मेरी कहानी बड़ी अजीब है। आज से 4 साल पहले की बात है मेरी शादी हुई, शादी के बाद मेरे पति की पारिवारिक आर्थिक हालत खराब चलने लगी।
उस वक्त मेरे पति का काम-धन्धा नहीं चल रहा था। मैं एक नई-नवेली दुल्हन थी, पर पति को परेशान देखती तो मुझे दु:ख होता।
मैं पूछती तो वे टाल जाते, मुझसे कहते- सब ठीक हो जाएगा.. तुम चिंता मत करो !
पर उनकी परेशानी बढ़ती ही जा रही थी, रात देर से आना, मेरी चुदाई कभी करते, कभी नहीं..! मैं चुदाने के लिए बेकरार रहती।
एक दिन मैं रात में जिद कर के पूछने लगी, तो बोले- मुझे घाटा हो गया है !
तो मैं बोली- सब ठीक हो जाएगा !
तो वो बोले- कुछ ठीक नहीं होगा… मेरे पास पूंजी नहीं है..!
मैं बोली- गहने बेच दो..!
तो बोले- नहीं.. कुछ उपाय करूँगा… तुम चिंता मत करो..!
मैं बोली- चिंता क्यूँ न करूँ.. नई-नवेली दुल्हन हूँ.. आप मुझे छोड़ कर गायब रहते हो, मुझे आपकी बाँहों का सहारा चाहिए…. मैं रातभर आपके साथ रहना चाहती हूँ..!
तो बोले- सब ठीक हो जाएगा..!
वो मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे थे, तो मैं गुस्से से बोली- मेरी जवानी को बर्बाद मत करो… मुझे सुख चाहिए…!
तो उस समय तो वे मुझे प्यार करके सो गए पर उनके दिमाग में कुछ कीड़ा कुलबुलाने लगा।
कुछ दिन बाद वे बोले- चलो, आगरा चलना है… तुम पैकिंग कर लो…!
तो मैंने सोची कि शादी के बाद तो परेशान थे, शायद मेरा और अपना दिल बहलाने के लिए आगरा मुझे भी ले चल रहे होंगे।
मुझे लगा मेरे गुस्से की वजह से तो नहीं ऐसा कह रहे हैं…!
तो मैं बोली- तुम परेशान हो.. आगरा जाओगे, पैसा खर्च होगा… रहने दो… मैं यहीं खुश हूँ..!
तो वो बोले- नहीं.. बस आगरा पहुँचना है… सब इंतज़ाम हो जाएगा..!
मैं बोली- कैसे…! आगरा में कोई जादू होगा..!
तो बोले- ऐसा ही कुछ समझो…!
उनकी बात मेरी समझ में नहीं आई।
फिर मैं तैयार हो गई।
इतनी जल्दी प्रोग्राम बना था कि वगैर ट्रेन के रिजर्वेशन ही आगरा जाना पड़ा।
स्टेशन के रास्ते में बोले- आगरा में मैं एक दोस्त सुनील के बुलाने पर जा रहा हूँ… उसने बोला है कि भाभी को लेकर आगरा आ जाओ… पैसा मैं कमवा दूँगा…!
मैं बोली- मेरे जाने से क्यों… तुम भी जाते तो भी पैदा हो जाता…!
तो बोले- दोस्त बोला है… भाभी को जरूर लाना है…!
इतने में रेलव स्टेशन आ गया। प्लेटफार्म पर भीड़ थी। वाराणसी के प्लेटफार्म नम्बर 9 से मरुधर एक्सप्रेस से जाना था। पति टिकट लेकर आए, हम लोग ट्रेन में बैठ गए।
देखते ही देखते ट्रेन में भीड़ हो गई। एक लड़का जो मेरे पास बैठा था, वो मुझे लगातार घूर रहा था, मुझे उसका घूरना अच्छा लग रहा था।
ट्रेन में भीड़ बढ़ती जा रही थी, मैं तो सेक्स के मामले मे बहुत तेज हूँ। मैं निगाह बचा कर मुस्कुरा कर उसको मूक निगाहों से आमंत्रित कर रही थी। मेरी इस अदा से वो मेरे चूतड़ों को बगल से छू रहा था।
मुझे मज़ा आने लगा।
मेरे पति ने कहा- तुम ऊपर बैठ जाओ..!
उन्होंने मुझे ऊपर वाली बर्थ पर भेज दिया।
तभी ऊपर एक आदमी मेरे पति से बोला- तुम भी ऊपर आ जाओ..! मैं नीचे आ जाता हूँ।
तो मेरे पति बोले- नहीं.. ठीक है, तब तक जो मेरे बगल मे लड़का नीचे था।
वो बोला- भाई साहब आप आ जाओ… मैं ऊपर आ जाता हूँ।
वो लड़का ऊपर आ गया। मैंने एक चादर बिछा ली और आराम से बैठी थी। रात के 9 बज चुके थे। एकाएक उस लड़के ने मेरी चूत को सहला दिया।
मैं फुसफुसाई- कोई देख लेगा..
तो बोला- कोई नहीं देखेगा !
इतना कहते ही वो भी समझ गया कि मैं राज़ी हूँ। वैसे भी मैं कई दिन से चुदी नहीं थी।
वो धीमे से एक उंगली मेरे चूत में डाल कर आगे-पीछे करने लगा और मैं गर्म होती जा रही थी। फिर वो एक रुमाल की आड़ देकर लण्ड निकाल कर दिखाया, तो मैं मस्त हो गई। उसका ‘छानू’ बहुत मोटा था।
मैंने सब की निगाह बचा कर एक बार पकड़ कर छोड़ दिया पर अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
वो फुसफुसाया- चुदोगी..!
मैं बोली- यहाँ कहाँ..!
तो बोला- चलो बाथरूम..!
मैं बोली- बाथरूम नहीं.. कोई देख लेगा ऐसे ही ठीक है..!
मैंने अपने ऊपर कंट्रोल किया, फिर मज़ा लेती रही। ट्रेन तेज रफ्तार से चली जा रही थी। उसने मेरी चूत को पानी-पानी कर दिया।
मैं उसके लण्ड को मुठिया रही थी। तभी उसके लण्ड ने पानी फेंक दिया, वो शान्त हो गया।
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मैं भी ठीक से बैठ गई। वो लड़का लखनऊ में उतर गया, मैं देखती रह गई… उससे ना चुदाने का मलाल था।
खैर हम आगरा स्टेशन पर उतरे, पति से बोली- अब कहाँ चलना है?
तो बोले- फोन लगाता हूँ..!
पति ने फोन लगा कर बात की, उस आदमी ने एक पता बताया कि यहाँ आ जाओ।
पति ने फोन काट दिया, तो मैं बोली- यह कैसा दोस्त है, जो बुला कर लेने नहीं आया… और मैं आप के सभी दोस्तों को जानती हूँ। आगरा में आप के इस दोस्त को मैंने पहले कभी नहीं देखा है।
तो पति बोले- यह नेट के थ्रू मिला है…
फिर मुझे कुछ शक हुआ, मैं भी पढ़ी-लिखी हूँ, एमए (इंग्लिश) हूँ।
मैं बोली- तो वो मुझे कैसे जानता है..!
वे बोले- तुम्हारे चाहने से ही अब सब ठीक होगा..!
मैं बोली- मेरे चाहने से कैसे..!
तो बोले- सब तुम्हारे हाथ में है..!
यह कह कर मेरे पति रोने लगे।
मैं बोली- मैं आप की पत्नी हूँ.. मुझसे जो बन पड़ेगा मैं करूँगी..!
तो बहुत पूछने पर बोले- वो आदमी, जिसने मुझे बुलाया है, वह ‘फ्रेंडशिप-क्लब’ चलाता है, वो मुझसे बोला है कि एक महीने में तुमको बहुत पैसा पैदा करवा देगा, वो बोला था कि आप अपनी वाइफ को ले कर आओ.. बस तुम्हारी वाइफ को फ्रेंडशिप करनी होगी। कुछ लोगों के साथ कुछ पल अकेले रहना पड़ेगा और कुछ नहीं..!
फिर मैं खुल कर गुस्से से बोली- और तुम तैयार हो गए…! जानते हो क्या होगा..! फ्रेंडशिप की आड़ में मेरी चुदाई होगी… पता है?
पति नीचे सर कर के बोले- हाँ.. पता है…!
इतना कहते मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मैं ज़्यादा गुस्सा करने लगी।
वह रोने लगे मुझे मनाने लगे और बोले- इसके सिवा कोई चारा नहीं..!
तो मैं बोली- तुम बर्दाश्त कर लोगे?
वे बोले- बस कुछ दिनों की ही बात है… मान जाओ…!
मैं कुछ देर चुप रही, फिर सोचने लगी कि जब इसको बुरा नहीं लग रहा… तो मुझे क्या…! फिर पैसे की ज़रूरत भी पूरी हो जाएगी और ट्रेन की बात याद आई, उस लड़के के साथ भी तो ग़लत कर रही थी।
सब सोच कर मैंने कहा- चलो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..!
फिर हम लोग उसके बताए पते पर पहुँचे, वो पहले मेरे पति से मिला, फिर मुझसे बोला- मैडम थोड़ा अन्दर चलो… कुछ बात बतानी है। मैंने पति की तरफ देखा, पति ने जाने का इशारा किया, मैं उसके साथ अन्दर रूम में चली गई।
उसने पूछा- तुमको सब पता है ना..!
मैंने सर हिला दिया- हाँ..!
फिर वह मेरे मम्मों को छूते हुए बोला- 34 के हैं न… मस्त हैं !
मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया।
बोला- खड़ी हो ज़ा…
वो मेरी चूत में उंगली डाल कर सहलाने लगा, मैं गरम हो गई, चूत से पानी आने लगा।
वो बोला- मस्त चूत है तेरी… खूब चुदेगी..!
फिर हाथ बाहर निकाल लिया और पति को आवाज़ देकर अन्दर बुलाया और उससे बोला- एक ग्राहक आने वाला है, अपनी बीवी को समझा दो, नखरे न करे..!
पति ने हामी भर दी।
वो फिर मेरे पति से बोला- तुमको मेरे साथ चलना होगा, ग्राहक जब मीटिंग करके चला जाएगा तो हम लोग आ जाएँगे।
मुझे डर लगा, मैं बोली- आप लोग बाहर ही रहो.. कहीं और मत जाओ.. मुझे डर लग रहा है।
वह बोला- डरो नहीं.. वो बहुत बड़ा आदमी है बहुत प्यार से तेरी चूत मारेगा…!
फिर पति से बोला- तुम एक महीना रूकोगे तो एक लाख रुपया दूँगा। रोज इसको 4-5 ग्राहकों से चुदाना होगा।
वो साला मेरे पति के सामने खुल कर बोल रहा था।
फिर उसने मेरी तरफ मुँह कर के मुझसे बोला- चुद लेगी न… रोज 4-5 लोगों से?
मैं कुछ ना बोली। फिर वह मोबाइल निकाल कर किसी से बात करने लगा- सेठ, मेरे फ्लैट पर आ जाओ… मेरे पास वाराणसी एक मस्त माल आया है, आपका दिल खुश हो जाएगा !
उधर से सेठ बोला- आधा घंटे में आता हूँ।
बात कर फोन रख कर बोला- तू नहा-धोकर फ्रेश हो जा..!
कह कर बाहर गया, पति भी उसके साथ दूसरे कमरे में चले गए। मैं अच्छे से नहा धोकर फ्रेश होने लगी और पहली बार कपड़े उतार अपने नंगे बदन को देखने लगी, मैंने अपनी चूत सहला दी, चूत पर हल्के-हल्के रोयें थे। मैंने सोचा कि आज चूत को चिकनी कर दूँ… आज दिल खोल कर चुदूँगी.. जब पति को कोई फ़र्क नहीं, तो मैं क्यूँ चिंता करूँ…!
फिर मैंने चूत के बाल साफ कर दिए, मेरी चूत लौड़ा लेने के लिए खिल उठी। फिर मैं फ्रेश हो ली। तब तक शायद कोई आया था, क्यूँ कि बाहर बात होने की आवाज़ आ रही थी। फिर मैं जल्दी से बाहर आकर तैयार हुई।
तभी पति अन्दर आए, बोले- तुम मुझसे नाराज़ मत होना..!
मैं बनावटी क्रोध से बोली- कोई पत्नी से यह सब करवाता है..!
‘प्लीज़ साहस रखो… मैं हूँ ना…!” फिर चुटीले अंदाज में बोले- क्या मस्त तैयार हुई हो… क्या तुम भी चुदाना चाहती हो..!’
मैं फिर थोड़ी बनावटी गुस्से से बोली- बिल्कुल नहीं.. बस तुम्हारी खातिर कर रही हूँ… जाओ अब मैं कुछ नहीं करूँगी।
फिर पति मिमयाने लगे- अरे तुम मेरी जान हो… मज़ाक किया यार… सॉरी !
मैं बोली- चलो, बात मत बनाओ..!
हमारी बात हो ही रही थी कि तब तक सुनील अन्दर आ गया।
हमारी बात हो ही रही थी कि तब तक सुनील अन्दर आ गया, अन्दर आते ही मेरे पति से बोला- यार बड़ी देर कर दी?
फिर मुझसे बोला- तू तैयार हो गई?
मैंने ‘हाँ’ में सिर हिलाया।
फिर वो बोला- वाह…. खूब मस्त लग रही हो..!
और मेरे पास आया और पति से बोला- आकाश थोड़ा उधर घूम जाओ… मुझे चैक करना पड़ेगा ताकि सेठ नाराज़ ना हो जाए।
मेरे पति घूम गए, सुनील ने तुरंत मुझे बाँहों में ले कर चुम्बन करने लगा और एक हाथ मेरी पैन्टी में डाल कर चूत पर रखा और चौंक कर बोला- वाह… नाइस एंड स्मूद चूत… आज सेठ तो गया काम से…!
मैं तनिक शरमाई तो सुनील मुझसे बोला- तू सेठ को खुश कर देना..!
मैं बोली- ठीक है..!
फिर सुनील ने हाथ निकाल मुझे छोड़ दिया और बोला- आकाश, सेठ को अन्दर ले कर आओ..!
कुछ ही देर में सेठ अन्दर आ गया।
सेठ मुझे देखते ही बोला- वाह… क्या ‘पटाका-आइटम’ है..!
सुनील बोला- बस सेठ जी, आपकी सेवा करने के लिए आई है।
फिर सुनील ने मेरा परिचय कराया और बोला- तुम लोग बात करो… हम लोग आते हैं… वैसे भी हम लोगों का यहाँ क्या काम… क्यूँ आकाश?
पति भी मरता क्या ना करता… उसने मुंडी ‘हाँ’ में हिला दी।
सुनील बोला- नेहा, सेठ का ख्याल रखना… हम लोगों को कुछ काम है, अभी करके आते हैं..!
मैं भी बोली- आप लोग बेफिक्र हो कर जाओ और मुझे एक बार सेठ जी की सेवा का मौका तो दीजिए, फिर बाद में सेठजी से पूछ लेना कि सेवा मे कोई त्रुटि तो नहीं हुई और अगर सेठ जी को कुछ कमी लगे तो नाचीज़ का सर कलम कर देना !
मैंने भी पहली बार खुल कर मज़ाक कर दिया।
सुनील बोला- चलो आकाश भाई.. अब हम लोग इधर से चलते हैं।
यह कह कर दोनों चले गए।
फिर सेठ ने उठ कर दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर बैठ गया कुछ इधर-उधर की बातें करते-करते मुझे सहलाने लगा और मुझे चुम्बन करते-करते बेड पर लेट गया।
मैं भी उसका साथ देने लगी, पर सेठ जैसे टूट पड़ना चाहता था, जैसे मुझे खा जाएगा।
मैं बोली- थोड़ा प्यार से करो सेठ..!
बोला- तेरे जैसे माल को पाकर सब्र नहीं होता रानी…!
मैं उस समय कुरती-जींस पहने हुई थी। सेठ ने कुरती उतार फेंकी, जींस भी निकाल दिया।
मैं केवल ब्रा-पैन्टी में रह गई थी। लाल ब्रा-पैन्टी में मेरे हुस्न को देखा कर सेठ बोला- तू तो सेक्स की देवी है… आज मैं अपने लौड़े से चूत पेल कर फाड़ दूँगा…!
कहते हुए ब्रा से मेरी मम्मों को निकाल कर बारी-बारी से चूसने लगा और मुझे चूमते हुए नाभि तक आया और पैन्टी के ऊपर से चूत को चूमा तो मेरी चूत रोने लगी और मैं सेठ का सर पकड़ कर चूत पर दबाने लगी।
फिर सेठ ने धीमे-धीमे चूमते-चाटते पैन्टी को मेरे पैरों से निकाल दिया और सीधे मेरी चूत पर मुँह रख दिया।
मैं एकदम से कांप गई।
सेठ चूत चाटने लगा, एक हाथ से चूची मसकने लगा।
सेठ की उमर 55 के आस-पास की थी, पर गजब का प्यार कर रहा था।
उसने मेरी चूत में जीभ पेल दी, चूसते-चाटते मेरी जाँघों को चूमते, चूत को चाटते मुझे पागल कर दिया।
मुझे लगा कि कुछ देर और चाटता रहा तो मैं झड़ जाऊँगी, मेरी सिसकारी फूट रही थीं।
सेठ मंजा हुआ खिलाड़ी था, उसने भांप लिया कि मैं एकदम से गर्म हो गई
हूँ, उसने चूमना बंद कर दिया और खड़ा हो कर अपने कपड़े उतारने लगा।
जब उसने जांघिया उतारा, तो मैं देख कर पागल हो गई।
क्या मर्द था…!
उसका लौड़ा करीब 8 इंच लम्बा और मोटा 4 इंच का था, देखने में पूरा गदहे के लण्ड जैसा था।
मैं पहले डरी, फिर सोचने लगी कि आज किस्मत मेहरबान है तो फिर क्या डरना…!
सेठ लण्ड को मेरे मुँह के पास लाकर बोला- चूस…!
मैंने कभी भी पति को छोड़ कर किसी और का लंड नहीं चूसा था, मैं बोली- नहीं सेठ मैं नहीं चूसूँगी..!
तो सेठ बोला- नखरे मत कर… चूस न..!
सेठ जबरदस्ती मेरे मुँह में लौड़ा डालने लगा। मैं ना-नुकुर करती रही, पर वो नहीं माना। उसने लण्ड ठूँस दिया।
मेरी सांस रुक गई, मेरा मुँह पूरा भर गया था, दर्द के मारे आँसू आ गए, पर सेठ ने मजबूर कर के लौड़ा चुसाया और बोला- साली लौड़ा चूस… तुझे खुश कर दूँगा… बस तू मुझे खुश कर…!
इतना बोल कर वह अपने हाथ से एक सोने की अंगूठी मेरे हाथ में देकर बोला- ले तू मेरे को पसन्द आ गई है, ले रख ले… पर उन लोगों से कुछ मत कहना।
अंगूठी पाते ही मेरा मन उछल पड़ा और मैं सेठ की हर बात को मानने और खुश करने के लिए लौड़ा चाटने लगी।
सेठ भी खुश होकर बोला- चाट कुतिया… खा जा मेरे लौड़े को… कुतिया साली.. तेरी चूत भी पनिया गई है… साली लौड़ा खाने को… रो रही है…!
मैं मजे से उसका लण्ड चाटने लगी।
फिर सेठ बोला- चल अब तुझे चोदूँगा।
उसने लौड़ा मुँह से निकाल कर मुझे बेड के किनारे कर दिया। मेरे पैर नीचे कर के सारा शरीर ऊपर कर दिया और मेरे पैर उठा कर चूत चाटने लगा। मैं सोचने लगी कि ये तो फिर से चूत चाट रहा है पता नहीं जीभ से ही चोद कर छोड़ देगा..!
पर वो मेरी सोच को समझ गया और बोला- तू चिंता मत कर… मुझे चूत का पानी पीकर चुदाई करने में मज़ा आता है…!
फिर सेठ ने मेरी चिकनी और पनियाई चूत पर लौड़ा लगाया, चूत खूब रसीली थी सो जरा से धक्के में ही उसका सुपारा ‘फक्क’ की आवाज़ के साथ चूत की दरार में फंस गया।
मुझे दर्द होने लगा, चूत पनियाई तो थी, पर लण्ड चूत के हिसाब से अधिक मोटा था, अब सेठ लौड़ा अन्दर पेलने लगा। मैं छटपटाने लगी, पर सेठ ने पूरा लौड़ा चूत में बेदर्दी से पेल दिया, मैं दर्द से चिल्लाने लगी तो सेठ को मजा आने लगा कि उसको मस्त चूत मिली और वो मेरे दर्द को घटाने के लिए मेरी छातियों को चूसने लगा। तो कुछ राहत मिली।
आज तक तो पति का 5 इंच लंबा 2 इंच मोटा लौड़ा ही खाया था, पर आज मेरी चूत दुगुना मोटा लौड़ा से खा रही थी।
कुछ ही पलों बाद मुझे भी मज़ा आने लगा।
सेठ लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा, मेरे मुँह से सिसकारियाँ आने लगीं तो सेठ समझ गया कि अब मुझे अच्छा लग रहा है।
फिर सेठ ज़ोर-ज़ोर से हुमच कर चोदने लगा, पैर ऊपर उठा होने के कारण मेरे पेड़ू में दर्द हो रहा था।
मैं सेठ से बोली- मेरे पैर नीचे कर दो..!
फिर सेठ पैर नीचे कर कस-कस कर मेरी चूत को चोद कर निहाल कर दिया।
फिर चूत से लौड़ा निकाल कर बोला- जान एक बार अपने लौड़े को चाट ले…. फिर चूत चोदूँगा।
मैं अंगूठी के लालच में लौड़ा चाटने लगी।
लण्ड में चूत का पानी लगा था, मैंने सब चाट कर साफ कर दिया।
सेठ ने मुझे घोड़ी बना कर पीछे से चूत में लण्ड ठोक कर चोदने लगा। मैं एकदम से पानी-पानी हो कर सीत्कारें ले लेकर चिल्लाने लगी- चोद राजा… मेरी चूत को मेरे राजा… आज से चूत तुम्हारे नाम कर दी.. चोद साले मेरी चूत…!
सेठ ने मेरी बात सुन कर मस्त होकर चोदने की रफ्तार बढ़ा दी और बोलने लगा- ले साली… रंडी खा… मेरा लौड़ा… अपनी चूत में.. बड़ी मस्त है रे तेरी चूत… तुझे तो चोद कर अपनी रखैल बनाऊँगा..!
फिर सेठ लेट कर आगे से चूत में लण्ड डाल कर चोदने लगा। मैं भी हर धक्के पर सिसिया कर जबाब देती- हाँ… राजा तेरी रखैल बनूँगी… इसी लौड़े से चूत चुदवाऊँगी… मेरे राजा आ..स..सन्न..हस्सीए..!
मैं झड़ने लगी, “मैं गई आह…हसीए… आसहसीस…. मैं गई… राजा.. झड़ गई… !
कस कर सेठ से चिपक कर झड़ने लगी, ऐसा लगा कि मैं बरसों की प्यासी थी, मेरा पानी निकलने के बाद भी सेठ मुझे चोदे जा रहा था।
अब मुझे चूत में जलन होने लगी थी, मैं सेठ से बोली पर सेठ कहाँ मानने वाला था, सेठ तो बस चोदने में लगा था।
तभी सुनील का फोन आ गया, सेठ झुँझला कर बोला- साला मूड खराब कर दिया.. कहते हुए फोन उठाया, बोला- क्या है बे…!
सुनील बोला- सेठ खुश हुए..!
मानो सेठ के जले पर नमक छिड़क दिया, यह बात सुन कर सेठ झुंझला कर बोला- अबे साले… लण्ड तो अभी इसकी चूत में है.. फोन रखो… मैं तुझे बाद में कॉल करूँगा।
फिर सेठ बोला- रानी थोड़ा लौड़ा चाट और चूत से लौड़ा बाहर कर के चटाया।
बोला- अब तेरा पिछवाड़ा मारूँगा..!
मैं डर गई, पर सेठ ने एक न सुनी… ढेर सारा थूक लगा कर लौड़ा पिछवाड़े के छेद पर लगा कर एक ही झटके में लौड़ा डालना चाहा, पर सुपारा जाते ही मुझे बहुत दर्द हुआ, मैं छटपटाने लगी।
शायद सेठ को पता था दर्द होगा, तभी सेठ अपनी बाँहों में मुझे जकड़ लिया था। मैं चिल्लाती रही, रोती रही, पर सेठ ने पूरा लण्ड डाल कर ही माना और मेरी गाण्ड मारता रहा।
उसे ज़रा भी दया नहीं आई, वो मेरी गाण्ड की जड़ तक हुमच-हुमच के ठोकर मारता रहा फिर मेरी गाण्ड में झड़ने लगा।
‘लो जान गया मैं…!’ और सेठ का पानी से गाण्ड भर गई।
कुछ देर वो मेरे ऊपर ही पड़ा रहा, फिर उसने अपना ‘हलब्बी-छानू’ निकाल लिया, उसका लौड़ा देख कर मैं डर गई।
मैं उठी, मुझसे चला नहीं जा रहा था बाथरूम में जब पेशाब करने बैठी, तो गाण्ड से खून और सेठ का वीर्य फर्श पर फैल गया।
किसी तरह धोकर बाहर आई, तो सेठ सुनील को फोन पर बोला- आ जाओ नेहा जान ने मुझे खुश कर दिया है भाई…!
कह कर उसने फोन रख दिया और मुझसे बोला- नेहा मैं तुमसे बहुत खुश हूँ… लो यह 2000 रूपए…!
फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर माँगा और अपना दिया।
तब तक सुनील व आकाश आ गए थे।
यह है मेरी पहली चुदाई की कहानी।
मेरे पति खाना लेकर आ गए फिर हम दोनों ने खाना खा सोने के लिए बिस्तर पर गए तो मेरे पति ने पूछा- क्यों.. बड़ी चुप हो नेहा..?
तो मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली- बीवी को किसी और को देकर चले गए इतना भी ना सोचा कि वह जोर-जबरदस्ती करता तो मैं क्या करती, मुझे डर लग रहा था।
पति बोले- यार डरने की कोई बात नहीं है, हम तो थे ना और सुनील भी तो मेरे साथ ही था।
ये सब बात करते-करते हम दोनों सो गए।
सुबह सुनील कब आया.. पता ही नहीं चला, सुनील के जगाने पर ही नींद खुली।
फिर मैं फ्रेश होने बाथरूम में चली गई।
मैं बाथरूम से निकली तो सुनील बोला- आकाश तुम फ्रेश हो लो भाई.. मैं आप लोगों के लिए चाय लाता हूँ।
सुनील के चाय लेकर आते ही आकाश यानि मेरा पति भी फ्रेश हो चुका था।
सुनील चाय लेकर भी आ गए फिर हम तीनों ने साथ बैठ कर चाय पी।
सुनील बोला- करीब एक घंटे में मेरे एक मित्र आने वाले हैं, नेहा तुम तैयार हो जाओ।
यह बोलकर सुनील चला गया, फिर मैंने तैयार हो कर जीन्स-टॉप पहन लिया।
सुनील के कहे अनुसार करीब एक घंटे में एक आदमी के साथ सुनील आ गया।
हम लोगों से परिचय करवाते हुए सुनील बोले- यह मेरे खास मेहमान राज शर्मा हैं और राज यह आकाश है और यह नेहा है।
मैं बोली- प्यार से रानी।
सभी हँस दिए।
सुनील बोले- नेहा.. राज भाई का थोड़ा मूड फ्रेश करो… यह तुमको देखने के लिए बेताब थे।
मैं बोली- राज जी.. आपका स्वागत है।
तभी सुनील बोले- आप लोग एन्जॉय करो मैं और आकाश चलते हैं।
उन लोगों के जाने के बाद दरवाजा अन्दर से बंद करके मैं राज के पास आ गई।
राज जी बोले- नेहा तुम्हारी चर्चा जब से सुनी है.. तभी से तुमको पाने की चाहत थी.. आज तुम इन चार घंटों के लिए मेरी रानी बन जाओ।
मैं राज से बोली- जो हुकुम मेरे आका।
राज हँस दिए और उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा। मैं कटी पतंग की तरह राज की गोद में जा गिरी।
राज मेरी तरफ एकटक देखने लगे और मैंने कातिल अदा से कहा- कभी आपने लौंडिया नहीं देखी।
वो मुस्कुराने लगे और बोले- बहुत देखी हैं लेकिन आपके जैसी मस्त परी नहीं देखी.. जिसको भी आपका ये रसीला जिस्म मिला होगा वो मर्द भी कितना खुशनसीब होगा।
मैं भी चुटकी लेते हुए बोली- चलिए आज आपको भी मैं नसीब वाला बना देती हूँ।
मैंने देखा कि उनका पजामा तना हुआ था और वो एकटक मेरी फूली हुई चूचियों
को निहार रहे थे। मेरी चूत की प्यास भी तेज होने लगी और मेरे मम्मे मसलवाने
के लिए मचलने लगे।
मैंने जानबूझ कर एक भरपूर अंगड़ाई ली और उनके बिस्तर से उठने का नाटक करने लगी।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया।
वो बिस्तर पर लेटे हुए थे और मैं जानबूझ कर उनके ऊपर गिर पड़ी।
मेरे बड़े-बड़े मम्मे उनकी मजबूत चौड़ी छाती में दब गए और उन्होंने मुझे ऊपर से जकड़ लिया।
अपने तप्त होंठों को मेरे नाजुक होंठों पर कसकर रसपान करने लगे।
मैं उनकी मजबूत बाँहों में कसमसाते हुए बोली- मैं आपकी बीवी नहीं हूँ।
तो वो मेरा टॉप उतारते हुए बोले- बन जाओ न.. कुछ समय के लिए।
मैं बोली- बीवी बनूँगी तो मजा नहीं आएगा।
मैं उनके ऊपर अपना सारा बोझ डाले हुए थी, उनका लंड मेरी दोनों जाँघों के बीच गड़ रहा था।
मैं अपनी दोनों चूचियों को उनके सीने पे रगड़ने लगी, मु्झ पर भी चुदाई की खुमारी छाने लगी थी और मेरी दोनों चूचियाँ कठोर होने लगीं।
मैंने कहा- आज मुझे जी भर करके चोदो, मेरी चूत बहुत दिनों से लंड का दीदार करने के लिए तड़प रही है.. इसकी तड़प शान्त कर दो प्लीज।
राज ने मेरे चूचुकों को अपनी चुटकी में भर कर मसल दिया।
मैंने सिसकारी लेते हुए पूछा- क्या आप की बीवी अच्छे से नहीं चुदती?
