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Tuesday, 13 August 2024

मालकिन के साथ नौकरानी को भी चोदा

मेरा नाम श्लोक है, मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। अब अपने बारे में अधिक क्या बताऊँ यारों..

सभी यही कहते हैं कि मैं स्मार्ट हूँ।

मेरा लन्ड 7 इन्च है या 9 इन्च है.. मैं इस तरह से झूठ नहीं बोलने वाला हूँ..
मुझे लगता है कि ये तय करने का मौका तो लड़कियों को ही देना चाहिए।

फिर भी अपने बारे में थोड़ा बता देता हूँ। मैं दिखने में ठीक हूँ, पर लोग मुझे सेक्सीबॉय कहते हैं।

मुझे चोदने का हुनर.. मेरी बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स से मिला है।

आज तक ये सुख मुझे नए-नए तरीकों से मिल रहा है, तो उनको मेरी तरफ़ से शुक्रिया।

अब मैं अब कहानी पर आता हूँ।

मैं कॉलबॉय कैसे बना.. इसके पीछे मेरी एक पुरानी गर्ल-फ्रेंड थी.. उसका नाम पायल था।

वो मेरी चुदाई से परिचित थी.. पर उसकी शादी हो गई और वो अपने ससुराल सूरत चली गई.. पर फिर भी हम कभी फोन पर बात कर लेते और जब भी वो अहमदाबाद आती तो कुछ जुगाड़ करके हम दोनों चुदाई भी कर लेते थे।

मैंने उससे कहा था- कोई लड़की तो सैट करवा दो।

उसने कहा- मैं तो हूँ किसी की तुमको क्या जरुरत है?

तो मैंने उससे कहा- यार तू महीने में दो-तीन दिन के लिए आती है और कभी तो तीन-चार महीने भी लग जाते हैं.. तब तक क्या मैं मुठ ही मारता रहूँ?

हालांकि उसे यह नहीं पता था कि उसके जाने के बाद कितनी लड़कियों को ठोक चुका हूँ।

एक बार पायल का फोन आया, उसने मुझसे पूछा- एक शादीशुदा लड़की है.. चोदना चाहोगे?

मैंने उससे कहा- मेरे साथ मजाक मत करो… तुम मुझे किसी को ठोकने का कह रही हो और शादीशुदा लड़की.. लड़की नहीं होती औरत होती है।

तो पायल ने कहा- मैं सच कह रही हूँ.. मेरी एक सहेली है मानसी..
उसकी शादी अहमदाबाद में ही हुई है.. और उसकी शादी को तीन महीने ही हुए हैं।
उसका पति शादी के दो महीने बाद ही अमेरिका चला गया है।
मानसी ने मुझे कॉल करके सब बताया है कि उसका चुदवाने का बहुत मन करता है.. पर वो कुछ कर नहीं सकती..
वो बड़ी ही रॉयल फैमिली से है.. कहीं बाहर चुदवाने जाए और किसी को पता चल गया.. तो बदनामी हो सकती है।
वो कहती है कि दिन तो कैसे भी निकल जाता है.. पर रात को चूत को लंड की याद आ ही जाती है और रात को ऊँगली डाल-डाल कर थक गई है।
मानसी का मुझसे यही कहना है कि अब उससे नहीं रहा जा रहा है और मैं उसके लिए कुछ कर सकती होऊँ तो जल्दी करे।

मैंने कहा- हम्म.. फिर..?

फिर पायल बोली- मैंने सोचा.. कि कभी मेरे पति भी ऑफिस के काम से तीन-चार दिन बाहर रहते हैं तो मुझे भी चूत में ऊँगली डालनी पड़ती है.. पर उसमें लंड से चुदवाने जितना मजा कहाँ मिलता है, सो मैंने उसकी परेशानी समझी और मैंने उसको तुम्हारे बारे में बताया है.. क्या तुम उसकी मदद करोगे?

मेरे मन में तो बहुत सारे लड्डू फूटने लगे.. पर मैंने अपने जोश को होश से सम्भाला और नाटक करने लगा- जान, मैंने तुम्हारे अलावा किसी के साथ मैंने चुदाई नहीं की है और अब तुम ही मुझको किसी को चोदने का कह रही हो?

