बारिश में हमने एक-दूसरे को गर्माहट देकर कैसे शांत किया.
अब हमारी बातें सेक्स पर भी होने लगी थीं, लेकिन सिर्फ़ बातें ही थीं.
हमारे कॉलेज में बायोलॉजी का एक भी छात्र नहीं था इसलिए ये विषय अब बंद हो चुका था.
बायो की लैब पूरी तरह खाली थी और कोई वहां जाता भी नहीं था.
यही वजह थी कि वहीँ हमारा प्यार भरा मिलन होता था.
हम दोनों एक-दूसरे से खूब प्यार करते थे.
वह मेरे बूब्स के साथ खेलता, उन्हें चूसता, कभी मेरी चूत चाटता और मुझे पूरी तरह शांत कर देता.
अब आगे हार्ड सेक्स विद बॉयफ्रेंड:
एक बार मेरे मामू के बेटे का एक्सीडेंट हो गया.
वह ज़्यादा घायल तो नहीं था लेकिन हॉस्पिटल में भर्ती था.
सभी लोग उसे देखने जा रहे थे.
मैंने अम्मी से कहा- मेरे एग्ज़ाम नज़दीक हैं और मुझे प्रोजेक्ट भी पूरा करना है.
इस पर मेरी आपा मुमताज ने भी मेरा साथ दिया और मैं नहीं गई.
सभी लोग सुबह निकल गए.
उसी समय मैंने कुणाल को फोन किया और कहा- जल्दी से घर आ जाओ, हमें प्रोजेक्ट पूरा करना है.
वह समझ गया कि मैं किस प्रोजेक्ट की बात कर रही हूँ.
अम्मी-अब्बू के जाने के बाद मैं नहाकर तैयार हो गई.
मैंने चाँदनी रंग का लहंगा पहना, थोड़ा मेकअप किया और पर्पल नेल पॉलिश लगाकर तैयार बैठी थी.
ठीक ढाई बजे कुणाल घर आया.
मैंने दरवाज़ा खोला तो वह मुझे देखता ही रह गया.
मैंने मज़ाक में कहा- बाहर ही खड़े रहोगे क्या?
कुणाल ने अन्दर आकर मेरा हाथ पकड़ा और बोला- मुझे नहीं मालूम था कि कोई दुल्हन मेरा इंतज़ार कर रही है!
मैंने हंसते हुए कहा- तो क्या … बारात लेकर आते आज?
मेरे माथे पर चूमते हुए उसने कहा- सुहाग की सेज़ लाता.
हम दोनों ने एक-दूसरे को बांहों में भर लिया और एक-दूसरे में समा गए.
फिर मैंने पूछा- कुछ नाश्ता करोगे?
कुणाल ने मेरी उंगली दबाते हुए कहा- ये नाश्ता करने का समय है क्या?
हम दोनों हंस पड़े.
इसके बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गई, जो दूसरी मंज़िल पर था.
वहां हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे.
वह मेरी पीठ सहलाते हुए नीचे मेरी गांड दबाने लगा, साथ ही मेरे होंठ चूस रहा था.
हम दोनों एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे.
तभी उसने मेरा ब्लाउज़ खोलकर मुझे ऊपर से नंगी कर दिया.
अब वह मेरे बूब्स पीने लगा और एक को मसल रहा था.
वह मेरे चूचे ऐसे चूसता जैसे कोई छोटा बच्चा दूध पीता है.
मैं भी उसका साथ दे रही थी और उसके सिर को सहला रही थी.
उसके चूमने और चूसने से मेरी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी.
ये मेरे लिए एक नया और अनोखा अनुभव था.
अचानक उसने मेरा लहंगा उठाकर मेरी चड्डी उतार दी.
मैं कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उसने अपनी उंगली मेरी चूत में घुसा दी और चोदने लगा.
मेरी मदभरी सिसकारियां निकल रही थीं और मेरी चूत से फव्वारा-सा बहने लगा था.
कुछ देर बाद वह लहंगे में घुस गया और मेरी चूत चाटने लगा.
वह कभी दांत गड़ा देता, तो कभी जीभ अन्दर तक घुसा देता.
मैं एकदम से सातवें आसमान पर थी और उसके मुँह में ही झड़ गई.
फिर वह मेरे पास आया और मेरे बूब्स पीने लगा.
मैं उसे किसी छोटे बेबी की तरह अपने सीने से लगा कर दूध पिलाने लगी.
वह भी खींच खींच कर मेरे निप्पलों का रस चूस रहा था.
मैं भी उसके लंड को सहला रही थी, जो धीरे-धीरे कड़क हो गया था.
अब कुणाल ने मुझे सीधा लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गया.
उसका लंड मेरी चूत पर था और वह मुझे चूम रहा था.
अचानक से उसने एक झटका मारा और उसका टोपा मेरी चूत में घुस गया.
मैं चीखने वाली थी लेकिन उसने मेरे होंठ दबा दिए.
वह धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.
जब उसने देखा कि मैं शांत हूँ तो एक ज़ोरदार झटके के साथ आधा लंड घुसा दिया.
मैं जोर से चीख पड़ी.
उसका लंड मेरी झिल्ली को फाड़ते हुए अन्दर घुस चुका था.
मेरी आंखों से आंसू बहने लगे.
वह मुझे चूमने लगा और मेरे बूब्स दबाने लगा.
मैं उतने ही ज़ोर से चीख रही थी- आह … ओह … अम्मी… उई … मर गई … इई … आई … ओह!
मेरी चूत से खून निकल रहा था लेकिन वह बिना रुके मुझे चोद रहा था.
उसका लंड सीधे मेरी बच्चेदानी पर लग रहा था.
अब मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी- आह … ओह … येस … आह …
फक मी… हार्ड… आह … जानू… आह … और ज़ोर से … आज से ये चूत तुम्हारी है…
पूरा खोल दो इसे … आह … और तेज़… और चोदो मुझे … आह!
फिर उसने मुझे कुतिया बनाकर चोदा.
करीब 20-25 मिनट चोदने के बाद वह झड़ गया.
इस बीच मैं भी दो बार झड़ चुकी थी.
फिर कुणाल वैसे ही बिना कपड़ों के बाहर हॉल में आकर बैठ गया सोफे पर!
मैं भी कुछ देर बाद आ गई.
थोड़ी देर बाद मैं उसका लंड फिर से चूसने लगी.
वह मदहोश हो गया.
उसके मुँह से सिर्फ़ ‘आह … ओह … मेरी जान … आह चूसो इसे … आह.’ निकल रहा था और वह मेरे बालों को सहला रहा था.
मैंने करीब बीस मिनट तक उसके लंड को चूसा और चाटा.
उसने मुझे गोद में बिठाकर चूमना शुरू किया. मैं भी मदहोशी में आ गई थी.
मेरे गालों को सहलाते हुए वह बोला- जान, मुझे तुम्हारी गांड भी चाहिए.
पहले तो मैं सोच में पड़ गई, फिर हां बोल दिया.
क्योंकि मैं अब सचमुच उससे प्यार करने लगी थी और उसके लिए सब कुछ करने को तैयार थी.
इस पर वह खुशी से मुझे चूमने लगा और उसने मुझे सोफे पर झुकाकर खड़ा कर दिया.
वहां मेरी चुनरी थी, उसी से मेरे हाथ सोफे से बांध दिए और मेरे मुँह में कपड़ा ठूंस दिया.
इसके बाद वह किचन से तेल लेकर आया और मेरी गांड में लगाने लगा.
उसने ढेर सारा तेल मेरी गांड में लगाया और अपने लंड पर भी.
मेरे थूक और तेल से चिकना होने के कारण उसका लंड मेरी गांड में डंडे की तरह धंसने लगा.
