सभी लड़कियों, भाभियों, को रोहित का प्रेम भरा नमस्कार!
मेरा नाम रोहित है, आयु 24 वर्ष और शरीर से, कर्म से, इस प्रकृति में
नारियों को, सम्भोग में संतुष्ट करने के लिए ही पैदा हुआ हूँ। मेरे लण्ड का
नाप 8 इंच है। जिन लड़कियों, आंटियों, भाभियों को मैंने अभी तक चोदा है, वे
ही मेरे लण्ड की महिमा समझ सकती हैं।
मैं जिगोलो हूँ और नागपुर और पुणे में रहता हूँ। पहले मैं स्टडी के लिए
पुणे गया था, हालांकि अभी भी वहीं पढ़ता हूँ। मैंने जिगोलो का काम शुरू
किया था, पर पुणे में होते हुए भी मेरे लिए नागपुर से बहुत कॉल आते थे
इसलिये मैंने सोचा कि नागपुर में कस्टमर की कमी नहीं है तो क्यों न अपने
नागपुर जाकर ही यह काम किया जाए, इसलिये मैं वापस आ गया।
काम अच्छा चल रहा है, कभी पुणे से मुझे कॉल आते हैं तो वहाँ चला जाता हूँ और अक्सर कई बार मेरे साथ बहुत सी ऐसी रोमांचक और सैक्सी घटनायें होती हैं जिन्हें मैं किसी से नहीं बता सकता, पर अन्तर्वासना के माध्यम से अब मैं आपको बता सकता हूँ।
चलो, अब एक और सत्य घटना सुनिए।
इस बार मुझे पुणे से 29 साल की एक अविवाहिता लड़की का कॉल आया, उन्होंने
बताया कि वे प्राइवेट जॉब करतीं हैं और मेरी सेवायें लेना चाहती हैं।
मैंने आने के लिए हाँ कहा।
उन्होंने मुझे डेट बताई कि ‘इस दिन शाम को 8 बजे के बाद आप मुझे मोबाइल पर कॉल करना, मैं बता दूँगी कि किधर आना है।’
उन्होंने अपने घर का पता नहीं बताया।
मैंने कहा- ठीक है।
मैं उनके द्वारा बताये हुए दिन पर निश्चित समय पर पहुँच गया। फ्रेश होकर साढ़े आठ पर मैंने उनको कॉल किया तो उन्होंने मुझे एक शादी गार्डन का पता बोला ‘यहाँ चले आओ शादी है। गार्डन के बाहर पहुँच कर मुझे कॉल करना।’
मैं ऑटो से उस पते पर पहुँचा, मुझे वह गार्डन मिल गया। मैंने बाहर से ही उन्हें फोन लगाया और अपना हुलिया बताया।
उन्होंने मुझे बाहर ही रुकने को बोला। कुछ देर बाद एक बेहद खूबसूरत 28-30 साल की लड़की साड़ी पहने हुए, बालों में फूल लगाए हुए, एकदम सज़ी-धजी गेट से बाहर आई।
वो आपने कान पर मोबाइल लगा कर किसी को खोज रही थी। तभी मेरे मोबाइल की घंटी बज़ी। अब तक वो मेरे पास पहुँच चुकी थी। मेरे मोबाइल की घंटी उसे भी सुनाई दे गई होगी। मैं अपनी जेब से मोबाइल निकाल ही नहीं पाया कि घंटी बंद हो गई।
मैं भी उन्हें ही देख रहा था। उन्होंने मेरे पास में खड़े होकर मुझसे बोला- आप आ गये?
मैंने बोला- आपने बुलाया और हम चले आये।
वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।
वो मेरे पास आईं और मुझसे पूछा- आप रोहित?