पायल ने मुझसे कहा- नाटक मत करो.. मुझे पता है कि तुम उसको चोदना चाहते हो और मेरी शादी होने के बाद तुमको भी चुदाई के लिए चूत चाहिए.. इसलिए मैंने तुम्हारा नाम लिया है।

मैंने उससे कहा- तुमने मेरे बारे में सोचा.. यही बहुत है.. तुम उसको मेरा फोन नम्बर दे देना और कॉल करने का बोलना।

फिर पायल ने कहा- ठीक है.. पर देखना इस बात का किसी को पता ना चले।

मैंने कहा- कोई पागल ही होगा.. जो मुँह तक आया लड्डू ना खाए.. फ़िक्र मत करो.. मैं किसी को नहीं बताऊँगा।

फिर एक रात दो बजे किसी का फोन आया.. मैं तुरन्त समझ गया था कि ये मानसी का ही फोन होगा।

फिर भी मैंने फोन उठा कर कहा- कौन बोल रहा है?

तो उसने कहा- मैं मानसी बात कर रही हूँ मुझे पायल ने आपका नम्बर दिया है।

मैंने कहा- हाँ हाँ… मानसी जी.. आप फोन काटिए.. मैं आपको फोन करता हूँ।

मैंने फोन काट कर उसी नम्बर पर वापिस कॉल लगाई।

फिर हमने बात की।

मैं- जी मानसी जी.. कैसी हो आप?

मानसी- कुछ ठीक नहीं है श्लोक.. आपको तो पायल ने मेरे बारे में सब बताया ही होगा और मुझे सिर्फ मानसी ही कहो।

मैं- हाँ मानसी.. मुझे पायल ने सब बताया है.. तुम फ़िक्र मत करो.. मैं तुमको निराश नहीं करूँगा और तुम मुझ पर पूरा भरोसा कर सकती हो डियर.. पर हम कब मिल सकते हैं?

मानसी- हम तीन दिन के बाद मिलेंगे.. मेरे ससुराल के लोग सूरत जा रहे हैं.. उधर एक रिश्तेदार की शादी है.. पर मैं कुछ भी बहाना बना कर यहीं पर रुक जाऊँगी।

मैं- ठीक है.. मैं उस पल का इन्तजार करूँगा डियर..

उस रात हम दोनों ने फोन पर ही कामुक बातें करते-करते अपना पानी भी गिराया और कब सुबह हो गई.. पता ही नहीं चला।

फिर हम सो गए।

मुझे अब उस दिन का इन्तजार था कि कब मैं उसको मिलूँ और उसको चोदूँ।

हमारी हर रात को फोन पर बात होने लगी और फोन पर ही चुदाई करने लगे।

फिर जिस दिन का हम दोनों को इंतजार था.. वो आ ही गया।

मानसी का सुबह कॉल आया और उसने कहा- सब सूरत जाने के लिए निकल गए हैं… तुम दस बजे तक मेरे घर पर आ जाना.. मैं तुमको पता मैसेज करती हूँ।

मैंने कहा- तुमने यही पर रहने के लिए सबको कैसे मना लिया?

उसने कहा- मेरी तबीयत ठीक नहीं है मैंने यही बहाना बना दिया.. पर उन्होंने मेरी नौकरानी को मेरे पास रहने का बोल कर गए हैं। तुम चिंता मत करो वो मैं देख लूँगी.. तुम सिर्फ वक्त से आ जाना।

मानसी का सुबह कॉल आया और उसने कहा- सब सूरत जाने के लिए निकल गए हैं… तुम दस बजे तक मेरे घर पर आ जाना.. मैं तुमको पता मैसेज करती हूँ।

मैंने कहा- तुमने सबको कैसे मना लिया कि तुम नहीं जा रही?

उसने कहा- मेरी तबीयत ठीक नहीं है मैंने यही बहाना बना दिया.. पर उन्होंने मेरी नौकरानी को मेरे पास रहने का बोल कर गए हैं। तुम चिंता मत करो वो मैं देख लूँगी.. तुम सिर्फ वक्त से आ जाना।

उसने मुझे पता मैसेज किया और मैं बाइक लेकर दिए हुए पते पर जाने के लिए निकल पड़ा।

मैंने वहाँ पहुँच कर मानसी को कॉल किया तो उसने कहा-105 नम्बर के बंगले के अन्दर आ जाओ.. मैं तुम्हारा कबसे इन्तजार कर रही हूँ.. अब और इंतजार नहीं होता।