मुझे बहुत दर्द हो रहा था, पर मुँह में कपड़ा होने के कारण मैं कुछ बोल न सकी.
वह जोर-जोर से चोदने लगा और मेरी गांड फाड़ दी. मेरी गांड से खू.न भी बहने लगा.
उसने अपना लंड बाहर निकाला और मेरी गांड के खू.न को साफ किया.
फिर उसने मेरे मुँह से कपड़ा हटाया और दोबारा अपना लंड मेरी गांड में घुसाकर चोदने लगा.
इस बार मुझे कम दर्द हुआ और मैं भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी.
करीब आधा घंटा तक हार्ड सेक्स विद बॉयफ्रेंड हुआ, उसने मेरी गांड मारी और ढेर सारे चांटे भी मेरी गांड पर जड़े, जिससे मेरी गांड अन्दर और बाहर दोनों तरफ से लाल हो गई.
मेरी हालत इतनी खराब हो गई थी कि मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.
कुणाल मुझे गोद में उठाकर कमरे में ले आया.
वहां हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में नंगे ही सो गए.
शाम को आठ बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि कुणाल अभी भी सो रहा था.
मेरे फोन पर आपा के चार मिस्ड कॉल थे.
मैंने कॉल करके पूछा तो आपा ने कहा- कहां थी?
मैंने बताया कि फोन साइलेंट था, इसलिए मुझे पता नहीं चला.
फिर उन्होंने खाने के बारे में पूछा और फोन रख दिया.
मैंने फ्रेश होकर हम दोनों के लिए खाना बनाया और साथ में खाया.
हम दोनों बिना कपड़ों के ही बैठकर टीवी देख रहे थे.
इसके बाद रात साढ़े दस बजे से मेरी चुदाई दोबारा शुरू हो गई.
उस रात कुणाल ने मेरी चूत और गांड को बुरी तरह रौंदा.
अगली सुबह वह अपने घर चला गया.
उसने मेरी हालत इतनी खराब कर दी थी कि अगले दो दिनों तक मैं कॉलेज नहीं जा सकी.
कुणाल ने अपनी पढ़ाई के लिए एक अलग कमरा भी ले रखा था.
क्योंकि उसके डैड आर्मी में थे, जब वे आते तो पार्टी होती थी या कई लोग उनसे मिलने आते, जिससे उसे पढ़ाई में डिस्टर्बेंस होता था.
अब हमारा हर रोज़ मिलना होता, कभी किसी क्लास में, तो कभी बायो लैब में.
जब ज्यादा मन करता, तो कुणाल मुझे उसी कमरे में ले जाकर घंटों पेलता.
एक बार मैंने उसे घर बुलाकर अपने परिवार से मिलवाया.
मेरे अब्बू उससे बहुत प्रभावित हुए.
फिर वह भी मुझे एक दिन अपने घर ले गया.
उसकी मां बहुत अच्छी थीं वह मुझसे ऐसे बात कर रही थीं जैसे मुझे पहले से ही जानती हों.
मुझे भी उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा.
हमारा यह मिलना ऐसे ही चल रहा था कि एक दिन मैंने देखा कि आपा कॉलेज में आई थीं.
वहां वह अक्सर पुराने साथियों या टीचर्स से मिलती थीं लेकिन आज वह बायो लैब की तरफ जा रही थीं.
मैं भी उनके पीछे चलने लगी, तभी मेरे कुछ दोस्त आ गए और मैं उनके पीछे न जा सकी.
जब मैं घर लौटी, तो आपा अभी भी नहीं आई थीं.
वे मुझसे थोड़ी देर बाद पहुंचीं.
मुझे कुछ शक हुआ क्योंकि आपा इतनी देर बाहर नहीं रहती थीं.
जब उन्होंने अपना बुर्का उतारा, तो उनके कुर्ते और सलवार खराब हो गए थे, जैसे किसी ने बुरी तरह मसल दिया हो.
पर मैंने उस दिन उनसे कुछ नहीं पूछा.
इसी तरह वे अब हर दूसरे दिन जाने लगीं.
मुझे शक हुआ कि उनका किसी से चक्कर है. पर वह कौन है, यह जानना बाकी था.
एक रात मैंने देखा कि वह किसी से चैटिंग कर रही थीं.
रात में मैंने उनका फोन चेक किया, तो किसी से बहुत ही हॉट और सेक्सी बातें हो रही थीं.
मैंने देखा कि नंबर ‘जालिम’ के नाम से सेव था.
अब बात यहां तक आ गई थी कि आपा उससे चुदने के लिए तड़प रही थीं.
वह जालिम कौन था, इसे जानने को मैं भी बेचैन थी.
अगले दिन मैं कॉलेज के लिए तैयार हुई और आपा से कहने लगी- आज मुझे कॉलेज
से बाहर भी कुछ काम है तो मैं पहले बाहर का काम खत्म करूंगी, उसके बाद यदि
समय मिला तो ही कॉलेज जाऊंगी वर्ना सीधी घर आ जाऊंगी.
आपा ने ओके कह दिया और वे अपने फोन को लेकर कमरे में चली गईं.
मैं समझ गई कि आपा अपने आशिक को फोन लगाने गई हैं.
मैं अपने काम का बहाना बना कर सीधे कॉलेज गई और बायो लैब में जाकर बैठ गई.
आज मैंने अपने आशिक को भी कुछ नहीं बताया था.
कुछ आधा घंटा बाद मुझे कुणाल की आवाज आई और उसके साथ आपा की खिलखिलाने की आवाज आई तो मैं समझ गई कि कुणाल ही जालिम है.
पहले तो मन हुआ कि इधर से चली जाऊं, पर अब वे दोनों नजदीक आ गए थे, तो मैं यूं ही छिपी बैठी रही.
बायो लैब में आने के बाद आपा ने अपने बुर्के को उतारा और कुणाल के सीने से लग गईं.
मैं अवाक थी.
कुछ ही देर बाद बिना पूरे कपड़े उतारे कुणाल ने मेरी आपा को चोदना चालू कर दिया और कुछ बीस मिनट बाद वे दोनों फारिग हो गए.
इस दौरान मैंने महसूस किया कि आपा कुणाल से चुदवा कर काफी खुश नजर आ रही थीं जबकि कुणाल शांत रहा था.
इसके बाद की सेक्स कहानी को अगले भाग में बताउंगी कि हमारी शादी कैसे हुई.
तब तक के लिए विदा दोस्तो!
फूफा जी ने मुझे ट्रेन में चोदकर औरत बनाया
मैं कुमकुम हूँ. मेरी उम्र इस समय 21 साल है.
यह जो यंग गर्ल नीड सेक्स कहानी मैं आपको बताने जा रही हूँ, वह मेरी जिंदगी की हकीकत है.
मेरी बुआ की शादी अब से दो साल पहले राज से हुई.
राज की उम्र इस समय 30 साल है और वह एक बिजनेसमैन हैं.
अपने काम के सिलसिले में उनका हमेशा ही बाहर आना-जाना लगा रहता है और वह अक्सर हमारे यहां, यानि अपनी ससुराल में आते-जाते रहते हैं.
राज बहुत ही हंसमुख व्यक्ति हैं.
शादी के बाद से ही जब भी मैं राज फूफाजी को देखती, मेरे दिल में हलचल होने लगती थी.
वे मुझे बहुत अच्छे लगते थे और शायद मैं उनके जैसा ही पति चाहती थी.
बुआ भी हमेशा उनकी तारीफ करती रहती थीं.