मैंने कहा- जी, मैं ही रोहित हूँ।
हम दोनों ने हाथ मिलाये।
उन्होंने बताया- यह मेरी बड़ी दीदी की शादी है। बस कुछ देर में प्रोग्राम ख़त्म हो जाएगा। तुम आओ मेरे साथ, खाना खा लो।
मैंने कहा- ठीक है।
मैं खाना खाने लगा। पर वो स्टेज से लगातार मुझे देख रही थी, मैं भी उन्हें देख रहा था। वो लगभग 28 साल की सुंदर लड़की थी। उनका जिस्म बिल्कुल प्रियंका चोपड़ा की तरह बहुत ही सेक्सी लग रहा था।
मैं खाना खा चुका था और एक कुर्सी पर बैठ कर कॉफी पीने लगा।तभी मैंने देखा कि दूल्हा-दुल्हन और सब लोग स्टेज से उतर कर खाना खाने के लिए जा रहे हैं।
वो मेरे पास कॉफी लेकर आई और मुझसे पूछने लगी- तुमको कोई परेशानी तो नहीं हुई है?
मैंने कहा- नहीं।
उन्होंने बताया- यह मुझसे बड़ी दीदी की शादी है।
मैंने कहा- हाँ, इंतज़ाम देखने से ही पता चलता है और यह शादी के मतलब की बहुत बढ़िया जगह भी है।
उसने बताया- ये जो दो आजू-बाजू में कमरे हैं, उनमें से एक में लड़की और एक में लड़के के लिए अलग कमरे दिए गये हैं। अब स्टेज प्रोग्राम ख़त्म होने के बाद फेरे आदि का कार्यक्रम है, जहाँ यह प्रोग्राम होना है, उधर ही मेरा कमरा है, यहाँ बहुत से लड़के लड़कियाँ हैं। किसी को कोई शक नहीं होगा कि आप किस की तरफ से यहाँ आए हुए है। मेरा मतलब है, लड़के वालों की तरफ से या लड़की वालों की तरफ से।
मैं ध्यान से उसकी बातें सुन रहा था। वो यह सब मुझसे बोल तो रही थी, पर बोलते बोलते उसकी साँसें फूल रहीं थीं। मैं उसकी स्थिति समझ रहा था।
उसने मुझे बताया- मैं मांगलिक हूँ, इस वजह से अभी तक मेरी शादी कहीं तय नहीं हो पाई है। मेरे साथ की सब लड़कियों की शादी हो चुकी है और उनके बच्चे भी हैं। इस उमर में सेक्स को लेकर मेरा क्या हाल हो रहा होगा, तुम समझ सकते हो। इसलिए मैंने तुमसे कॉन्टेक्ट किया है, पर रोहित, यह हमारी पहली और आखिरी मुलाकात होगी।
मैं उसकी सब बातें सुनने के बाद बोला- अगर कभी आप मार्केट जाती हैं और अगर आपकी जूस पीने की इच्छा होती है, तो आप शॉप पर जाकर जूस पीती हैं, पैसे देतीं हैं, और घर आ जाती हैं, है न! वहाँ का गिलास थोड़ी ना घर लेकर आती हो। वैसे ही आपने मेरी सर्विस खरीदी है, मुझे नहीं। आप से आज के बाद मेरा कोई मतलब नहीं रहेगा, आप निश्चिन्त रहें।
वो मुस्कुराने लगी। हम 30 मिनट तक बातें करते रहे। इस बीच दूल्हा-दुल्हन उस कमरे की तरफ जाने लगे जहाँ मंडप बना हुआ था। और उधर ही प्रिया का रूम भी था।
वो बोली- उठो और साथ में चलो।
हम भी दूल्हा-दुल्हन की भीड़ के साथ शामिल हो गये। प्रिया का कमरा अन्दर से बहुत ही अच्छा फाइव स्टार होटल की तरह का रूम था। बड़ा बेड था और टीवी, फोन रखे हुए थे। कमरा महक भी रहा था। उसने एसी ऑन कर दिया।
बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था, मैंने झाँक कर देखा तो बहुत बड़ा और सुंदर बाथरूम था। उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
मैं बेड पर बैठ गया, दीवार से पीठ टिका कर लेट गया। मैंने टीवी ऑन किया और देखने लगा। प्रिया बेड के पास खड़ी हुई थी। मुझे देखे जा रही थी। साँस लेने के कारण उसके बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे। मैंने उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ाया। कुछ देर बाद, उसने मेरा हाथ पकड़ा तो मैंने उसे बिस्तर पर खींच लिया। वो बड़ी अदा से मेरे सीने पर गिर पड़ी।