मैंने कहा- मेरी जान.. बस अभी आया।

मैंने 105 नम्बर बंगले के बाहर पहुँच कर घन्टी बजाई.. मुझे लगा मानसी ही दरवाजा खोलेगी.. पर दरवाजा उसकी नौकरानी ने खोला।
लेकिन एक पल में तो दिमाग के तार ही हिल गए… साली नौकरानी ही क्या पटाखा लग रही थी।

मैं सोच में पड़ गया कि बाहर ये नजारा है तो अन्दर कयामत होगी।

मैंने अपने दिमाग के तार ठीक किए और उससे कहा- मेरा नाम श्लोक है मुझे मानसी जी से मिलना है।

उसने कहा- आइए.. आप यहाँ हॉल में बैठिए.. मैं मालकिन को बुलाती हूँ।

फिर उसने आवाज लगाई- मालकिन… आपसे कोई मिलने आया है..

और वो रसोई में चली गई।

मेरी नजरें जिसको देखना चाहती थीं.. वो अब मेरे सामने थी।

अब आप लोगों को ये लगता होगा कि अब ये ऐसा कहेगा कि क्या लग रही थी यारो!

उसके 34 के मम्मे 28 की कमर 36 के चूतड़..

पर मेरे दोस्तों बुरा मत मानना.. कुदरत की कारीगरी पर कभी कहा नहीं जाता।

वो जो भी लग रही थी.. बहुत कामुक लग रही थी।

वो सही में किसी अप्सरा से कम नहीं थी।

वो थिरकते और मदमाते क़दमों से मेरे पास आई और कहा- हाय श्लोक…

मैं बस उसको ही देखने में ही मग्न हो गया था।

उसने एक बार और कहा- हाय श्लोक…

मेरा फिर ध्यान भंग हुआ और कहा- ओ… हाय.. मानसी.. सॉरी जान.. मैं बस तुम्हारी खूबसूरती में खो गया था… तुम बहुत खुबसूरत हो और साथ में बहुत ही सेक्सी भी।

फिर उसकी नौकरानी पानी लेकर आई.. उसने मुझे पानी दिया और चली गई।

फिर हमने हॉल में बैठ कर बहुत सारी बातें की.. इसलिए कि उसकी नौकरानी को लगे कि ये सच में मालकिन के दोस्त हैं।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. मैं मानसी के पास सट कर बैठ गया और उसके बालों में ऊँगलियाँ डाल कर उसको कस कर पकड़ लिया।

कामातुर होकर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसको बेहिसाब चूमने लगा।

ऐसा करने से एक अलग ही नशा छा जाता है और सामने वाले को ये भी पता चल जाता है कि आज उसकी चूत.. भोसड़ा बनने वाली है।

उसने मुझसे कहा- रुको जान.. तुम पहले ये बताओ कि तुम क्या लोगे?

मैंने कहा- बस अब और इन्तजार नहीं होता। मैं तो अब सिर्फ तुम्हारी चूत ही लूँगा।

उसने हँस कर कहा- जान वो तो तुम्हारी ही है.. पर उसके अलावा क्या लोगे?

मैंने कहा- जो तुम्हारी मरजी हो.. वो ले आओ।

फिर उसने अपनी नौकरानी को आवाज लगाई और दो गिलास में रेडवाइन ले आने को कहा।

मैं चौंक गया और कहा- रेडवाइन क्यूँ?

तो उसने कहा- जब हम फोन पर बात करते थे.. तब तुमने मुझे बताया था कि मैं कभी-कभी ड्रिंक करता हूँ.. इसलिए सिर्फ तुम्हारे लिए मैंने मंगवाई है।

मैंने कहा- तुमने तो दो गिलास मंगवाए हैं।

तो उसने कहा- आज मैं भी जम कर तुमसे चुदवाना चाहती हूँ जान… और ये हमारा पहली बार है.. शर्म में रह कर मिलन में कोई कमी नहीं करना चाहती हूँ … तुम फ़िक्र मत करो मैंने शादी से पहले दोस्तों के साथ बहुत बार ड्रिंक की है।

नौकरानी वाइन लेकर आ गई..