एक बार मैंने बुआ को बात करते हुए सुना कि राज का रोमांटिक अंदाज़ और स्टैमिना बहुत लंबा है, वे बहुत देर तक टिकते हैं. राज हमेशा फुल मूड में रहते हैं और कभी भी, कहीं भी चालू हो जाते हैं.
हालांकि जब भी मुझे मौका मिलता, मैं राज फूफाजी से फोन पर घंटों बात करती थी.
हमारी बातें हमेशा शरारत भरी होती थीं और वे मुझे बहुत अच्छे लगने लगे थे.
आखिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उन्हें प्रपोज़ कर दिया.
मैंने बात करते हुए कहा- राज फूफाजी, एक बात कहनी थी. आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, मैं आपको चाहने लगी हूँ.
इस पर उन्होंने हंस कर कहा- समय आने पर मैं जवाब दूँगा.
उसके बाद भी हम फोन पर हमेशा बात करते रहे.
मेरा सवाल अब तक निरुत्तर रहा था.
अब हमारी बातें कभी गंभीर, तो कभी रोमांस से भरी होती थीं.
वे हमेशा मेरे कपड़ों के बारे में पूछते और कहते- मैं तुम्हें लहंगा-चोली में देखना चाहता हूँ.
एक बार बुआ और राज फूफाजी हमारे घर आए.
राज फूफाजी ने मुझे पहले ही अपने आने की खबर दे दी थी इसलिए मैं पार्लर जाकर तैयार हो चुकी थी.
लेकिन अगले दिन राज फूफाजी को दिल्ली किसी काम से जाना था तो वे दोनों आए और फूफा जी जाने की बात करने लगे.
जब वे लोग यह बात करने लगे तो मैंने जिद की कि मुझे भी आपके साथ दिल्ली चलना है क्योंकि मैं कभी दिल्ली नहीं गई.
मेरे मन में कुछ और ही प्लानिंग थी, यंग गर्ल नीड सेक्स को वे समझ चुके थे.
आखिर मेरे घर वालों ने भी मुझे इजाज़त दे दी और राज फूफाजी ने मेरा रिजर्वेशन भी अपने साथ करा लिया.
मैंने जाने से पहले अपनी चूत को अच्छे से साफ कर लिया और चिकनी कर ली.
वैसे भी मैं पहले ही पार्लर जाकर तैयार थी.
अगले दिन मेरा रिजल्ट आने के बाद कॉलेज में एक प्रोग्राम था.
उसी दिन हमारी ट्रेन रात 9 बजे जबलपुर से दिल्ली की थी.
मैं शाम 5 बजे प्रोग्राम में शामिल होने चली गई.
रात 8 बजे मेरे बड़े भाई ने मुझे प्रोग्राम से पिक किया और स्टेशन छोड़ा, जहां राज फूफाजी पहले ही पहुंच चुके थे.
मैंने उस समय व्हाइट टॉप और लाइट ब्लू जींस पहन रखी थी जिसमें मैं बहुत हॉट लग रही थी.
मेरा पूरा फिगर उन कपड़ों में साफ दिख रहा था.
रात 9 बजे गाड़ी आई और मैं और राज फूफाजी ट्रेन में चढ़ गए.
जल्द ही ट्रेन चल पड़ी.
हमारा रिजर्वेशन फर्स्ट एसी में था डबल कूपे वाले में.
मैं उन्हें अकेले देखकर बार-बार मुस्कुरा रही थी और शर्मा रही थी.
हमारी बातें शुरू हुईं.
मैंने समय देखते हुए फिर से उन्हें प्रपोज़ किया और कहा- राज जी, आपने जवाब नहीं दिया.
इस पर उन्होंने कहा- मेरी ओर से हां है. मैं भी तुम्हें पसंद करता हूँ.
लेकिन हमारे रिश्ते की मर्यादा भी है. तुम्हें नापसंद करने की कोई वजह नहीं
है.
यह कहते वे मेरी तारीफ करने लगे.
मैंने कहा- राज जी, आप चिंता मत करो. मैं कभी आपको धर्मसंकट में नहीं डालूँगी. आप बस मेरा पहला प्यार हो.
इतने में टीटीई आया और हमारा टिकट चेक करके बोला- आप लोग नए कपल हैं, इसलिए कूपे को अन्दर से लॉक करके रेस्ट कीजिए.
टीटीई के जाते ही राज फूफा जी ने दरवाजा लॉक कर दिया.
टीटीई की बात पर मुझे हंसी आ रही थी.
मैंने कहा- देखा, अब तो लोग भी हमें पति-पत्नी समझने लगे हैं.
वे मुस्कुरा दिए.
मैं भी हंसती हुई बोली- वैसे भी मुझे आपके साथ पत्नी का रिश्ता ही रखना है.
राज ने कहा- तो आज हमारी सुहागरात हम यहीं मनाएंगे.
मैंने मज़ाक में कहा- मुझे आपके साथ कोई सुहागरात नहीं मनानी. जाने
कितने जालिम हो आप … न जाने क्या-क्या करोगे मेरे साथ? मैं तो एक नाजुक कली
हूँ.
राज बोले- आज मैं तुम्हें कली से फूल बना दूँगा.
मैंने कहा- राज, मुझे चेंज करना है.
वह बोले- कर लो न चेंज … किसने रोका है?
मैं उनकी ओर बढ़ती हुई बोली- भागो, शरारती कहीं के. मुझे तुम्हारे सामने
चेंज नहीं करना. वैसे भी तुम्हारे रहने से मुझे शर्म आ रही है. कहीं तुम
कोई शरारत न कर दो.
यह सब मैं शर्माती और मुस्कुराती हुई बोल रही थी.
वे बोले- ठीक है, मैं बाहर से आता हूँ. वैसे भी मुझे तुम्हें कुछ अलग ही देखना है, जो अब तक मैंने नहीं देखा.
यह कह कर फूफा जी बाहर चले गए.
मैंने जल्दी से अपने बैग से रेड प्लेन लहंगा-चोली निकाली और चेंज कर लिया.
मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था यानि न ब्रा, न पैंटी.
फिर मैंने आईने में खुद को देखा. ब्लाउज पीछे से बैकलेस था, एक डोर से
बंधा था और आगे से बहुत गहरे गले का था, जिसमें मेरे क्लीवेज साफ दिख रहे
थे.
लहंगे को मैंने नाभि से नीचे से बाँधा ताकि मेरी नाभि साफ साफ दिखे.
मैंने हाथों में चूड़ियां और मेहंदी पहले से ही लगा रखी थी.
पैरों में पायल और होंठों पर रेड लिपस्टिक लगाई.
मेरे बाल खुले थे, जो कुछ दिन पहले ही स्ट्रेट कराए थे.
मेरा पेट साफ दिख रहा था और पीठ पूरी बैकलेस थी.
जब मैंने आईने में देखा, तो मैं हॉट और सेक्सी लग रही थी.
मेरे अंग-अंग का एक-एक कटाव साफ दिख रहा था.
मेरी 21 साल की उम्र और 32-28-34 का फिगर.
मेरे बूब्स एकदम टाइट थे और मेरी गांड हल्की बाहर को निकली थी.
इसलिए मेरी बॉडी लहंगा-चोली में बहुत हॉट लग रही थी.
मैंने लाइट ऑफ कर दी, रेड ओढ़नी ली और पीठ के बल लेट गई.
ओढ़नी को मैंने चादर की तरह ढक लिया और चेहरा भी ढक लिया था.
मैंने राज फूफा जी को कॉल किया- आ जाइए, मैंने चेंज कर लिया है.
मैंने दरवाजा पहले ही अनलॉक कर दिया था.
मेरे मन के अरमान अब पूरे होने वाले थे.
आज मैं अपने प्यार को पूरे दिल से सब कुछ अर्पण करने वाली थी.