हम आधे लेट हुए थे, उसका सर मेरे सीने पर था। एक हाथ से मैं उसे थामे हुए था और एक हाथ से मैंने उसके गालों को छुआ। उसने आँख बंद कर ली। वो दुल्हन की तरह सजी हुई थी, साड़ी, गहने आदि पहने हुए थी और परफ्यूम की मदहोश कर देने वाली महक से मैं दीवाना हो गया। मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया।
आज, मैं भी सुहागरात मनाने के मूड में था। प्रिया अपने जीवन के तीसरे दशक के आखिरी सालों में अविवाहित लड़की थी इसलिये मैं यह अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या चाहिए? मेरा मतलब है कि एक ‘नाइस & फुल सॅटिस्फाइड सेक्स विद लव’ और वो मैं ही दे सकता हूँ। मैंने उसकी बंद आँखों को चूमा और एक हाथ उसके बालों में फिराने लगा।
वो किसी नयी दुल्हन की तरह शरमा रही थी। उसका एक हाथ मुझे अपने घेरे में लिए हुए था। फिर मैं उसके ऊपर कुछ झुका और मैंने अपने होंठ, उसके होंठों से लगा दिए। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
वह सिहर गई और ज़ोर से मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। मैं उसके होंठ चूस रहा था, वो भी मेरे होंठ चूस रही थी। कुछ पल हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे, तभी उसने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों गाल पकड़े और ज़ोर ज़ोर से अपना सिर घुमा घुमा कर मेरे होंठ चूसने लगी। उसकी इस दीवानगी से मेरे होंठ चूमने से एक बार तो मैं भी छटपटाने लगा था।
वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि भूखी शेरनी सी हो गई थी। इस समय उसके बड़े बड़े उरोज मेरे सीने पर दब रहे थे। मैंने भी अपना एक हाथ उसके सिर के पीछे कर, उसे पकड़ कर पूरे ज़ोर से उसके होंठ चूसने लगा। करीब 20 मिनट तक हम दोनों बस चूमाचाटी ही करते रहे। यह यौनपूर्व क्रीड़ा का पहला भाग था।
कुछ देर बाद हम अलग हुए, दोनों ही बुरी तरह हाँफ रहे थे। हम दोनों बिस्तर पर अलग अलग लेटे हुए थे। कुछ देर बाद जब हम सामान्य हुए तो मैं उसकी तरफ पलटा, वो आँख बंद किए हुए लेटी थी, मैंने उसे गर्दन पर चूमते हुए, उसके वक्ष को चूमने लगा साड़ी का पल्लू, उसके सीने पर से, अलग करते ही मैं हैरान रह गया।
क्या मस्त बड़े बड़े बूब्स थे यार! मैं तो मचल उठा था। मैंने अपने दोनों हाथ उसके उन स्तनों पर रख दिये और सहलाने लगा। उसकी साँसें तेज़ चलने लगीं और वो मेरी तरफ देखने लगी। मैंने उसके स्तनों को सहलाते हुए अपना मुँह उसके ब्लॉउज में घुसेड़ दिया।
वो मचल उठी और मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपने उरोजों में छुपा लिया। मैं अपने होंठ उसके मस्त दूध के निप्पलों पर फेरे जा रहा था। फिर मैंने एक हाथ से उसके ब्लॉउज के हुक खोल दिए, वो गुलाबी रंग की ब्रा पहने हुए थी।
क्या सेक्सी ब्रा थी! देख कर मज़ा आ गया। मैं कुछ देर ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मे दबाता रहा और अपने होंठ उसके मम्मों पर फिराता रहा। फिर मैं बूब्स से नीचे होते हुए, उसके पेट और नाभि पर आया उसकी नाभि में जीभ घुसा कर खूब चूसा। उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी।