फिर हम दोनों वाइन पीने लगे, पर नौकरानी को मुझ पर शक सा होने लगा ओर क्यों ना हो.. पहले मैं उसकी मालकिन से दूर बैठा था.. पर अब एक-दूसरे से सट कर बैठे थे.. इतने नजदीक बैठे थे कि हवा भी हमारे बीच से ना जा सके।

हमने पैग खत्म किए और मानसी ने फिर से दो गिलास रेडवाइन के पैग बनाने को नौकरानी को कहा।

हमने दूसरे पैग भी खत्म किए।

मैं फिर मानसी को चूमने लगा.. चाटने लगा।
अब तो वो भी मेरा साथ दे रही थी।

दो पैग अन्दर जाने के बाद कौन देख रहा है क्या चल रहा है.. किसको ध्यान रहता है।

मानसी अब पूरे जोश में थी.. वो भी अब मुझे जोर-शोर से चूम और चाट रही थी। ये सब हम हॉल में ही कर रहे थे।

मैंने मानसी से कहा- यहाँ हॉल में तुम्हारी नौकरानी देख लेगी.. चलो कमरे में चलते हैं।

मानसी ने कहा- ठीक है।

फिर उसने नौकरानी को आवाज लगाई तो वो आ गई।

मानसी ने नौकरानी से कहा- ये मेरा दोस्त है श्लोक.. मैं इसको बंगला दिखाती हूँ.. तब तक तुम नीचे का काम करो।

फिर हम कमरे में आ गए।

जैसे ही हम कमरे में आए.. मैंने उसको अपनी बाँहों में ले लिया।

वाह.. क्या अलग सा सुकून था यारों.. मैंने उसको उठाया ओर धीरे से बिस्तर पर लिटाया फिर से चूमने लगा।

अब मेरे हाथ धीरे-धीरे उसके शरीर के सारे अंगों को छूने लगे।

उसके शरीर से एक अलग ही किस्म की कंपन मुझे महसूस हुई।
मुझे कुछ समझ में तो आया पर मैंने सर झटक दिया।

मैं अब उसके मम्मों को ऊपर-ऊपर से ही मसलने लगा। मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को उतार कर फेंक दिया।

अब वो सिर्फ ब्रा पैन्टी में थी.. क्या कयामत लग रही थी।

वो इतनी गोरी-चिट्टी थी कि उसको छुओ तो भी दाग पड़ जाए.. पर अब मुझे उस शरीर से हर जगह से पानी निकालना था।

मैंने उसकी ब्रा निकाल कर फेंक दी.. अब उसके तने हुए मम्मे मेरे सामने थे। मैं उसके रसीले मम्मों को अपने मुँह में लेके चूसने लगा।
उसका स्तन जितना मेरे मुँह में आ सकता था.. मैं उतना ही उसको पूरा अन्दर लेकर चूसने की कोशिश करने लगा।

मेरा हाथ अब धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। मैं उसके चूतड़ों को मसलने लगा।

मैंने अब उसकी पैन्टी में हाथ डाल दिया तो देखा कि उसकी पैन्टी कुछ ज्यादा ही गीली थी।

मैंने मानसी से कहा- जान क्या बात है.. कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही है तुम्हारी चूत…

मानसी ने कहा- जान मेरी चूत ने तो तभी पानी छोड़ दिया था.. जब तुमने मुझे अपनी बाँहों में लिया था।

मैंने कहा- मुझे पता है जान…

तो उसने कहा- तुम्हें कैसे पता चला?

मैंने कहा- जान.. मुझे तुम्हारे शरीर की कंपन महसूस हुई थी।

इन्हीं सब बातों में मैंने उसकी पैन्टी निकाल दी। मैं अब उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा और उसके मम्मों को भी चूसे जा रहा था।

हम बिस्तर पर लेटे हुए थे और एक-दूसरे को खूब चूस और चाट रहे थे।
मैं अब धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रहा था।
मैंने पैन्टी निकाल दी थी.. पर उसकी चूत अभी तक देखी न थी।

दोस्तों चूत न देखने का मेरा एक लॉजिक है.. अगर तुम कपड़े निकालते-निकालते चूत को एक बार देख लो तो तुम्हारा सारा ध्यान वहाँ ही चला जाएगा और तुम चूत चोद बैठोगे.. और लड़की को ज्यादा मजा नहीं दे पाओगे।

लेकिन दोस्तों लड़के का पहेला फर्ज़ लड़की को तृप्त करना होता है और खास करके शादीशुदा औरत के लिए तो ये जिम्मेदारी और भी अधिक ढंग से निभानी चाहिए।