यह सोचते ही मेरी चूत हल्की-हल्की गीली होने लगी थी और मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी होने लगी थी.
आज मैं पहली बार चुदने वाली थी, वह भी अपने पहले प्यार के साथ.
इतने में दरवाजा खुला और राज फूफाजी अन्दर आ गए.
उन्होंने दरवाजा लॉक किया.
वे उस समय कुर्ता-पायजामा पहने थे.
उन्होंने लाइट ऑन की और मुझे एकटक देखते रह गए.
मैंने शर्माते हुए कहा- राज, प्लीज लाइट ऑफ कर दो. मुझे शर्म आ रही है. तुम्हारे इस तरह देखने से ही मुझे शर्मिंदगी हो रही है.
जवाब में उन्होंने लाइट ऑफ कर दी.
लेकिन फिर भी इतनी रोशनी थी कि हम एक-दूसरे को साफ देख सकते थे.
साथ ही उन्होंने जीरो वाट का बल्ब चालू कर दिया.
मैंने कहा- राज देखो … मैंने ये कपड़े सिर्फ इसलिए पहने क्योंकि तुम्हारी यही इच्छा थी!
मैं लेटी थी और राज जी मेरे पास आकर मुझसे सटकर बैठ गए.
उन्होंने मेरी चुनरी को धीरे-धीरे मेरे शरीर से हटा दिया.
वे मुझे एकटक देखने लगे.
मैंने कहा- राज … जैसा तुमने कहा था कि मुझे लहंगा-चुनरी में देखना चाहते हो, आज मैं वैसे ही तुम्हारे सामने हूँ.
मैंने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को ढक लिया, अपने शरीर को छुपाने की कोशिश करते हुए.
मैं राज को अपने क्लीवेज देखने से रोक रही थी और शर्माती हुई बोली भी कि राज, प्लीज ऐसे मत देखो न!
हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में खोए हुए थे.
मैंने फिर से कहा- राज, मुझे इस तरह मत देखो. मुझे शर्म आ रही है. अपनी नजरें हटा लो.
राज ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें ऊपर उठा दिया.
उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मेरा कोई जोर उनके सामने नहीं चला.
मैंने अपने हाथ छुड़ाने की हल्की कोशिश की.
लेकिन अब मैं पूरी तरह उनके बस में थी.
वे अपने पूरे शरीर को मेरे ऊपर ले आए और मेरे ऊपर लेट गए.
पहली बार कोई मेरे इतने करीब था, लेकिन मुझे इसका अहसास भी नहीं हो रहा था.
राज फूफा जी ने मेरे निचले होंठों के पास अपने होंठ लाए और उन्हें चूमने, काटने और चूसने लगे.
उन्होंने मेरी लिप्सटिक तक चूस ली.
मैं तो मानो मदहोश-सी होने लगी.
वे मेरे निचले होंठ को बुरी तरह चूस रहे थे और मैं मछली की तरह तड़प रही थी.
मेरा शरीर जैसे जलने लगा था.
धीरे-धीरे वे मेरे गले पर आए और वहां चूमने लगे.
वे जंगली अंदाज में मेरे शरीर को अपने दांतों से चूस रहे थे.
मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी छाने लगी थी.
मेरी चूत तो पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
मैंने अपने होंठ काटे, आंखें बंद कीं और मदहोश होकर राज फूफा जी को अपना काम पूरा करने में साथ दे रही थी.
लेकिन नीचे मेरी चूत का हाल और भी बुरा था जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी … जीवन में पहली बार.
मेरी हालत खराब होती जा रही थी.
शायद पहली बार कोई मेरे जिस्म से इस तरह खेल रहा था.
वे धीरे-धीरे मेरे बूब्स की ओर बढ़े और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें चूमने लगे.
मेरे क्लीवेज की लाइनिंग पर भी वह अपने होंठ चला रहे थे.
लेकिन उन्होंने मेरे हाथ नहीं छोड़े और मैं तड़पती रही.
मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह … आह … आह …’
फिर वे और नीचे मेरे पेट पर चूमने लगे.
उन्होंने मेरे हाथ छोड़ दिए.
पहले तो मैंने अपने हाथ रोक रखे और अंगड़ाई लेने लगी.
लेकिन कुछ देर बाद मेरे हाथ अपने आप राज जी के बालों में चले गए और उन्हें सहलाने लगे.
मैं उनके सिर पर दबाव भी बना रही थी.
राज फूफा जी मेरे पेट को चूमते हुए अपने होंठों से सहला रहे थे.
मैं आंखें बंद कर, मदहोश होकर मजे में खो रही थी.
अचानक राज फूफा जी ने मेरे लहंगे का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने लगे.
मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना था, इसलिए मुझे शर्मिंदगी हो रही थी.
मैंने उनके हाथ रोकने की कोशिश की लेकिन आखिरकार वे जीत गए.
देखते ही देखते उन्होंने मेरे लहंगे को मेरे शरीर से अलग कर दिया.
अब मैं उनके सामने नीचे से निर्वस्त्र थी.
शर्म से पानी-पानी होकर मैंने अपनी चूत को दोनों हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश की.
तभी राज फूफा जी उठे और अपने सारे कपड़े उतार दिए.
उनका खड़ा लंड अब मेरी आंखों के सामने था.
वे मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए.
उन्होंने मेरे पैरों को सहलाते हुए अचानक उन्हें अपनी ओर खींचा.
फिर मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझे उठाया और सीधे अपनी गोद में बिठा लिया.
मैंने उनके इस अंदाज के बारे में कभी सोचा भी नहीं था.
उधर राज फूफा जी का लंड मेरी चूत के आसपास टकरा रहा था.
मेरे अन्दर एक अजीब-सी हलचल पैदा हो रही थी क्योंकि मैं जानती थी कि अब कुछ ही क्षणों में उनका लंड मेरी चूत के अन्दर होगा.
राज ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर स्मूच करने लगे.
अब मेरी शर्म भी छूट चुकी थी, इसलिए मैं भी उनका साथ देने लगी.
उस पल हमारी जीभें आपस में टकरा रही थीं और मैं उस मजे को पूरी तरह ले रही थी.
हमारा स्मूच चरम सीमा पर था.
उधर राज फूफा जी ने मेरे बालों को एक तरफ करते हुए मेरे ब्लाउज की पीछे की डोरी को खोल दिया.
अब मेरा ब्लाउज ढीला हो चुका था, जिसे उन्होंने कुछ ही क्षणों में मेरे शरीर से अलग कर दिया.
अब मैं उनके सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी.
राज ने मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया और प्यार करने लगे.
मेरे बूब्स उनकी छाती से दब चुके थे.
मुझे राज फूफा जी को कुछ बोलने या समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही थी.
वे अपनी मर्जी से मेरे शरीर के साथ खेल रहे थे.
कभी वे मेरी पीठ को सहला रहे थे, कभी मेरे बालों को खींचकर उन्हें सहला दे रहे थे, तो कभी मेरे गालों पर चुंबनों की बौछार कर रहे थे.
कभी वे मेरे बालों को खींचते हुए मेरे गले पर चुंबन ले रहे थे और थोड़ा नीचे होते हुए मेरे स्तनों पर भी चुंबन ले रहे थे.
मैं भी उनके साथ चिपक कर उनके बालों को सहलाती हुई उन्हें उत्तेजित करने में लगी थी.
अब तो राज फूफा जी ने मेरे स्तनों को एक-एक करके चूसना शुरू कर दिया था और मेरी उत्तेजना को बढ़ाने में जुट गए थे.
उन्होंने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर रखा था और दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को पकड़ कर कभी दबाते तो कभी एक दूध को चूस लेते.