फिर मैं एक झटके से बिल्कुल नीचे उसके पैरों के पास पहुँच गया। उसके पैर चूमते हुए उसकी साड़ी ऊपर करते हुए, उसकी नरम जाँघों तक आ गया। क्या खूबसूरत मखमली जांघें थीं। मैं दोनों जाँघों पर अपने होंठ से उसको मदहोश कर रहा था। वो अपना सिर जोर जोर से आजू-बाजू घुमा रही थी, अपने होंठ, दाँतों से चबा रही थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसकी दोनों जाँघों पर से सरकाते हुए, उसकी पैन्टी को पकड़ा और नीचे खींच दिया।
उसके पैर चूमते हुए उसकी साड़ी ऊपर करते हुए, उसकी नरम जाँघों तक आ गया। क्या खूबसूरत मखमली जांघें थीं। मैं दोनों जाँघों पर अपने होंठ से उसको मदहोश कर रहा था। वो अपना सिर जोर जोर से आजू-बाजू घुमा रही थी, अपने होंठ, दाँतों से चबा रही थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसकी दोनों जाँघों पर से सरकाते हुए, उसकी पैन्टी को पकड़ा और नीचे खींच दिया।
मैं दोनों जाँघों पर अपने होंठ से उसको मदहोश कर रहा था। वो अपना सिर जोर जोर से आजू- बाजू घुमा रही थी। अपने होंठ, दाँतों से चबा रही थी। मैंने अपने दोनों हाथ उसकी दोनों जाँघों पर से सरकाते हुए, उसकी पैन्टी को पकड़ा और नीचे खींच दिया।
मेरी इस हरकत से वो चिहुंक उठी और दोनों हाथ से मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया। उसकी चूत बहुत ही मस्त थी, बिल्कुल मलाई की तरह, पाव की तरह फूली हुई, बिल्कुल साफ, एक भी बाल नहीं था और महक भी आ रही थी।
मैंने अपना काम शुरू कर दिया, अपने दोनों हाथों से उसके कूल्हों को सहलाते हुए उसकी चूत चाटने लगा।
वो अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से ऊपर को उछालने लगी।
कमरे में उसके मुख से कामवासना युक्त ‘ओ… सी.. ह.. हा… सी..उ..ऊ’ की आवाजें गूँजनें लगीं।
करीब 15 मिनट तक चूत चाटने में, उसने तीन बार अपना पानी छोड़ा, उसे बहुत आनन्द आ रहा था।
फिर मैं अलग हुआ, तो वो भी बैठ गई और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। मैंने अपनी पैंट खोलनी शुरू की, उसने शर्ट उतारने के बाद मेरे सीने पर बहुत प्यार से हाथ फेरा और अपने होंठ मेरे सीने से लगा दिए और ज़ोर ज़ोर से मेरे सीने पर होंठ फेरने लगी।
मैं पैंट उतार चुका था, मैंने उसकी ब्रा अलग की तो उसके कबूतर उछल कर ऐसे बाहर आ गए जैसे उनको पिंजरे से आजाद कर दिया हो। इतने बड़े और सुन्दर उरोज देख कर मैं भी बेकाबू हो गया और मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया, जिससे उसके मम्मे मेरे सीने से दब जायें।
इससे उसे और मुझे भी अच्छा लगा।
कुछ देर बाद मैंने उसके नाभि के नीचे साड़ी के अन्दर अपना हाथ डाल दिया। वो मुझे देखने लगी कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं मुस्कुराया और मैंने अन्दर से उसकी साड़ी का तह किया हुआ हिस्सा पकड़ा और बाहर खींच लिया, जिससे एक ही झटके में साड़ी बिल्कुल खुल गई।
वो हँसने लगी। मैंने साड़ी अलग की अब वो पेटिकोट में थी। पेटिकोट में से ही उसकी चूत का आकार देख कर मैं पागल हो रहा था।
उसकी पिछाड़ी की गोलाइयाँ ऊपर को उठी हुई थी और उसके नितम्ब बड़े थे। मुझे साड़ी में चूत देखना बहुत पसंद है। अच्छे से उभरी हुई चूत ऊपर से आभास दे जाए तो लण्ड तभी झटके से खड़ा हो जाता है। प्रिया की ऐसी ही चूत थी, जिसे देख कर मेरा लौड़ा और क़ठोर हो गया था।