तो बोले- एक ही चूत में पेलते-पेलते बोर हो गया हूँ और वैसे भी आपकी तुलना में तो वो जीरो है।
मुझ पर नशा छा रहा था और मैं अपनी फूली हुई बड़ी-बड़ी छातियों को उनके छाती पर रगड़ने लगी।
मैंने कहा- आज आप मुझे इतना चोदो कि मुझे आपकी चुदाई हमेशा याद रहे।
तो वो बोले- आपके इस गदराए जिस्म को मैं भी कहाँ भूल पाऊँगा.. आपको कौन मर्द नहीं चोदना चाहेगा.. आपको चोदकर तो मैं निहाल हो जाऊँगा।
उन्होंने अपनी हाथों का दबाव और बढ़ा दिया और मुझे अपने ऊपर खींच लिया।
अब हम दोनों ही अपने आपे में नहीं थे। उन्होंने मेरी ब्रा को भी खोल
दिया और फिर मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे।
मेरे मम्मों को मसलते-मसलते कहने लगे- रानी, आज तो मैं इन्हें पूरी तरह चबा जाऊँगा।
वो मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर उसका दूध पीने लगे और मेरी मक्खनी चूचियों में अपने दांत गड़ाने लगे।
उन्होंने मेरी जीन्स निकाल दी और अब मेरे शरीर पर केवल एक पैन्टी थी।
मैंने भी उनके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और उनका अंडरवियर भी उतार कर उनके काले फ़नफ़नाते लंड को आजाद कर दिया।
बाहर आते ही उनका मोटा लंड तन कर खड़ा हो गया और उसे मैं अपने दोनों हाथों से पकड़ कर सहलाने लगी।
उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी।
करीब दो मिनट तक सहलाने के बाद मैंने उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
उनका लंड बहुत बड़ा था और जितने लौड़ों से मैं अभी तक चुदवा चुकी हूँ उन सबसे शायद अब तक का सबसे बड़ा लौड़ा था।
मैंने कहा- इतने बड़े लंड को मेरी मुलायम सी चूत कैसे झेलेगी.. पता नहीं दीदी की चूत का क्या हाल हुआ होगा।
तो उन्होंने कहा- जरा सब्र करो रानी, एक बार चुदवाने के बाद आपको कोइ दूसरा लंड पसन्द नहीं आएगा।
काफी देर तक लंड को चूसने के बाद मैंने अपने चूचियों को उनके मुँह के हवाले कर दिया और वो बेकरारी से उन्हें चूसने लगे और हौले-हौले कट्टू करने लगे और उँगलियों को मेरी पैन्टी के अन्दर डालकर ऊपर-नीचे करने लगे।
मैं अब बहुत गरम हो चुकी थी मैंने उनसे जल्दी चोदने के लिए कहा।
मैं उनके नीचे आ गई और वो मेरे ऊपर चढ़ गए और फिर मेरी पैंटी उतार फेंकी।
मैंने उनके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर टिकाया, उन्होंने एक झटका
दिया और मेरी चिकनी बुर में उन्होंने अपने बड़े से लण्ड का सुपारा पेल
दिया और झटके पे झटके देने लगे।
मुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ क्योंकि मेरी चूत चुदवाते-चुदवाते काफी फ़ैल चुकी थी।
उन्होंने मेरी दोनों जाँघों को उठाकर चोदना शुरु कर दिया। उनका काला मोटा
लंड मेरी बुर में घुसने-निकलने लगा और मुझे अपूर्व आनन्द की प्राप्ति होने
लगी।
सचमुच चुदवाने में कितना आनन्द आता है, मैं बता नहीं सकती और अगर आपको मोटा-ताजा, लम्बा और कठोर लण्ड मिल जाए तो वो आनन्द दुगुना हो जाता है।
उनके लण्ड में ये सारी खूबियां थीं।
मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं आप सबको बता नहीं सकती।
मैं उनसे कहने लगी- राज आपके इस मोटे काले लंड का सचमुच कोई जबाब नहीं।
उन्होंने मुझे नए-नए आसनों में चोदना शुरु किया और मैं आनन्द के मारे ‘उई-उई’ करने लगी।
एक साथ बुर और चूची का मजा लेने के लिए वो मेरे ऊपर छा गए, उनका लण्ड मेरी बुर में धंसा हुआ था, वो एक हाथ मेरे एक मम्मे को नोंच रहे थे और मेरे दूसरे मम्मे को मुँह लेकर से चूसे जा रहे थे, साथ ही अपने चूतड़ को उछाल-उछाल कर बुर को पेले भी जा रहे थे।
मैंने कहा- वाह राज जी.. आपको तो लड़की चोदने का पूरा अनुभव है… मैं तो आपकी चुदाई की कायल हो गई।
तो उन्होंने कहा- मैं भी आपकी बुर और इन मुलायम रस भरी चूचियों का दीवाना हो चुका हूँ… अब बिना आपको चोदे बिना कैसे रहूँगा।
‘मेरी चूत चोदने आते रहिएगा…’ मैं हँसने लगी।
वो भी हँसने लगे।
वो फिर से मेरी चुदाई पर ध्यान देने लगे।
मैंने कहा- जोर-जोर से चोदिए न राज जी.. मेरी बुर बहुत प्यासी है इसकी आग ऐसे शान्त नहीं होगी।
उन्होंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी और जोर-जोर से लौड़े को अन्दर-बाहर करने के
साथ ही अपने लंड को मेरी प्यासी चूत में धकेलने लगे और मैं चिल्लाने लगी-
हाँ.. ऐसे ही.. आह..आह उई.. माँ.. मर गई.. आह चोदते रहिए.. बिल्कुल ऐसे ही
आह.. राज जी आह..।
अपने दोनों हाथों से मैं अपनी चूचियाँ मसलने लगी और वो मेरी चुदाई करते रहे।
मुझे चुदवाने में इतना मजा पहले कभी नहीं आया था।
उन्होंने मुझे जी भरके चोदा और अन्त में अपना सारा वीर्य मेरी चूत में डाल दिया।
कहने लगे- शायद आज मेरा लंड इतनी मस्त बुर को चोद कर पहली बार संतुष्ट हुआ है।
यह कहते राज मेरे ऊपर से उठ गए फिर मैं उठकर बाथरूम गई और जब वहाँ से निकली तो राज जी नंगे ही बैठे थे।
मैं बोली- क्या इरादा है जनाब का?
तो बोले- यार तुम साथ दो.. तो एक बार फिर महफिल जमाएँ!
मैं बोली- आपकी इच्छा है।
बोले- यार तू चीज ही ऐसी है कि मन मानता ही नहीं.. यह लो 1000 का नोट रख लो.. मेरी तरफ से अलग से…
मैं उनकी बात मान कर बोली- आज तो आप भी मुझे खुश कर दिया है, इस लिए मैं ये पैसे नहीं लूँगी।
फिर राज ने जबरन मुझे रूपए दे दिए और अगले दिन आने के लिए कहा फिर वे बाथरूम में चले गए।
तब तक मैं कपड़े पहन तैयार हो गई।
राज बाथरूम से निकले और तैयार हुए फिर उन्होंने सुनील को फ़ोन लगा कर बोला- यार कहाँ चले गए.. आ जाओ।
फ़िर राज मुझसे बात करने लगे।
सुनील जी आ गए और बोले- नेहा जी आज शाम सात बजे आपको मेरे साथ यहीं पास के एक होटल में चलना है, वहाँ आपकी मुलाकात होटल मालिक से करानी है। अगर उन्हें तुम पसंद आ गईं तो आपकी आज की मीटिंग होटल मालिक के साथ होगी।
मैं बोली- ओके।
फिर सुनील बोले- अभी तो 12:30 बज रहे हैं। तब तक तुम लोग चाहो तो आगरा घूम लो।
मेरे पति आकाश बोले- हाँ…यह ठीक है हम घूम आते हैं।
सुनील बोले- पर वक्त का ध्यान रखना, शाम को जाना है और ये लो 15000 रुपए.. कुछ खरीददारी भी कर लेना, अब मैं चलता हूँ..
6:30 पर आऊँगा, नेहा तुम तैयार रहना।
मैं बोली- ठीक है।
सुनील चले गए, हम लोग भी थोड़ा घूमने निकल गए।
घूम कर हम लोग आए तो सोचा कि कुछ देर आराम कर लें।
फिर ठीक वक्त पर सुनील आ गए।
शाम सात बजे हम होटल के लिए रवाना हुए।
आज मैंने जीन्स और कुर्ती पहनी थी, मैं बहुत सुंदर लग रही थी।
होटल पहुँचते मैं सीधे होटल के अन्दर चली गई और सुनील जी के साथ कुर्सी पर बैठ गई।
थोड़ी देर जिन साहब से मीटिंग करनी थी, वो (होटल मलिक) अन्दर आ गए और सुनील से हाथ मिला कर बैठ गए।
तब सुनील जी ने मेरा परिचय दिया और वे बातें करने लगा।
कुछ देर बात करने के बाद सुनील जी बोले- नेहा जी.. आप साहब जी को पसंद आ गई हो, तुम्हारा क्या कहना है?
मैं बोली- जो आप लोगों की सोच है, वही मेरी भी है।
सुनील जी ने बोला- सर जी बात पक्की, अब आप इजाजत दो, तो हम चलें।
होटल मालिक बोले- खाना वगैरह खा के जाओ.. क्यों नेहा?
मैं बोली- जो आप ठीक समझो।
‘क्या आप नहीं खाओगी?’
मैं बोली- क्यों नहीं..
सभी हँस दिए।
फिर हम सब खाना खाने बैठे।
होटल मालिक भी हमारे साथ ही खाना खाने लगा।
खाना खाने के बाद होटल मालिक ने एक वेटर को बुलाया और बोला- मैडम आज हमारी मेहमान हैं, इनको कमरा नंबर 201 में ले जाओ और इनको जो भी जरूरत हो, तुरंत हाजिर कर देना।
वेटर बोला- जी मालिक।
फिर सर बोले- नेहा, तुम चलो आराम करो।
मैं वेटर के पीछे-पीछे चल दी।
वेटर घूम कर देखे जा रहा था, मैं भी कुछ शरारत करने के मूड में आ गई।
मैं वेटर को देख मुस्कुरा देती, तभी मेरा कमरा आ गया।
मैं कमरे में पहुँची, अरे बाप रे.. यह कमरा नहीं यह तो जन्नत था।
मै बिस्तर पर जा बैठी, वेटर बोला- मैम, कुछ चाहिए?
मैं बोली- हाँ.. पर वो चीज तुम नहीं तुम्हारे सर जी देंगे।
वेटर सकपका गया, मैं मजा लेटी हुई बोली- जाओ जरूरत होगी तो बुला लूँगी।
उसके जाने के बाद में गुसलखाने में गई अपनी पैन्टी सरका कर मूतने बैठी, बड़ी जोर की पेशाब लगी थी, स्शी..स्शी.. की आवाज करते मेरी चूत से धार निकल पड़ी।
मैं आपको बता दूँ कि मैं पतली वाली चाइनीज पैन्टी पहनती हूँ जो पीछे से सिर्फ एक डोरी वाली होती है जो कि मेरी गाण्ड की दरार में घुस जाती है और आगे से सिर्फ दो इंच चौड़ी पट्टी मेरी चूत को ढकने में नाकाम सी होती है।
खैर.. मैं मूत कर बाहर आई और शीशे में खुद को देखने लगी। मैं आज बहुत सुंदर लग रही थी।
तभी होटल के कमरे का फोन बजा फोन उठाया, ‘हैलो’ कहने से पहले ही उधर से आवाज आई- मैं होटल मालिक जयदीप हूँ.. आधे घंटे में आ रहा हूँ.. जान जब से तुम्हें देखा है, रह नहीं पा रहा हूँ तुम्हारी चूत चोदने को बेताब हूँ।
मैं बोली- मैं भी चुदने को तैयार हूँ.. आ जाओ।
बोले- कुछ लोग हैं पहले इनकी छुट्टी कर दूँ फिर आता हूँ मेरी जान.. और सुनो नाईटी लाई हो? या एक ले आऊँ।
मैं बोली- है.. आप चिन्ता ना करो।
तो वो बोले- पहन लो.. बाकी कपड़े उतार दो.. मगर पैन्टी-ब्रा नहीं.. वो मैं उतारूँगा।
उसने फोन रख दिया। मैंने कपड़े निकाल कर नाईटी पहन ली और बिस्तर पर जा लेटी और होटल मालिक के विषय में सोचते हुए पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर चूत सहलाने लगी।
मैं यहाँ जयदीप कहना चाहूँगी, जयदीप को जब से देखा है, मैं भी उससे चुदना चाहती थी, जय का जिस्म मुझे उत्तेजित कर रहा था।
मैं सोच रही थी कि कैसे वो मुझे अपनी बांहों में लेकर, मेरी चूत अपने हाथों से सहलाएगा।
यही सोचते-सोचते मेरी चूत पनिया गई।
तभी कमरे की घन्टी बजी, मेरा ध्यान टूटा, मैं झट से जाकर दरवाजा खोला, सामने होटल मालिक जयदीप था।
मैं बोली- आईए आप ही का इन्तजार कर रही थी..
अन्दर आकर दरवाजा बन्द करके उसने मुझे पकड़ लिया और मेरे गुलाबी होंठों को चूमने लगा।
वो मुझे अपनी बांहों में भर कर चूम रहे थे और अपने एक हाथ को मेरी नाईटी
के अन्दर डाल कर, मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे स्तनों को दबाने लगा।
फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया और मुझे बिस्तर पर लुढ़का दिया।
फिर एकदम से वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे होंठों को चूसने लगा और बोलने लगा- जब से सुनील ने तुम्हारे बारे में बोला, तभी से तुम्हें देखना और पाना चाहता था। आज देखते ही तुम मुझे पसन्द आ गईं।
फिर मुझे चूमने लगा और बोला- नाईटी में तुम गजब की लग रही हो, अब जरा अन्दर के भी दीदार करा दो मेरी जान!
मैं बोली- हुजूर.. आज मैं आपकी हूँ.. जो चाहो करो.. आपके स्वागत में मेरा हुस्न हाजिर है।
जय ने चूमते हुए मेरे नाईटी को निकाल दिया।
अब मैं उसके सामने सिर्फ़ ब्रा-पैन्टी में थी, जयदीप मुझे आँखें फाड़े मुझे देखते हुए बोला- तुम ऐसे में कयामत लग रही हो.. मेरा बस चले तो तुमको सदा ऐसे ही रखूँ।
फिर उसने मेरी पैन्टी के ऊपर से चूम लिया, बोला- मैं चुदाई से पहले पैन्टी-ब्रा को निकालता नहीं.. फाड़ देता हूँ, तुम बुरा तो नहीं मानोगी?
मैं बोली- जैसा आपको अच्छा लगा.. करो।
इतना बोलते ही जय ने ब्रा को जोर से पकड़ कर एक झटके में फाड़ दिया और मेरी चूचियाँ छलक कर बाहर आ गईं।
जय भींच कर मेरी चूची चूसने लगा।
फिर पैन्टी पकड़ा और जोर से खींच कर फाड़ दिया, जिससे मेरी गुलाबी चूत उसके सामने आ गई।
अब मैं उसके सामने पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी, मेरे बड़े-बड़े स्तन उसके सामने सख्त आम की तरह तने हुए थरथरा रहे थे।
मेरे स्तनों को देख कर वो पागल हो गया, एक मम्मा मुँह में लेकर चूसने लगा, मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार होने लगा। मैं अपनी आँखें बँद करके पड़ी हुई थी।
करीब 15-20 मिनट तक वो ऐसे ही मेरे बदन को चूमता रहा, फ़िर वो उठा और अपने कपड़े निकालने लगा।
जब उसने अपना लौड़ा निकाला तो मैं देखती रह गई। वो करीब 8 इंच बड़ा और 4 इंच मोटा था।
मुझसे रहा नहीं गया, मैं लपकी और उसका मोटा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी।
वो हैरान रह गया.. शायद जय यह नहीं सोच रहा था।
वो बोला- साली तू तो रन्डी निकली।
मैं भी अब बेशर्म हो गई थी और उसका लन्ड चूसने लगी।
वो बोला- साली कुतिया.. आज तो तेरे दोनों छेदों को मैं फ़ाड़ दूँगा।
मैं बोली- हाँ.. मेरे राजा.. आज तो मुझे अपनी रन्डी बना दे.. फ़ाड़ डाल मेरे छेदों को.. आह्ह..
उसने अपना लन्ड मेरे मुँह में से निकाला और बोला- बोल साली पहले रन्डी किधर डालूँ?
मैं बोली- आज तक मैंने अपनी गाण्ड एक ही बार मरवाई है, आज तू इसको दुबारा चोद दे।
आप से उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी कहानी अच्छी लग रही होगी।
यह मेरे जीवन की सच्ची कहानी है और अभी भी मेरे जीवन की धारा बह रही है, मैं आपसे बार-बार मुखातिब होती रहूँगी।
उसने अपना लन्ड मेरे मुँह में से निकाला और बोला- बोल साली पहले रन्डी किधर डालूँ?
मैं बोली- आज तक मैंने अपनी गाण्ड एक ही बार मरवाई है, आज तू इसको दुबारा चोद दे।
वो बोला- चल मेरी रानी.. कुतिया बन जा।
तो मैं कुतिया की तरह उसके सामने अपनी गाण्ड खोल कर बैठ गई।
उसने ढेर सारा थूक लिया और मेरी गाण्ड के छेद पर लगा दिया, फिर उसने अपना सुपारा मेरी गाण्ड के छेद पर टिकाया और एक जोर का धक्का मारा।
‘आईईइ..’ मैं जोर से चिल्लाई।
एक ही झटके में उसने अपना पूरा लन्ड मेरी गाण्ड के अन्दर डाल दिया।
मैं रोने लगी,’छोड़ दो मुझे.. आह्ह्ह्ह प्लीज़ उईईईइ.. मैं मर गई।’
वो मेरे चूतड़ों को धीरे-धीरे सहला रहा था।
फिर उसने अपना लन्ड बाहर निकाला और फिर एक और जोर का धक्का दे दिया।
मैं फिर चिल्लाई लेकिन इस बार वो नहीं रुका और धक्के पे धक्का मारने लगा।
मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं रो रही थी, लेकिन वो कमीना नहीं रुका और धक्के पे धक्का लगाता ही गया।
करीब 10 मिनट के बाद मेरा दर्द दूर हुआ।
मेरी गाण्ड में से ‘फ़चक… फ़चक…’ की आवाज आ रही थी।
आख़िरकार दुबारा मुझे मोटे लण्ड से गाण्ड मरवाने का सपना पूरा हुआ था।
अब मेरा दर्द पूरा गायब हो गया था और मुझे बड़ा मजा आने लगा था।
अब मैं मस्ती में चिल्ला रही थी- आह्ह्ह्ह्ह.. मेरे राजा.. फाड़ दे मेरी गाण्ड को.. आहहहह और जोर से आहहहह… मुझे अपनी रन्डी की तरह चोद..उईईईईईई…
तभी उसने अपना लन्ड मेरी गाण्ड में से निकाला और मेरे नीचे आ गया।
मैं समझ गई और उसके ऊपर चढ़ गई, मैंने उसका लन्ड पकड़ लिया और अपनी गाण्ड के छेद पे सैट कर लिया और धक्का दिया।
इस बार उसका लौड़ा बड़े आराम से मेरी गाण्ड के अन्दर चला गया।
अब मैं उसके लन्ड के ऊपर मेरी गाण्ड पटक-पटक कर चुदने लगी। वो भी नीचे से धक्के मार रहा था।
‘फ़चक… फ़चक’ पूरे कमरे में यही आवाज आ रही थी।
मुझे उसकी रन्डी बन कर बहुत मजा आ रहा था।
वो मेरी गाण्ड फाड़ता रहा।
फिर जय बोला- रानी मैं झड़ने वाला हूँ.. कहाँ निकालूँ?
मैंने कहा- मेरी गाण्ड में ही छोड़ दो।
तो वो जोर-जोर से धक्के मारते-मारते मेरी गाण्ड के अन्दर ही झड़ गया।
फिर मैं उठी और जय के लण्ड को रूमाल से साफ किया फिर अपनी चूत पोंछी। जय के वीर्य से रूमाल पूरा भीग गया था।
वो बोला- तुम थोड़ा आराम कर लो। उसके बाद चूत मारूँगा.. चुदोगी न।
मैं बोली- ऐसे लवड़े से कौन नहीं चुदना चाहेगा.. मेरे जयदीप आज में तेरी रन्डी हूँ.. तू जैसे चाहे मुझे चोद ले।
मेरी ब्रा-पैन्टी तो पहले ही फट चुकी थी। मै वैसे ही नाईटी पहन कर जय के बगल में जा लेटी।
जय भी कपड़े पहन चुका था और उसने फोन करके काफी के लिए बोला।
फिर हम दोनों बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर घन्टी बजी।
जय ने दरवाजा खोला, वेटर काफी ले आया था।
काफी और सिगरेट रख बोला- सर कुछ और? जय बोला- नहीं.. जाओ।
वो चला गया।
जय सोफे पर बैठ कर सिगरेट पीने लगा और मुझे भी सोफे पर बुला लिया।
मैं जय से सट कर बैठ काफी पीने लगी। कुछ देर बाद जय बोला- चुदोगी.. तैयार हो?
मै बोली- बिल्कुल.. आप का साथ देने को तैयार हूँ।
मुझे बाँहों में लेकर बोला- बहुत हसीन दिख रही हो रानी।
मैंने उसके गले में बाहें डालते हुए उसके होंठों पर होंठ रखते हुए जयदीप के होंठ पीने लगी।
तभी जय ने मेरी नाईटी खोल दी और मेरे मम्मे दबाने लगा।
मैं ‘सी..सी’ कर रही थी।
वो मेरा निप्पल चूसने लगा और मैं गर्म होने लगी।
फिर जय ने नाईटी उतार फेंकी, मैं जयदीप के सामने नंगी होकर बिस्तर पर लहराने लगी।
‘हाय मेरी जान नेहा.. बहुत मस्त माल हो.. जी चाहता है.. कच्चा खा जाऊँ’ मेरी चूची चूसते और चाटते हुए नीचे की तरफ जाने लगा।
मेरा बदन वासना से जलने लगा। ऐसे कामुक अंदाज़ कभी नहीं अपनाए थे, किसी ने मेरे बदन पर ऐसे खेल नहीं खेला था।
जब जय ने मेरी नाभि चाटी, मैं कूल्हे उठाने लगी।
उसने मेरी चूत के पास अपनी जीभ घुमाई और बोला- वाह.. कितनी प्यारी फ़ुद्दी है.. कितनी चिकनी की हुई है।
वो मेरी फ़ुद्दी चाटने लगा तो मुझे लगा कि मैं वैसे ही झड़ जाऊँगी, पर मैंने उसको नहीं रोका।
वो मुझे उल्टा लिटा कर मेरे पीठ कमर और चूतड़ों को चाटने लगा।
मैं वासना से सिसकार उठी, ऐसे मर्द के साथ पहली बार थी जो औरत को इतना सुख देता हो।
अब वो अपना मोटा लंड मेरे होंठों पर फिरा कर बोला- चल अब लौड़ा चाट।
मैं भी पूरी रंडी बन कर दिखाना चाहती थी।
उसकी आँखों में देखते हुए मैं नीचे से उसके लौड़े को जुबान से चाटते हुए सुपारे तक गई, वहाँ से जीभ घुमा कर लौड़ा चूसा।
‘हाय मेरी रानी.. मजे से चाट-चूम.. जो तेरा दिल आए कर.. इसके साथ।’
उसका आठ इंची लौड़ा सलामी दे देकर मेरे अरमान जगा रहा था। मैं खूब खेल रही थी।
फ़िर बोला- चल एक साथ करते हैं।
69 में आकर मैं उसके लौड़े को चूसने लगी, वो मेरी फ़ुद्दी को चाटने लगा।
उंगली से फैला कर दाने को रगड़ते हुए बोला- वैसे काफी ठुकवाई है तुमने।
‘आपको किसने कह दिया जनाब?’
‘तेरी फ़ुद्दी बोल रही है..हम भी बहुत बड़े शिकारी हैं नेहा रानी।’
मैं कुछ बोलने के बजाय मुस्कुरा दी, कुछ देर एक-दूजे के अंगों को चूमते रहे।
फिर जय ने मेरी टांगें उठा दीं और अपने मोटे लौड़े को धीरे-धीरे से चूत में घुसेड़ने लगा।
मुझे सच में दर्द हुआ, काफी मोटा था।
‘कैसी लगी फ़ुद्दी? खुली या सही?’
‘नहीं.. नहीं..सही है रानी।’
उसने एकदम से पूरा झटका दिया, मेरी सिसकारी निकल गई- आ आऊ ऊऊऊउ छ्हह्ह्ह।
वो जोर जोर से पेलने लगा, मैं सिसक सिसक कर उसका पूरा साथ दे रही थी।
जयदीप ने मेरी टांगों को हाथों में पकड़ लिया और वार पर वार करने लगा। इससे पूरा लौड़ा घुसता था। कभी मुझे घोड़ी बनाता, कभी टांगें उठा-उठा कर मेरी लेता रहा।
बहुत देर बाद जब उसका निकलने वाला था तो उसने पूछा- कहाँ निकालूँ रानी.. जल्दी बोलो?
मैं बोली- रुको मत.. जो करना है..करो मेरे राजा.. हाय.. जोर-जोर से करो ना..।
उसने अपना पूरा बीज मेरे पेट में बो दिया, मैंने उसका गीला लौड़ा चाट-चाट कर पूरा साफ़ कर डाला।
‘मजा आया..?’
‘हाँ.. बहुत मुझे आज तक किसी ने नहीं ऐसा नहीं चोदा था।’
‘बहुत मस्त माल है तू.. नेहा मुझे बहुत पसंद आई.. तेरे चूतड़ बहुत मस्त हैं।’ मेरी गाण्ड पर थपकी लगाते हुए बोला।
एकदम से दोनों चूतड़ फैला कर गाण्ड देखने लगा, ‘इसमें भी एक बार फिर से करने का मन है।’
‘आपको जो ठीक लगा.. करो, आज मैं सिर्फ आप की हूँ।’
उसने मेरे चूतड़ों को थपकी देते हुए फैलाया, छेद पर थूका और पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया।
उसका लौड़ा फिर से खड़ा था।
उसने जोर से लौड़ा गाण्ड में घुसा दिया और पेलने लगा।
‘हाय फट गई मेरी.. मत करो।’
लेकिन उसने पूरी मर्दानगी मेरी गाण्ड पर उतार दी.. जोर-जोर से गाण्ड मारी और झड़ गया।
पूरी रात जयदीप ने मुझे जम कर चोदा और मेरे बदन का पोर-पोर हिला दिया, मेरा अंग-अंग ढीला कर दिया।
फिर मुझे नींद आ गई।
मुझे पता ही न चला कि कब सुबह के 6:30 बज गए।
सुनील मुझे लेने आया था, तब पता चला। मैं उठी गुसलखाने जाकर फ्रेश हो कर बाहर आई।
सुनील ने पूछा- रात कैसी थी?