दोस्तो, आप जितने भी काम से क्यों ना थके हों.. पर घर पर जाकर अपनी बीवियों से प्यार चुदाई या फिर प्यार वाली बातें जरूर करें..
वरना आपकी बीवियों के बाहर जाने की सम्भावना बढ़ जाती है।
जैसे कि मैं अभी किसी और की बीवी के पास हूँ…

हम दोनों गलत नहीं थे.. सिर्फ अपनी-अपनी जरूरत के लिए साथ हैं।

यह बात मेरे दिल में थी.. जो बता दी.. आप बुरा मत मानना दोस्तो।

मैं अब धीरे-धीरे चूत के पास आ गया।
जैसे ही चूत के पास मुँह रखा.. एक अजीब सी मादक खुश्बू छा गई।

अब उसने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए.. सिर्फ अंडरवियर को छोड़ कर।

वो मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से पकड़ कर दबाने लगी।

मैं उसकी चूत के दाने को चाटने लगा.. मैं उसकी चूत में पूरी जीभ डाल कर चाट रहा था और उसकी गान्ड में एक ऊँगली डाल कर उसे चोद रहा था।

अब आप ही सोचो क्या सुकून मिला होगा उसको…

मेरा लंड भी अपने राक्षसी आकार में आता जा रहा था और उसी वक्त मानसी ने मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया।

मानसी की चूत का स्वाद कुछ अलग ही था।

नमकीन पानी.. वो भी एक अलग खुश्बू के साथ पीने का माहौल था.. ओर अब वो समय आ ही गया।

मानसी ने अकड़ कर.. कस के मेरे बालों को पकड़ रखा था।

मैं समझ गया कि अब एक जोरदार लहर आने वाली है.. जो मेरे मुँह पर सुनामी की तरह छा जाएगी और ऐसा ही हुआ।

उसकी चूत ने इतनी पानी छोड़ा कि मेरा मुँह पूरा भर चुका था।

मैंने पानी मुँह में भरके रखा और उसके मुँह के पास जाकर हम दोनों ने उसकी चूत का रसपान किया।

अब वो काबू के बाहर थी.. वो मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ खींच रही थी और बोल रही थी- अब चोदो भी जान.. जल्दी चोदो जान.. अब और मत तड़पाओ.. मैं मरी जा रही हूँ.. तुमसे चुदने के लिए.. लंड डाल दो मेरी चूत में..

मैंने भी अब ज्यादा वक्त ना लेते हुए.. लगा दिया लंड को चूत के दरवाजे पर…

चूत का दरवाजा पूरी तरह खुला था और चूत लंड के स्वागत के लिए पानी छोड़ रही थी।

मैंने मानसी की चूत में जैसे ही लंड डाला तो उसकी जोर से चीख निकल गई.. पर मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया।
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अब मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा।

मानसी मुझे कुछ ज्यादा ही खुश दिख रही थी।
वो मजे के साथ ही मुझसे कह रही थी- ओहह… जान लव यू.. और जोर से करो डियर… करते रहो.. मुझे कभी छोड़ कर मत जाना… मममम… मुझे आज तक ये सुख और ऐसी चुदाई नहीं मिली.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… चोदो जान चोदो…आह्ह..

मैंने भी अब मेरी रफ़्तार बढ़ा दी।
मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
चूत ओर लंड में जो प्यारी सी लड़ाई छिड़ी हुई थी.. उसका अब सुखद परिणाम आने वाला था।
एक ऐसा ऐतहासिक परिणाम जिसमें दोनों की जीत थी।

मेरे लंड के झटके उसके दोनों मम्मों को जैसे झूला झुला रहे थे.. इतनी तेजी से उसके मम्मे आगे-पीछे थिरक रहे थे।

मेरा माल अब निकलने ही वाला था.. मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूँ?

तो उसने कहा- हम साथ में ही झड़ते हैं.. मैं भी अभी दुबारा झड़ने वाली हूँ।

बस चार-पाँच जोर के झटकों के साथ हम दोनों झड़ गए।

मेरा गर्म लावा एक तेज धार के साथ उसकी चूत के अन्दर की दीवारों से जा टकराया।
उसकी धार से जो सुकून मानसी के चेहरे पर था.. वो देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा।

उसने मुझे माथे पर चूमा और कस कर अपनी बाँहों में समेट लिया।

उसकी आँखों में एक चमक सी आ गई थी।

हम एक-दूसरे से चिपक कर ऐसे ही लेटे रहे।

दस मिनट के बाद अब वापिस मानसी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उससे खेलने लगी।
मेरे लौड़े को वो धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी।

लेकिन ये लंड साला नंगी लड़की देखते ही खड़ा हो जाता है.. तो लड़की के पकड़ने से क्या नहीं हो सकता।
वो वापिस अपने राक्षसी आकार में आ गया।

मानसी ने लंड देख कर कहा- ये बहुत अच्छा है कितने इंच का होगा?