फिर अचानक वह समय आ गया, जिसका शायद मुझे और उन्हें इंतज़ार था.
राज फूफा जी का लंड मेरी चुत के आसपास ही घूम रहा था.
उन्होंने अपना हाथ मेरी गांड के पास ले जाकर उसे हल्का सा उठाया और अपने लंड को मेरी चुत के मुहाने पर ले आए.
फिर फूफा जी ने मुझे अपनी ओर चिपका लिया.
उनका लंड मेरी चुत के अन्दर घुस चुका था.
एक ही बार में पूरा लंड चुत में समा गया था.
मुझे बहुत ज्यादा दर्द भी हुआ, इतना ज्यादा कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए.
मैं छटपटाने लगी, जिसे समझते हुए राज फूफा जी मेरे होंठों को चूसने लगे.
कुछ देर बाद राज फूफा जी ने मेरी आंखों में आंखें डालीं और फिर से जोरदार धक्के के साथ अपना लंड मेरी चुत में अन्दर कर दिया.
उन्होंने मेरी गांड को अपनी तरफ खींचते हुए यह प्रहार किया था.
इस बार मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हुआ और मैं छटपटाने लगी.
मैं उन्हें अपने से दूर करने लगी और मेरे मुँह से जोर से आवाज़ निकली- आह आह आह … मम्मी, मर गई.
मेरी आंखों से आंसुओं की धार निकलने लगी.
दोस्तो, मैं अपनी कुंवारी चुत की सील तुड़वा कर एक बार तो पछताने लगी थी कि इतना दर्द की नहीं सोची थी.
राज फूफा जी ने मुझे दर्द से तड़फते हुए देख कर मुझे लेटा दिया.
लेकिन उन्होंने अपना लंड मेरी चुत से नहीं निकाला और वे मेरे ऊपर लेट कर पूरी तरह से छा गए.
वे मुझे सहलाने लगे, मेरे स्तनों को अपने हाथों से सहलाते हुए चुंबन लेते रहे.
कुछ देर बाद जब मैं थोड़ा सामान्य हुई तो राज फूफा जी फिर से अपना लिंग अन्दर-बाहर करने में जुट गए.
इस बार वे मेरी आंखों में आंखें डालकर मुझे चोद रहे थे.
मैं भी अब मज़ा ले रही थी क्योंकि अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.
मेरा दर्द मज़े में बदल चुका था और मेरी चुत की सील टूट चुकी थी.
हालांकि मेरी चुत कई बार पानी छोड़ चुकी थी जिस वजह से चुत में चिकनाई काफी ज्यादा हो गई थी और लौड़े की मोटाई अब दर्द की जगह मजा देने लगी थी.
फूफा जी एक शातिर खिलाड़ी की तरह मुझे सहलाते हुए चोद रहे थे.
साथ ही वे मुझे बार-बार चुंबन भी कर रहा था.
उन्होंने मेरे चेहरे, होंठ, जीभ, आंखों, यहां तक कि मेरे स्तनों को भी खूब चूसा.
उस दौरान मेरा पानी बार बार गिर रहा था और मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी.
मैं तो बस उस हसीन चुदाई का मज़ा ले रही थी.
मैं बोल रही थी- राज … आह अह … करो … मज़ा आ रहा है. सच में राज, आज से पहले कभी इतना मज़ा नहीं आया. ओह ओह … आह आह … यस यस फक मी.
मेरी चूड़ियां भी लौड़े की लय के साथ बज रही थीं.
तभी राज ने अपना लंड मेरी चुत से निकाला और मेरे पूरे शरीर पर चुंबन करते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे.
अब वे मेरे पैरों तक पहुंच गए और मेरे एक पैर को पकड़ कर उठाया.
मेरी आंखों में देखते हुए फूफा जी ने मेरे पैर के अंगूठे को चूसना शुरू कर दिया.
उनकी इस हरकत से मेरी चुत फिर से गीली हो गई.
तभी राज फूफा जी ने अचानक मेरे पैर को घुमाया और मुझे पलट दिया.
अब मेरी पीठ उसके सामने थी.
राज फूफा जी ने मेरे शरीर को सहलाते हुए ऊपर की ओर बढ़ना शुरू किया.
उन्होंने मेरी गांड पर दो-चार जोर से चपत भी मारी.
मैंने पलट कर उनकी ओर देखा और नज़रों से पूछा कि यह क्या कर रहे हो?
जवाब में राज फूफा जी ने मेरे बालों को पकड़ कर खींचा.
फिर अपनी गांड के पास अपना लंड लाकर मेरी चुत पर पीछे से सैट कर दिया.
उनके इस तरीके से मैं मदहोश होने लगी.
उन्होंने जल्द ही पीछे से मेरी चुत पर लंड सैट किया और एक ही शॉट में उसे अन्दर घुसा दिया.
मुझे फिर से दर्द हुआ लेकिन इस बार राज फूफा जी रुके ही नहीं.
वे अपना लिंग अन्दर-बाहर करने लगे.
चुदाई के साथ ही कभी वे मेरी पीठ पर चुंबन ले लेते, तो कभी मेरे बालों को जोर से खींच लेते.
मैंने अपना मुँह उनकी ओर किया, तो उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें काटने-चूसने लगे.
साथ ही राज अपना हाथ आगे करके मेरे स्तनों को जोर से दबा रहे थे.
लेकिन उन्होंने एक पल के लिए भी अपनी चुदाई का कार्यक्रम बंद नहीं किया.
मेरी चुत कई बार स्खलन कर चुकी थी.
मैं अब फूफा जी का नाम लेते हुए बोल रही थी- आह राज डार्लिंग … जल्दी जल्दी करो … मज़ा आ रहा है!
लेकिन राज फूफा जी थे कि थकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
मुझे भी उनके हर धक्के पर मज़ा बढ़ता जा रहा था.
आखिर में राज ने मेरे मुँह में अपनी उंगली डालते हुए कहा- कुमकुम, मेरा होने वाला है.
मैंने समझा भी नहीं कि क्या बोलना है.
आखिरी के 15-20 जोरदार शॉट मारते हुए राज फूफा जी ने मेरी चुत में अपना सारा वीर्य गिरा दिया और वैसे ही मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गए.
वे मेरी पीठ को चूमते हुए मेरे स्तनों को सहला रहे थे.
मेरा शरीर भी पूरी तरह थक चुका था.
उसी हालत में हम लोग करीब 10 मिनट रहे होंगे.
फिर राज फूफा जी उठे और बोले- कुमकुम, मैं आता हूँ.
मैंने उठकर अपनी चुत को देखा, जिस पर खून लगा था.
मैंने उसे पहले साफ किया, फिर अपना लहंगा पहना ही था कि राज फूफा जी वापस आ गए.
उन्होंने अन्दर आते ही गेट लॉक किया और लाइट्स चालू कर दी.
लाइट चालू होते ही मैं शर्मा गई और अपने स्तनों को दोनों हाथों से ढककर राज फूफा जी के सामने खड़ी हो गई.
फिर वे बोले- तुम बस इतने ही कपड़ों में अच्छी लग रही हो.
मैंने कहा- तुम्हें शर्म नहीं आती? एक जवान लड़की के सामने इस तरह देखते हुए खड़े हो!
राज फूफा जी आगे बढ़े.
मैं बोली- क्या … इतना करके अभी तक थके नहीं?
राज फूफा जी ने कहा- अभी तो सारी रात बाकी है. वैसे भी आज मैं तुम्हें सोने तो देने वाला नहीं हूँ.
वे मेरी ओर आने लगे.
मैं घूमकर सामने वाली दीवार के पास खड़ी हो गई.