मैं क्या कहती.. बस ‘हँस’ दी।
फिर मैं और सुनील होटल से बाहर आए सुनील के साथ बाइक पर बैठ कर चल दी।
रास्ते में सुनील बोला- जयदीप जी बोल रहे थे कि नेहा बहुत मस्त लौंडिया है,
उसकी शादी जरूर हुई है, पर बिल्कुल कोरा माल है.. दिल खुश कर दिया। उसे एक
बार और नीचे लेने की इच्छा है।
मैं बोली- सुनील जी आपने क्या जवाब दिया?
सुनील हँसते हुए बोला- जान.. मैं भी यही बोला कि जब बोलो आपके लौड़े के नीचे ला देंगे, बस आपके एक इशारा चाहिए।
मैं आप लोगों को यहाँ फ़िर से एक बार बताना चाहती हूँ कि मेरी नई-नई
शादी हुई थी, अभी तो ठीक से पति ने चोदा भी नहीं था, मैं कली से फूल भी
नहीं हुई थी.. कि मुझे गैर मर्दों से चुदना पड़ा।
हालांकि इसमें मेरी भी मर्जी थी। मुझे नए-नए लौड़ों से चुदने की बड़ी इच्छा थी।
अब आगे कहानी पर आती हूँ।
सुनील से बातें करते-करते कब कमरे पर पहुँची, मुझे पता ही नहीं चला।
सुनील ने बाइक रोकी, तब पता चला कि हम लोग कमरे पर पहुँच गए।
मैं बाइक से उतर कर सीधे कमरे के अन्दर गई, वहाँ देखा कि आकाश बैठा था।
वो मुझे देख कर बोला- जान.. कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना?
मैं कुछ बोलती इससे पहले सुनील पीछे से बोला- मेरे रहते क्या दिक्कत होती।
तब आकाश बोले- सही बोले.. सुनील भाई आप हो, तो मुझे कोई परवाह नहीं।
सुनील थोड़ा मुस्कुराया।
फिर मेरे पति बोले- सुनील भाई, आज कोई मीटिंग मत रखना, आज मैं चाहता हूँ कि नेहा को कहीं घुमा लाऊँ।
तो सुनील बोले- ठीक है.. वैसे आज मुझे कुछ काम से मथुरा जाना था.. चलो आज आप लोग भी मौज-मस्ती करो, फिर शाम को मुलाकात होगी। मैं जाते वक्त नीचे चाय बोलता जाऊँगा।
सुनील के जाने के बाद हम लोग फ्रेश हुए तभी चाय वाला आया, हम दोनों ने चाय पी और फिर मेरे पति ने मुझसे पूछा- रात कैसी रही?
मैंने अपनी चुदाई की पूरी कहानी अपने पति आकाश को बताई कि रात क्या हुआ और मैं खूब चुदी।
मुझसे इस बातचीत के दौरान मेरे पति मेरे मम्मे दबा रहे थे और एक हाथ से चूत सहला रहे थे।
मेरा तो मन तो था ही नहीं…. क्योंकि पूरी रात की चुदाई से बिल्कुल थकी हुई
थी, मेरी चूत भी सूखी थी, पर पति की इच्छा थी, सो मैं भी साथ दे रही थी।
पति रात की बात सुन इतना गर्म हो गए कि उन्होंने मेरी सूखी बुर में लंड पेल दिया और 10-15 धक्के लगा कर ‘पुल्ल-पुल्ल’ की और झड़ गए।
फिर मैं नहाने चली गई।
जब बाहर आई तो आकाश बोले- लग रहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है.. बुखार सा है।
जब मैंने देखा तो वाकयी बुखार था, मैं बोली- चलो डॉक्टर को दिखा कर दवा ले लो..
डाक्टर के पास जा दवा ली और दवा खा आकाश को आराम करने को बोली।
कुछ देर बाद जब दवाई ने असर किया तो आकाश बोले- अब कुछ ठीक है चलो, कहीं घूमने चलते हैं।
पर मैंने मना कर दिया- नहीं.. फिर कभी चलेंगे.. जब तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे। अभी अच्छा भी नहीं लगेगा कि तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है और मैं इसी वक्त घूमने जाऊँ।
तभी सुनील का फोन आया- आकाश जी मैं निकल रहा था.. सोचा कि एक बार पूछ लूँ.. कोई काम तो नहीं?
पति बोले- यार मुझे बुखार हो गया है और नेहा ने भी इसी कारण घूमने जाने से मना कर दिया है, एक बात कहूँ.. तुमको यदि ठीक लगे तो नेहा को अपने साथ ले जाते.. बेचारी तुम्हारे साथ ही घूम लेती।
सुनील बोला- भाई.. इसमें ठीक लगने की क्या बात.. मैं उधर से ही नेहा को लेते हुए निकल लूँगा।
सुनील के फोन रखने पर पति ने बताया- तुम तैयार हो जाओ.. सुनील आ रहे हैं तुम जाओ घूम आओ।
मैंने मना कर दिया- मैं आपको इस हालत में छोड़ कर नहीं जा सकती।
पर पति के जिद के आगे जाना पड़ा।
कुछ देर में सुनील आए और आकाश से बोले- मैं बाइक छोड़ देता हूँ, हो सकता है कि तुमको कोई जरुरत पड़े.. हम लोग बस से जाएंगे।
मैं और सुनील बस में चढ़े, पर बस में बहुत भीड़ थी, बड़ी मुश्किल से खड़े होने के लिए जगह बन पाई।
सुनील जी बोले- नेहा भीड़ बहुत है, दूसरी बस से चलें।
मैं बोली- अब बस में चढ़ चुके हैं तो इसी से चलो.. क्या पता दूसरी में भी यही हाल हो।
तभी बस चल पड़ी। बस में सुनील मेरे आगे थे, मैं उनके पीछे कुछ दूर थी।
बस चलने के बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे चूतड़ पर हाथ सहला रहा है। मैंने भीड़ के कारण ध्यान नहीं दिया, पर जब मुझे लगा कि कोई सख्त चीज़ मेरी गाण्ड की दरार में चुभ रही है, तो मैंने पीछे हाथ कर देखना चाहा।
तो मेरे पीछे खड़े आदमी के पैंट पर हाथ चला गया और तभी मुझे उसके खड़े लण्ड का अहसास हुआ।
उस आदमी का लंड मोटा था और मैंने उसकी तरफ देख कर शरमा कर झट से अपना
हाथ खींच लिया और उसके मोटे लंड के बारे में सोच कर मुझे एक शरारत सूझने
लगी, मुझ पर वासना हावी होने लगी।
मैं अपने चूतड़ों को उसके लंड पर दबाने लगी। मैं जताना चाहती थी कि मैं बुरा नहीं मानूंगी।
तभी बस का ब्रेक लगा और अच्छा मौका जान कर उस आदमी ने मेरी कुर्ती के ऊपर से मेरी एक छाती को पकड़ लिया और जोर से मसल दिया।
मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई।
सुनील मेरी आह सुनकर पूछने लगे- क्या हुआ.. कोई दिक्कत तो नहीं?
मैंने ‘ना’ में सर हिला दिया, तब तक बस पुनः चल दी।
वो आदमी ने मेरे चूतड़ों को मसलने लगा, मैंने डर कर बस में इधर-उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा, पर भीड़ की वजह से सभी एक दूसरे से सटे हुए थे।
तभी उस आदमी ने मेरे कान में बोला- कोई दिक्कत न हो, तो थोड़ा इधर को आ जा..
मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने मुझे अपने से चिपका लिया, शायद वह समझ गया था कि मैं उसकी हरकतों से सहमत हूँ।
मैं एक लैगी पहने थी, उस आदमी ने मेरी लैगी के अन्दर हाथ डाल कर मेरी
पैन्टी के बगल से चूत को सहलाते हुए एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी।
मैं चिहुंक उठी और मुँह से सिस्कारते हुए नशीली निगाहों से उसकी तरफ देखने लगी।
वो मेरी चूत में ऊँगली से चोदे जा रहा था।
तभी मैंने पीछे हाथ करके उसका लण्ड पकड़ लिया, फिर धीरे से उसकी जिप नीचे खींच दी और अन्दर हाथ डाला।
वो तो अन्दर कुछ नहीं पहने था.. मेरे हाथ का सीधा सामना उसके लौड़े से हुआ।
मैंने उस आदमी को देख कर आँख मार दी।
अब तो वो बिल्कुल समझ गया कि मेरे इरादे क्या हैं। उसके लंड को पकड़ कर मैं आगे-पीछे कर रही थी।
तभी उसने मेरा हाथ लौड़े से हटा दिया और मेरी लैगी को थोड़ा नीचे खींच मेरी चिकनी गाण्ड और चूत पर लौड़े को ऊपर-नीचे घिसने लगा।
बस में इतनी भीड़ थी कि कौन क्या कर रहा है, किसी को पता ही नहीं चल सकता था।
आदमी बस के साथ हिल-हिल कर अपना लंड मेरी चूत से रगड़ने लगा।
पैन्टी की वजह से उसका लंड चूत से ठीक से रगड़ नहीं पा रहा था तो मैंने
थोड़ा सा झुक कर अपनी पैन्टी साइड में कर दी और उसके लंड को अपनी चूत के
दरवाजे पर लगा दिया।
अब उसका लंड मेरी चूत पर टक्कर मार रहा था और उसका लंड मेरी चूत के मुँह में घुसा हुआ मुझे धीरे-धीरे चोद रहा था।
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, मुझे लगा कि मैं उससे कह दूँ- डरो मत.. हचक कर चोदो मुझे.. दिल खोल कर चोद.. भूल जा कि मैं बस में हूँ।
वो एक हाथ से मेरी छाती को कुर्ती के अन्दर से मसक रहा था।
मेरी आँखें मुंद गईं.. मैं भूल गई कि मैं बस में हूँ।
उसने कुछ देर बाद एक-दो तेज झटके मारे और मेरी पैन्टी पर पूरा पानी छोड़ दिया।
मैं तो पहले ही अपना पानी छोड़ चुकी थी और मेरी चूत से पानी धीरे-धीरे रिस रहा था।
मेरी सारी पैन्टी ख़राब हो गई और उसने अपना लंड निकाल कर अपने रुमाल से पौंछ कर अन्दर कर लिया। मैंने बेमन से अपना पजामा और पैन्टी खींच कर सही किया।
तभी सुनील बोले- चलो स्टॉप आ गया..
बस रुकी, मैं और सुनील बस से उतर कर चल दिए।
सुनील बोले- यहाँ से कुछ दूर जाना है एक रिक्शा कर लेते हैं।
तभी सुनील की निगाह मेरे पिछवाड़े पर गई।
सुनील बोले- नेहा जान ये भीग कैसे गई?
मैंने नाटक करते हुए चौंकी- अरे…ये कैसे हुआ… मुझे पता ही नहीं चला?
तभी एक रिक्शा मिला सुनील और मैं उस पर बैठ गए। सुनील रिक्शे वाले को जहाँ जाना था वहाँ की बोले, फिर बगल से मेरी चूत पर हाथ रख कर गीलेपन को छू कर नाक से सूँघ कर बोले- वाह रानी.. काम निपटा लिया.. लग रहा है कि बस में तुम्हारे पीछे वाले ने चोद कर माल छोड़ा है?
मैं क्या कहती, पर सुनील से बोली- साले ने अपना रस तो निकाल लिया और मेरी चूत को प्यासी छोड़ दिया।
सुनील ने मेरी तरफ प्यार से देखा।
तभी सुनील बोले- चलो स्टॉप आ गया..
बस रुकी, मैं और सुनील बस से उतर कर चल दिए।
सुनील बोले- यहाँ से कुछ दूर जाना है एक रिक्शा कर लेते हैं।
तभी सुनील की निगाह मेरे पिछवाड़े पर गई।
सुनील बोले- नेहा जान ये भीग कैसे गई?
मैंने नाटक करते हुए चौंकी- अरे…ये कैसे हुआ… मुझे पता ही नहीं चला?
तभी एक रिक्शा मिला सुनील और मैं उस पर बैठ गए। सुनील रिक्शे वाले को जहाँ जाना था वहाँ की बोले, फिर बगल से मेरी चूत पर हाथ रख कर गीलेपन को छू कर नाक से सूँघ कर बोले- वाह रानी.. काम निपटा लिया.. लग रहा है कि बस में तुम्हारे पीछे वाले ने चोद कर माल छोड़ा है?
मैं क्या कहती, पर सुनील से बोली- साले ने अपना रस तो निकाल लिया और मेरी चूत को प्यासी छोड़ दिया।
सुनील ने मेरी तरफ प्यार से देखा, फिर सुनील बोले- रानी, तुम बिल्कुल गर्म हो गई हो, तुम्हारी चूत की सुगंध बता रही है कि साले ने तुम्हारे साथ गलत किया, चोदना नहीं था तो गर्म करके अपना माल क्यों छोड़ दिया।
मैं भी तपाक से बोली- अभी कौन सी देर हुई है, अभी तो दिन की शुरूआत है और आप भी तो हैं। मेरी चूत की गर्मी शान्त ना हो, यह तो हो ही नहीं सकता।
तभी हम लोग एक ऑफिस के सामने रुके, वह एक रियल स्टेट कम्पनी का ऑफिस था, मैं सुनील के पीछे ऑफिस में दाखिल हुई।
अन्दर पहुँच कर सुनील मुझसे बोले- नेहा तुम यहीं सोफे पर बैठो, मैं अन्दर सर जी से मिल कर आता हूँ।
मैं बोली- ओके सुनील..
वो वहीं बगल के एक केबिन में चले गए, मैं वहीं बैठी रही।
कुछ देर बाद एक लड़का आया और मुझसे बोला- मेम.. आप को सर जी ने अन्दर बुलाया है।
मैं उठी और उसी केबिन की तरफ चल दी और केबिन के दरवाजे पर दस्तक दी, अन्दर से ‘कम इन’ की आवाज आई और मैंने दरवाजे खोला।
मैं देखती रह गई, सामने एक बहुत ही जवान और आकर्षक युवक बैठा था।
वो एकदम गोरा स्मार्ट था, उसे देख मेरी गरम चूत में पानी आ गया और मैं भूल गई कि वो भी मुझे देख रहा है।
तभी वो आदमी बोला- आइए नेहा जी.. बैठिए।
तब मुझे आभास हआ और शर्मिन्दा हो गई।
सुनील बोले- नेहा जी, ये मिस्टर सुरेश सिंह हैं। यह रियल स्टेट कम्पनी का ऑफिस इन्हीं का है।
मैंने नमस्ते की, पर सुरेश जी ने हाथ आगे बढ़ा दिया।
मैंने भी हाथ मिलाया पर मेरी नियत तो खराब थी और चूत गर्म थी, इसलिए हाथ मिलाते ही मेरी चूत में गुदगुदी होने लगी, मुझे लगा कि मुझे बाँहों में लेकर, मेरी बस की छेड़-छाड़ की गर्मी को उतार दे।
यह सोचते हुए मैं सुनील के बगल के सोफे पर जा बैठी, सामने सुरेश जी थे और बीच में एक ऑफिस टेबल थी।
तभी कॉफ़ी आ गई, कॉफ़ी पीते हुए सुनील अपनी जमीन वगैरह के विषय में बात कर रहे थे और मैं उन दोनों की बात सुन रही थी, पर मेरा ध्यान सुरेश पर ज्यादा था, फिर कुछ नोटरी कागज पर सुनील और सुरेश ने दस्तखत किए और एक फाइल में रख दिए।
फिर सुरेश ने सुनील से कहा- नेहा जी बोर हो रही होगीं, क्यों ना आप नेहा जी को लेकर अपनी साइट भी देख आओ, क्यों नेहा जी..!
सुरेश जी ऐसा बोल कर बाथरूम चले गए।
तभी मैं सुनील से बोली- क्या आप को बाहर जाना है?
सुनील ने कहा- जा कर देख लूँ, प्लाट कैसा है। तुम यहीं ऑफिस में रहो, मैं सुरेश से तुम्हारे विषय में बोला है कि आप वाराणसी से आई हो, यहाँ मेरे पास कुछ काम से आई हो, बाकी और कुछ नहीं कहा है, पर सुरेश सुन्दरता का दीवाना है, तुम यहाँ रह कर सुन्दरता का दीदार करा दोगी तो बाकी काम सुरेश पूरा कर देगा। तुम्हारी चूत की आग और पैसे की चाहत दोनों पूरी हो जाएगी और हाँ.. चूत चुदवा ही लेना.. सुबह की तरह अधूरी न रह जाना।
मैं बोली- देखती हूँ.. मैं कितना सुरेश जी के लौड़े को गर्म कर पाती हूँ।
तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई तो हम चुप हो गए।
सुरेश बोले- क्यों भाई.. आप लोग जा रहे हो?
सुनील बोले- बॉस.. नेहा तो नहीं जा रही है, बोल रही है कि अगर कोई दिक्कत ना हो तो आपे ऑफिस में रह जाऊँ?
सुरेश जी बोले- नेहा आप कहीं भी रह सकती हो.. कोई दिक्कत नहीं है..
मैं मुस्कुरा दी।
फिर सुनील चले गए और सुरेश से बात करने लगी।
बात करते-करते सुरेश जी मेज के नीचे से अपने पैर से मेरे पैरों को हल्का-हल्का रह-रह कर सहला देते और मैं गुदगुदा उठती।
फिर मैं भी मेज पर झुक कर बैठ गई, ताकि मेरे रस भरे आम दिख सकें, मैं सुरेश को थोड़ा और आकर्षित और उत्तेजित कर सकूँ।
बातों के दौरान सुरेश मेरी सुन्दरता की तारीफ करते हुए कुर्सी से उठ कर मेरे पीछे आ गए, मेरे कन्धों पर हाथ रख सहलाने लगे और मैं सिसियाते हुए बोली- सर जी.. यह क्या कर रहे हो.. प्लीज ऐसा मत करो प्लीज..
सुरेश बोले- नहीं.. नेहा जी, मना मत करो.. एक बार तुम्हारे सुन्दरता का रस पीना चाहता हूँ.. एक बार पिला दो..
ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लिया और मैं भी मस्ती में झूमती हुई उनके सीने से जा लगी।
फिर वहीं पास पड़े सोफे पर मुझे लेकर बैठ गए और कुर्ती के ऊपर से मेरी चूचियाँ दबाने लगे।
आज सुबह से ही मेरी बुर चुदना चाह रही थी, मैंने भी एक हाथ से उनका लण्ड पकड़ कर दबा दिया।
मेरे इतना करते ही उन्होंने एक झटके में ही मेरी कुर्ती उतार दी और अगले ही पल मेरी ब्रा भी उतार दी।
अब वो मेरी चूची पीने लगे, मैं भी अपने आमों को चुसाते हुए सिसकारने लगी।
वो चूमते हुए नीचे की ओर आते हुए मेरे मम्मों को दबाए जा रहे थे।
मेरी चूत पानी-पानी हो गई।
फिर सुरेश उठ अपने सारे कपड़े उतार फेंके और मेरी लैगीज भी सरका दी और मेरी चूत पर मुँह रख कर बुर चाटने लगे।
मेरी चूत ने पहले से ही पानी छोड़ा हुआ था क्योंकि मैं स्वयं भी तो चुदना चाह रही थी, वो भी पूरी नंगी हो कर, मस्ती से शरीर को उसके हवाले करके जी भर कर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी।
अब हम दोनों कुछ ही पलों में पूरे नंगे हो चुके थे।
मेरा दिल फिर से लण्ड के चूत में घुसने के अहसास से धड़क उठा।
उसने मुझे अपनी बाँहों में कस कर ऊपर उठा लिया और अब मैंने भी शरम छोड़ दी, अपनी दोनों टाँगें उसकी कमर से लपेट लीं।
उसका लण्ड मेरी गाण्ड पर फिर से छूने लगा।
उसने मुझे सोफे पर पटक दिया। मैंने भी उसे झटके से पलट कर नीचे कर दिया और उस चढ़ बैठी और अपनी चूचियाँ उसके मुँह में ठूंस दीं।
‘मेरे सुरेश.. मेरा दूध पी ले जरा… जोर से चूस कर पीना।’
मैंने उसके बालों को जोर से पकड़ लिया और चूचियाँ उसके मुँह में दबाने लगी।
उसका मुँह खुल गया और मेरे कठोर चूचुकों को वो चूसने लगा।
मेरा हाल बुरा होता जा रहा था, चूत बेहाल हो चुकी थी और लण्ड लेने को लपलपा रही थी, पानी की बूंदें चूत से रिसने लग गई थी। लण्ड को निगलने के लिए चूत बिल्कुल तैयार थी।
उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ भींच लिए, मेरी चूत के आस-पास उसका लण्ड तड़पने लगा।
मैं थोड़ा सा नीचे सरक गई और लण्ड को चूत के द्वार पर अड़ा लिया।
अब देर किस बात की बात की… उसके लण्ड ने एक ऊपर की ओर उछाल मारी और मेरी चूत ने उसके लण्ड को लीलते हुए, नीचे लण्ड पर दबा दिया।
उसका मस्त लौड़ा “फ़च” की आवाज के साथ भीतर तक रास्ता बनाता हुआ जड़ तक बैठ गया।
मैंने अपनी चूचियाँ उसके मुँह से निकालीं और अपने होंठ से उसके होंठ दबा लिए।
‘आह्ह्ह्ह ठोक दिया ना.. ईह्ह्ह..’ मेरी चूत में उसके लण्ड का मीठा-मीठा अहसास होने लगा था।
‘आपका जिस्म कितना मस्त है.. चोदने लायक..’ उसके मुँह से ‘चोदना’ शब्द बड़ा प्यारा लगा।
मुझे लगा कि सुरेश मुझसे इसी भाषा में मुझसे बोले, सो मैंने भी जानबूझ कर ऐसी भाषा का प्रयोग करना शुरु कर दिया- तेरा लण्ड भी सॉलिड है।
‘रानी, तेरी चूत भी कितनी प्यारी है।’
मैं उसके लण्ड पर अपनी चूत मारने लगी। लण्ड बहुत ही प्यारी रग़ड़ मार रहा था।
मुझे चूत-घर्षण करते हुए चुदाने में आनन्द आ रहा था।
कुछ देर ऐसे ही चुदने के दौरान सुरेश ने मुझे ऊपर कर लिया।
मैं सीधी बैठ गई और ‘धच’ से उसके लण्ड पर चूत मारी और खुद ही चीख पड़ी।
मैं भूल गई थी कि उसका लण्ड मोटा और अधिक लंबा था, वो तो मेरी बच्चेदानी से जोर से टकरा गया था।
इस दर्द के साथ बहुत ही जोर का आनन्द भी आया।
‘सुरेश उई.. ईईसीओ.. सीसीईईईसीई चुद गई.. तेरे लण्ड से.. राजा बहुत मजा आ रहा है.. तू भी नीचे से मार ना चोद दे राजा मेरी चूत को फ़ाड़ दे आआहह.. सीईई… राजा मैं आज सुबह से ही चुदासी हूँ.. चोदो ओर चोदो मोटे लण्ड से आह्ह… मेरी प्यारी चूत को.. मादरचोद.. इस चूत को चोद डाल तू.. मुझे आज चोद-चोद कर निहाल कर दे…’
मैं गालियाँ बोल-बोल कर अपने मन की भड़ास निकाल रही थी।
मेरे दिल को ऐसा करने से बहुत सुकून आ रहा था।
मैंने कुछ रुक कर फिर से ऊपर से चूत को फिर से उछाला और एक नया और सुहाना मजा लम्बे लण्ड का मिल रहा था।
फिर तो ऊपर से ‘धचा..धच’ लण्ड के ऊपर अपने आप को पटकते चली गई।
सुरेश चोदते हुए बोला- गालियाँ देती हुई बहुत प्यारी लग रही है.. आजा अब मैं तेरी माँ चोद देता हूँ.. भोसड़ी की.. रण्डी कुतिया.. ले चुदवा ले अपनी चूत को.. भोसड़ी में खा मेरा लौड़ा.. चुदवा ले।
मैं भी मस्त हो कर कहने लगी- मेरे प्यारे हरामी मादरचोद.. मेरी भोसड़ी चोद दे… बस अब मुझे नीचे दबा ले और साली चूत की चटनी बना दे।
अब हम दोनों ने पलटी मार ली और वो मेरे ऊपर सवार हो गया।
उसकी कमर, मैंने सोचा भी नहीं था, ऐसी जोर-जोर से चलने लगी कि बस मुझे स्वर्ग का आनन्द आ गया।
मैं तबियत से चुदने लगी।
‘हाय मेरे चोदू.. चोद मुझे.. राजा मेरी फ़ुद्दी को मसल डाल… चूत फ़ाड़ दे मेरी।’
मैं अनाप-शनाप बकते हुए चुद रही और चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी।
‘आह, मेरी रानी तेरी चूत का चोद आज मेरा लौड़ा मस्त हो गया.. रानी.. जी भर के आज चुदवा ले.. जी भर के मेरी कुतिया.. छिनाल.. साली.. रण्डी.. आह्ह्ह्हऽऽ’
उसकी प्यारी सी मीठी गालियाँ मुझे नया आनन्द करा रही थीं।
मेरे शरीर में तरावट आने लगी, सारा जिस्म मीठे जोश से भर गया, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं कभी ना झड़ूँ.. बस जिन्दगी भर चुदाती ही रहूँ.. यह मजा किसी और चुदाई से अलग था, कुछ जवानी का जोश और मीठी-मीठी गालियों की मीठी चुभन थी।
मैं भी आज जी खोल कर सारी गन्दी से गन्दी गाली सुनते हुए चुद रही थी।
अब मेरा जिस्म ऐंठने लगा और आनन्द को मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकी… मेरी चूत जोर से झड़ने लगी।
मेरी चूत में लहरें उठने लगीं, तभी सुरेश ने मेरे ऊपर अपने आपको बिछा लिया और लण्ड को चूत में भीतर तक दबा लिया।
उसके कड़कते लण्ड ने मेरी बच्चेदानी को रगड़ मारा और चूत में उसका वीर्य छूट पड़ा।
वो अपने लण्ड को बार-बार वीर्य निकालने के लिए दबाने लगा।
वीर्य से मेरी चूत लबालब भर चुकी थी।
वो निढाल हो कर एक तरफ़ लुढ़क पड़ा।
मैंने भी मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली थीं।
सारा सुख और आनन्द और दिन भर की तड़प, चूत की प्यास शान्त हो गई थी।
मेरे शरीर में तरावट आने लगी, सारा जिस्म मीठे जोश से भर गया, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं कभी ना झड़ूँ.. बस जिन्दगी भर चुदाती ही रहूँ.. यह मजा किसी और चुदाई से अलग था, कुछ जवानी का जोश और मीठी-मीठी गालियों की मीठी चुभन थी।
मैं भी आज जी खोल कर सारी गन्दी से गन्दी गाली सुनते हुए चुद रही थी।
अब मेरा जिस्म ऐंठने लगा और आनन्द को मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकी… मेरी चूत जोर से झड़ने लगी।
मेरी चूत में लहरें उठने लगीं, तभी सुरेश ने मेरे ऊपर अपने आपको बिछा लिया और लण्ड को चूत में भीतर तक दबा लिया।
उसके कड़कते लण्ड ने मेरी बच्चेदानी को रगड़ मारा और चूत में उसका वीर्य छूट पड़ा।
वो अपने लण्ड को बार-बार वीर्य निकालने के लिए दबाने लगा।
वीर्य से मेरी चूत लबालब भर चुकी थी।
वो निढाल हो कर एक तरफ़ लुढ़क पड़ा।
मैंने भी मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली थीं।
सारा सुख और आनन्द और दिन भर की तड़प, चूत की प्यास शान्त हो गई थी।
मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेते हुए पड़ी रही.. मेरी चूत से वीर्य निकलते हुए मेरी गाण्ड तक पहुँच रहा था।
मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेते हुए पड़ी रही। चूत से वीर्य निकलते हुए मेरी गाण्ड तक पहुँच रहा था।
मैं तो इतनी थक गई थी कि सोफे पर ही पड़ी रही।
मुझे होश तब आया, जब सुरेश जी ने मुझे हिला कर बोला- नेहा.. क्या हुआ?
मैं बोली- जानू.. इतना मजा आया कि उठने का मन नहीं कर रहा है.. जी कर रहा है ऐसे ही लेटी रहूँ..