मैंने कहा- तुम्हीं बताओ.. कितने इंच का है?

तो उसने कहा- ह्ह्म्म… 8 इंच?
फिर मैंने कहा- 8 इंच नहीं.. 7 इंच का है.. पर मैं तो ये मानता हूँ कि लड़कियों को खुश रखे.. लंड ऐसा ही होना चाहिए। मैं तुमसे ही पूछ रहा हूँ.. बताओ क्या तुम मेरे लंड से खुश हो?

मानसी ने कहा- मैं इसका जवाब कुछ दूसरे तरह से दूँगी… तो तुमको भी पता चल जाएगा..

मैंने मानसी और नौकरानी की कैसे साथ में चुदाई की… इसका रस आपको अगले भाग में मिलेगा।
कहानी जारी रहेगी।

 मानसी ने लंड देख कर कहा- यह बहुत अच्छा है कितने इंच का होगा?

मैंने कहा- तुम्हीं बताओ.. कितने इंच का है?

तो उसने कहा- ह्ह्म्म… 8 इंच?

फिर मैंने कहा- 8 इंच नहीं.. 7 इंच का है.. पर मैं तो ये मानता हूँ कि लड़कियों को खुश रखे.. लंड ऐसा ही होना चाहिए। मैं तुमसे ही

पूछ रहा हूँ.. बताओ क्या तुम मेरे लंड से खुश हो?

मानसी ने कहा- मैं इसका जवाब कुछ दूसरे तरह से दूँगी… तो तुमको भी पता चल जाएगा..

दूसरे ही पल में उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और मुझे इसका जवाब मिल गया।

वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

पहली बार में ही मैंने मानसी को तृप्त कर दिया था इसलिए वो अब आराम से मजे ले रही थी।

लेकिन मेरी नजर दरवाजे पर गई तो मुझे लगा कि उधर कोई है।

कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला रह गया था.. पर मैंने सोचा घर में मानसी और वो नौकरानी के अलावा तो कोई है भी नहीं।

मेरे मन आया कि मानो या ना मानो बाहर नौकरानी ही है.. पर यह बात मैंने मानसी को नहीं कही।

मानसी मेरा लौड़ा चूसने में मसगूल थी… मानसी अब मेरे ऊपर आ गई और लंड को चूत में फिट करने लगी।

मानसी मेरे लंड पर धीरे से बैठ रही थी।

मेरा लंड अब पूरा मानसी की चूत में था। मानसी धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी।

क्या मजा आ रहा था यारो…

मानसी बड़ी गहराई तक मेरा लंड ले रही थी और मुझे भी काफी अन्दर तक उसकी चूत में मेरा लंड महसूस हो रहा था।

इतने में मानसी एक बार फिर झड़ गई थी।

अब मैंने मानसी से कहा- अब मैं तुमको दूसरे तरीके से चोदता हूँ..

मैंने उसको घुटनों के बल बैठने को कहा।

वो वैसे बैठ गई।

अब मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और धक्के लगाने लगा।

मेरी नजर मानसी की गान्ड पर पड़ी.. मैंने उसकी गान्ड पर थूक लगाया और एक उंगली गांड में डाल दी।

मैं उंगली से उसकी अनचुदी गान्ड को चोदने लगा।

चूत में लंड और गान्ड में उंगली से चुद कर मानसी जैसे सातवें आसमान पर उड़ने लगी थी।

उसकी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।

‘आह्ह्ह…आहहहम… उईईई..’