राज फूफा जी के सामने मेरी पूरी बैकलेस पीठ थी.
राज फूफा जी ने सही मौका पाते हुए मेरे बालों को हटाते हुए मेरी पीठ पर चुंबनों की बौछार कर दी.
उन्होंने कहा- काश कुमकुम, तुम मुझे पहले मिली होतीं!
मैंने जवाब दिया- लेकिन अब तो मिल गई हूँ न!
इस पर राज फूफा जी ने पीछे से ही मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
उधर उनका एक हाथ मेरे बूब्स पर चला गया.
धीरे-धीरे मेरे हाथों को हटाते हुए उन्होंने मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथों से दबाना और मसलना शुरू कर दिया.
मैं तो शर्म से पानी-पानी हो रही थी.
राज फूफा जी मेरे बूब्स दबाने के साथ-साथ अब धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगे थे.
वे मेरी पीठ और कमर पर चुंबन लेने लगे.
उधर मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था और मैं कसमसा रही थी.
अब मैं राज से दूर हटते हुए सीट पर जाकर बैठ गई, अपने बूब्स को छुपाते हुए.
राज मुस्कुराते हुए मेरे पास आया और मेरे पैरों को खींचकर मुझे लेटा दिया.
फिर उन्होंने मेरे लहंगे को अपने हाथों से ऊपर करना शुरू किया और उसे मेरी कमर तक ले आए.
अब मेरी चूत फूफा जी के सामने थी, जिसे वे बड़ी ही ललचाई नजरों से देख रहे थे.
राज फूफा जी मेरी जांघों को सहलाते हुए धीरे-धीरे अपने चेहरे को मेरी जांघों पर ले आए और फिर उन्होंने अपने होंठों को मेरी पिंक चूत पर रख दिया.
पहले उन्होंने ऊपर से चुंबन लेना शुरू किया और उन्होंने मेरी चुत को अपनी जीभ से कुरेदना और काटना शुरू कर दिया.
मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी और पानी भी छोड़ चुकी थी.
राज फूफा जी ने अब अपनी जीभ को मेरी चूत के दाने पर और फिर चूत के अन्दर ले जाकर गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया.
मेरे हाथ मेरे बूब्स को छोड़कर उनके सिर तक चले गए और मैं उनके सिर को दबाने लगी ताकि वे और ज्यादा अपनी जीभ को मेरी चूत में डालकर उससे खेलें.
साथ ही अब मेरी आहें भी निकलने लगीं.
मैं बोल रही थी- आह राज … ऐसे ही करो … आह और अन्दर तक … मजा आ रहा है. बस करते रहो ओह राज, आह आह!
राज फूफा जी अपनी मस्ती में मेरी चुत को चाट रहे थे.
‘सच राज, बुआ सच कहती थीं, तुम असली मर्द हो. आज मैं सच में तुम्हारी हो गई!’
काफी समय बाद राज फूफा जी ने मुझे छोड़ा और सीट पर बैठ गए.
वे मेरी ओर देखकर मुस्कुराने लगे और मैं अपने चेहरे पर एक हारी हुई मुस्कान के साथ शर्माती हुई उनकी ओर देख रही थी.
राज फूफा जी ने कहा- चल आ जा मेरी रानी. तुझे आज जन्नत दिखाता हूँ.
फूफा जी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खड़ा किया और फिर मुझे घुटनों के बल बैठने को कहा.
मैं जैसे ही घुटनों के बल बैठी, राज फूफा जी ने मेरे चेहरे को पकड़ कर पहले मेरे माथे पर एक चुंबन लिया और मेरे बालों को एक साथ करते हुए मेरे चेहरे को अपने लंड के सामने ले आए.
अब मेरा चेहरा उनके लंड के सामने था और उनका लंड फुल स्टैंड पोजीशन में खड़ा था.
मैं जान रही थी कि राज फूफा जी अब क्या करने वाले हैं.
राज फूफा जी ने अपने लंड को पहले मेरे होंठों पर रगड़ा.
फिर उन्होंने मुझसे कहा- अपना मुँह खोलो.
मैंने अपना मुँह खोला तो फूफा जी ने अपने लंड को सीधा मेरे मुँह में घुसा दिया और कहा- मेरी कुमकुम रानी, चूस ले … बहुत मजा आएगा हम दोनों को!
राज फूफा जी की बात मानते हुए मैं उसके लंड को चूसने लगी.
साथ ही वे अपने हाथों से मेरे सिर को ऊपर नीचे करते हुए अपने लंड को चुसवाने लगे.
कुछ देर तो मुझे अजीब लगा लेकिन उसके बाद मुझे भी काफी मजा आने लगा और मैं उनका साथ देने लगी.
अब तो मेरे मुँह से आवाजें भी आने लगी थीं जिससे राज फूफा जी और मस्ती
में आ जाते और मेरे बालों को पकड़ कर अपने लंड पर थपथपाने लगते.
साथ ही वे बीच-बीच में अपने हाथों से मेरे बूब्स को जोर से पकड़ कर निचोड़ भी देते.
मुझे मजा तो आ रहा था लेकिन साथ ही फूफा जी का लंड मेरे गले तक चला जाता, जिसके कारण मेरा दम भी घुटने लगता.
काफी देर बाद राज फूफा जी ने मुझे छोड़ा और मैं उनसे दूर हटकर खड़ी हो गई.
तभी राज फूफा जी फिर से खड़े हुए और उन्होंने मुझे अपने दोनों हाथों में ऐसे उठा लिया मानो मैं कागज सी हल्की हूँ.
उनका एक हाथ मेरी कमर पर और दूसरा हाथ मेरे घुटनों पर था.
उसी पकड़ को मजबूती देते हुए उन्होंने मुझे पकड़ कर उठा लिया.
अब मैं सिर्फ उनकी आंखों में देख रही थी.
राज फूफा जी मुझे वैसे ही लेकर बर्थ पर बैठ गए.
मैंने अपनी बांहों को उनके गले में डाल रखा था.
अब वे धीरे-धीरे मेरे चेहरे को अपनी ओर ले जाने लगे.
साथ ही उन्होंने अपना हाथ मेरे लहंगे को ऊपर करने में लगा दिया.
कुछ पल बाद फूफा जी ने मेरे होंठों पर चुंबन लेना शुरू कर दिया और साथ ही नीचे मेरी जांघों पर सहलाने लगे.
मेरे बूब्स उनकी छाती से लगकर दब रहे थे.
ऊपर उनकी जीभ मेरे मुँह में आ चुकी थी और हमारा स्मूच शुरू हो गया.
साथ ही उन्होंने मेरी पीठ पर भी हाथ चलाना जारी रखा.
उधर नीचे मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था और चूत से पानी भी आने लगा था.
राज फूफा जी ने फिर से मेरे लहंगे के बंधन को खोल दिया और धीरे-धीरे मेरे लहंगे को मेरे शरीर से निकाल दिया.
इस तरह से एक बार फिर से उन्होंने मुझे पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया.
कुछ देर तक वे मेरे शरीर के साथ प्यार करते रहे.
फिर उन्होंने अपना मुँह नीचे करके मेरे बूब्स को चूसना शुरू कर दिया.
लेकिन इस बार वे पूरे वेग से चूस रहे थे, यहां तक की काट भी ले रहे थे.
मैं भी उनका साथ दे रही थी, उनके सिर पर हाथ रख कर अपने बूब्स पर दबा रही थी.
मेरी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं- ओह राज … और चूसो उह … उह … मजा आ रहा है!
फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरे पीछे आ गए.
उन्होंने मेरे बालों को आगे की ओर करते हुए मेरी पीठ पर किस करना शुरू कर दिया.
वे मेरी गर्दन को भी चूसने लगे.