पर ऑफिस में थी इसलिए बाथरूम में अपने जिस्म को साफ़ करने के लिए चूतड़ मटकाते हुए चली गई।
जब बाहर आई तो सुरेश ने कहा- नेहा जी.. आज तो आप ने बहुत मजा दिया.. ये लो 5000/- रुपए रख लो।
मैं लेने से मना करने लगी लेकिन सुरेश जी ने जबरदस्ती दे दिए तो मैंने रूपए पर्स में रख लिए।
सुरेश बोले- रानी, मैंने आप को आगरा भेजने का इन्तजाम कर दिया है, आप लोगों को मेरी कार से ड्राइवर छोड़ देगा।
मैंने ‘थैंक्स’ कहा।
तभी चपरासी नाश्ता लेकर आया, मैंने और सुरेश जी ने नाश्ता करके कॉफ़ी पी।
तब तक सुनील जी आ गए, मेरे चेहरे पर मुस्कान देख सुनील सारी बात समझ मुस्कुराने लगे और सुरेश से बात करने लगे कि जमीन ठीक है.. पसंद आ गई।
और बोले- अब आप इजाजत दीजिए.. नहीं तो बहुत लेट हो जायेंगे, वैसे भी 6:35 हो रहा है।
सुरेश बोले- आप लोग मेरी कार से जा रहे हो।
फिर हम लोग एक साथ उठ कर बाहर हाल में आए और ड्राइवर को बुला कर बोले- ये लोग मेरे मेहमान हैं, इनको आगरा छोड़ कर आओ।
मैंने नमस्ते की और कार की पिछली सीट पर बैठ गई, सुनील भी मेरे साथ पीछे ही बैठ गए।
कार आगरा के लिए चल दी।
रास्ते में सुनील मेरी चुदाई के विषय में पूछने लगे।
मैंने सब बात बताई कि कैसे सुरेश ने चोदा और कैसे मैं चुदी।
तभी सुनील ने कहा- रानी तुम्हारी चुदाई सुन कर मेरा भी पानी निकालने का मन करने लगा है। क्या तुम मेरा साथ नहीं दोगी?
मैं बोली- क्यों नहीं.. जो मेरे लिए इतना कर सकता है.. मैं तो घूमने आई थी, पर आपने चुदाई और पैसा दोनों दिला दिया।
इस समय कैसे चुदाई करें? ड्राइवर क्या कहेगा?
सुनील बोले- तुम हाथ और मुँह के सहारे पानी निकाल दो।
मैं बोली- ठीक है.. पर आप आगे ड्राइवर पर निगाह रखना, कहीं वो देख ना ले।
सुनील बोले- ओके..
मैंने सुनील की जांघ को सहलाते हुए पैंट के ऊपर से ही लन्ड को सहलाते हुए जिप को आहिस्ता-आहिस्ता नीचे करते हुए खोल दिया।
अब उनके अंडरवियर में हाथ डाल कर लंड बाहर निकाल कर देखने लगी।
सुनील का लंड बड़ा प्यारा था, एक बार फिर मुझे चुदने का मन करने लगा।
मैंने सुनील के लंड को पकड़ कर ऊपर-नीचे करना शुरू किया।
कुछ समय बाद मैंने अपना सिर नीचे करके उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुँह में लिया। मैंने अपनी जीभ को उसके लंड के शिश्न-मुंड पर घुमा कर उसके पानी का स्वाद लिया।
फिर उसका लंड चूसते हुए, हाथों से लौड़े को मेरा मुठ मारना लगातार चालू था।
सुनील का एक हाथ मेरे पीठ से होते हुए मेरी लैगिंग्स और पैन्टी के अन्दर
हाथ डाल मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ा, तो मैंने धीरे से
अपने पैर थोड़े चौड़े कर लिए ताकि वो मेरी सफाचट, चिकनी चूत पर आराम से
हाथ फिरा सके।
हाथ फिराते-फिराते उस की बीच की उंगली मेरी गीली फुद्दी के बीच की दरार में घुस गई।
वो अपनी उंगली मेरी चूत के बीच में ऊपर-नीचे मेरी चूत के दाने को मसलता हुआ घुमा रहा था और चूत में ऊँगली करवाने से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकल जातीं, पर मैं ड्राइवर की वजह से खुल कर आवाज नहीं कर सकती थी।
उसके मुँह में मेरा एक चूचुक और मेरे हाथ में उसका लंड था।
हम दोनों और कड़क हो गए।
मैं भी उस का लंड चूसते हुए लौड़े को आगे-पीछे करती जा रही थी और एक बार तो मैंने सोची कि चुद ही लूँ मगर कार में यह संभव नहीं था।
मेरी चूत में सुनील की ऊँगली लगातार घूम रही थी और मैं संतुष्टि के गंतव्य की तरफ बढ़ने लगी।
उसकी उंगली अब मेरी चूत में घुस कर चुदाई कर रही थी, मेरी फुद्दी को उसकी उंगली चोद रही थी।
मैं भी उसके लंड को चूस रही थी और एक हाथ से उसके अंडकोष को सहला रही थी।
हम दोनों दबी जुबान से कार में चुदाई का मजा ले रहे थे।
जैसे ही उसको पता चला कि मैं झड़ने के मुकाम पर पहुँचने वाली हूँ, उसने अपनी उंगली से जोर-जोर से मेरी चूत की चुदाई करनी शुरू कर दी।
वो मेरी चूत को अपनी उंगली से इतनी अच्छी तरह से कामुक अंदाज़ में चोद रहा था कि मैं झड़ने वाली थी और मेरी नंगी गांड अपने आप ही हिलने लगी।
मेरे मुँह से जोर से संतुष्टि की आवाज निकली और मैं झड़ गई।
मैंने उसकी उंगली को अपने पैर, गांड और चूत को भींच कर अपनी चूत में ही जकड़ लिया और झड़ने का मज़ा लेने लगी।
मैं झड़ने का मज़ा लेते हुए सुनील के लन्ड का सुपारा गले तक लेकर चाटते हुए लंड को आगे-पीछे किए जा रही थी।
अभी भी सुनील का हाथ मेरी चूत और गाण्ड की दरार में घूम रहे थे और मैं सुनील का लंड तेज-तेज मुठियाते हुए आगे-पीछे किए जा रही थी।
सुनील भी मस्ती की तरफ बढ़ रहा था, तभी सुनील का लौड़ा मेरे मुँह में ढेर हो गया और उसने पानी छोड़ दिया।
सुनील के वीर्य से मेरा मुँह भर गया और मैंने तुरंत माल को गुटकते हुए मुँह हटा कर कहा- यार ये क्या किया.. अब मुँह कैसे धोऊँगी?
पर सुनील आँखें बंद किए झड़ने का मजा ले रहा था.. क्योंकि अभी भी मेरा हाथ सुनील के लौड़े पर चल रहा था।
सुनील ने अपने रुमाल से मेरा मुँह साफ किया और फिर अपना लंड साफ़ किया।
अब हम लोग अपने कपड़े ठीक कर आराम से बैठ गए।
सुनील बोला- थैंक्स नेहा..
मैं बोली- इसमे थैंक्स की क्या बात है.. यह तो मेरा फर्ज था।
हम लोग आगरा के करीब पहुँच गए थे कुछ ही देर में कार एक मकान के सामने रुकी।
मेरे प्यारे दोस्तो, आप लोगों ने मेरी कहानी को पढ़ा और पसंद किया है।जो आप लोगों ने प्यार दिया है, इसके लिए मैं आप सबका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूँ।
आप की नेहा रानी
फिर मिलूँगी.. अगले भाग में तब तक के लिए अलविदा।सुनील के वीर्य से मेरा मुँह भर गया और मैंने तुरंत माल को गुटकते हुए मुँह हटा कर कहा- यार ये क्या किया.. अब मुँह कैसे धोऊँगी?
पर सुनील आँखें बंद किए झड़ने का मजा ले रहा था.. क्योंकि अभी भी मेरा हाथ सुनील के लौड़े पर चल रहा था।
सुनील ने अपने रुमाल से मेरा मुँह साफ किया और फिर अपना लंड साफ़ किया।
अब हम लोग अपने कपड़े ठीक कर आराम से बैठ गए।
सुनील बोला- थैंक्स नेहा..
मैं बोली- इसमे थैंक्स की क्या बात है.. यह तो मेरा फर्ज था।
हम लोग आगरा के करीब पहुँच गए थे कुछ ही देर में कार एक मकान के सामने रुकी।
अब आगे..
मैं और सुनील कार से बाहर निकले और ड्राईवर को बाय किया। फिर मैं सुनील
के पीछे चलते हुए बिल्डिंग में दाखिल होते हुए बोली- यहाँ कोई काम है क्या?
सुनील बोले- वो मैं आपको बताने वाला था.. पर ध्यान से उतर गया था। यहाँ पर
मेरा एक बहुत ही ख़ास दोस्त रहता है.. उसी से आपको मिलाने ले जा रहा हूँ।
यदि आप थकी न हो.. तो आप मिल लेतीं।
मैं बोली- अब तो यहाँ लाकर पूछना तो बेमानी है और आप उससे मिलाने लाए हो या चुदाने?
सुनील बोला- यार नाराज हो गई क्या?
मैं हँस कर बोली- नहीं यार.. मैं तो यूं ही मजाक कर रही थी।
तभी सुनील ने एक कमरे के बाहर लगी घंटी को दबाया।
करीब एक मिनट बाद कमरे का दरवाजा खुला और सामने एक साधारण कदकाठी का एकदम
गोरा मर्द बाहर आया- अरे सुनील, तुमने बताया भी नहीं यार.. कि तुम आ रहे
हो?
सुनील बोला- क्या नवीन भाई.. मुझे अब बता कर आना पड़ेगा क्या..?
नवीन बोला- नहीं यार.. मेरा कहने का यह मकसद नहीं है।
फिर नवीन मेरी तरफ देखने लगा.. तभी सुनील ने मेरा परिचय करवाया।
‘भाई क्या देख रहे हो.. यह नेहा जी हैं क्या इन्हें दरवाजे पर ही खड़ा किए रहोंगे?’
नवीन हड़बड़ा कर मुझे ‘हाय’ करके अन्दर आने को बोला।
हम लोगों ने कमरे में पहुँच कर देखा कि यह एक गेस्टरूम था.. उसमें दो सोफे और एक बेड लगा था।
मैं सोफे पर बैठी और मेरे बगल में सुनील जी बैठकर नवीन जी से बोले- यार
नेहा जी बनारस से आई हुई हैं। मैंने सोचा कि इन्हें आपसे मिलवा दूँ।
नवीन बोला- अच्छा किया.. पर यार थोड़ा मुश्किल है।
मैं यहाँ आपको नवीन के फ्लैट के विषय में बता दूँ कि नवीन का फ्लैट चार कमरे का था। कुल मिलाकर ये बहुत बड़ा फ्लैट था। मैं जहाँ बैठी थी.. वह सामने का पहला कमरा था।
सुनील बोला- क्यों यार.. ऐसी क्या दिक्कत है.. जो तू नेहा जैसी हसीन लड़की को सामने पाकर भी मुश्किल कह रहा है।
नवीन बोला- अब तेरी भाभी है अन्दर.. तो कैसे क्या होगा?
तभी सुनील बोला- यार, भाभी को हम लोगों का आना पता ही नहीं है। नेहा जी को
यहीं रहने दो.. तुम मेरे साथ अन्दर चलो। भाभी मुझे देख कर खुश हो जाएंगी और
मैं उनको बातों में उलझाए रहूँगा, तुम कोई बहाना बनाकर नेहा के पास आकर
आराम से मिलते रहना।
फिर सुनील और नवीन अन्दर चले गए।
करीब दस मिनट बाद नवीन जी वापस आ गए।
मैं नवीन से बोली- अगर आपकी वाइफ यहाँ आ गईं तो?
नवीन मुस्कुराकर बोला- नेहा, देखो आपको और मेरे को पता है कि तुम मेरे पास क्यों आई हो।
मैं ‘हाँ’ बोली।
‘फिर भी मेरा और आपके मिलन में देर हो रही है.. लेकिन अन्दर सुनील और मेरी वाइफ सेक्स शुरू भी कर चुके होंगे।’
मैं बोली- ओ माई गॉड.. क्या सुनील को पता है कि तुम अपनी बीवी की चूत चुदाई के बारे में जानते हो?
नवीन जी बोले- नहीं सुनील और मेरी वाइफ कुछ नहीं जानते.. में उन्हें चुदाई
करते देख चुका हूँ.. बस सुनील को मौका चाहिए था.. जो आज आपकी वजह से मिल
गया।
‘क्या सुनील आपकी वाइफ को बताएगा कि मैं यहाँ आपके साथ हूँ?’
‘नहीं नेहा जी.. वह ऐसा नहीं करेगा.. क्योंकि उसने वाइफ के सामने मुझे आगरा
फ़ोर्ट भेजने की बात की है.. अगर मैं यहाँ हूँ.. वाइफ को पता चलेगा, तो वो
सुनील के साथ कुछ नहीं करेगी और सती सावित्री बनने का ढोंग करके आसमान पर
सर पर उठा लेगी।’
बातों के दौरान ही मुझे नवीन ने बेड पर बैठाकर मेरी कुर्ती और लैगी को
निकाल दिए थे और मैं पैन्टी और ब्रा में बैठी चूची और चूत मसलवा रही थी।
मैंने अपने होंठ नवीन के होंठों पर रख दिए, नवीन मेरे होंठों को चूसने लगे,
नवीन अपने हाथों से मेरी चूचियाँ कस कर मसल रहे थे। हम दोनों करीब दो मिनट
तक इस तरह ही एक-दूसरे के मुँह में मुँह डालकर चूमते रहे।
कुछ मिनट बाद नवीन ने अपने कपड़े निकालने के लिए मेरे होंठ से अपने को अलग किए और कपड़े निकाल कर पूरी तरह निर्वस्त्र हो गए और इसी के साथ मेरी भी ब्रा-पैन्टी निकाल फेंके।
नवीन ने मेरी गर्दन को चूमते हुए कहा- नेहा जी.. आपको सेक्स का लाईव सो दिखाता हूँ।
मैं कुछ कहती इससे पहले नवीन धीमे से अन्दर चले गए जहाँ सुनील और नवीन की वाइफ थी।
कुछ देर में मुझे भी अन्दर आने का इशारा किया, मैं डरते हुए नवीन के पास गई।
इस वक्त मैं और सुनील पूरी तरह निर्वस्त्र थे।
सुनील ने इशारे से खिड़की के अन्दर देखने को बोला, खिड़की की ओट से हम दोनों ने अन्दर देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए। नवीन की वाइफ पैर फैलाकर बिस्तर पर लेटी थी और सुनील उसकी चूत चाट रहा था।
नवीन की वाइफ मजे लेकर चूत चटवाते हुए सिसकारी लेते हुए नवीन को गालियाँ बक रही थी- हाय जान.. मस्त है तुम्हारा लंड.. इसी लिए तो तुमको देख कर मेरी चूत छिनाल बन जाती है.. नवीन साले का लंड.. मुझे उसका लौड़ा कभी पसंद ही नहीं आया.. आज तक साला ठीक ढंग से मेरी चूत चौड़ी ही नहीं कर पाया।
सुनील नवीन की वाइफ के ऊपर चढ़ कर और पैर उठा कर अपना लंड चूत पर लगा कर रगड़ने लगा।
नवीन की वाइफ पूरी मस्ती से ‘आआआह.. ऊऊ.. उईईई.. हाआ.. सि.. करते हुए अपना चूतड़ उछाल कर लंड को अन्दर कर लिया।
इधर नवीन भी अपनी वाइफ की चुदाई देखकर उत्तेजित होकर पीछे से ही मेरी चूत पर लंड लगा कर ठेल दिया।
सही में नवीन का लण्ड बहुत छोटा तो नहीं था.. फिर भी मीडियम साइज था, पर सुनील के लण्ड के आगे बच्चा ही था।
नवीन के एक ही झटके में मेरी चूत पूरा लण्ड खा गई।
नवीन की वाइफ की चुदाई देख कर मेरी भी चूत लण्ड लेने के लिए पानी छोड़ रही
थी और मेरी गीली चूत में नवीन का लण्ड ‘सट.. सट..’ करते हुए अन्दर-बाहर हो
रहा था।
नवीन मेरी गर्दन.. कभी मेरी पीठ को.. और मेरी चूची को रगड़ते हुए अपने लण्ड को पेल रहा था।
‘आआहह..’ उसे चूमने और चूसने में मुझे भरपूर मज़ा आ रहा था।
मैं भी सिसियाते हुए धीमे से बोली- आह.. सिईसिआह.. बहुत मजा आ रहा है.. ऐसे ही चूसो.. चाटो.. ऊंऊऊहह.. हां… हां.. और मेरी चूत पेलो।
उधर नवीन की वाइफ कमरे में सुनील के मोटे लण्ड से चीख-चीख कर और कमर उठाकर चुद रही थी, इधर मैं चुदाई देखते हुए चुदने का एक अलग ही मजा लेकर चुद रही थी। नवीन बड़े प्यार से मेरी चूत का मजा ले रहा था।
तभी कमरे से सिसकारियों की आवाज तेज हो गई और नवीन भी चोदते हुए अन्दर देखने लगा।
सुनील ‘गचा.. गच..’ लण्ड पेलते हुए बीच में उसकी चूचियाँ भी दबाता जा रहा
था और हर एक धक्के पर चीख कर नवीन की वाइफ सुनील को चूत में लण्ड पेलने को
प्रोत्साहित कर रही थी।
‘आह्ह.. चोदो आह.. आआहह.. और मारो मेरी चूत.. आआहह.. ऊऊह.. उईई.. अहा..’
वो मजे करते हुए चूतड़ उछाल कर लण्ड खा रही थी।
इधर नवीन मेरी चूत पर शॉट पर शॉट मार कर मेरी चुदाई करता जा रहा था।
तभी मेरी निगाह अन्दर गई और मैंने देखा कि नवीन की वाइफ झड़ रही थी और सुनील ने झटका मारते हुए नवीन की बीवी की चूत में ही पिचकारी छोड़ दी, वो अपना पूरे का पूरा लण्ड बुर में ठोक कर झड़ने लगा।
इधर नवीन सुनील को झड़ता देख मेरी चूत में लण्ड चोदने की रफ्तार तेज करके मेरी चुदाई करते हुए छह-सात जोरदार धक्के लगाकर मुझे अपनी बाँहों से जकड़ कर मेरी चूत में भी पिचकारी छोड़ कर झड़ने लगा।
मैं सिसियाकर प्रश्न वाचक निगाहों से नवीन को झड़ते देखने लगी। नवीन समझ
गया कि मैं प्यासी हूँ और सर झुकाकर मेरे पीठ पर वजन रख कर हाँफने लगा।
उधर नवीन की वाइफ भी जोरदार चुदाई से मस्त होकर आँखें बंद करके सुनील के सीने से चिपक कर लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।
वे दोनों एक-दूसरे की बाँहों में ऐसे बेसुध होकर चिपके रहे, जैसे किसी से कोई शिकायत ही ना हो।
इधर मैं प्यासी ही रह गई।
मैं सिसियाकर प्रश्न वाचक निगाहों से नवीन को झड़ते देखने लगी। नवीन समझ
गया कि मैं प्यासी हूँ और सर झुकाकर मेरे पीठ पर वजन रख कर हाँफने लगा।
उधर नवीन की वाइफ भी जोरदार चुदाई से मस्त होकर आँखें बंद करके सुनील के सीने से चिपक कर लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।
वे दोनों एक-दूसरे की बाँहों में ऐसे बेसुध होकर चिपके रहे, जैसे किसी से कोई शिकायत ही ना हो।
इधर मैं प्यासी ही रह गई।
अब आगे..
मुझे नवीन के लण्ड से चूत हटाने का मन तो नहीं कर रहा था.. पर उससे पहले
ही नवीन का लण्ड मुरझा कर चूत से बाहर निकल गया और उधर भी तूफान आकर चला
गया था। नवीन की वाइफ और सुनील कभी भी बाहर आ सकते थे। इसलिए वहाँ से हटना
जरूरी था। मैं नवीन के साथ बाहर चली आई।
नवीन ने कहा- नेहा जी सॉरी.. मैं ज्यादा उत्तेजित हो गया था.. इसलिए जल्दी झड़ गया।
मैं बोली- कोई बात नहीं।
तभी मेरे मोबाईल पर सुनील का मैसेज आया कि नेहा जी अगर आप लोगों का काम हो गया हो.. तो आप और नवीन बाहर निकलो।
मैंने नवीन को यह बात बताई, नवीन मेरे साथ बाहर आ गया और हम लोग लिफ्ट पकड़ कर नीचे चले आए।
करीब दस मिनट बाद सुनील भी नीचे आ गए। मैंने नवीन को नमस्ते की.. तभी सुनील बोला- क्यों नवीन भाई.. कैसा रहा नेहा का साथ.. मजा आया?
नवीन बोला- नेहा का साथ हो तो मजा ना आए.. यह हो ही नहीं सकता।
फिर हम लोग ऑटो पकड़ कर जहाँ रूके थे.. वहाँ अपने रूम पर आ गए।
अब रात के साढ़े दस का समय हो रहा था, आकाश कमरे में सोया हुआ था।
सुनील हाल समाचार करके.. सुबह आने को बोल चला गया, मैं बाथरूम जाकर फ्रेश
होकर नाईटी पहन कर बाहर आई और पति के साथ खाना खाकर बिस्तर पर आराम करने
लगी।
पर मेरी चूत अब भी पानी छोड़ रही थी और मुझे चुदाई की चाहत हो रही थी।
मैं अपना एक पैर पति की जांघ पर चढ़ा कर अपनी बुर को कमर पर दाबने लगी।
तभी पति मुस्कुराकर बोले- मेरी जान.. बहुत प्यासी लग रही हो.. क्या बात है?
मैं नवीन और सुनील के घर पर हुई चुदाई की सारी बातें बताने लगी। चुदाई
की बात और मेरी चूत प्यासी रह गई सुन पति जोश में आकर मेरे चूचियाँ कसकर
दबाते हुए मेरे होंठों को मुँह में ले कर चूसते हुए एक हाथ से मेरी बुर कस
कर मसल कर मेरे ऊपर चढ़ गए।
बुर मसलते हुऐ पति की एक उंगली मेरी बुर में चली गई।
एक तो मेरी बुर पानी छोड़ रही थी, दूसरे मैं पैन्टी भी नहीं पहने हुई थी.. क्योंकि मैं जब बाथरूम गई थी तभी ब्रा-पैन्टी उतार आई थी।
फिर पति ने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ कर बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। मैं
पति का सर पकड़ कर अपने तने हुए चूचों पर उनका मुँह रख कर बोली- सैयां जी..
मेरी चूचियाँ चूसो।
मेरे पति तने हुए दोनों मम्मों को दबाते हुए मुँह में भर कर मेरे निप्पल को
खींच-खींच कर चूसते हुए बोले- कई दिन हो गए.. तेरी चूत मारे हुए.. आज तेरी
चूत की सारी गर्मी और अकड़न दूर कर दूँगा।
वो बड़े ज़ोर-जोर से दोनों चूचों को भींचते हुए मेरे गले और होंठ और चूचियां चूसने लगे।
मैं सिसकारी लेकर बोली- आह रे.. ऊहहआह.. सीई आह सीईईई सी आह.. अब मुझसे
नहीं रहा जाता.. मेरे राजा.. मेरी चूत चोदकर मेरा सारा रस निकाल दो..
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तभी पति ने मेरी चूची छोड़कर जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर अपना
लम्बा और मोटा लण्ड मेरे होंठों पर लगा कर बोले- मेरी जान.. बुर पेलवाने से
पहले अपने प्यारे लण्ड को चाट तो लो।
मैं पति के लण्ड को हाथों से पकड़ कर बड़े प्यार से सुपारे को मुँह में लेकर चूसने लगी।
मैं आप लोगों को यह बता दूँ कि मेरे पति के लण्ड पर चमड़ी नहीं है, लण्ड की चमड़ी कटी हुई है।
मैंने प्यार से जीभ को लण्ड के चारों तरफ फिराते हुए.. चाट-चाट कर मोटे सुपारे को लाल कर डाला।
मैं समूचे लण्ड को गले तक लेकर चूसे जा रही थी।
मेरी इस तरह की चुसाई से पति मस्त होकर ‘आहें’ निकालने लगे और लण्ड चूसने के दौरान पति चूतड़ और मेरी बुर भी मसक रहे थे।
मैं पहले से ही प्यासी थी, एक तो पति के द्वारा चूतड़ और चूत सहलाने से मेरी
चुदास अब पूरी तरह सवार हो चुकी थी और अब मैं मस्ती में मचलते हुए लण्ड
चूसे जा रही थी।
तभी पति बोले- बस करो मेरी जान.. नहीं तो मेरा माल तेरे मुँह में ही निकल जाएगा।
मैं भी लण्ड पीना छोड़ कर बोली- हाँ मेरे सैयां.. बस अब जल्दी से चोद
दो.. अब मैं इतनी गर्म हो गई कि मुझसे अब रहा नहीं जाता आआह… सीईईई सीआह..
ऊऊऊँ.. इइइसीसी.. बस राजा.. अब देर ना करो.. मेरे सईयां..
इतना सुनते ही पति ने मेरी बुर को अपनी गदोरी में भरते हुए कसकर भींच दिया और मेरी बुर ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया।
एक तो मेरी बुर पहले से ही पनिया हुई थी और बुर दबाने से मेरा बदन कांपने
लगा। मैं ‘आहें’ भरते हुए सिसियाने लगी और चुदाई की प्यास से व्याकुल होकर
मैं पलटकर घोड़ी बनकर हिनहिनाते हुए लण्ड को बुर के मुँह पर लगा के.. बुर की
फांकों को लण्ड के सुपारे से फैला कर चूतड़ों को पीछे को कर दिया।
‘फक्क..’ की आवाज के साथ सुपारा मेरी बुर में घुसता चला गया।
तभी पति ने बचा खुचा हुआ लण्ड भी सटाक से मार कर अन्दर कर दिया।
अब पति तेज़-तेज़ कमर हिलाते हुए मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे। मैं कमर और चूतड़ हिला-हिला कर लण्ड बुर में पेलवाते जा रही थी।
मैं मस्त हो कर बोलने लगी- आह्ह.. और चोदो.. मेरे राजा.. पेलो मेरी बुर.. फाड़ दो.. मेरी चूत.. हाय सीई हाय रे आहहह सी… और ज़ोर से मारो धक्का.. चोदो साली को.. बहुत प्यासी थी.. आहहह.. चोदते रहो
पति मेरी चूचियाँ जोर से मसलते हुए बोलने लगे- ले खा साली.. मेरे लण्ड को छिनाल साली.. खा मेरे लण्ड को..
‘हाँ मेरे जानू, मेरी चूत छिनाल हो गई है। पेलो साली को.. आहहह.. गइइई.. मेरे राजा.. मैं गइई.. आह सी..’
अकड़ते हुए मैं झड़ने लगी और मुझे झड़ता हुआ पाकर पति मेरी बुर पर ताबड़तोड़ धक्कों की बौछार करते हुए चोदते जा रहे थे।
मेरी चूत से ‘फच.. फचा.. फच..’ की आवाजें आने लगी थीं।
लण्ड भी ‘सक.. सक..’ करके अन्दर- बाहर करते हुए पति मेरी बुर में लण्ड जड़
तक ठोक कर झड़ते हुए बोले- ले.. मैं भी गया.. तेरी चूत में… ले साली अपनी
चूत में.. मेरे वीर्य को.. आह.. ले.. मैं झड़ रहा हूँ.. ततत..तेरी चूत में..
वे झड़ कर हाँफने लगे और हम दोनों एक मस्त चुदाई के बाद आराम से एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गए।
मैं झड़ने लगी और मुझे झड़ता हुआ पाकर पति मेरी बुर पर ताबड़तोड़ धक्कों की
बौछार करते हुए चोदते जा रहे थे। मेरी चूत से ‘फच.. फचा.. फच..’ की आवाजें
आने लगी थीं।
लण्ड भी ‘सक.. सक..’ करके अन्दर- बाहर करते हुए पति मेरी बुर में लण्ड जड़
तक चाप कर झड़ते हुए बोले- ले.. मैं भी गया.. तेरी चूत में… ले साली अपनी
चूत में.. मेरे वीर्य को.. आह.. ले.. मैं झड़ रहा हूँ.. ततत..तेरी चूत में..
वे झड़ कर हाँफने लगे और हम दोनों एक मस्त चुदाई के बाद आराम से एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गए।
अब आगे..
सुबह नींद तब खुली जब मैंने दरवाजे पर घंटी की आवाज सुनी।
मैं उठी और जाकर दरवाजा खोला तो सामने सुनील चाय लेकर खड़ा था।
‘अरे आप..?’
‘गुड मॉर्निंग..’ सुनील बोला- लग रहा है, रात को कुश्ती देर तक चली।
मैं मादकता से बोली- ऐसा क्यों लग रहा है..