अब मेरी चुदाई की रफ़्तार की कोई सीमा नहीं थी।

फिर से लंड ओर चूत की प्यार भरी लड़ाई में हम दोनों की जीत होने वाली थी।

मेरी कुछ मेहनत के बाद मेरी मंजिल मुझे सामने दिखाई दे रही थी।

कुछ धक्कों के साथ मेरी रफ़्तार और बढ़ गई और मेरे लंड ने एक बार और गरम लावा उसकी रसीली चूत में छोड़ दिया।

मैं अब निढाल हो कर मानसी के ऊपर ही लेट गया।

मैंने फिर मानसी से धीरे से कहा- शायद बाहर कोई है।

मानसी तुरन्त खड़ी हुई और उसने जल्दी से दरवाजा खोल दिया।

उसने बाहर देखा तो उसकी नौकरानी ही थी।

वो छुप-छुप कर हमारी चुदाई देख रही थी।

मालकिन को देख कर वो भागने लगी, पर मानसी ने कहा- रुक जाओ.. वरना अच्छा नहीं होगा।

वो रुक गई और उसको लेकर मानसी कमरे में आ गई।

मैं और मानसी पहले से ही नंगे थे और उसकी नजर मेरे लंड पर ही टिकी थी।

वो घबराई और कांपती हुई हमारे सामने खड़ी थी।

मानसी ने मुझसे अंग्रेजी में कहा- श्लोक इसका क्या करें.. अगर यह किसी को बता देगी तो?

मैं मानसी को एक तरफ लेकर गया और उससे अंग्रेजी में कहा- देखो मानसी तुम चिंन्ता मत करो.. कुछ नहीं होगा, पर सिर्फ मुझे

इसको भी चोदना पड़ेगा।

मानसी ने मना कर दिया- नहीं… मैं तुमको किसी के साथ नहीं बाँट सकती.. तुम अब सिर्फ मेरे हो।

मैंने मानसी को समझाया- जान.. यह सब मैं तुम्हारे लिए ही कर रहा हूँ.. वरना उसको धमकी देंगे तो अभी नहीं.. पर कभी ना कभी तो

किसी को बताएगी और उसको चोदूँगा तो तुम भी कभी बोल सकती हो कि मेरी बात बताई तो तेरी भी बात तेरे पति को बता दूँगी।

मानसी ने कहा- ठीक है… पर यह चुदवाने को राजी हो जाएगी?

मैंने कहा- उसने हमारी चुदाई देखी है तो उसको भी चुदवाने का मन हुआ होगा.. अगर उसकी पैन्टी गीली होगी तो जरूर चुदवाएगी।

‘हम्म..’

मैंने मानसी को कहा- मैं जैसा बोलता हूँ तुम सिर्फ वैसा करना।

मानसी ने कहा- ठीक है।

मैंने उसकी नौकरानी को पास बुलाया और डांटा- तुम ऊपर क्यूँ आई.. किसने बुलाया तुम्हें यहाँ आने के लिए… नाम क्या है तेरा बता?

वो बहुत डर गई थी… उसने डरते-डरते कहा- मेरा नाम सविता है।

फिर मैंने सविता से कहा- देखो, यह बहुत बड़े घर की बहू है.. अगर तुम यह बात किसी को बताओगी तो कोई तुम्हारी बात नहीं मानेगा

और इसका कुछ नहीं होगा.. लेकिन यह घर में कहेगी कि सविता को चोरी करते पकड़ा है.. तो सब मान लेंगे और तुम्हारी नौकरी चली

जाएगी.. बोलो अब मैं कहूँ वैसा करोगी?

सविता ने कहा- नहीं साहब.. मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. मुझे माफ कर दो.. आप जैसा कहोगे मैं वैसा करूँगी।

मैंने कहा- ठीक है सविता… पहले तो तुम डरना छोड़ दो और अपनी साड़ी निकालो।

सविता ने कहा- नहीं साहब.. मुझे जाने दो।

मैंने सविता से कहा- जो मैं कहता हूँ.. वो करो।

फिर उसने अपनी साड़ी निकाल दी।

‘अब पेटीकोट और ब्लाउज भी उतारो।’

उसने तनिक झिझकते हुए वो भी निकाल दिए।

अब वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी।

साली क्या माल लग रही थी।

मेरा लवड़ा खड़ा हो गया।

मैंने उठ कर उसकी ब्रा निकाल दी।

उसने दोनों हाथों से अपने मम्मों को छुपा लिया।

मैंने उसके हाथों को मम्मों से अलग कर दिया और उसके मम्मों को दबाने और चूसने लगा।

वो ‘आआआ.. उउऊए..’ करने लगी और जैसे ही मैंने पैन्टी में हाथ डाला तो मुझे पता चल गया कि यह साली तो पहले से ही चुदवाने के

लिए तैयार है।

मैंने धीरे से उसकी पैन्टी भी उतार दी।

फिर मैंने उससे कहा- जाओ और जाकर तीन गिलास वाइन लेकर आओ।

वो वैसे ही नंगी रसोई में गई और वाइन लेकर आई।

एक गिलास मैंने और एक मानसी ने ले लिया।

सविता ने पूछा- तीसरा गिलास किसके लिए है?