मैंने उसका पेटिकोट उतार दिया, अब वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने थी। मैंने उसकी गान्ड को खूब प्यार से सहलाया, चूमा और उसने भी मुझे अपने ऊपर खींच लिया और एक हाथ से मेरा लण्ड पकड़ लिया। मैं अभी भी पूरी तरह से नग्न नहीं था, वो ऊपर से ही मेरे लण्ड को दबा रही थी। फिर अचानक उसने मेरी चड्डी नीचे खींच दी। मैंने खुद उसको अपनी टांगों से बाहर निकाल दिया।
वो बोली- प्लीज़, अब कब तक तड़फाओगे, जल्दी अन्दर डालो ना प्लीज़।
मैंने भी उसके दोनों पैर अपनी कमर पर रखे और चूत पर अपने लण्ड को रख दिया उसने आँखे बंद कर लीं। पहले मैंने अपना लण्ड उसकी कुँवारी चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अन्दर डाला मुझे झट से पता चल गया कि अभी कि वो कुँवारी है, मेरा लवड़ा थोड़ा सा ही अन्दर गया था पर वो बेकाबू होने लगी।
अभी उसे दर्द का अहसास नहीं था क्योंकि मैंने अभी सिर्फ सुपारा ही उसके दाने पर रगड़ा था। थोड़ा सा ही चूत के अन्दर किया था, पर वो इतनी मचल रही थी कि अचानक उसने अपने दोनों पैर से मुझे जोर से जकड़ लिया और अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टिका कर अपनी कमर को ज़ोरदार झटका देकर मेरे लण्ड पर भरपूर वार कर दिया।
मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया। मेरे लण्ड की चमड़ी ऊपर चढ़ गई थी। मुझे बहुत दर्द हुआ, मैं चीख पड़ा। मेरे साथ वो भी चीख पड़ी क्योंकि उसे भी बहुत दर्द हो रहा था। मेरा लण्ड का उसकी चूत से स्पर्श होते वो इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उसने अधिक उत्तेजनावश ऐसा कर दिया।
खैर अब हम कुछ देर रुक गए।
मेरा लण्ड उसकी चूत में ही था। कुछ देर बाद दर्द कम होने पर मैंने अपने लण्ड को आगे पीछे किया। अब उसे भी कुछ अच्छा लगने लगा था। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई तो उसे भी मज़ा आने लगा वो भी अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरा साथ दे रही थी।
20 मिनट तक मैंने कई तरह से उसकी चुदाई की। इतने समय में ना जाने वो कितनी बार झड़ चुकी थी।
वो बोली- अब बस रोहित, तुम अपना पूरा कर लो, अब मुझसे और सहन नहीं हो रहा है। तुमने मुझे जीते जी स्वर्ग की सैर करा दी है।मेरी आत्मा न जाने कब से प्यासी थी, हाँ मैं जब दसवीं क्लास में पढ़ती थी, तब से ही लंड की प्यासी थी और अब 29 साल की उम्र में मैंने इसे पाया है। रोहित, मैं तुम्हारी बहुत अहसानमंद हूँ।
यह कहकर उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, करीब दस मिनट और करने के बाद भी जब मेरा नहीं निकला, तो वो बोली- निकाल क्यों नहीं रहे हो? रोहित प्लीज़, अब मेरी कमर दर्द कर रही है।
मैं मुस्कुराया क्योंकि मैं उनको तो संतुष्ट कर चुका था, पर मैं भी सतुंष्ट होना चाहता था, मैंने कहा- अच्छा, तुम मेरे ऊपर आओ।
वो बोली- ठीक है, पर जल्दी कर देना।
मैंने कहा- ठीक है।
वो मेरे ऊपर आई तो मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड डाला और उसने अपनी चूत का पूरा भार मेरे लौड़े पर रख दिया। वो कुछ आगे पीछे हुई। मुझे अच्छा लगने लगा, फिर मैंने अचानक उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे कुछ ऊपर उठा दिया जिससे अब उसका भार उसके ही दोनों घुटनों पर था। अब मैंने अपने दोनों पैर बिस्तर पर टिका कर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा कर ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत पर अपने लौड़े से ठाप लगाने लगा।