सुनील बोला- मुझे पता है नवीन ने तुमको केवल गरम तो कर दिया होगा पर
ठंडा नहीं कर पाया होगा और तुमने ठंडा होने के लिए आकाश भाई को सोने नहीं
दिया होगा।
मैं सुनील की बात सुनकर मुस्कुरा दी और सुनील भी मुस्कुराते हुए अन्दर आ
गए। तब तक मेरे पति भी जाग गए थे। मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई और पति भी
फ्रेश होकर आ गए.. फिर हम सब लोग बैठकर चाय पीने लगे।
अब सुनील बोले- नेहा जी.. आज आप को पूरे दिन के लिए सिर्फ आराम है.. कहीं जाना नहीं है। हो सकता है रात का कोई प्रोग्राम बने।
सुनील 20000/- रूपया मेरे पति को देते हुए बोले- आकाश जी इसे रखिए.. यह कल का कुछ हिसाब है.. बाकी बाद में देखा जाएगा और मैं दोपहर में तो आ नहीं सकता.. शाम तक ही आऊँगा। इसलिए आप लोग बाहर जाकर खाना खा लीजिएगा।
इस सबके बाद सुनील चले गए। उनके जाने के बाद मैं बाथरूम में नहाने चली
गई.. लेकिन कुछ ही देर बाद पति बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक देने लगे।
मैंने अन्दर से ही पूछा- क्या है?
तो पति ने कहा- साथ नहाने का मन है।
मैंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दिया। फिर पति भी मेरे साथ नहाते हुए मेरी चूचियों और चूतड़ों को दबाने लगे, वो कभी मेरी चूची को मुँह में भर लेते और कभी बुर को सहला देते।
मैं पति की इस तरह की हरकतों से गरम होने लगी और बोली- इरादा क्या है जनाब का.. सुबह-सुबह रंगीन मिजाजी..?
पति मुस्कुराते हुए मेरी योनि प्रदेश को चूमने लगे। काफी देर मेरी बुर
को चूसने से मेरी चूत की गरमी बढ़ गई और मैं सिसियाते हुए पति के सर को बुर
पर दबाते हुए चूत को चटवाने लगी..
साथ ही मैं सिसक भी रही थी- ऊऊउई.. आआह्ह्ह.. आआह्ह.. मेरे राजा चाटो.. मेरी चूत.. मेरी चूत को काट कर खा जाओ..
पति मेरी चूत की पंखुड़ियों को मुँह से खींच-खींच कर चूस रहे थे.. पर
अचानक चूत को पीना छोड़कर अचानक से लण्ड को बुर पर लगा दिया और एक तेज शॉट
लगा कर लंड को ‘सटाक’ से मेरी चूत में पेल दिया।
मैं आकाश की इस हरकत के लिए तैयार नहीं थी। मैंने ‘ऊऊउ..ईईई.. सीई..’ की आवाज करते हुए कस कर पति को पकड़ लिया।
उधर पति ने मेरी बुर पर लगातार दस-बारह झटके मार कर लण्ड को बाहर निकाल लिया और बोले- बस आज ऐसे ही रहा जाए.. बिना चुदाई पूरी किए..।
मैं मिन्नतें करती रही- और पेलो..
पर पति मेरी काम वासना की आग का मजा उठा रहे थे और नहाकर बाहर निकल गए।
कुछ देर बाद मैं भी बाहर आई.. पर मेरी चुदास पूरे चरम पर थी इसलिए मेरी चूतड़ और कमर बल खा रहे थे। उस पर मेरे पति मेरे नितम्बों पर चिकोटी लेते बोले- क्या हुआ मेरी जान.. तबियत सही नहीं है क्या?
मैं वासना के नशे में बाथगाउन उतार नंगे ही जाकर पति की गोद में बैठ गई और मैंने अचनाक उनके खड़े लण्ड को कसकर पकड़ कर उस पर चिकोटी काट ली।
पति तेज स्वर में चिल्ला उठे और मुझे गोद से उतार कर ‘आह सी..’ करने लगे।
मैं बोली- क्या हुआ.. अब पता चला कि बात क्या है?
फिर पति बोले- जान.. मैंने तुम्हें जानबूझ कर प्यासा छोड़ दिया था। अभी पूरा
दिन ही बाकी है.. पता नहीं कब लण्ड से चूत लड़ जाए.. क्यों उतावली होती
हो.. मौका मिलेगा तो किसी भी लण्ड से चूत लड़ा लेना। मैंने रोका तो नहीं है।
मैं मुस्कुराने लगी।
फिर पति कपड़े पहन कर बोले- मैं सामने वाली दुकान से उसी के हाथ नाश्ता
भिजवाता हूँ.. और मैं नहीं आऊँगा क्योंकि मुझे एक काम से जाना है और एक या
दो घण्टे में आऊँगा.. तुम कपड़े पहन लो।
ये बोल कर वे चले गए..
पर मुझे शरारत सूझ रही थी इसलिए मैंने एक छोटा सा स्कर्ट और टाप डाल
लिया.. स्कर्ट केवल मेरी चूत और चूतड़ों को ढकने भर के लिए काफी था.. बाकी
मेरी जांघें पूरी नंगी दिख ही रही थीं।
इन कपड़ों में मेरी स्थिति यह थी कि अगर मैं झुक जाऊँ.. तो चूतड़ों के छेद और
चूत का भी दीदार हो ही जाएगा.. क्योंकि मैंने पैन्टी नहीं पहनी थी।
फिर मैं मिरर के सामने बैठ कर पूरी तरह से तैयार हो कर बिस्तर पर लेट गई।
तभी घंटी बजी.. मैंने जाकर दरवाजा खोला.. तो सामने एक बांका नौजवान हाथ
में नाश्ते का पैकट लिए खड़ा था। वो मेरे को ऊपर से नीचे देखते हुए बोला-
मेम साहब.. साहब ने ये नाश्ता भिजवाया है।
मैं एक तरफ को होते हुए बोली- अन्दर मेज पर रख दो।
वह बांका जवान कमरे में अन्दर दाखिल होकर.. नाश्ता मेज पर रखकर खड़ा होकर मुझे देखते हुए बोला- मेम साहब मैं जाऊँ?
मैं बोली- आप का नाम क्या है और जाने की जल्दी है क्या?
वह बोला- मेरा नाम विनय है और मेरी सामने दुकान है..
मेरा इरादा उसे देख कर चुदने का हो उठा था.. इसलिए मैंने उसे कुछ और दिखाने और उसको अपने जाल में फंसाने के लिए एक तरीका सोचा।
और मैं बोली- विनय मेरा एक काम कर दोगे क्या?
वह बोला- जी मेम साहब..
मैं बोली- एक बोतल पानी ला दो।
और पैसा देने के लिए मैं मिरर के पास जाकर और झुककर अपने हैंडपर्स से पैसा निकालने लगी। मेरे झुकते ही विनय को मेरी चूत का दीदार हो उठा। विनय आँखें फाड़ कर देखते हुए अपना लण्ड सहलाने लगा।
यह सब करते हुए मैं मिरर से विनय को देख रही थी और जानबूझ कर पैसा ढूँढ़ने का नाटक कर रही थी ताकि उसको ज्यादा से ज्यादा गरम कर सकूँ।
मेरे दिमाग में घुस चुका था कि आज इस साले को इतना गरम कर दूंगी कि ये आज
मेरी चूत चोद ही दे। मैं उसी की हरकतों तो नोटिस करते हुए घूम गई.. बिना
विनय को कोई मौका दिए हुए..
मेरे पलटते ही विनय डरकर बगल में देखने का नाटक करने लगा। मैं जब विनय के करीब पहुँची तो विनय की साँसें तेज चल रही थीं। विनय की साँसों में एक वासना की महक आ रही थी।
मैंने एक सौ का नोट देते हुए उसके हाथों को दबा दिया।
अब मैं मादक अदा से अंगड़ाई लेते हुए बोली- थोड़ा जल्दी आना पानी लेकर.. बहुत प्यासी हूँ..।
विनय हकलाते हुए बोला- जी जी जी.. मेमममेम साहहब..
वो झटके से मुझे घूरता हुआ कमरे के बाहर चला गया। मैं जाकर बिस्तर पर चूत खोल कर बैठ गई और एक पत्रिका लेकर पैर को मोड़ लिया ताकि विनय को आते ही मेरी चिकनी बुर का दीदार हो जाए।
और वही हुआ.. जैसे ही विनय पानी की बोतल लेकर आया.. वैसे ही मैंने मुँह के सामने पत्रिका करके पढ़ने का नाटक करते हुए अपने पैरों को थोड़ा और फैला दिया। ताकि विनय मेरी बुर को अच्छे से देख ले।
कमरे के अन्दर आते ही सबसे पहले विनय की कामुक निगाहें मेरी जाँघों के बीच में पहुँच कर मेरी बुर को ताड़ने लगीं।
काफी देर तक बुर का मैं जमकर दीदार कराने के बाद चौंकते हुए बोली- अरे तुम कब आए?
विनय सच्चाई छुपाते हुए बोला- ब्ब्स.. अ..अभी आआआ.. आया म..मेम स..स.. साहब।
‘ओके..’
बोला- नाश्ता नहीं किया मेमसाहब.. ठण्डा हो गया है..
मैं बोली- विनय लेकिन कुछ और है जो गरम है।
‘ऐसा क्या है.. आप नाश्ता तो खा लीजिए।’
मैं बोली- नाश्ते के साथ कुछ और खाने का मन हो गया है।
ये कह कर मैंने आगे की बात अधूरी छोड़ दी।
तभी विनय ने पूछा- और क्या खाना चाहती है- मेमसाब?
मैं बोली- अगर तुम खिलाओ.. तो जरूर खा लूँगी।
विनय बोला- आप बताइए.. मैं अभी ला देता हूँ..
जानबूझ कर विनय भी बात बढ़ा कर बात कर रहा था।
मैं अश्लीलता से खुलते हुए बोली- अपना केला खिला दो।
विनय सकपकाते हुए बोला- मेरी दुकान पर केला नहीं बिकता.. रूकिए कहीं और से ले आता हूँ।
मैं बोली- नहीं.. मैं जब भी खाऊँगी.. तो तुम्हारा ही केला ही खाऊँगी।
विनय बोला- क्यों मजाक करती है-मेमसाब.. मेरे पास कहाँ है केला..?
मैं उसको उंगली से बुलाते हुए बोली- जरा यहाँ को आओ.. दिखाती हूँ..।
विनय के करीब आते ही मैंने अपनी जांघों को पूरा खोल दिया और जैसे ही विनय मेरे करीब आया।
मैं बोली- विनय अगर तुम्हारे पास केला निकला.. तो खिलाओगे ना.. वादा करो।
‘वादा मेमसाब.. जरूर खिलाऊँगा..’ वो लजरते हुए स्वर में बोला।
तभी मैंने एक झटके से विनय के मोटे तगड़े और खड़े लण्ड को पकड़ लिया।
‘यह है केला.. अब जल्दी से निकालो और खिलाओ।’
विनय को भी अब चुदास चढ़ गई थी और वो भी नाटक करते हुए बोला- मेमसाब, यह केला मुँह से खाने के लिए नहीं है।
मैंने तुरंत विनय का हाथ पकड़ कर ले जाकर सीधे अपनी गरम चूत पर रख कर दबाते
हुए बोली- इसे खिलाना है। अब तो केला खाने की सही जगह है ना..
विनय ने मेरी बुर को चापते हुए कहा- जी मेमसाब.. लेकिन कोई आ गया तो?
मैं सिसियाते स्वर में कराही- आह्ह्ह.. आआ आह्ह्ह्ह.. नहीं विनय कोईई..
नहींई.. आएगा.. तुम इत्मीनान से खिलाओ अपना केला.. यह मेरी चूत इसको आराम
से खा लेगी।मैंने एक झटके से विनय के मोटे तगड़े और खड़े लण्ड को पकड़ लिया।
‘यह है केला.. अब जल्दी से निकालो और खिलाओ।’
विनय को भी अब चुदास चढ़ गई थी और वो भी नाटक करते हुए बोला- मेमसाब यह केला मुँह से खाने के लिए नहीं है।
मैं तुरंत विनय का हाथ पकड़ कर ले जाकर सीधे अपनी गरम चूत पर रख कर दबाते
हुए बोली- इसे खिलाना है। अब तो केला खाने की सही जगह है ना..
विनय ने मेरी बुर को चापते हुए कहा- जी मेमसाब.. लेकिन कोई आ गया तो?
मैं सिसियाते स्वर में कराही- आह्ह्ह.. आआह्ह्ह्ह.. नहीं विनय कोईई..
नहींई.. आएगा.. तुम इत्मीनान से खिलाओ अपना केला.. यह मेरी चूत इसको आराम
से खा लेगी।
अब आगे..
‘मेमसाब.. आपको मैं अपना केला जरूर खिलाऊँगा।’
‘क्या तुम मेमसाब मेमसाब.. किए जा रहे हो.. मेरा नाम नेहा है और प्यार से
सब रानी भी कहते हैं। तुमको जो अच्छा लगे तुम बुला सकते हो।’
‘जी रानी जी..’ कहते हुए उसने मेरी बुर में उंगली डाल कर एक हाथ से मेरी चूची को पकड़ कर सहलाते हुए खड़ा रहा।
शायद विनय चाह रहा था कि मैं खुद आगे बढूँ..
फिर मैं विनय के सर को पकड़ कर नीचे कर के अपने होंठों पर रख कर एक जोरदार
किस करके विनय को अपने दूधों की तरफ ले गई और अपनी चूची के अंगूरों को
चूसने के लिए बोली।
विनय मेरी छाती को भींच कर पीते हुए मेरी चूत को अपनी मुठ्ठी भरकर दबाते हुए मेरी चूचियों को पीने में मस्त था।
तभी मैंने विनय के लण्ड को बाहर निकाल लिया, उसका लण्ड बाहर आते ही हवा में झूल गया.. जैसे कोई गदहा अपना लण्ड झुला रहा हो।
विनय का लण्ड देख कर मेरी मुँह में पानी भर आया और मैंने मुँह खोल के विनय
के लण्ड को मुँह में भर लिया पर विनय का सुपारा काफी मोटा था.. जो मेरे
मुँह में भर गया और मुझे चूसने में दिक्कत हो रही थी।
इधर विनय मेरी चूत को सहलाते हुए कभी उंगली अन्दर पेल देता.. कभी मेरी बुर को भींच लेता। मैं विनय के लण्ड की चमड़ी को आगे-पीछे करते हुए पूरे गले तक डाल कर लण्ड को को मुठियाते हुए चूसे जा रही थी।
तभी विनय मेरा मुँह लण्ड से हटाकर सीधे मुझे बिस्तर पर गिरा दिया। उसने मेरी चूत के ऊपर पर मुँह लगा कर पूरी बुर को मुँह में भर लिया। अब उसने बुर को खींचकर चूसते हुए मेरे लहसुन को हल्के-हल्के दांत लगा कर चुसाई करना शुरू कर दिया। इसी के साथ उसने अपना हाथ चूतड़ों पर ले जाकर मेरे गुदा द्वार को सहलाते हुए मेरी बुर की चुसाई करने लगा।
मैं पूरी मस्ती में सिसकारियाँ ‘उफ्फ्फ्फ़ आह सी..’ ले रही थी।
मैं कामुकता से सीत्कार करते हुए बोली- विनय.. अब बस करो.. मेरी बुर में
केला पेल दो.. हाय विनय चोदो मुझे.. जितना चाहे चोदो.. अपना पूरा लौड़ा
मेरी बुर में पेलो.. आआईईई..
मैं सिसियाते हुए विनए का मुँह अपनी चूत से हटाने लगी और विनय ने भी चूत चुसाई छोड़ कर मुझे दबोच लिया मैंने अपना एक हाथ ले जाकर उसका मूसल लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाते हुए बोली- विनय.. तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है.. बहुत मोटा है.. लंबा भी खूब है..।
विनय मस्ती से मुझसे चिपका हुआ था, मैं लण्ड को मसलते बोली- उफ्फ्फ्फ़.. यकीन नहीं होता.. इतना मोटा लण्ड मेरी चूत के अन्दर जाने वाला है। उसी पल विनय ने मुझे चूमते हुए मेरी एक टांग को उठा दिया और मैं चूत पर लण्ड लगा कर लण्ड को चूत में घुसने का रास्ता दिखा बैठी।
अगले ही पल एक ही शॉट में विनय ने लण्ड का सुपाड़ा चूत में उतार दिया।
मैं उत्तेजना में उसके होंठ चूसने लगी और मैंने अपने पैरों को उसकी कमर पर
लपेट दिया। चूचियों को मसलते हुए मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल दीं।
विनय अपने कंधों पर पैर रखवा कर मेरी चूत में लण्ड पेलने लगा, विनय मुझे
ठोकने लगा और कस-कस के ठाप पर ठाप लगा कर अपने मोटे लण्ड से मेरी ठुकाई
करने लगा।
विनय के लण्ड की मदमस्त चुदाई से मेरी चूत से ‘खचाखच.. फचाफच..’ की आवाज
आ रही थी। मेरे मुँह से, ‘ओह्ह्ह.. ऊऊफ़.. आहसीई.. उफ़..’ की आवाजें आने
लगीं।
मैं अपनी चूत उठा-उठा कर विनय का लण्ड बुर में लेती जा रही थी।
‘ऊऊफ़आह.. और पेलो.. ऐसे ही.. चोदो.. मुझे.. मैं ऐसे मोटे लण्ड से चुदने
के लिए तड़फ रही हूँ.. आईईईई सीऊऊह सीईईई आह ऊफ़्फ़्फ़.. चोद.. पेल.. मार
साले मेरी चूत…’
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विनय कस-कस कर अपना लौड़ा डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था और मैं अपनी चूत उसके लण्ड पर उछाल-उछाल कर चुदवाती रही।
विनय पूरा ज़ोर लगा कर धक्के पर धक्के लगाता हुआ पूरा लण्ड चूत में जड़ तक डाल रहा था वो मेरी जबरदस्त चुदाई कर रहा था और मैं सिसकारी लेते हुए बुर चुदवाती जा रही थी।
‘आहसीई.. आउउई.. फाड़ दो.. मेरी चूत.. मसक दो मेरे बोबों को.. और रगड़ कर
पेल मेरे राजा.. वाह इसे कहते हैं चुदाई.. चूत के राजा.. मेरी चूत के
मैदान में दिखा मर्दागनी.. आआह्ह्ह.. म्म्म्म म्म्मार.. चूतत.. मेरे
राजजा.. डालल.. पेलल.. आहसीई… ऊईई.. मैं गई.. मेरे राजा.. लगा धक्का.. कस
कस.. कर पेल साले.. मार चूत आआ.. मेरीरी.. सासाली.. चूत.. आह आउइ उउउइ..’
कहते हुए मैंने विनय से चिपकते हुए पानी छोड़ दिया।
‘आह जान.. मैं झड़ रही हूँ.. मेरे सैयां मैं बारी तेरे लण्ड पर.. तेरी बाँहों पर.. पेल दे लण्ड.. मेरी बच्चेदानी तक.. आहहह सी..’
मैं विनय को कस के पकड़ कर झड़ रही थी और विनय मेरी झड़ी हुई चूत पर धक्के पर धक्के लगाते हुए काफी देर तक मुझे रौंदता रहा। मेरी चूत में लण्ड जड़ तक चांप कर झड़ने लगा और मुझको पूरी तरह अपनी बाँहों में कसकर दाब के.. लण्ड से वीर्य की धार छोड़ कर झड़ने लगा। हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लिए काफी देर तक पड़े रहे।आप लोग मेरी कहानी पढ़ते वक्त अपना लण्ड पकड़ कर हिलाते हुए यही सोचो कि आप लोग अपनी प्यारी नेहा रानी की बुर, चूत, फ़ुद्दी, फ़ुद्दा, भोंसड़ी चोद रहे हो.. अपने लण्ड से नेहा रानी की योनि को फाड़ते हुए झड़ रहे हो।
खैर.. आइए मेरी चूत की रसीली दास्तान की तरफ बढ़ते हैं।
उस शाम सुनील मुझे एक फाईव स्टार होटल में ले गया।
वहाँ दो विदेशी लौड़े मेरी चूत की चुदाई के लिए अपने लण्ड को तैयार कर रहे थे।
मैं सुनील के साथ मिनी स्कर्ट और टॉप में जैसे ही उनके कमरे में पहुँची.. वो विदेशी मुझे देखते ही लार टपकाने लगे।
तभी उसमें से एक ने मुझे सुनील के सामने ही खींच कर अपनी जाँघ पर बैठा लिया
और एक हाथ से चूची और एक हाथ चूत पर ले जाकर बोला- वाऊ.. वंडरफुल सुनील..
क्या माल लाए हो।
उसी वक्त दूसरे ने सुनील की तरफ एक नोट की गड्डी उछाल कर कहा- प्लीज गो आउट।
मैं बस सुनील को ही देख रही थी और सुनील मुझे भूखे भेड़ियों में छोड़ कर चला गया।
उनमें से एक का नाम चार्ली था और दूसरे का नाम रिची था।
सुनील के जाते ही चार्ली मुझ पर टूट पड़ा। एक तो पहले से ही मुझे रिची अपनी बाँहों में दबोच कर मेरी चूचियाँ मसल रहा था.. उस पर चार्ली का भूखे भेड़िये सा टूटना.. मैं तो डर ही गई।
तभी चार्ली मेरे होंठों को अपने दाँतों से दबाकर काट कर चूसने लगा और मैं दर्द से बिलबिला उठी।
मेरे जिस्म को नोंचने- खसोटने की मानो कोई प्रतियोगिता चल रही हो, कभी मुझे
रिची अपनी तरफ खींचकर मेरी चूची मसकता.. और कभी चार्ली मुझे भंभोड़ता।
मैं तो बस छटपटा कर रह जाती और मैं कर भी क्या सकती थी।
दोनों में रहम नाम की चीज ही नहीं थी, मेरा जिस्म उन्हें केवल एक भोगने कि वस्तु दिख रही थी।
चार्ली ने मुझे चूमते-काटते हुए एकाएक मेरी स्कर्ट को खींच कर फाड़ दिया
और दूर फेंक दिया। रिची भी कहाँ पीछे रहता.. उसने भी मेरे टॉप को बिल्कुल
खींचते-फाड़ते हुए मेरे जिस्म से अलग कर दिया।
उन दोनों को देख कर लग रहा था कि जैसे उन्हें ऐसा करने में बहुत ख़ुशी मिल
रही हो.. पर मुझे लग रहा था अब कपड़ों को फाड़ने के बाद मुझे ही फाड़ने का
नम्बर है।
इसी तरह अभी ये दोनों मुझे नोंच-खसोट कर मेरी चूत और जिस्म की धज्जियाँ उड़ाने वाले हैं।
मेरे जिस्म पर बचे-खुचे ब्रा और पैन्टी को भी फाड़कर फेंक दिया गया।
एक ने मेरी चूत को मुँह में भर लिया और एक ने मेरी चूची को..
मैं डरते हुए बोली- मैं कैसे जाऊँगी.. आप लोगों ने तो मेरे कपड़े ही फाड़ दिए।
उन दोनों ने कहा- पहले चुदाई करा.. फिर जाने की सोचना..
ये सब बातें इंग्लिश में ही हो रही थीं, उन लोगों को हिन्दी कहाँ आती थी।
चार्ली मेरे मम्मों को चूसते हुए कभी निप्पलों को ज़ोर से दबाता या कभी दोनों मम्मों को एक साथ पकड़ के ज़ोर से हिलाने लगता। नीचे मेरी चूत को रिची मुँह में भरकर चूसते हुए काट लेता, कभी वो जाँघ को.. तो कभी चूत को काट रहा था.. और ऊपर चार्ली मेरी चूची.. पेट को बुरी तरह काट और नोंच रहा था।
मुझे मजा आने की जगह दर्द हो रहा था, मैंने चिल्लाते हुए कहा- प्लीज.. बंद करो ये खेल.. प्लीज़ मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़ अहह… सिसि.. द..दर्द हो रहा है।
लेकिन चार्ली और रिची को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था, चार्ली मेरे मम्मों से होते हुए गरदन को चूमते हुए मेरे होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगा, उसने मेरी चूचियाँ मसकते हुए दाँतों से कसकर मेरे होंठ को काट लिया।
मैं दर्द से सीत्कार कर उठी- आहह आ..
मैंने दर्द की अधिकता से उसका मुँह पकड़ कर अपने होंठों से हटा दिया.. तो उसने मेरे निप्पलों को काट लिया।
मैं जोर से चीख पड़ी- अहहह..आहसीई.. प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा है.. प्लीज़ समझने की कोशिश करो.. आह प्लीज़ अहहहह..
फिर वो मुझे छोड़ कर खड़ा होकर अपने कपड़े खोलने लगा।
इधर रिची मेरी चूत की चटाई चालू रखे हुए था, रिची की चूत चुसाई से मुझे थोड़ा मजा आ रहा था।
तभी मेरा ध्यान चार्ली पर गया, चार्ली ने अपनी पैंट खोली और उसे उतार कर फेंक दी। जैसे ही चार्ली ने अपना अंडरवियर नीचे किया.. मैंने चार्ली का लण्ड देखा, मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं, मैं पलक झपकाना भूलकर चार्ली का लण्ड देख रही थी। चार्ली का लण्ड स्प्रिंग की तरह बाहर निकल कर लटक रहा था।
मैं देख कर हैरान थी। उसका लंड कम से कम 9 इंच का तो था। एकदम गोरा.. और मोटा लंड निकाल कर वो मेरी तरफ बढ़ा। वो मेरे नजदीक आकर अपने लण्ड को मेरे होंठों पर फिराने लगा.. और मैंने भी मस्त होकर लण्ड को देख कर चार्ली का लण्ड मुँह में ले लिया।
उधर नीचे रिची भी चुसाई बंद करके अपने कपड़े उतार कर अपने लण्ड को मेरी चूत में रगड़ने लगा।
तभी मेरा ध्यान रिची के लण्ड पर गया। जैसे दोनों के जुड़वां लण्ड हों.. एक
सी ही बराबरी के मोटे.. लम्बे.. दोनों लण्ड को देखकर मेरी बुर पानी छोड़ने
लगी।
उसके बाद क्या बताऊँ दोस्तो.. रिची ने अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया। उसका मोटा लंड देखकर तो मैं हैरान हो गई थी। बड़ा ही जबरदस्त लण्ड मेरी चूत पर टिका हुआ था।
एक मेरे मुँह में घुसा था। फिर रिची ने दो-तीन बार लंड को मेरी चूत पर रगड़ कर एकदम से जोर से धक्का लगा दिया। उसका पूरा हलब्बी लंड मेरी चूत में समाता चला गया।
मेरे मुँह से आवाज निकली- आह्ह्ह्हह्ह सीई..
मैंने दर्द सहते हुए कसकर दाँतों को जकड़ लिया.. और मेरे मुँह के अन्दर
चार्ली का लण्ड था.. जिस पर मेरे दाँत लग गए। चार्ली कसकर चिल्लाया।
चार्ली के लण्ड का ध्यान आते ही मैंने मुँह खोल दिया।
फिर चार्ली मुझे गाली देते हुए लण्ड को मेरे गले तक डाल कर मेरे मुँह में आगे-पीछे करने लगा।
उधर रिची तेज-तेज धक्के पर धक्के लगा कर लंड को मेरी चूत में पेल रहा था। इधर चार्ली मेरी चूचियों को दबाते हुए मेरे मुँह में अपना लण्ड ठोक रहा था। रिची मेरे चूतड़ों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के दे रहा था। मैं लण्ड चूसते हुए चुदवाती रही और रिची चोदता रहा। फिर मेरी चूत ने अचानक पानी छोड़ दिया।
रिची के लण्ड के हर धक्के का स्वागत करते हुए मैं बड़ी जोर से चुदवा रही थी, ‘फचफच..’ लंड अन्दर-बाहर हो रहा था।
मेरी चूत रिची के हर शॉट पर मेरे मुँह से आवाज निकालने लगी ‘अहह.. अह्ह्ह सीसीईईई आहहह.. की मदमस्त आवाज मेरे मुँह से निकलने लगी।
‘आआहआसी.. सी..सीआह..’ करके मैं चुद रही थी और चार्ली का लण्ड भी चूस रही
थी। दोनों तरफ के मजे पाकर मैं झड़ने लगी और रिची भी मेरी झड़ती चूत पर
धक्कों की रफ्तार तेज करके मेरी चूत में पानी निकाल कर शान्त हो गया।
अभी तो चुदाई शुरू हुई थी पूरी रात मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ने वाली थीं।
मेरे साथ बने रहिये.. बहुत मजा दूँगी.. सच में.. न जाने कब आपको भी मेरी चूत में अपना लौड़ा डालने का मौका मिल जाए।रिची के लण्ड के हर धक्के का स्वागत करते हुए मैं बड़ी जोर से चुदवा रही
थी, ‘फचफच..’ लंड अन्दर-बाहर हो रहा था, मेरी चूत रिची के हर शॉट पर मेरे
मुँह से आवाज निकालने लगी। ‘अहह.. अह्ह्ह सीसीईईई आहहह.. की मदमस्त आवाज
मेरे मुँह से निकलने लगी।
‘आआहआसी.. सी..सीआह..’ करके मैं चुद रही थी और चार्ली का लण्ड भी चूस रही थी।
दोनों तरफ के मजे पाकर मैं झड़ने लगी और रिची भी मेरी झड़ती चूत पर धक्कों की
रफ्तार तेज करके मेरी चूत में पानी निकाल कर शान्त हो गया।
अब आगे..