तो मैंने कहा- तुम्हारे लिए है.. पीओ इसे।

तो पहले तो उसने मना किया।

फिर मानसी ने कहा तो उसने वाइन पी ली।

अब उसको नशा होने लगा.. फिर मैंने उससे कहा- अपनी मालकिन की चूत चाटो।

अब वो वाइन के सुरूर में मानसी की चूत चाटने लगी थी।

मानसी की ‘आआह… आअह… अआ…’ की आवाजें निकाल रही थीं।

मैं सविता के मम्मों को चूस रहा था और उसकी सफाचट चूत के दाने को सहला रहा था।

फिर मैं उसकी बुर में दो उंगली डाल कर चोदने लगा और मानसी मेरे लंड को आगे-पीछे कर रही थी।

हम तीनों एक-दूसरे में लगे हुए थे।

कभी मानसी की मैं चूत चाट रहा था.. कभी सविता मेरा लंड चूस रही थी.. तो कभी मानसी सविता के मम्मों को चूस लेती और दबा

देती थी।

मैंने पहले सविता की चूत में लंड पेल दिया उसको जोर के झटके लगाने लगा।

कमरे में जम कर चुदाई चल रही थी।

सविता की आवाज से पूरे कमरे का माहौल बदल गया।

सविता मस्ती में बोल रही थी- और करो साहब.. ऐसी चुदाई तो मेरा पति भी नहीं करता साहब.. और जोर से करो… और जोर से करो…

और जोर से…. मेरी चूत में आज कुछ महसूस हो रहा है.. साहब क्या लौड़ा है आपका…आआई…

वो इतनी मस्त हो चुकी थी कि एकदम से अकड़ गई झड़ गई।

अब मैंने मानसी की चूत में लंड डाल दिया और उसकी चूत को पेलने लगा।

‘उऊउऊऊ… मम… हहह…’

वो भी उछल-उछल कर चुदवा रही थी।

उसकी चूत ने भी कुछ ही देर में पानी छोड़ दिया।

अब मेरा लावा निकलना बाकी था… तो मैंने सविता को घोड़ी बना कर चुदवाने को कहा।

उसने तुरन्त घोड़ी बन कर चूत और गान्ड के जलवा दिखा दिए।

अब मैंने सविता की गान्ड मारने की सोची उसकी गान्ड में बहुत सारा थूक लगाया और चूत की बजाए गान्ड पर लंड रख दिया।

सविता कुछ समझती.. उसके पहले ही लंड का सुपारा गांड में घुस चुका था।

उसकी जोर से चीख निकल गई।
हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना डॉट कॉम पर।
‘ओए माँ.. मर… गईई…निकालो साहब दर्द हो रहा है।’

पर मैंने सिर्फ सुपारा डाल कर थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा।

उसके लटकते मम्मों को सहलाया.. फिर जब उसका दर्द कम हुआ तो धीरे-धीरे लंड गान्ड में पेलने लगा।

अब पूरा लंड उसकी गान्ड में पेवस्त हो चुका था।

अब मैंने धक्के लगाने चालू किए.. मेरी चुदाई की रफ़्तार बढ़ गई।

उसका चुदवाने का मजा दुगना होने लगा।

मैं सविता की गान्ड को बड़ी शिद्दत से चोदे जा रहा था।

गांड मारने का मजा और वाइन का नशा मुझ पर छाने लगा।

गान्ड की कसावट ने मेरे लंड को कुंवारी चूत की याद दिला दी।

सब कुछ भूल कर कुछ कीमती धक्कों ने मुझे जन्नत की सैर करा दी।

मेरा गरम लावा उसकी गांड में पड़ी टट्टी में सन गया। मेरा वीर्य उसकी गान्ड में छूट गया था।

मैंने लौड़े को बाहर खींचा और उसको कपड़े से पौंछ कर दोनों के मुँह के पास अपना लंड लगा दिया।

मेरे लंड से सविता की गान्ड की महक आ रही थी।

मानसी और सविता ने लौड़े को चाट कर वो महक को अलविदा कर दिया।

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