मुझे कुछ परेशानी हुई तो, मैं एक पल के लिये रुका और अपने सर के नीचे एक तकिया रख लिया और फिर शुरू हो गया। मैं सौ की स्पीड से उसे चोद रहा था। वो भी मथानी की तरह हिल रही थी। करीब दस मिनट तक लगातार करने के बाद मैंने उसकी चूत में सारा पानी न डालते हुये बाहर निकाल दिया।
अब मैं उसके ऊपर आ गया और करीब 15 मिनट तक हम लोग यूँ ही लेटे रहे, फिर हम दोनों अलग हुए और बाथरूम गए, हमने अपने आप को साफ किया, हम दोनों ही नंगे थे, हमारे शरीर पसीने से लथ पथ हो रहे, तो मैंने पानी का फव्वारा खोल दिया। दोनों उसके नीचे खड़े थे। उसका गीला बदन देख कर मैं फिर उत्तेजित हो गया।
हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए, हमारे ऊपर पानी लगातार गिर रहा था। हम 15 मिनट तक एक दूसरे के शरीर से खेलते रहे। फिर मैं उसके पीछे आया और उसे आगे की तरफ झुका दिया और अपना लण्ड पीछे से उसकी गाण्ड में डालना चाहा तो उसने मना कर दिया। मैं भी मान गया, फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया।
वो झुकी हुई थी और अपने दोनों हाथों से नल पकड़े हुए थी। मैंने अपने लौड़े को आगे पीछे करना शुरू किया तो उसे भी मज़ा आने लगा, वो भी अपनी गाण्ड को आगे पीछे कर रही थी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई, मेरे दोनों हाथ उसके नितम्बों को पकड़े हुए थे। दस मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद वो बोली- मेरी कमर दर्द कर रही है, प्लीज़ रोहित, अब मुझे छोड़ दो।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए और ज़ोर ज़ोर से धक्के मार कर अपना पानी निकाल दिया। फव्वारे का पानी हमारे ऊपर लगातार गिर रहा था। गिरते पानी में चुदाई का, क्या आनन्द आता है, ये वही समझ सकता है जिसने ऐसा किया हो।
हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को बाहों में भर कर खूब प्यार किया।
रात के 2 बज रहे थे और हम बाथरूम में नहा रहे थे। नहा कर कपड़े पहन कर, हम लोग बाहर आए। प्रिया बहुत खुश थी, मैं भी निकलने के लिए तैयार हो गया।
प्रिया ने अपने बैग में से रुपये निकाल कर मुझे दे दिए और बोली- थैंक्स रोहित, तुम ना होते तो मैं, जीवन के इस सुख से ना जाने कब तक महरूम रहती।
यह कहकर वो फिर मुझसे लिपट गई और बोली- तुम्हें जाने देने को मेरा बिल्कुल मन नहीं कर रहा है रोहित।
मैंने उसे चूमा और कहा- अगर फिर मेरी याद आए तो मुझे कॉल कर लेना। अपना ख्याल रखना, ठीक है, अब मैं चलता हूँ।
वो बोली- रूको, पहले मैं बाहर देखती हूँ, कोई है तो नहीं।
मैंने कहा- ठीक है।
उसने दरवाजा खोला और बाहर से लॉक करके चली गई। वो दो मिनट में ही वापस आ गई और बोली- सब कार्यक्रम हो चुके हैं। अब विदाई हो रही है, सब लोग उधर ही हैं, तुम निकल जाओ।
मैं उसके साथ बाहर आ गया और शादी में आये हुये लोगों की भीड़ में शामिल होता हुआ बाहर की तरफ निकलने लगा। प्रिया भी अपनी सहेलियों के साथ शामिल हो गई थी और वो मुझे लगातार देखे जा रही थी, मैंने मुड़ कर देखा, तो प्रिया की आँखों में आँसू थे।
मैंने उसे एक हल्की मुस्कान दी और तेज़ी से बाहर निकल गया।
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