रिची के गर्म वीर्य को चूत में लिए हुए चार्ली के लण्ड को चूस रही थी, कभी सुपारे को तो.. कभी चार्ली के अंडकोषों को मुँह से चूस रही थी, चार्ली मेरी चूचियाँ मींज रहा था।
रिची मेरी चूत से लण्ड खींच कर नीचे उतर गया और तभी चार्ली मेरी चूची व पेट को सहलाते हुए अपना हाथ मेरी चूत की तरफ ले जा गया, वो मेरी चूत को सहलाते हुए लण्ड चुसवाता जा रहा था।
रिची के वीर्य से भरी हुई चूत को मींजते हुए चूत में दो उंगली डाल कर चूत मसकते हुए चार्ली भी मेरे मुँह में पानी छोड़ने लगा.. उसने अपने सारे वीर्य को मेरे मुँह में डाल दिया और लण्ड को मेरे होंठों से नीचे तक मेरी चूचियों पर रगड़ने लगा।
मैं चार्ली के लण्ड से निकले हुए पानी को गटक गई। उन दोनों मुझे उसी हालत में लेकर बिस्तर पर अगल-बगल लेट गए। मेरी बुर से अभी भी रिची के लण्ड का पानी बह रहा था और मुँह में होंठों पर थोड़ा बहुत चार्ली का वीर्य लगा था। मेरे शरीर पर काटने के निशान दिख रहे थे। मेरे साथ हुई बेदर्द चुदाई से मैं बिल्कुल थक गई थी.. पर अभी वो दोनों वैसे ही भूखे दिख रहे थे।
काफी देर रिची और चार्ली की बाँहों में पड़ी रही, जितनी देर रही.. दोनों
ने एक भी पल के लिए मेरे शरीर को राहत नहीं लेने दी। रिची और चार्ली के हाथ
मेरे पूरे बदन पर चूत पर.. चूची.. चूतड़.. हर जगह फिर रहे थे।
रिची और चार्ली ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया।
एक बार फिर दोनों के लण्ड मेरी चुदाई करने के लिए पूरे तैयार थे। उसी पल चार्ली मुझे घोड़ी बना कर मेरे पीछे से चूतड़ों को और पीठ को चूमने लगा, पूरे चूतड़ और छेद के साथ रिची के वीर्य से सनी चूत को चार्ली चाटते हुए मेरी गाण्ड मारने की तैयारी कर रहा था।
उधर रिची मेरे मुँह के करीब खड़े होकर पहले मेरे होंठों को कुछ देर किस करने लगा। इसके बाद उसने चूत के रज और वीर्य से सने लण्ड को मेरे होंठों पर रगड़ते हुए चूसने का मुझे इशारा किया।
मैं अपने मुँह में रिची के लण्ड को लेकर चूसने लगी, रिची मेरे गले तक लण्ड ले जाकर मुझे लण्ड चुसवा रहा था।
मेरा ध्यान चार्ली की तरफ तब गया.. जब चार्ली का लौड़ा मेरी गाण्ड को चौड़ा करने के लिए जोर लगा रहा था।
मेरी गाण्ड इतने मोटे लण्ड को झेल नहीं पाएगी इसलिए मैंने चार्ली के लण्ड को गाण्ड से हटा कर चूत की तरफ कर दिया।
चार्ली तो पहले से जोर लगा रहा था और एक तो चूत पहले से रिची के लण्ड के पानी से चिकनी थी। चार्ली का लौड़ा ‘सपाक’ की आवाज के साथ पूरा चूत में समा गया और मैं दर्द से बिलबिला कर दोहरी हो उठी।
पर आराम के बजाए मेरी और शामत आ गई।
इधर रिची का लण्ड मेरे पूरे हलक में चला गया जिससे मुझे उबकाई और सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
जैसे ही मैंने बाहर उबकाई करना चाही.. रिची ने मेरा सर पकड़ कर मेरे हलक में लौड़ा पेल कर धक्के मारने शुरू कर दिए।
उधर नीचे चार्ली के लण्ड का निशाना चूकने की सजा मिलने लगी।
चार्ली ने लण्ड को बुर से खींच कर मेरी गाण्ड के छेद पर लगा कर कस कर
मेरे नितम्ब पकड़ कर मुझे बिना सम्भलने का मौका दिए.. एक जोरदार शॉट लगा
दिया।
चार्ली का मोटा लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड को चीरता हुआ तीन-चौथाई हिस्सा अन्दर दाखिल हो गया।
मैंने चिल्लाना चाहा.. पर रिची के लण्ड के हलक में होने की वजह से आवाज
नहीं निकाल पाई, दर्द से मेरी आँखों में आँसू निकल रहे थे.. पर रिची और
चार्ली कोई रहम नहीं दिखा रहे थे।
बस मेरे मुँह से ‘गूंगूं गूंगूं..’ की हल्की आवाज बाहर आ रही थी।
रिची और चार्ली एक साथ दोनों तरफ से मुझे बजा रहे थे।
मेरी गाण्ड फट गई थी.. पर चार्ली मेरी गाण्ड मारने में कोई कसर नहीं कर रहा
था, साला खींच-खींच कर मेरी गाण्ड पर शॉट पर शॉट लगाए जा रहा था, कमरे में
चार्ली के लण्ड का लग रहा हर शॉट.. कमरे में गूंज रहा था ‘सट.. सट.. चट..
सट.. सट..’
मैं बस रिची के लण्ड का दर्द सहते हुए चूस रही थी.. चूसना कहना बेमानी होगा रिची मेरे मुँह को चोद रहा था।
मैं बेबस थी.. कुछ नहीं कर सकती थी, बस कामना कर रही थी कि किसी तरह ये
दोनों झड़ जाएँ, करीब दस-बारह धक्के मेरे हलक में लगा कर रिची ने अपना लण्ड
पूरी तरह हलक में ठोक दिया।
अब वो ‘आहआह.. सीसीईआह..’ कर झड़ने लगा।
पीछे चार्ली मेरी गाण्ड की चुदाई किए जा रहा था, चार्ली की गाण्ड मराई से मेरी मेरी गाण्ड का छेद सुन्न हो गया था।
चार्ली का लण्ड कितनी बार.. और कितनी तेजी से अन्दर जा रहा था। मुझे पता ही
नहीं चल रहा था। रिची का लण्ड जब मुँह से निकला.. तो थोड़ी राहत मिली।
मेरा मुँह दर्द से दु:ख रहा था। मैं अपना मुँह बिस्तर पर रख कर चार्ली का लण्ड गाण्ड में लेती जा रही थी। बस अपने मुँह से चार्ली के हर धक्के पर ‘आह ऊऊऊईई आह..’ कर रही थी। चार्ली भी कस-कस कर ना जाने कितनी देर तक गाली देते हुए मेरी गाण्ड मारता रहा।
मुझे तब पता चला.. जब चार्ली एक तेज शॉट मार कर लण्ड को गाण्ड की जड़ तक
चांप कर औंधे मुँह मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा। चार्ली ने मेरे ऊपर लदे
रहते हुए अपना सारा वीर्य मेरी गाण्ड में छोड़ दिया।
वो अब हाँफते हुए मुझे कस कर जकड़े हुए पड़ा रहा।
उधर रिची सोफे पर नंगे ही बैठ कर मुझे और चार्ली को देख रहा था। रिची का लण्ड ढीला होकर गदहे के लौड़े की तरह झूल रहा था। चार्ली का लण्ड अभी भी मेरी गाण्ड में ही घुसा था।
पूरी रात इसी तरह कई बार मेरी कभी गाण्ड और मुँह.. चूत चुदती रही।
सुबह तक मेरे शरीर में मानो जान ही नहीं रह गई थी, मैं बिस्तर पर वैसे ही बेहोशी की हालत में नंगी पड़ी थी।
शायद रिची या चार्ली में से किसी ने सुनील को फोन करके बोल दिया था, सुनील आया मुझे बाथरूम ले जाकर फ्रेश करवाया।
अब मुझ में हल्की सी जान आई, मैं बोली- सुनील मेरे कपड़े फट गए हैं।
तभी रिची की आवाज सुनाई दी- रानी हम लोग ऐसे ही चोदते हैं इसीलिए मैंने तुम्हारे लिए कपड़े ले लिए थे।
फिर सुनील ने मुझे कपड़े पहनाए और चाय पीकर निकल लिए।
मैं बोली- सुनील मेरे कपड़े फट गए हैं।
तभी रिची की आवाज सुनाई दी- रानी हम लोग ऐसे ही चोदते हैं इसीलिए मैंने तुम्हारे लिए कपड़े ले लिए थे।
फिर सुनील ने मुझे कपड़े पहनाए और चाय पीकर निकल लिए।
अब आगे..
सुनील मुझे होटल से लेकर सीधे कमरे पर पहुँचे और मैं सीधे जा कर बिस्तर
पर लेट गई। रात भर उन दोनों ने मेरी जमकर चूत का मर्दन और चुदाई करके शरीर
के पोर-पोर को दुखा कर रख दिया था।
मेरी चूत को और मुझे.. आराम की सख्त जरूरत थी।
जब मैं कमरे पर पहुँची.. उस वक्त मेरे पति नहीं थे.. शायद बाहर नाश्ता
करने गए हुए थे। सुनील मेरे पास ही बिस्तर पर बैठ कर बोले- थक गई हो रानी..
कल सालों ने जमकर चूत मारी है क्या?
मैंने कहा- सालों ने चूत ही नहीं.. पिछवाड़ा.. मुँह.. यानि हर छेद को जम कर
मारा है.. और आप भी तो भूखे दरिन्दों के बीच छोड़ कर चले गए थे।
सुनील सिर्फ मुस्कुरा दिए।
मैं बोली- आप को हँसी आ रही है.. वो तो मुझे पता है कैसे मैंने झेला है।
तभी कमरे में पति आ गए.. आते ही वे बोले- अरे आ गए आप लोग.. मैं जरा नीचे चला गया था।
सुनील बोला- आकाश जी आज आप मेरे साथ चलो.. शाम तक आ जायेंगे.. और आज नेहा
को आराम करने दो.. वो काफी थक गई है। आकाश ने सहमति में सर हिलाया।
‘नेहा जी.. मैं जाते वक्त नीचे दुकान से खाना नाश्ता भेजता जाऊँगा.. और भी कोई काम जो जरूरत का होगा.. सब कमरे में ही आ जाएगा। आपको कहीं जाना नहीं है.. आप बस आराम कीजिएगा।’
कुछ देर बाद सुनील और पति चले गए उनके जाने के बाद वही लड़का.. जिसने
मुझे चोदा था.. आया और ‘नमस्ते’ कह कर बोला- नाश्ता लाया हूँ.. आप खा
लीजिए..
मैंने उसे अपने पास बैठाया और बोली- विनय.. मेरे बदन में बहुत दर्द है.. तुम दोपहर में गरम तेल से मेरी मालिश कर देना।
विनय बोला- जी मैडम..
और वो चला गया।
मैं नाश्ता करके सोने लगी। मेरी नींद तब खुली.. जब किसी ने जगाया।
‘अरे विनय.. तुम आ गए..?’
‘जी मेम..’
मैं बोली- तेल लाए हो?
‘जी.. गरम करके लाया हूँ।’
‘ठीक है.. फिर अब तो तुम जल्दी से मेरे सारे कपड़े निकाल दो.. और अच्छी तरह से तेल से मालिश कर दो।
विनय ने तुरन्त ही मेरे सारे कपड़े निकाल कर मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया,
मैं भी पेट के बल लेटकर चूतड़ उठा कर मालिश के लिए तैयार हो गई।
विनय रात की मेरी चुदाई के निशान को देखकर बोला- मेम.. यह सब निशान कैसे हैं?
मैं बस विनय को देखकर मुस्कुरा दी।
‘विनय.. तुम बस मेरी मालिश कर दो.. मेरी बदन टूट रहा है.. मेरी चूचियाँ..
चूत और गाण्ड की सब की मालिश कर तू.. फ्री होकर आया है ना..?’
वह बोला- जी.. मैं यहाँ आया हूँ.. ये किसी को नहीं पता।
‘वेरी गुड विनय.. तू मेरी रात की थकान मिटा दे।’
विनय मेरे चूतड़ों से होते हुए कमर.. पीठ तक तेल टपका कर आहिस्ते-आहिस्ते
से मेरे जिस्म की मालिश करते हुए मेरे चूतड़ों तक.. और कभी-कभी मेरी चूत पर
भी हाथ फेर देता।
‘विनय.. तुम भी अपने कपड़े उतार दो.. नहीं तो तेल लग जाएगा।’
विनय भी मादरजात नंगा होकर मेरे ऊपर सवार होकर मेरी मालिश करने लगा।
मालिश के दौरान विनय का मोटा लण्ड मेरे जिस्म पर छू कर सरक जाता था। विनय
ने मेरी गाण्ड की मालिश शुरू करते हुए मेरे चूतड़ों को निचोड़ते हुए मेरी चूत
को भी मुठ्ठी में भरकर दबाकर मेरे जिस्म की मालिश करते हुए अपने लण्ड को
भी मस्ती करा रहा था।
मैंने भी मालिश कराते हुए पलट कर विनय का हाथ पकड़ कर अपनी छाती पर रखवा लिया साथ ही उसका दूसरा हाथ चूत पर रख लिया।
अब मैं विनय से बोली- अब यहाँ की भी मालिश करो न।
विनय अपने हाथ से मेरी चूत की गहराई को नापते हुए मेरे जिस्म को राहत
प्रदान करने लगा। तभी विनय मेरी चूची को मसलते हुए अपने लण्ड से मेरी चूत
की फाकों को रगड़ने लगा। मेरे बुरी तरह थके होने के बावजूद मेरी चूत फड़कने
लगी।
फिर वो धीरे से अपनी एक उंगली मेरी चूत में घुसा कर चूत की फांकों की मालिश
करते हुए बोला- लग रहा है मेम.. चूत बहुत ज्यादा चोदी गई है।
मैंने विनय का कोई जबाब नहीं दिया।
विनय मेरे नंगी चूचियों को मसलते हुए मेरे जिस्म की उतेजना बढ़ाने लगा। पर
मेरे जिस्म में इतनी ताकत नहीं बची थी कि मैं विनय का साथ दे सकूँ, मैं
लेटे हुए ही विनय के मालिश के तरीके का आनन्द ले रही थी।
विनय भी उत्तेजना में गरम हो चुका था, उसकी साँसें ऊपर-नीचे हो रही थीं।
वो दुबारा मेरी चूत के मुँह पर लण्ड लगा कर रगड़ने लगा और उसने मेरी
चूचियों को मुँह में ले लिया। उसकी जोरदार चुसाई से और लण्ड की रगड़ाई से
मेरी बुर पानी छोड़ने लगी।
विनय बोला- मेम आप कहें.. तो चूत मार लूँ।
मैं बोली- नहीं विनय.. अभी तुम जैसे कर रहे हो.. वैसे ही करो.. अभी मेरी चूत दुख रही है।
मैं विनय के बिल्कुल नंगे जिस्म के नीचे थी।
विनय पूरे जिस्म की मालिश और बुर के साथ छेडकानी करते हुए मुझे यौनानंद दे रहा था।
फिर 69 की पोजीशन में आकर उसने अपने लण्ड को मेरे मुँह में दे दिया और
अपने मुँह से मेरी चूत को धीरे-धीरे चाटने लगा। मैं उसके मोटे लण्ड को जीभ
से चाटते हुए हिलाने लगी।
फिर विनय कुछ देर बाद दुबारा मेरे जिस्म की मालिश के दौरान लण्ड का सुपारा
बुर में पेलकर मेरे जिस्म की मालिश करने लगा, वो धीरे-धीरे लण्ड आगे-पीछे
कर रहा था।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
कुछ ही धक्कों के बाद विनय उत्तेजना में होकर तेज गति से मुझे चोदने लगा।
मुझे भी मजा आने लगा.. मैं झड़ गई तभी वो भी अपने लण्ड का सारा पानी मेरे
पेट, चूत और चूचियों पर डाल कर मेरे जिस्म को पकड़ कर लम्बी-लम्बी साँसें
लेने लगा।
थकान के बाद फिर थकान चढ़ती जा रही थी पर मेरी चूत की चुदास कम होने का नाम नहीं ले रही थी।फिर विनय ने धीरे से अपने लंड का सुपारा चूत में घुसा दिया और अपने जिस्म से मेरे जिस्म पर पड़े वीर्य को रगड़ते हुए चूमता रहा।
थकान के बाद फिर थकान चढ़ती जा रही थी पर मेरी चूत की चुदास कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
अब आगे..
काफी देर तक विनय मेरे जिस्म से खेलते हुए मेरी मालिश करता रहा, साथ में दोबारा विनय के लण्ड ने पानी भी छोड़ दिया।
विनय मेरी मालिश करके और लण्ड का पानी निकाल कर थक चुका था।
मैंने भी विनय को कल आने के लिए बोल कर उसको जाने दिया।
चार्ली और रिची की चुदाई से मैं इतना थक गई थी कि मैं कई दिन तक सुनील के द्वारा चुदाई की पेशकश को ठुकराती रही।
लेकिन दिन में विनय आता और मेरी अच्छी तरह मालिश करता और मजे लेकर मेरे जिस्म पर अपना वीर्य उड़ेल कर चला जाता।
पांच दिन बाद एक दिन सुनील सुबह ही आकर बोले- रानी, आज तुम्हारी मीटिंग जरूरी है.. आज एक आदमी बाहर से आगरा घूमने आया है और उसको कोई मस्त चुदासी लड़की चाहिए। अब तो कई दिन हो गए हैं और अब तो तुम पूरी तरह से सही लग रही हो।
मैं बोली- जी सुनील जी.. मैं आज खुद कहने वाली थी कि मेरी चूत के लिए लण्ड खोजो.. ये बहुत मचल रही है। आज आपने मेरी दिल की बात कह दी है। मैं खुद यहाँ इतनी दूर बनारस से बैठने तो आई नहीं हूँ। जितना लोगों के लण्ड से अपनी चूत को लड़ाऊँगी.. उतना ही मेरे पति को मुनाफ़ा होगा। मैं आज ही आराम पा चुकी अपनी चूत से उस अजनबी को खुश करते हुए उसके लण्ड का सारा रस चूस लूँगी।
सुनील मेरी बात से खुश होकर बोले- वाह बिल्कुल सही नेहा जी.. तो बस आप रेडी हो जाओ.. साढ़े बारह बजे चलना है।
फिर सुनील चले गए और मैं नहा कर पूरी तरह मेकअप आदि करके.. अपनी चूत के
बालों को भी साफ़ करके.. लण्ड को चूत में लेने के लिए बैठी सुनील का इन्तजार
कर ही रही थी।
तभी सुनील आ गए और मैं निकल ली।
सुनील मुझे लेकर उस आदमी के गंतव्य स्थान पर पहुँचे और उसके दरवाजे की घंटी बजाई। कुछ ही देर बाद एक अधेड़ ने आकर दरवाजा खोला।
मैं और सुनील अन्दर दाखिल हुए। उसकी उम्र 56 से 59 के करीब रही होगी। उसको
देखकर मेरी चूत की रही सही उत्तेजना शान्त हो गई कि यह मरियल मेरी चूत क्या
लेगा, मेरे से इसे तो मजा आएगा.. पर आज तो मेरी चूत प्यासी ही रहेगी।
तभी सुनील की आवाज से मेरा ध्यान टूटा- नेहा.. इनसे मिलो, ये मिस्टर
महमूद भाई हैं.. ये हैदराबाद से आगरा में कुछ बिजनेस के सिलसिले आते रहते
हैं, इनको हर बार मौज मस्ती का इंतजाम मैं ही कराता हूँ।
मैं भी मस्का लगाते हुए बोली- यह तो मेरी किस्मत है.. जो हुजूर की खिदमत का मौका मिला।
मेरी बातों से सुनील और महमूद हँस दिए।
सुनील ने मेरा परिचय करवाया और सुनील रूपया लेकर मुझे महमूद की बाँहों की शोभा बढ़ाने के लिए मुझे उनके पास छोड़ कर चले गए।
जाते वक्त सुनील बोलते हुए गए- मैं शाम को आउँगा.. महमूद भाई के लण्ड को अपनी बनारसी चूत से तृप्त कर देना।
सुनील के जाते ही महमूद ने मुझे अपने सीने से लगाकर मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मेरी गाण्ड की गोलाई को नापते हुए मुझे किस करने लगे।
काफी देर बाद अपने से मुझे अलग करके मेरे कपड़ों को खोल कर अलग कर दिए, मैं सिर्फ़ ब्रा-पैन्टी में ही रह गई थी।
महमूद अपने ऊपरी कपड़े उतारते हुए साथ में नेकर भी निकाल कर पूरे नंगे हो लिए। मैंने देखा कि बस मेरे चूतड़ और गाण्ड की गोलाई को सहलाकर महमूद का लण्ड मेरी चूत चोदने के लिए फुंफकार उठा था।
महमूद मेरे पास आकर मुझे किस करके लण्ड को चूसने को बोले।
मैं सीधे नीचे बैठ कर महमूद का लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी, महमूद मेरे सर को सहलाते हुए लण्ड चुसवाने लगे।
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मैं महमूद के कटे लण्ड का सुपारा मुँह में लेकर लेमनजूस की तरह खींच कर
चूस रही थी। मेरा बूढ़े महमूद पर अनुमान गलत निकला.. वह तो ढलती उमर में भी
बहुत जोशीला था।
मैं सोचने लगी कि बस चूत चोदकर मेरा पानी निकाल दे.. तब तसल्ली हो।
महमूद मुझे उठा कर बिस्तर पर घोड़ी बनाकर मेरी चूत चाटने लगा जैसे एक कुत्ता कुतिया की बुर चाटता है।
महमूद की चुसाई ने ही मेरी चूत से पानी निकलवाने पर मजबूर कर दिया।
मैं महमूद के मुँह पर पानी छोड़ने लगी और महमूद मेरी चूत का पानी चाट रहा
था। काफी देर महमूद की चूत चुसाई से मेरी चूत चुदने को फड़कने लगी।
मैं चूत चुसवाना छोड़कर महमूद का लण्ड बुर में लेने के लिए पलटकर बोली- मेरी जान.. मेरी बुर में पेल दो अपना लण्ड..
और महमूद ने भी तुरन्त मेरी बुर में अपना फनफनाता हुआ लण्ड पेल दिया।
महमूद का लण्ड मेरी पनियाई हुई बुर में घुसते ही मेरी सिसकारी निकल गई ‘आहहह.. उहउउई.. सीईईईआह..’
मेरी सिसकारियाँ सुन कर महमूद ने मेरी चूत पर ताबड़तोड़ शॉट लगाते हुए अपना लण्ड बाहर खींच लिया।।
मैं मस्ती के नशे में चिल्ला उठी- नहीं म्म्म्त.. निनिकालो.. पेलो.. चो..चो..चोदो मम्म..ममेरी बु..बुर..
पर महमूद ने मेरी एक ना सुनी और मुझे उठाकर अपना लण्ड मेरे मुँह में देकर
बोले- बेबी.. मेरा चुदाई का यही तरीका है। जब चूत ज्यादा गरम हो चुदाई
बंद.. मैं अभी तो में अपना वीर्य तुमको मिलाऊँगा.. फिर तेरी बुर को पानी
पिलाऊँगा…
इधर मैं बिस्तर पर बैठे हुए ही झुककर महमूद का लण्ड ‘गपागप’ चूस रही थी। महमूद पीछे से मेरी चूत मलकर मेरी प्यासी चूत की प्यास बढ़ाते हुए लण्ड चुसाई करवाता रहा।
एकाएक तभी महमूद के मुँह से सिसकारी के साथ वो अनाप-शनाप भी बोलने लगा- ले साली चाट.. मेरे लण्ड को ले.. चूस ले.. पूरा ले.. तेरी चूत मेरे लण्ड को पाकर धन्य हो जाएगी.. मैं चूत का शौकीन हूँ.. आह..सीई.. उह.. ले.. मेरी जान.. मैं गया आह सीसीसीई..
ये कहते हुए उसने ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में डाल कर हाँफते हुए अलग हो गया।
जब महमूद वीर्य छोड़ रहा था.. तभी उसका आधा वीर्य मेरे गले से नीचे हो गया
था.. बाकी लण्ड बाहर करने पर मेरे मुँह से होते हुए मेरी चूचियों पर गिर
रहा था।
मैं वैसे ही जीभ घुमाकर वीर्य चाटे जा रही थी।मैं बिस्तर पर बैठे हुए ही झुककर महमूद का लण्ड ‘गपागप’ चूस रही थी।
महमूद पीछे से मेरी चूत मलकर मेरी प्यासी चूत की प्यास बढ़ाते हुए लण्ड
चुसाई करवाता रहा।
एकाएक तभी महमूद के मुँह से सिसकारी के साथ वो अनाप-शनाप भी बोलने लगा- ले
साली चाट.. मेरे लण्ड को ले.. चूस ले.. पूरा ले.. तेरी चूत मेरे लण्ड को
पाकर धन्य हो जाएगी.. मैं चूत का शौकीन हूँ.. आह..सीई.. उह.. ले.. मेरी
जान.. मैं गया आह सीसीसीई..
ये कहते हुए उसने ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में डाल कर हाँफते हुए अलग हो गया।
जब महमूद वीर्य छोड़ रहा था.. तभी उसका आधा वीर्य मेरे गले से नीचे हो गया
था.. बाकी लण्ड बाहर करने पर मेरे मुँह से होते हुए मेरी चूचियों पर गिर
रहा था।
मैं वैसे ही जीभ घुमाकर वीर्य चाटे जा रही थी।
अब आगे..
पूरे वीर्य को चाट कर साफ करते हुए मैं बाथरूम में चली गई और मैं जब
बाहर आई.. तो देखा कि अभी भी महमूद वैसे ही बिना कपड़ों के पड़े थे। मैं भी
जाकर महमूद के बगल में लेट गई और महमूद ने मुझे खींचकर अपने जिस्म से चिपका
लिया। अब वो मेरे जिस्म को सहलाने लगे। मैंने बूढ़े को देख कर जैसी कल्पना
की थी.. वैसा कुछ भी नहीं था.. बल्कि महमूद तो जवान मर्दों को मात देने
वाला निकला।
एक बार फिर मेरी जाँघों के बीच में दबा हुआ महमूद का लण्ड आहें भरने लगा।
इधर महमूद मेरी चूत और गाण्ड की फाँकों को कस कस कर सहलाते हुए मेरी प्यासी
बुर की प्यास बढ़ा रहे थे।
मैं महमूद के सीने को सहलाते हुए बोली- क्या महमूद डार्लिंग.. आपने मेरी बुर का सौदा किया है.. तो क्या केवल अपनी प्यास मिटाओगे.. मेरी नहीं.. मेरी भी चूत प्यासी है?