इसके बाद उन्होंने अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाते हुए मेरे दोनों बूब्स पर रख दिया.
पहले वे हल्के-हल्के से मेरे दूध सहलाने लगे, फिर जोर जोर से दबाने लगे.
मैं बस उस पल का मजा ले रही थी.
कुछ देर बाद उन्होंने मेरे दोनों हाथों को सीट पर रखवाया और मेरी पीठ पर किस करते हुए मेरी गांड तक आ गए.
उन्होंने पहले बहुत प्यार से मेरी गांड को किस किया.
मैं पीछे मुड़कर यह सब देख भी रही थी.
इस दौरान मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
अब वह खड़े हुए और उन्होंने अपने लंड को पहले मेरी चूत पर रगड़ा.
मेरा सारा पानी उनके लंड पर लग गया.
फिर उन्होंने अपने फुल स्टैंड लंड को मेरी गांड पर सैट कर दिया और मेरी कमर पकड़ते हुए हल्का सा पुश किया.
मेरी गांड एकदम टाइट होने के कारण बंद थी जिस वजह से लंड अन्दर नहीं जा रहा था; बस उनका टोपा मेरी गांड पर सटक रहा था.
मैंने राज फूफा जी की ओर देखा और कहा- क्या एक ही दिन में सब कुछ कर लोगे?
इस पर राज फूफा जी ने मेरी गांड पर जोरदार चपत मारते हुए कहा- आज ही तुम्हें पूरी औरत बनाना है, तो तैयार हो जा मेरी कुमकुम.
फिर उन्होंने एक बार फिर से अपना लंड मेरी गांड पर सैट किया और धीरे-धीरे अन्दर करने लगे.
पहले तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपना लंड मेरी गांड के अन्दर लगभग डाल ही दिया.
दर्द के कारण मेरा बुरा हाल हो रहा था फिर भी मैं आगे के मजे के लिए उनके साथ देने लगी और इस दर्द को सहने लगी.
कुछ देर बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
पहले तो मुझे काफी दर्द हुआ, लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और शायद मजा भी आने लगा.
जब मैं पूरी तरह नॉर्मल हो गई तो उन्होंने मेरी गांड में लंड अन्दर-बाहर करना तेज कर दिया.
उनकी स्पीड इस बार ज्यादा नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्पीड बढ़ने लगी.
अब वे पूरी तरह मेरी गांड मार रहे थे और मुझे भी अब मजा आने लगा था.
राज फूफा जी बीच-बीच में कभी मेरे बालों को खींचते, तो कभी मेरी पीठ पर झुककर किस ले लेते.
कभी आगे हाथ डालकर मेरे बूब्स को पकड़ते, सहलाते और दबा देते.
कभी-कभी मेरी गांड पर चपत भी मारते.
साथ ही वे मेरी गांड की तारीफ भी करते कि कैसे नॉर्मल पोजीशन में भी मेरी गांड निकली रहती है … मेरा पिछवाड़ा कितना आकर्षक है.
लेकिन उन्होंने पीछे से गांड मारना नहीं रोका.
इस दौरान मेरी चूत से पानी की धार निकल कर मेरे पैरों तक आ गई थी.
मेरे बाल पूरी तरह बिखर चुके थे.
बहुत देर बाद उन्होंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी.
कुछ देर बाद उन्होंने अपना सारा वीर्य मेरी गांड में डाल दिया और मेरी पीठ के ऊपर निढाल होकर गिर गए.
फिर वे मेरी पीठ पर किस करने लगे.
हम दोनों उसी पोजीशन में एक सीट पर लेट गए.
धीरे-धीरे उनका लंड मेरी गांड से निकल गया.
मेरा सारा शरीर दर्द करने लगा था और मैं उनसे बात करते-करते कब सो गई, पता ही नहीं चला.
सुबह जब उठी, तो राज फूफा जी मुझसे चिपक कर सो रहे थे.
मैं रात की ओल्ड यंग चुदाई की बातें याद करके सोच रही थी कि कितनी हसीन रात बीती थी.
फिर मैंने राज फूफा जी के गाल पर किस करके उन्हें जगाया.
वे भी जाग गया और मुझे और करीब से चिपका लिया.
मैंने कहा- देखो मिल गई न तुम्हें कुमकुम!
वे बोले- कुमकुम, अब सिर्फ मेरी ही रहेगी.
मैंने कहा- चलो, अब दिल्ली आने वाला है.
फिर हम दोनों उठे, अपने कपड़े पहने और तैयार हो गए.
कुछ देर बाद स्टेशन भी आ गया. आगे की कहानी अगली बार.
बस के सफर में कमसिन चूत मसलने की कहानी
एक बार फिर से मैं एक रोमांचक बस सेक्स स्टोरी के साथ हाज़िर हूँ.
यह सेक्स कहानी नहीं है, बल्कि एक सफर के दौरान एक लड़के और लड़की के बीच हुई कामुक और कश्मकश भरी दास्तान है.
मेरे उन साथियों से, जो महिलाओं की निजी जानकारियां मांगते हैं, मैं माफी मांगता हूँ और कहना चाहता हूँ कि कहानियों का आनन्द लें, किसी के निजी जीवन में दखल न करें.
यह बस सेक्स स्टोरी मेरी या मेरी किसी महिला मित्र की नहीं है बल्कि मेरे सफर के दौरान घटित घटनाओं पर आधारित है.
पात्रों के नाम कहानी को पढ़ने में मज़ा आए, इसलिए लिख दिए गए हैं … बाकी नाम बदले हुए हैं.
कुछ दिन पहले मैं ज़रूरी काम से रोडवेज की बस से लखनऊ जा रहा था.
मैं अकेला था, तो सोचा कि आज का सफर बहुत बोरिंग होगा.
लेकिन तभी बस में एक परिवार चढ़ा, जिसमें पति-पत्नी और उनकी बेटी थी.
बेटी की उम्र लगभग 19 साल रही होगी.
बस चलने में अभी वक्त था और लगभग खाली बस में उन्होंने मेरे बगल वाली तीन सीटों पर अपनी तशरीफ जमा ली.
कुछ ही देर में वह आदमी उन्हें छोड़कर चला गया.
अब मैंने उस लड़की को तसल्ली से देखा, तो मैं जैसे खो ही गया.
उसका दूध-जैसा गोरा रंग, तीखे नैन, पतली सुराहीदार गर्दन, होंठ ऐसे जैसे गुलाब की नाजुक पंखुड़ियां.
उस लड़की ने क्रॉप टॉप और घुटनों तक की स्कर्ट पहनी थी.
उसके शरीर की बनावट एक कमसिन कली-सी थी, शायद 30-26-32 की फिगर रही होगी.
वह न ज्यादा मोटी, न पतली … औसत देह की कामुक लड़की.
कुछ देर बाद बस चलने को हुई.
उस लड़की का नाम श्रद्धा था जो उसकी मां के पुकारने पर मालूम हुआ था.
मां ने उसे पुकारा और खुद खिड़की की तरफ चली गई.
इससे अब उस हुस्न परी का दीदार मेरे लिए और सुलभ हो गया.
बस अभी कुछ ही दूर चली थी कि कुछ लोग बस में चढ़े, जिनमें हमारी कहानी का हीरो नीरज भी था.
सभी लोग अपनी-अपनी जगह देखकर बैठ चुके थे.
नीरज भी श्रद्धा के बगल में आकर बैठ गया, जिससे मेरी नज़र मेरी हीरोइन पर नहीं जा पा रही थी.
बस अब शहर से बाहर निकलकर अपनी रफ्तार पर थी.
मेरी नज़र, न चाहते हुए भी बार-बार श्रद्धा की तरफ जा रही थी.