महमूद मेरी बात सुनकर बोला- अभी तो पूरा दिन बाकी है रानी.. और तुम इतनी
हसीन हो.. कि तेरी चूत की प्यास तो बढ़ाकर ही मैं मिटाऊँगा.. मेरा लौड़ा
तेरी चूत का पसीना निकाल देगा.. मत घबड़ाओ.. अगर तू विवाहित न होती.. तो मैं
तेरे को अपनी रखैल बना लेता।
‘मैं भी पति के रहते भी खुशी-खुशी आप की रखैल बन जाऊँगी.. पर आप तो बहुत दूर के हैं और मैं बनारस की हूँ।’
तभी एकाएक महमूद मेरे ऊपर सवार होकर मेरी छातियाँ भींच कर मेरे होंठों
को अपने होंठों से दबाकर चूसने लगे। काफी देर तक मेरी छाती और होंठों को
किस करते हुए वो अपने लण्ड को मेरी चूत पर घिस रहे थे।
मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे कोई योद्धा जंग में जाने से पहले अपनी तलवार को धार देता है।
मैं तो काफी देर से प्यासी थी और मेरी 5 दिन से चुदाई भी नहीं हुई थी।
उस पर भी एक तो महमूद ने पहले राउंड में मेरी चूत को बहुत गरम कर दिया था। इन सब का नतीजा यह निकला कि मेरी बुर पानी-पानी हो रही थी। बुर के अन्दर से पानी बाहर तक चिपचिपा रहा था, महमूद अपने लण्ड को मेरी पानी से भिगो रहे थे।
कुछ देर बाद महमूद ने मेरा पैर ऊपर उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और लण्ड
को मेरी चूत पर टिका कर धीमी- धीमी गति से सुपारे को थोड़ा अन्दर-बाहर करते
हुए मुझे चुदाई के सागर में गोते लगवाने लगे।
महमूद की इस अदा से मेरी चूत की फाँकें खुलने-पचकने लगीं। मैं कमर उछाल कर
लण्ड अन्दर लेना चाहती थी.. पर महमूद बड़ी सावधानी से लण्ड को अन्दर जाने से
रोककर केवल सुपारे से ही मेरी बुर की फाँकों से खेलते हुए मेरी बुर की
प्यास बढ़ाते जा रहे थे।
मैं चुदने के लिए व्याकुल हो रही थी.. मैं सिसकारियाँ लेने लगी। सिसकारी के सिवा मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी क्योंकि ड्राईविंग का काम किसी और के काबू में था.. वो जैसा चाह रहा था.. वैसा कर रहा था।
इधर मेरी चूत लण्ड खाने के चक्कर में फूलती जा रही थी। मैंने तड़पते हुए महमूद को भींच कर सिसियाया और आहें भरते हुए ‘आहह.. सिईईईई.. आहउ.. आह.. ससीइ..’ करते मैं बेतहाशा अपनी चूत उछाले जा रही थी।
महमूद का लण्ड अपनी बुर में लेने को मैं मचल रही थी। पर मेरा सारा प्रयास बेकार हो रहा था। मुझे लग रहा था कि महमूद मेरी बुर तड़पाने का ठान चुके थे। मेरी बुर महमूद के पूरे लण्ड को लीलने के लिए व्याकुल हो रही थी।
मेरे मदमस्त जिस्म का और बुर की तड़प बढ़ाने में महमूद एक काम और कर रहे
थे, वे मेरी चूचियों को भींच कर पीते हुए अपने लण्ड का सुपारा मेरी बुर पर
नचा रहे थे, कभी दाईं चूची को.. कभी बाईं चूची मुँह में भर चूसते हुए लण्ड
से मेरी बुर के लहसुन को.. तो कभी मेरी बुर की फाँकों पर.. और कभी हल्का सा
सुपारे को बुर के अन्दर कर देते थे।
महमूद के इस तरह के प्यार से मैं चुदने के लिए पागल हुए जा रही थी।
दोस्तो.. मैं बता नहीं सकती कि मुझे कितना आनन्द आ रहा था।
महमूद मुझे एक मंजे हुए खिलाड़ी लग रहे थे, वे ताड़ चुके थे कि मेरी चूत बहुत बड़ी चुक्कड़ है।
उसी पल महमूद ने मेरी दाईं चूची पर दांत गड़ा दिया और मैंने ‘आईईई.. आहउई..’ कहते कमर उछाल दी।
और यहीं पर मुझे थोड़ा मजा आ गया।
महमूद का दिए हुआ दर्द मेरी चूत के लिए मजा लेने का मौका बन गया और मैंने ‘आहहह.. सीईईई.. आह..ऊई..’ कह कर महमूद की कमर कसकर पकड़ ली.. ताकि लण्ड कुछ देर के लिए ही मेरी चूत में घुसा रहेगा.. पर साला महमूद भी पक्का खिलाड़ी था। उसने तुरन्त अपना एक हाथ मेरी चूत के करीब ले जाकर मेरी जांघ के पास कस कर चिकोटी काट ली।
‘आईईईउई..’ की आवाज के साथ मेरा दांव उलट गया। जो मैंने जितनी तेजी से
कमर उछाल कर लण्ड को बुर में लिया था.. यहाँ यही उलटा पड़ गया, इस चिकोटी के
कारण उतनी ही तेजी मुझे कमर को नीचे करना पड़ा। इसका नतीजा यह हुआ कि महमूद
का लण्ड मेरी चूत से बाहर आ गया।
मैं महमूद की कमर छोड़ कर उनके चूतड़ों पर हाथ से मारने लगी।
महमूद मुझे चिढ़ाते हुए अपने लण्ड को मेरी गाण्ड की दरार से सटाकर मेरी गुदा के छेद को रगड़ने लगे। महमूद के ऐसा करने से तो मेरी चुदने के इच्छा और भी तेज हो गई और मैं महमूद से अपनी बुर चुदवाने के लिए मनौती करने लगी।
मेरी मनुहार से महमूद को शायद मेरे ऊपर दया आ गई, महमूद मुझे चूमते हुए
मेरी नाभि से होते हुए मेरी योनि प्रदेश को चूमने और चाटने लगा, मैं चूत
उठा-उठा कर महमूद से बुर चुसवाने लगी।
मेरी बुर तो चुदने के लिए तड़प रही थी, महमूद के चुसाई से भरभरा गई पूरी बुर
एकदम पकोड़ा सी फूल चुकी थी और चुसाई से राहत के बजाए बुर को अतिशीघ्र
चुदाई की चाहत होने लगी।
तभी महमूद ने मेरी बुर को पीना छोड़ कर मेरे होंठों को चूसते हुए अपने लण्ड को मेरी बुर पर लगा कर हलका सा दबाव देकर सुपारे को अन्दर ठेल दिया।
‘आहहह.. सीसीसी.. ईईई.. आह..’ और मैं महमूद के सीने से लिपट गई।
तभी महमूद ने एक जोर का शॉट मेरी बुर पर लगा दिया।
‘आआ.. उइइइ… सीआह..’ की आवाज के साथ महमूद का पूरा लण्ड मेरी बुर में समा गया।
महमूद एक ही सांस में गचागच लण्ड बुर में डुबोने लगा और मैं चूतड़ों को उछाल-उछाल कर बुर में लण्ड लेने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती थी। महमूद भी मेरी बुर को चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। पूरी लय-ताल से मेरी बुर की चुदाई करते हुए मेरी और मेरे चूत की तारीफ के साथ मेरी बुर का भोसड़ा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।
मेरी बुर भी महमूद के हर शॉट पर फूलती जा रही थी और साथ में पानी छोड़ कर लण्ड को बुर में लेने का कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
मैं मस्ती के आलम में आँखें बंद किए हुए बस बुर को उछाल कर लण्ड खाती रही।
ना जाने कैसे बूढ़े में इतनी ताकत आ गई थी.. वो मेरी बुर की धुनाई करते जा
रहा था और मैं भी एक इन्च बिना पीछे रहे बुर मराती जा रही थी।
तभी महमूद ने गति तेज कर दी और ताबड़तोड़ मेरी बुर पर झटकों की बौछार करने लगा।
मैं लण्ड की लगातार मार से मेरी चूत झड़ने के करीब पहुँच चुकी थी ‘आह..सी.. और पेलो.. और मारो.. निकाल दो.. मेरी चूत की सारी गरमी.. आहह.. सीई.. आह.. ऐसे ही चोदो.. मेरे सनम.. और डालो मेरी बुर में.. लण्ड आहह.. सीई.. मैं गई रे.. आह.. आह.. उई.. चली गई.. आह.. सीसी..’
और मैं महमूद से लिपट कर बुर का पानी निकालने लगी.. पर महमूद अभी भी शॉट लगा रहा था और झड़ती बुर पर शॉट पाकर मेरी बुर का पूरा पानी निकल गया। मेरी पकड़ ढीली पड़ गई।
इधर महमूद अभी भी धक्के लगाए जा रहा था। मेरे झड़ने के 5 मिनट की चुदाई के बाद महमूद ने भी मेरी बुर में अपना पानी डाल दिया और वो शान्त हो गया.. चुदाई का तूफान भी थम गया था।
आप मेरी रसीली कहानियाँ पढ़ने के लिए अन्तर्वासना पर जरूर आया कीजिए।
मेरी चुदाई के हर एपिसोड को जरूर पढ़िए। अगले अंक में आपको एक नई चुदाई का
मजा दूँगी।मैं महमूद से लिपट कर बुर का पानी निकालने लगी.. पर महमूद अभी भी शॉट
लगा रहा था और झड़ती बुर पर शॉट पाकर मेरी बुर का पूरा पानी निकल गया। मेरी
पकड़ ढीली पड़ गई।
इधर महमूद अभी भी धक्के लगाए जा रहा था। मेरे झड़ने के 5 मिनट की चुदाई के
बाद महमूद ने भी मेरी बुर में अपना पानी डाल दिया और वो शान्त हो गया..
चुदाई का तूफान भी थम गया था।
अब आगे..
चूत और लण्ड कि लड़ाई और वासना के खेल शान्त हो चुका था और महमूद अभी मेरी चूत पर ही लदे थे कि तभी बेल बज उठी।
मैंने महमूद की तरफ देखा.. महमूद भी झुंझलाते हुए बुदबुदाए- कौन है?
यह कहते हुए वीर्य से सनी बुर से अपना लण्ड खींचकर तौलिया लपेट कर दरवाजे
की तरफ बढ़े और मैंने वैसे ही अपने नंगे बदन को ढकने के लिए एक चादर खींच कर
अपने जिस्म पर डाल ली।
तभी महमूद ने दरवाजा खोला तो सामने सुनील थे।
‘ओह सुनील भाई, आप..!’
‘जी महमूद भाई.. मैं हूँ.. कहीं गलत वक्त पर एंट्री तो नहीं मार दिया हूँ?’
‘थोड़ा और पहले आते तो जरूर आने की शिकायत करता..’
सुनील और महमूद दोनों लोग आकर बिस्तर पर बैठ गए।
सुनील महमूद को और मुझे देख कर सब समझ गया था कि अभी अभी यहाँ चूत और लन्ड से चुदाई करके वासना का खेल खेला गया है।
उसी समय महमूद बाथरूम चले गए और तभी सुनील ने मेरे चादर के अन्दर हाथ डाल
कर मेरी बुर को सहलाने के लिए ज्यों ही अपना हाथ मेरी चूत पर रखा.. वैसे ही
मुस्कुरा दिया क्योंकि सुनील का हाथ मेरे रज और महमूद के वीर्य से सन गया
था।
उसी वक्त महमूद बाथरूम से बाहर आए और सुनील ने हाथ बाहर खींच लिया।
महमूद बोले- कैसे आना हुआ सुनील जी?
‘वही.. महमूद भाई.. अगर आप की इजाजत हो तो नेहा को ले जाता..’
महमूद ने कहा- सुनील भाई मन तो नहीं भरा है.. वैसे आप की इच्छा.. मैं तो
चाह रहा था कि आज की रात नेहा जी की चूत और चोदता और चुदते देखता.. अगर आप
चाहो तो कुछ और दे दूँ?
अभी सुनील कुछ कहते.. महमूद ने 100 के नोटों की एक गड्डी फेंक दी।
सुनील बिना मुझसे पूछे.. बोले- जब तक आप की इच्छा हो.. आप नेहा जी के जिस्म को भोग सकते हैं।
और सुनील मुझे एक बार फिर महमूद के लण्ड की शोभा बनने के लिए छोड़ कर चले गए।
मैं बिस्तर पर चूत में महमूद के वीर्य को लिए हुए बस सुनील को जाते हुए देखती रही। सुनील के कमरे से जाते ही महमूद दरवाजा बन्द करके मेरे पास आकर बोले- डार्लिंग तुम और तुम्हारी चूत मेरे को भा गई है।
अभी महमूद कुछ और कहते.. मैंने कहा- आपने सुनील से कहा कि नेहा की चूत और चोदता.. पर आप एक चीज और बोले थे कि चुदते हुए देखता.. इसका मतलब नहीं समझी.. यह कैसे सम्भव है?
महमूद मेरी बात सुनकर मुस्कुरा रहे थे.. पर बोले कुछ नहीं और मोबाइल से
किसी को फोन करने लगे। मैं बस चुप होकर महमूद की बात सुनने लगी।
उधर किसी ने ‘हैलो’ कहा.. महमूद ने भी हैलो कहकर बोला- अरे भाई, मैं महमूद बोल रहा हूँ..
और हालचाल के बाद जो महमूद ने उससे कहा उसे मैं सुनकर सन्न रह गई।
उधर वाले ने भी शायद महमूद को कुछ बोलकर फोन रख दिया।
मैं बोली- यह आप किससे बात कर रहे थे और मेरी चूत को चुदने के लिए उससे क्यों कह रहे थे?
महमूद बोले- नेहा जी मेरा शौक है.. मैं जहाँ भी जाता हूँ.. मुझे एक
‘चुदक्कड़’ लड़की चाहिए होती है और उसे चोदने के बाद मुझे उसे चुदते देखने का
भी शौक है और इसी तरह मैं जिस भी शहर में जाता हूँ.. वहाँ एक लड़के को रखता
हूँ।
यहाँ भी मेरा लड़का है.. दीपक राना.. उसी से बात कर रहा था। तुम्हारी चुदाई
के लिए वह आ रहा है। उसे मैंने 10.30 रात तक आने को कहा है।
आज मैं दीपक राना का लण्ड पकड़ कर तेरी चूत में डाल दूँगा और जब दीपक राना
तेरी चुदाई करेगा.. मैं तेरी चूचियां मीसूंगा और तेरी चुदती बुर का पानी
चाटूगा..
एक काम करो नेहा.. तुम बाथरूम जाकर अच्छी तरह फ्रेश हो लो और चलो कहीं घूम
कर आते हैं.. और बाहर ही डिनर कर लिया जाएगा.. ताकि बस रात को तेरी चुदाई
इत्मीनान से देख सकूँ। रानी तू ड्रिंक करती है..?
मैंने ‘ना’ में सर हिलाया..
‘लेकिन नेहा रानी.. आज तुमको मेरी खातिर पीना पड़ेगा.. प्लीज ‘ना’ मत कहना.. नहीं तो मेरा दिल टूट जाएगा..’
मैं बोली- महमूद.. यार मैंने कभी पी नहीं है.. और आपके कहने पर अगर पी ली..
तो मैं नशे में हो जाऊँगी.. और फिर मैं खुल कर साथ नहीं दे पाई तो?
महमूद ने कहा- कुछ नहीं होगा.. तुमको पीना पड़ेगा.. मेरी कसम है तुझे..
मैं फिर कुछ नहीं बोली और सीधे बाथरूम में चली गई, फ्रेश होकर मैंने
चार्ली के द्वारा दी गई ड्रेस पहन ली.. जो कि एक शार्ट स्कर्ट था और ऊपर का
बिना बाजू का एक हॉट सा दिखने वाला टॉप पहन कर तैयार हो गई।
महमूद ने जब मुझे देखा.. तो वो मुझे देखता ही रह गया और बोला- वाहह.. क्या मस्त माल लग रही है मेरी जान..
मैं मुस्कुरा दी।
और फिर हम लोग घूमने निकल गए।
घूमते हुए हम लोग एक मॉल में गए.. और वहाँ पर रेस्टोरेन्ट में बैठ कर खाने का आर्डर दिया।
मैं और महमूद आमने-सामने बैठे थे, महमूद के पीछे वाली टेबल पर एक हेण्डसम
सा लड़का बैठा था। वह लड़का जब से बैठा था.. तभी से मुझे ही देखे जा रहा था।
मैंने उसकी तरफ गौर किया.. तो वह मुझे स्माइल और इशारा देने लगा। उसके इशारे पर मैं बस मुस्कुरा देती.. वह मेरे मुस्कुराने को मेरी रजामंदी समझ कर मुझे इशारे से मिलने को बोलकर एक तरफ चल दिया।
कुछ देर बाद मैंने गौर किया तो पाया कि मेरा आर्डर का टोकन नम्बर 543 था और जो नम्बर चल रहा था.. वह अभी 535 था.. इसका मतलब डिनर आने में करीब 20 मिनट लगने वाला था, तो मैं बाथरूम के बहाने महमूद से बोल कर चल दी।
मैं उसी ओर गई जिस तरफ वो गया था। वह ऊपर जाने वाली सीढ़ी के पास था। मुझे देखकर वह इशारा करके सीढ़ियाँ चढ़ने लगा और मैं उसके पीछे-पीछे चल दी। वो जिस सीढ़ी से चढ़ रहा था.. वह बैक साईड की सीढ़ी थी.. वो लड़का चौथे फ्लोर पर जाकर रूक गया। वहाँ के बाद ऊपर जाने का रास्ता बन्द था और अंधेरा भी था।
मेरे पहुँचते ही उसने मुझे अपने पास खींच लिया, मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर किस करने लगा।
मैं उससे छूटने को छटपटा रही थी.. पर वह एक ढीट लड़का था.. उसने सीधे मेरी
बुर पर हाथ ले जाकर मेरी बुर को दबा दिया और एक हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर
अपने लण्ड पर रख दिया।
पता नहीं.. कब उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था।
साले का लण्ड बेलन की तरह गोल था।
उसका लण्ड हाथ में आते ही मेरा मन उससे खेलने को करने लगा और मैं उसके लण्ड को आगे-पीछे करने लगी।
उसने इसे मेरी रजामंदी मानकर मेरे होंठों को छोड़ कर मुझे नीचे बैठाकर अपना
लण्ड मेरे मुँह में भर दिया.. और मैं भी ‘लपालप’ लण्ड चूसने चाटने लगी।
मैं चाह रही थी कि जल्दी से उसके लण्ड का पानी निकले और मैं चाटकर साफ करके नीचे जाऊँ.. कहीं देर न हो जाए।
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वह लड़का भी ‘गपागप’ लण्ड मेरे मुँह में पेले जा रहा था। कुछ देर की चुसाई के बाद उसने मुझे उठाकर झुका दिया और मेरी छोटी सी स्कर्ट को ऊपर करके मेरी पैन्टी को खींचकर नीचे करके मेरी चूत को मुँह में लेकर चाटने लगा। वह जीभ लपलपा कर चाटता रहा।
मैं बोली- जो करना बे.. जल्दी कर.. मुझे देर हो रही है।
अभी मैं कुछ समझती.. उस लड़के ने तुरन्त चूत पीना छोड़कर अपने लण्ड को मेरी
प्यासी बुर पर लगा दिया और एक जोरदार झटका लगाकर पूरा लण्ड एक ही बार में
अन्दर डाल दिया।
अब उसने मेरी कमर पकड़ कर बिना रूके झटके पर झटका लगाते हुए मेरी बुर ऐसी-तैसी करते हुए मेरी चुदाई करने लगा।
उसके हर धक्के से मेरे मुँह से ‘ऊऊ..न.. आह.. आहहह हईईई.. आहई..ऊऊऊऊऊ’ निकलती।
मैं देश दुनिया से बेखबर बुर चुदाती रही ताबड़तोड़ चुदाई से मेरी बुर पानी
छोड़ रही थी। तभी उसका लण्ड मेरी चूत में वीर्य की बौछार करने लगा। मैं
असीम आनन्द में आँखें बंद करके बुर को लौड़े पर दबाकर उसके गरम वीर्य को बुर
में लेने लगी।
तभी उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। सट.. की आवाज करता लण्ड बाहर था.. और मैं खड़ी होती… इससे पहले वह गायब हो गया।
मैं भी नीचे बाथरूम में जाकर चूत साफ करके मेकअप आदि ठीक करके बाहर आकर महमूद के पास बैठ गई। देखा कि डिनर भी आ चुका था। अब लण्ड खाने के बाद भूख भी जोरों से लगती है न..
फिर मिलेगें बाय..
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मैं देश दुनिया से बेखबर बुर चुदाती रही ताबड़तोड़ चुदाई से मेरी बुर पानी
छोड़ रही थी। तभी उसका लण्ड मेरी चूत में वीर्य की बौछार करने लगा। मैं
असीम आनन्द में आँखें बंद करके बुर को लौड़े पर दबाकर उसके गरम वीर्य को बुर
में लेने लगी।
तभी उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। सट.. की आवाज करता लण्ड बाहर था.. और मैं खड़ी होती… इससे पहले वह गायब हो गया।
मैं भी नीचे बाथरूम में जाकर चूत साफ करके मेकअप आदि ठीक करके बाहर आकर महमूद के पास बैठ गई। देखा कि डिनर भी आ चुका था। अब लण्ड खाने के बाद भूख भी जोरों से लगती है न..
अब आगे..
डिनर करने के बाद हम लोग सीधे कमरे पर पहुँचे और महमूद ने मुझे उसी ड्रेस में रहने को बोला.. जिस ड्रेस में मैं थी।
मैं सोफे पर बैठ गई.. मेरे पास ही महमूद भी बैठकर मेरी जांघ सहलाते हुए बात करने लगे।
‘नेहा.. आज जो लड़का आ रहा है.. दीपक राना.. वो बहुत ही मस्त कद-काठी का
है.. तुम देखोगी तो तेरी बुर पानी छोड़ने लगेगी.. और मैं जो ड्रिंक लेने को
बोल रहा था.. वो इसलिए कि दीपक राना का लण्ड एक सामान्य लण्ड नहीं है..
जैसा कि तुमको आज तक मिला होगा और तुम चूत में ले चुकी होगी। तुम्हारी
जानकारी के लिए बता रहा हूँ.. अगर तुम सब बात जानकर मना करोगी दीपक राना से
चुदने के लिए.. तो मैं दीपक राना को नहीं बुलाऊँगा..
आज तक तुम बहुत मोटे लण्ड से चूत मरवाई होगी.. पर दीपक राना का लण्ड बहुत
ही लम्बा और मोटा लण्ड कहना गुनाह है। दीपक के लण्ड की तुलना घोड़े के लण्ड
से कर सकती हो। एक बात और जो है कि दीपक का लण्ड सुसुप्त अवस्था में भी
बहुत मोटा रहता है.. जब तुम दीपक के लण्ड से बहुत खुल कर खेलोगी.. तब जाकर
कहीं वह चुदाई के लिए तैयार होता है। मैं इसलिए भी बता रहा हूँ क्योंकि
उसके लण्ड को देखकर लड़कियाँ चुदने से मना कर देती हैं। इसलिए बेचारे के मन
से सेक्स की फीलींग ही समाप्त सी हो गई है.. बहुत जगाने पर दीपक का लण्ड
बुर चोदने को तैयार होता है। मैं चाहता हूँ कि तुम मना मत करना.. मैं उसके
लण्ड को तेरी बुर में देखना चाहता हूँ।’
मेरे मन में भी दीपक राना के विषय में सुनकर उसके लण्ड को देखने की
इच्छा जाग उठी थी, मैं भी ऐसे अदभुत लण्ड को देखना और ट्राई करना चाहती थी।
उधर महमूद ने एक अंग्रेजी शराब की बोतल खोल कर दो पैग बना दिए।
मैं बोली- महमूद.. मैं होश में दीपक का लण्ड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ.. नशे में मजा नहीं आएगा।
पर महमूद ने कहा- नहीं रानी.. मेरी बात मानो.. तुम होश में अगर दीपक
राना का लण्ड देख लोगी.. तो तुम्हारी चूत मैदान छोड़ कर भाग जाएगी.. इसलिए
तुम्हारा पीना जरूरी है।
और उसने मेरी तरफ पैग बढ़ा दिया।
मैं भी पैग उठाकर एक ही बार में पी गई.. मैंने करीब तीन-चार पैग गले से उतार लिए.. पहला पैग लेने में थोड़ी दिक्कत हुई.. फिर तो पीने में मजा आने लगा, महमूद पैग देते गए.. मैं पीती गई और मैं नशे में अपनी बुर सहलाते हुए बड़बड़ाने लगी।
तभी बेल बजी.. महमूद ने जाकर दरवाजा खोला और किसी को अन्दर लेकर आए और उसे मेरी बगल में बैठा दिया।
उस लड़के का जिस्म मजबूत कद-काठी का था।
मैं तो पहले ही नशे की हालत में होश खो बैठी थी। उस पर उस लड़के का जिस्म.. मेरी चूत की आग को नशा और भड़काने लगा।
तभी महमूद ने मुझे उस लड़के से चिपका दिया और मैं नशे की हालत में उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी। मैं अपने एक हाथ को उसके पैन्ट पर ले जाकर ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी। काफी देर तक यूँ ही मैं उससे चिपकी रही। मैं अलग तब हुई.. जब महमूद ने मुझे खींचकर अलग किया।
फिर महमूद ने एक-एक करके मेरे सारे कपड़े खींचकर निकाल दिए और उस लड़के को भी इशारा किया। वह भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर मादरजात नंगा हो गया। वो मेरी तरफ बढ़ा.. मेरा ध्यान जब उसकी जाँघों के बीच में गया.. तो मैं उछल पड़ी.. यह साला मर्द है कि राक्षस है..
दैत्याकार लण्ड लिए वो मेरी तरफ बढ़ रहा था। वह मतवाली चाल से मेरे करीब आकर मुझे अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर पटक कर मेरे ऊपर चढ़ बैठा। मैं उसकी बलिष्ठ भुजाओं में फंस कर रह गई थी। दीपक मेरी चूचियाँ भींचने लगा और मेरे होंठों को किस करते हुए मेरी चूचियों को मुँह में भरकर खींच-खींच कर पीने लगा।
काफी देर तक वो मेरे ऊपर चढ़ा रहा। अभी भी उसका लण्ड किसी हाथी के लण्ड के समान झूल रहा था.. पर अभी भी खड़ा नहीं हुआ था।
उधर महमूद बैठ कर देखते हुए उठे.. और नजदीक आकर दीपक को पकड़ कर मुझसे अलग किया।
दीपक नीचे खड़ा हो गया और महमूद उसके लौड़े को दोनों हाथों से पकड़ कर
आगे-पीछे करने लगे, इशारा करके मुझे उसके लण्ड के पास बैठने को कहा और मैं
दीपक के लण्ड के बिलकुल करीब जाकर बैठ गई।
दीपक का लण्ड मेरे नथुनों से टकराने लगा, मैंने न चाहते हुए भी दीपक के
लण्ड को मुँह में लेना चाहा.. पर मेरे मुँह में दीपक का लण्ड गया ही नहीं…
मैं ऊपर से ही लण्ड चाट कर संतोष करने लगी।
कुछ देर की चटाई से दीपक का लण्ड थोड़ा जोर मारने लगा। दीपक के लण्ड के
जोर मारने का एक कारण और भी था। मैं बिस्तर पर से ही दीपक का लण्ड चाट रही
थी और दीपक लण्ड चटाते हुए मेरी बुर को सहला रहा था।
इधर महमूद आगे-पीछे होते हुए बड़े गौर से दीपक को बुर मसकते और मुझे लौड़ा चाटते देख रहे थे।
काफी देर ऐसे ही खेल चलता रहा और दीपक का लण्ड फुंफकार उठा था। पूरी तरह खड़ी हालत में लण्ड देख कर मेरी चुदने की इच्छा खत्म होने लगी और मैं सोचने लगी कि इस लण्ड से नहीं चुद पाऊँगी।
तभी मुझे दीपक ने उठाकर बिस्तर पर पटक दिया.. मेरी चूत पर लण्ड रख कर लण्ड को अन्दर करने के लिए ताबड़तोड़ जोर देने लगा।
शायद वह समझ चुका था कि लण्ड देख कर मेरी गाण्ड फट गई है.. इसी लिए उसने
मुझे जकड़ लिया था और वो मुझे छूटने का कोई मौका नहीं देना चाहता था।
महमूद यह सब देख खुश हो रहे थे.. मैं विनती करते हुए बोली- महमूद मुझे बचा लो.. मुझे इस राक्षस से नहीं चुदना..
पर महमूद मेरी तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहे थे, वो तो दीपक के लण्ड पर थूक और लगाने लगे।
पहले से मेरी पनियाई बुर के मुँह को खोलकर सुपारा भिड़ा दिया और दीपक को जोर
लगाने को कहने लगे। दीपक पूरी जोर से मेरी बुर पर लण्ड चांपने लगा।
‘फक..’ की एक तेज आवाज के साथ दीपक का सुपारा बुर को चीरते हुए प्रवेश कर गया।
मैं चीख पड़ी- आआ.. अरे बाप रे.. न..न..नहीं.. न..नहीं.. चचु..चुद..ना.. आहऊई..माई..
तभी महमूद ने मेरे मुँह पर हाथ रख कर दीपक को पूरा लण्ड जितना जा सके..