बस को चले हुए लगभग 25-30 मिनट हो चुके थे और वे आंटी भी अब तक सो चुकी थीं.
मैंने जैसे ही उस तरफ नज़र डाली, मुझे उन दोनों की हरकतों में कुछ गड़बड़-सी महसूस हुई.
श्रद्धा बाहर की तरफ नज़र करके बैठी थी लेकिन नीरज के शरीर में कुछ हलचल मुझे दिख रही थी.
क्योंकि मेरी सीट बगल में थी इसलिए मैं वह सब देख पा रहा था.
कुछ ही देर में मैंने देखा कि नीरज अपनी कोहनी से श्रद्धा के वक्षस्थल को छूने की कोशिश कर रहा था.
लेकिन श्रद्धा की तरफ से अभी तक कोई विरोध नहीं दिखा.
अब मेरी भी दिलचस्पी इस खेल को देखने में बढ़ने लगी.
मैंने खुद को सीट पर अच्छे से एडजस्ट किया और इस खेल का मज़ा लेने लगा.
कुछ देर बाद श्रद्धा भी इस छेड़छाड़ के मज़े लेने लगी थी.
जैसे ही नीरज ने यह महसूस किया, उसकी हरकतें श्रद्धा के जिस्म पर बढ़ती जा रही थीं.
अब नीरज का एक हाथ श्रद्धा की कोमल जांघों पर आ गया.
उसका हाथ अभी फिलहाल उसकी स्कर्ट के ऊपर चल रहा था और दूसरा हाथ श्रद्धा की नाजुक चूचियों को महसूस करने में व्यस्त था.
श्रद्धा भी आंखें बंद करके इस मादक पल को महसूस करने में डूब गई थी.
उसके चेहरे पर आते मादक भाव बता रहे थे कि उसकी कमसिन जवानी को यह खेल बहुत पसंद आ रहा था.
बस में भीड़ होने की वजह से कोई उनकी हरकतें देख नहीं पा रहा था.
लेकिन मैं बगल में था, तो मेरे लिए सब देखना आसान था.
तभी नीरज ने अपना एक जूता उतार कर अपना पैर श्रद्धा की चिकनी पिंडलियों पर छू दिया.
अचानक श्रद्धा को जैसे करंट-सा लगा; उसके शरीर में कंपन हो गई, उसके होंठ थरथराने लगे.
अनजाने में ही उसका हाथ नीरज के हाथ पर आ गया.
वह उसे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन नीरज उसे तड़पाने में मज़ा ले रहा था.
श्रद्धा कातर भाव से नीरज को देखने लगी, जैसे कह रही हो कि बस अब और नहीं, वरना मैं खुद को काबू में नहीं रख पाऊंगी!
नीरज की हरकतें उस कमसिन कली के जिस्म पर बढ़ती जा रही थीं.
अब उसका हाथ श्रद्धा की चूची से सरक कर उसके पेट पर आ चुका था, जहां से वह उसके टॉप के अन्दर हाथ डालने का प्रयास कर रहा था.
शायद इस बीच उन दोनों ने एक दूसरे के नाम भी जान लिए थे.
नीरज का दूसरा हाथ श्रद्धा की जांघों पर कोहराम मचा रहा था, साथ ही नीरज का पैर श्रद्धा की पिंडलियों पर अपना कमाल दिखा रहा था.
श्रद्धा के चेहरे पर काम की रेखाएं उभर आई थीं.
उसका चेहरा सफेद से गुलाबी हो चुका था, होंठ थरथरा रहे थे और उसकी आंखों में वासना के लाल डोरे स्पष्ट दिख रहे थे.
नीरज लगातार अपनी हदें पार कर रहा था.
उसका हाथ जांघों से उठकर श्रद्धा की स्कर्ट के नीचे उसके घुटनों तक पहुंच चुका था.
श्रद्धा के नंगे, कच्चे जिस्म पर एक मर्द के हाथों का अहसास उसकी कामवासना को जगा रहा था.
नीरज का हाथ अब धीरे-धीरे स्कर्ट को उसकी जांघों तक ले आया था.
‘श्रद्धा, तुम्हारी त्वचा कितनी मुलायम है!’ नीरज ने धीमी आवाज़ में कहा.
हालांकि दोनों बस में थे लेकिन भीड़ अधिक होने और रोडवेज की बस में सीटें छोटी होने की वजह से किसी के देखने की गुंजाइश कम थी.
फिर भी, मेरी गिद्ध-सी दृष्टि इस युगल की लीलाओं का आनन्द ले रही थी.
वे अपनी मस्ती में मस्त थे और मेरी नज़रों से पूरी तरह अनजान.
जैसे ही नीरज के हाथ ने श्रद्धा की नंगी जांघों को छुआ, अचानक श्रद्धा का हाथ नीरज की जांघों पर उसके नागराज के पास आ गया.
इतनी देर में यह पहली बार था, जब श्रद्धा ने इस तरह से नीरज को छुआ था.
वह अपने हाथों का दबाव नीरज के पैर पर बढ़ा रही थी.
‘नीरज, ये क्या कर रहे हो!’ श्रद्धा ने कांपती आवाज़ में कहा.
पर उसकी आंखें कुछ और ही कह रही थीं.
अचानक श्रद्धा ने एक गहरी सांस लेते हुए आंखें बंद कर लीं. उसका शरीर बुरी तरह कांप रहा था और हल्के झटके महसूस हो रहे थे.
शायद वह कमसिन कली अपनी जवानी का रस बहा चुकी थी.
बस में लगने वाले झटकों की वजह से श्रद्धा के शरीर की यह कंपन किसी ने ज्यादा महसूस नहीं की लेकिन नीरज और श्रद्धा को पता था कि यह सब क्या और कैसे था.
अचानक नीरज ने अपना हाथ श्रद्धा की स्कर्ट से बाहर निकाला और उसकी आंखों में देखते हुए अपनी उंगलियों को मुँह में डालकर चाट लिया.
शायद उसे उस कमसिन जवान का स्वाद मिल चुका था.
यह देखकर श्रद्धा शर्म से लाल हो गई और उसने मुँह फेर लिया.
‘नीरज, तुम्हें शर्म नहीं आती!’ उसने धीरे से कहा.
तभी बस एक शहर में दाखिल हुई.
कंडक्टर ने आवाज़ दी- अगले स्टॉप पर उतरने वाले तैयार हो जाओ!
श्रद्धा ने खुद को ठीक किया और अपनी मां को जगाया.
शायद यही शहर उनका ठिकाना था.
बस के रुकते ही दोनों मां-बेटी उतर गईं.
मेरी नज़र अचानक नीरज की सीट पर गई.
वह अपने मोबाइल में कुछ कर रहा था. मैंने थोड़ा गौर किया तो देखा कि वह किसी का नंबर सेव कर रहा था. थोड़ा और उचक कर देखने पर पता चला कि वह नंबर श्रद्धा का ही था.
मेरा दिमाग घूम गया. मेरी नज़रें हर वक्त इन पर थीं, फिर भी यह सब कब हुआ, पता ही नहीं चला.
अभी लखनऊ पहुंचने में कुछ वक्त बाकी था.
मैंने अपने फोन में गाने लगाए और निश्चिंत भाव से श्रद्धा के बारे में सोचते हुए बैठ गया.
जानता हूँ कि इस बार कहानी में कोई समागम का भाग नहीं है लेकिन सफर के
दौरान कभी-कभी कुछ ऐसा कामुक देखने को मिल जाता है कि लिखने पर विवश होना
पड़ता है.
आशा है मेरे मित्रों को मेरी यह कोशिश, यह बस सेक्स स्टोरी पसंद आएगी.
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