डालने को बोले। दीपक पूरे जोर से शॉट पर शॉट मार कर लण्ड अन्दर करता रहा।
मैं बेहोश हो गई और जब होश में आई.. तो दीपक मेरी बुर पर शॉट मार रहा था।
महमूद मेरी चूचियों को चचोर रहे थे।
मेरी चूत में जलन हो रही थी.. मैं फिर छटपटाने लगी.. पर दीपक और महमूद
को कोई रहम नहीं आ रहा था। न जाने कब तक दीपक मेरी बुर चोदता रहा.. और मैं
नीचे पड़ी बुर में लण्ड लेती रही थी।
मेरी बुर फट चुकी थी.. मुझे मजा नहीं आ रहा था.. बस भगवान से विनती कर रही
थी कि कब यह राक्षस मेरी बुर में वीर्य डाल कर मेरी बुर से उतरे और मुझे
राहत हो…
पर साला घोड़े की तरह हुमुच हुमुच कर मेरी बुर के चिथड़े उड़ाते हुए लण्ड को
बुर में पेले जा रहा था और मैं दर्द भरी सिसकियाँ ले रही थी ‘आह.. ऊई.. ऊफ…
आआआ.. ऊऊऊउफ.. आहह..”
दीपक अनगिनत बार मेरी बुर से लण्ड को खींचता और बुर में डाल देता..
तभी एकाएक उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी.. ठाप पर ठाप लगाते हुए अपने वीर्य से बुर को भरकर मुझे कस कर जकड़ कर झड़ने लगा।
उधर महमूद मेरी बुर और दीपक के लण्ड को चाट रहे थे और दीपक बुर में लण्ड चांप कर अन्तिम बूंद तक वीर्य बुर में गिरा रहा था। दीपक मेरी बुर को फाड़ चुका था। मेरी बुर की दीवार से दीपक का वीर्य बह रहा था.. जिसे महमूद मजे से चाट रहे थे।
सच में… दीपक से चुद कर तो जैसे मेरी माँ चुद गई थी।बाय.. फिर मिलूँगी।
आप मेरी रसीली कहानियाँ पढ़ने के लिए अन्तर्वासना पर जरूर आया कीजिए। मेरी चुदाई के हर एपिसोड को जरूर पढ़िए। अगले अंक में आपको एक नई चुदाई का मजा दूँगी।दीपक अनगिनत बार मेरी बुर से लण्ड को खींचता और बुर में डाल देता..
तभी एकाएक उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी.. ठाप पर ठाप लगाते हुए अपने वीर्य से बुर को भरकर मुझे कस कर जकड़ कर झड़ने लगा।
उधर महमूद मेरी बुर और दीपक के लण्ड को चाट रहे थे और दीपक बुर में लण्ड चांप कर अन्तिम बूंद तक वीर्य बुर में गिरा रहा था। दीपक मेरी बुर को फाड़ चुका था। मेरी बुर की दीवार से दीपक का वीर्य बह रहा था.. जिसे महमूद मजे से चाट रहे थे।
अब आगे..
दीपक का लण्ड अभी भी मेरी बुर में था और मैं.. बेजान सी बेड़ पर पड़ी थी, महमूद दीपक राना के लण्ड से निकले वीर्य को चाट रहे थे।
दीपक का लण्ड मेरी बुर में पड़ा पड़ा जब कुछ ढीला हुआ.. तो दीपक ने अपना लण्ड
मेरी चूत से खींचना शुरू किया.. लण्ड जितना बाहर आता जा रहा था.. उतना ही
वीर्य भी बाहर आता जा रहा था, जिसे महमूद मजे लेकर चाटते जा रहे थे।
महमूद की बुर चटाई से चूत को कुछ राहत मिल रही थी।
जैसे ही दीपक का पूरा लण्ड चूत से बाहर निकला.. वीर्य भलभला कर बाहर आने
लगा.. जिसे महमूद ने मेरी गांड से लेकर चूत तक का सारा माल चाट कर साफ कर
दिया।
दीपक का लण्ड निकल जाने पर भी मेरी चूत की फाँकें खुली ही रह गईं.. जैसे कोई बड़ा सा बांस बुर में डालकर निकाल लिया हो।
चूत से लण्ड निकलने के बाद मैं राहत की सांस महसूस कर रही थी।
इधर महमूद पूरी तरह चूत को चाटकर साफ करके मेरे बगल में लेट गए और दूसरी तरफ दीपक मैं उन दोनों के बीच में पड़ी रही। कुछ देर आराम करने के बाद महमूद ने गरम पानी से मेरी चूत की सिकाई की। सिकाई से मेरी चूत को राहत मिली.. पर शायद महमूद मेरी बुर की सेवा करके उसे दोबारा चोदने के लिए तैयार कर रहे थे।
फिर दीपक मुझे अपनी बाँहों में लेकर और लण्ड को बुर पर चिपका कर लेट
गया। उधर पीछे से महमूद ने अपना लण्ड मेरी गान्ड पर लगा दिया और सोने लगे।
मैं दोनों तरफ से एक साथ चुदने के भय से कांप गई।
महमूद ने मुझे समझाया- डरो मत मेरी जान.. आज मैं नहीं चोदूँगा.. आज तुम्हारी चूत को दीपक के नाम कर दिया है.. आज केवल तुम्हारी चूत और गान्ड दीपक लेगा.. ओह्ह.. सॉरी गान्ड दीपक के लण्ड से तो तुम मरवा ही नहीं पाओगी दीपक केवल चूत ही चोदेगा। अभी आराम करो.. थक गई हो।
मुझे भी यूँ लेटे-लेटे नींद आने लगी और मैं सो गई।
मेरी नींद तब खुली जब आधी रात को मेरी चूचियाँ मींजी जा रही थीं और जब मैंने आँख खोली.. तो देखा कि दीपक मेरी चूचियाँ मसल रहा था।
महमूद मेरी बगल में बैठे हुए ये सब देख रहे थे।
दीपक मेरी चूचियों को मींजते हुए मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। मेरी चूचियों को दीपक दबा-दबा कर चूसते हुए मेरे चूचुकों पर जीभ फिराने लगा। दीपक के इस तरह के प्यार से मेरी चूचियां तन गईं और दीपक खूब खींच-खींच कर मेरी चूचियों को पीता रहा। वो दोनों हाथों से चूचियों को दबाते हुए धीमे-धीमे मेरी चूचियों से होते हुए मेरे पेट को चूमने लगा, साथ ही वो मेरी नाभि पर मुँह रख कर मेरी नाभि में जीभ फिराते हुए मेरी नाभि प्रदेश को जीभ से कुरेदने लगा।
इस बार दीपक मेरे जिस्म से इस तरह से खेलते हुए प्यार कर रहा था कि मेरी
चूत खुद ब खुद कुलबुलाने लगी, मैं दीपक के प्यार को पाकर पिघलने लगी।
दीपक धीमे-धीमे नीचे मेरी चूत की तरफ चूमते हुए बढ़ने लगा और मेरी बुर पर जीभ नचाने लगा।
अभी भी दीपक मेरी चूचियां मींज रहा था और नीचे मेरी बुर चाट रहा था।
दीपक की बुर चटाई और प्यार को पाकर मेरी बुर दीपक का लण्ड लेने के लिए मचलने लगी जब कि मेरी पहली चुदाई में दीपक ने मेरी बुर को चोदकर सत्यानाश कर दिया था, फिर भी इस बार मैं दीपक के लण्ड को अपनी बुर में लेने के लिए मचलने लगी थी और दीपक मेरी बुर की फांकों को एक-एक कर चाटे जा रहा था और मैं कमर उचका कर बुर चटाई करवाते हुए.. मन ही मन सोच रही थी कि दीपक के लण्ड ने पहली चुदाई में मुझे बहुत तकलीफ दी थी.. पर इस बार मैं दीपक के लण्ड को अपनी बुर में मजे लेकर चूत चुदवाऊँगी।
एक बार तो दीपक का लण्ड मेरी बुर में जा ही चुका है और अन्दर जाकर मेरी बुर को ढीला कर ही दिया है.. अब चुदाई में उतनी तकलीफ नहीं होगी। नीचे मेरी बुर को दीपक खींचकर चूस रहा था और मेरी बुर दीपक का प्यार पाकर पानी छोड़ने लगी, मैं मचलते हुए कमर उचका कर चूत चटवाते हए सिसियाने लगी।
‘आह.. सिसिई.. आहहह.. सीइइ.. उई आह.. दीपक मेरी चूत आपके लण्ड के लिए तैयार है.. मेरी जान एक बार फिर मैं आपके लण्ड को चूत में लेना चाहती हूँ..’ प्यार से मेरी चूत में अपना लण्ड को उतार दो जानूँ.. तेरा प्यार पाकर मेरी बुर तेरे लण्ड के स्वागत के लिए तैयार है.. आहहह.. सीसीसीईईई.. बस अब प्यार से मेरी बुर चोद दो.. आहह..’
मेरी बेताबी देखकर दीपक मेरी चूत चाटना छोड़कर मेरे ऊपर सवार हो गया और
मुझे अपनी बाँहों में दबाकर अपना मोटा लण्ड मेरी चूत पर सटाकर मेरे होंठों
को किस करने लगा।
उधर मेरे और दीपक के लण्ड और चूत के खेल को महमूद बैठे हुए देख रहे थे।
तभी दीपक मेरी चूत पर दबाव बढ़ाने लगा, उसका सुपारा अन्दर जाता.. इससे पहले
ही मैं छटपटाते हुए बोली- प्लीज.. नहीं ऐसे नहीं.. मैं मर जाऊँगी..
इस बार दीपक भी मुझे बेदर्दी के साथ नहीं चोदना चाहता था.. शायद इसी लिए लण्ड का दबाव कम कर दिया।
तभी मेरी चूत पर किसी की साँसों गरमाहट महसूस हुई।
बगल में महमूद नहीं थे.. एकाएक महमूद दीपक के लण्ड को और मेरी बुर को एक साथ चाट रहे थे। शायद दीपक के लण्ड को गीला कर रहे थे।
कुछ देर चाटकर महमूद ने ढेर सारा थूक निकाल कर दीपक के सुपारे पर लगा दिया
और दीपक का लण्ड मेरी चूत पर सैट करके मेरे पैरों को फैलाकर चूत की फांकों
को चौड़ा करके दीपक के चूतड़ों पर दबाव दे दिया, दीपक ने महमूद का इशारा पाकर
लण्ड का दबाव दुबारा मेरी बुर पर बढ़ा दिए।
सुपारा अन्दर प्रवेश कर गया और मैं चीख उठी- आह्ह… उईई माँ… फट गईई… फट गई… मरर… गईई…
मेरी चीख सुन कर दीपक नी चूत पर लण्ड का दबाव कम कर दिया.. पर मैं इस
बार दीपक के मोटे लण्ड को अपनी चूत में लेना चाहती थी और अपनी गरम चूत को
दीपक के लण्ड से लड़ाना चाहती थी।
दीपक के लण्ड ने तो पहली चुदाई में मुझे तो केवल दर्द ही दिया था.. पर इस
बार अपनी चूत दीपक के लण्ड से चुदवा कर मैं अपनी बुर का पानी निकलवाना
चाहती थी।
इस चुदाई में दीपक मुझे बड़े प्यार से चोदना चाहता था.. मैं कराहते हुए दीपक
से बोली- प्लीज दीपक.. रूको मत.. डालते जाओ.. मेरी बुर में लण्ड आहह..
दीपक एक बार फिर लण्ड को मेरी बुर में डालने लगा और मैं दांत भींच कर दीपक का लण्ड चूत में लेने लगी।
आहिस्ता-आहिस्ता दीपक ने मेरी चूत में अपना तीन चौथाई हिस्सा लण्ड उतार कर मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा।
दीपक चूचियों को चूसते हुए मेरी बुर से लण्ड खींचता.. फिर अन्दर डाल देता। दीपक के बार-बार लण्ड अन्दर-बाहर करने से मेरी चूत ढीली होकर पानी छोड़ते हुए लण्ड लेने के लिए फूलकर कुप्पा हो गई थी, अब आसानी के साथ दीपक का लण्ड मेरी चूत में.. आने-जाने लगा और मैं भी कमर उठाकर कर लण्ड को चूत में लेने लगी।
इधर महमूद मेरी जाँघ के पास बैठ कर चुदाई देखते हुए लण्ड हिला रहे थे, दीपक मेरी चूत में लण्ड की रफ्तार बढ़ाते जा रहे थे।
मुझे अब दीपक के लण्ड से धीमे-धीमे चूत चुदाना अच्छा लगने लगा, मैं चूत में
लण्ड लेते हुए सिसकारी लेने लगी- म्म्म्मीम.. ह्म्म्म्म म आआअहह.. हाआअ..
सिईम्म्मा.. मम्म्म.. हाय.. आह.. आअहह आअहह.. म्म्म्म मम..
फिर मैंने दीपक को अपनी ओर भींच लिया ‘आह्ह्ह्ह.. दीपक.. मारो मेरी चूत.. चोदो मेरी चूत..।’
अब मुझे भी मज़ा आ रहा था और मैं भी चूत उठाकर चुद रही थी, दीपक अपनी रफ़्तार बढ़ाता रहा। अब वो पूरे जोश के साथ मुझे चोद रहा था।
मैं भी मस्त हो चुकी थी, चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, मेरी चूत का खूब
सारा रस दीपक के लण्ड पर भी लग गया था, मेरी चूत भी अब दीपक के लण्ड का
स्वागत कर रही थी और मैं अपनी जाँघों को खोल करके लंड को पूरा रास्ता दे
रही थी।
अब उसका लंड मेरी चूत में सटासट अन्दर-बाहर होने लगा था, दीपक की रफ़्तार भी अब काफ़ी तेज हो चुकी थी, मैं दीपक की चुदाई से मस्त होकर झड़ने के करीब थी, मेरा पानी निकलने वाला था और दीपक ‘गपगप.. खचखच..’ लण्ड मेरी बुर में पेले जा रहा था।
मैं इस मस्त चुदाई की मस्ती में अपनी गाण्ड उठा कर चरम पर आ गई ‘आहहह..
सीसीसीईई.. आह.. उउउउइ.. आह.. धीमे आह.. मैं गई राजा.. आह.. म्म्म्ममी..
आहसीईई..’
मैं जाँघें भींच कर झड़ने लगी। दीपक मेरी चूत में लगातार झटके मारता रहा और
जब दीपक के लण्ड ने मेरी चूत में पानी छोड़ा.. तो दीपक मुझे दबोचते हुए चूत
में वीर्यपात करने लगा।
उधर महमूद ने भी मेरी चुदती चूत देखकर अंतिम बार मुठ्ठ मार कर मेरे मुँह पर
वीर्य छोड़ दिया। एक साथ दोनों ने मेरी बुर और मुँह को वीर्य से सान दिया।
आप मेरी रसीली कहानियाँ पढ़ने के लिए अन्तर्वासना पर जरूर आया कीजिए। मेरी चुदाई के हर एपिसोड को जरूर पढ़िए। अगले अंक में आपको एक नई चुदाई का मजा दूँगी।मेरा पानी निकलने वाला था और दीपक ‘गपगप.. खचखच..’ लण्ड मेरी चूत में पेले जा रहा था।
मैं इस मस्त चुदाई की मस्ती में अपनी गाण्ड उठा कर चरम पर आ गई ‘आहहह.. सीसीसीईई.. आह.. उउउउइ.. आह.. धीमे आह.. मैं गई राजा.. आह.. म्म्म्ममी.. आहसीईई..’
मैं जाँघें भींच कर झड़ने लगी।
दीपक मेरी चूत में लगातार झटके मारता रहा और जब दीपक के लण्ड ने मेरी चूत में पानी छोड़ा.. तो दीपक मुझे दबोचते हुए चूत में वीर्यपात करने लगा। उधर महमूद ने भी मेरी चुदती चूत देखकर अंतिम बार मुट्ठ मार कर मेरे मुँह पर वीर्य छोड़ दिया। एक साथ दोनों ने मेरी बुर और मुँह को वीर्य से सान दिया।
अब आगे..
अब पूरी तरह चुदाई का दौर शान्त हो चुका था। सुबह सुनील के आते ही मैं अपनी चुदी हुई चूत लेकर महमूद और दीपक को अलविदा कहकर सुनील के साथ कमरे पर आ गई। कमरे पर मेरे पति मेरा इंतजार कर रहे थे।
सुनील चाय लेकर आया, फिर हम तीनों ने बैठ कर चाय पी और मैंने उसी समय अपना एक फैसला पति और सुनील को सुनाया।
मैं बोली- सुनील जी.. मुझे अब बनारस वापस जाना है और अब आप मेरी कोई मीटिंग
मत रखिएगा.. और आपने जो प्यार और मदद की.. मैं उसका धन्यवाद करती हूँ।
मैंने पति से भी पूछा- क्यों.. आपको कोई प्रॉब्लम?
पति बोले- नहीं.. मैं भी यही चाहता हूँ।
पति ने भी सुनील को ‘धन्यवाद’ दिया और सुनील से भी पति ने पूछा- नेहा का निर्णय आपको बुरा तो नहीं लगा?
सुनील बोले- नहीं आकाश जी.. बुरा आप के जाने का नहीं लग रहा है.. बुरा लग
रहा है बिछुड़ने का.. पर जाना जरूरी है और जब भी आप लोगों को आगरा आने का
दिल करे.. तो सुनील आपके स्वागत में हमेशा तैयार है। आकाश जी.. आपको जो
पैसा दिया है.. और आज की टोटल कमाई भी मैं आपको दे देता हूँ। मुझे आप लोगों
से कोई दलाली नहीं लेनी और आप आज अपने सारे पैसे को बैंक में जमाकर दें..
साथ लेकर जाने की जरूरत नहीं है।
पति ने कहा- ठीक है.. ग्यारह बजे चलेगें.. तब तक आप लोग फ्रेश हो लीजिए।
सुनील जब चलने लगे.. तो मैं बोली- सुनील जी.. मैं आपका एहसान नहीं चुका सकती..
सबकी आँखों में बिछोह के कारण आँसू निकल आए थे। फिर हम लोग नहा-धोकर नाश्ता करके सुनील का इन्तजार करने लगे।
तभी सुनील भी आ गए.. जब पति और सुनील जाने लगे.. तो मैं बोली- मैं भी चलती
हूँ आपके साथ.. आप लोग बैंक चले जाना.. और आज मैं अपनी मरजी से अकेले घूमकर
शाम तक कमरे पर आ जाऊँगी।
उन लोगों के बैंक जाने के बाद मैं यूँ ही घूमते हुए ताजमहल देखने चली गई।
मैं काफी देर तक ताज देखती और घूमते हुए एक जगह बैठ गई। मुझे अकेला देखकर 42-45 साल का एक मर्द आकर मेरे करीब बैठ गया।
उसे देख कर लग रहा था कि वह मुझसे बात करना चाहता है।
फिर कुछ देर बाद वह बोल ही दिया- क्या आप अकेली ही आई है घूमने।
‘जी अकेली हूँ..’
‘ओह.. मैं भी अकेला हूँ.. आप बुरा ना माने.. तो क्या मैं आपके पास बैठ सकता हूँ?’
‘यस.. नो प्रॉब्लम..’
वह मेरे करीब आकर बैठकर बात करने लगा, मुझे भी उससे बात करना अच्छा लग
रहा था, वह एक सुन्दर गठीला बदन का मालिक था। मैं उसके प्रति आकर्षित होने
लगी।
मैंने उससे पूछा- आप कहाँ से हो?
वह बोला- मैं तो इलाहाबाद का हूँ मैडम..
मैं बोली- मेरा नाम नेहा है और मैं वाराणसी की हूँ..
‘अरे वाह.. आप तो मेरी तरफ की ही हो..’
‘आप यहाँ घूमने आए हो?’
‘नहीं नेहा.. मैं यहाँ नौकरी करता हूँ.. यूँ ही आज ताज देखने चला आया और देखिए आपसे मुलाकात हो गई।’
‘वो तो है.. और आपकी फैमली भी है?’
वह मायूस होते बोला- नहीं नेहा जी.. मैं अकेला हूँ।
‘तब तो सर जी आपको..’
वह बीच में बोल बैठा- मेरा नाम सर जी नहीं.. अभिजीत है..
‘जी अभिजीत.. आपको तब तो बीवी की याद सताती होगी।’
वह शरमाते बोला- याद के सिवा मैं कर भी क्या सकता हूँ नेहा जी।’
उसकी बात भी सही थी.. लेकिन मैं जानबूझ कर कुछ अश्लील मजाक करना चाहती थी, मुझे अभिजीत से बात करना अच्छा लग रहा था।
मैं बोली- बाकी का काम कैसे करते हो? जब बीवी की याद सताती होगी।
वह मुस्कुरा दिया- कुछ नहीं.. यूँ ही रह लेता हूँ..
मैं थोड़ी और बोल्ड होते हुए बोली- मैं कैसे मानूँ अभिजीत जी कि वाईफ की याद आने पर आप कुछ नहीं करते.. बताईए ना?
अभिजीत शरमाते हुए बोला- आप बुरा मान जाओगी।
मैं बोली- तुम बताओ तो सही.. मैं बुरा नहीं मानूँगी।
अभिजीत सर को झुका कर बोला- मुट्ठ मार लेता हूँ.. जब याद ज्यादा आती है।
मैंने उसको लाईन पर आता देख बात को आगे बढ़ा दिया।
‘तब तो आप बहुत गलत करते हो.. बीवी को यहीं ले आओ.. और अपनी तन की प्यास बुझाओ..’
मैंने एक साथ कुछ ज्यादा अश्लील शब्द बोल दिए।
वह बोला- वाईफ को यहाँ लाना सम्भव नहीं है।
‘तो फिर तुम किसी और के साथ क्यूँ नहीं कर लेते?’
वह बोला- नेहा यह सब किसी के साथ कैसे कर सकता हूँ.. कौन मिलेगा और मैं गन्दी जगह जाना नहीं चाहता।
मैं बोली- कोई घरेलू शादीशुदा औरत देख लो.. बहुत मिल जाएंगी।
वह मेरी बातों से समझ गया कि उसके थोड़ा आगे बढ़ने पर मैं ही वह औरत हो सकती हूँ.. पर वह भी जानबूझ कर बात घुमा रहा था।
‘आपके पति कहाँ हैं.. क्या आप अकेली आई हो बनारस से?’
‘नहीं.. अभिजीत मैं अकेली नहीं आई हूँ पति भी साथ हैं.. पर आज मैं अकेली
घूमने निकली हूँ और वैसे पति को काम के सिवाए मैं दिखती ही नहीं.. उनके साथ
से अच्छा मैं अकेली ठीक हूँ।’
मैं जानबूझ कर पति के बारे में झूठ बोली थी।
‘आप कब तक खाली हैं?’
मैं बोली- शाम तक या उससे भी अधिक समय है मेरे पास।
वह डरते हुए बोला- आपको बुरा ना लगे तो यहाँ बैठने के अलावा हम दोनों मेरे
कमरे पर चलते.. वहीं बैठकर बातें करते और मेरे कमरे की चाय भी पी लेतीं।
मैं बोली- आपके साथ मैं आपके कमरे पर चली.. तो कहीं लोग गलत ना समझें.. कि आप मेरे साथ..
मैंने जानबूझ कर बात अधूरी छोड़ दी।
‘नहीं नेहा.. कोई कुछ नहीं सोचेगा.. क्यूँ कि मैं आज तक किसी को लाया ही
नहीं कमरे पर.. और मेरा कमरे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में है। आप जब तक
चाहें.. वहाँ रुक सकती हो।’
फिर मैं बात करते हुए अभिजीत के कमरे पर पहुँची, अभिजीत ने अपने हाथों से चाय बना कर मुझे पिलाई।
अभिजीत मेरे पास चुपचाप बैठा था।
मैं बोली- आपका कमरा तो बढ़िया है.. पर यहाँ एक औरत की जरूरत है.. जो आपको
और घर को सुख दे सके। मुझे लग रहा है आज तक इस कमरे में सेक्स की किलकारी
नहीं गूंजी हैं।
यह सब मैं जानबूझ कर कह रही थी।
तभी वह बोला- नेहा आप चाहो तो अभी किलकारी गूँज उठें।
यह कह कर अभिजीत मुझे किस करने लगा।
मैं बोली- यह क्या कर रहे हो.. प्लीज ऐसा मत करो..
तभी अभिजीत बोला- तुम भी तो यही चाह रही थी नेहा.. अब मना मत करो। मैंने अब
तक किसी गैर औरत से सेक्स किया नहीं है.. पर मेरे पास उम्र का अनुभव तो
है।
यह कहता हुआ वह मेरे अंग-अंग को चूमने लगा और मैं भी एक प्यासा मर्द
पाकर चुदाई के नशे में उसके आगोश में बैठकर सेक्स का खेल खेलने लगी।
मेरी चूत की प्यास भी तेज होने लगी, वह मेरी चूचियों को मसलने लगा और मैं
अपने मम्मे मसलवाते जानबूझ कर एक भरपूर अंगड़ाई लेकर अभिजीत को अपनी बाँहों
भर के चुदाई का खुला निमंत्रण देते हुए वहीं सोफे पर लेटे गई।
उसने मेरे बड़े-बड़े मम्मों को अपनी मजबूत चौड़ी छाती के बीच दबा कर
मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और अपने होंठों को मेरे नाजुक होंठों पर
कसकर.. उनका रसपान करने लगा।
मैं उसकी मजबूत बाँहों में कसमसाते हुए बोली- मैं आपकी बीवी नहीं हूँ.. एक अंजान औरत हूँ।
वह बोला- मेरे लिए दोनों एक जैसे हैं। क्योंकि बीवी को चोदने में यही फीलिंग होती है।
फिर अभिजीत ने उठकर अपने और मेरे कपड़े निकाल दिए और मेरे चूचों को पीकर मुझे लण्ड चूसने को बोला।
मैं अभिजीत का लण्ड मुँह में भर कर चूसने लगी, कुछ देर की चुसाई से अभिजीत का लण्ड फनफनाने लगा।
फिर अभिजीत ने मुझे सोफे पर लिटाकर लण्ड को पकड़ कर मेरी चूत के मुँह पर रख
एक झटका दिया, मेरी चिकनी बुर में अभिजीत ने अपने लण्ड का सुपारा धकेल
दिया।
मैं भी कमर उचाकर चूत में लण्ड लेने की कोशिश कर रही थी। अभिजीत झटके पर
झटके देते हुए पूरा लण्ड मेरी बुर में डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा।
‘आआह्ह.. जान.. मजा आ रहा है.. खूब चोदिए मुझे.. वाह और जोर से..
डालिए.. वाह.. बहुत अच्छे से चोद रहे हो इस्स्स्स्स् स्स्स्स.. मेरी बुर को
खूब चोदो.. जम कर चोदो..’
‘ले.. चूत उठाकर चुद.. मेरे लण्ड से.. वाह.. आज तुमने बहुत मजा दिया मेरी
रानी.. वाह नेहा.. तुमने अपनी चूत देकर मुझे धन्य कर दिया।’ ये कहते हुए
अभिजीत मेरी चूत पर शॉट पर शॉट मारते हुए मेरी चूत का पोर-पोर हिला कर मेरी
चुदाई कर रहा था।
मैं चूत और कमर उछाल कर लण्ड बुर में लेती जा रही थी ‘आह्ह.. मुझे खूब
चोदो.. जम कर पेलो.. मेरे बुर में अपना लन्ड.. मेरे अजनबी सनम.. आहह..
इइइस्स्स्स्.. आह्ह्ह्ह्ह..’
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अभिजीत भी जम कर मेरी बुर को चोद रहा था।
थोड़ी देर बाद अभिजीत ने मुझे पलटने को कहा और मैं पलट गई।
अब मैं कुतिया बनी हुई थी और अभिजीत कुत्ते की तरह मुझे चोद रहे थे और वैसे
ही वो हाँफ़ भी रहे थे। अभिजीत का लण्ड मेरी चूत से टकरा कर ‘थप-थप’ की
आवाज कर रहा था। मैं मजे से मदहोश हुई जा रही थी।
तभी अभिजीत बोले- आह नेहा.. अब मेरा निकलेगा.. तेरी गरम बुर पाकर मेरा लण्ड झड़ जाएगा.. आआह्ह्ह.. आअह्ह्ह्ह.. आआह्ह्ह्ह..।
इस तरह की मादक आवाज निकालते हुए अभिजीत ने मेरी बुर में अपना वीर्य भलभला कर छोड़ने लगे।
मैं भी अभिजीत के गरम वीर्य को पाकर झड़ गई। अभिजीत बहुत प्यासा था.. उसने
शाम तक मेरी दो बार और चुदाई की और फिर भी हम दोनों का मन नहीं भरा था। मन
मार कर वहाँ से मुझे आना पड़ा।
मेरे प्यारे दोस्तो.. आज मैं कहानी की यह सीरीज ‘आज दिल खोल कर चुदूँगी’ का अंतिम भाग आप लोगों के सामने रख रही हूँ.. पर इसका मतलब यह नहीं कि आगे मेरी चुदाई नहीं हुई है। मैं फिर हाजिर होऊँगी.. एक नई कहानी के साथ.. क्योंकि मैं अभी तक लण्ड से बुर लड़ा रही हूँ।
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