मेरा लण्ड अब 67 साल का है। मुझे अपना लण्ड बहुत प्यारा है इसीलिए वो अब तक मेरा साथ दे रहा है। मेरी कहानी मेरे रिटायरमेंट के बाद चालू होती है जब मैं 60 साल का था।
मेरी पत्नी काफी भारी भरकम है इसलिए उसके साथ चुदाई में मजा नहीं आता।
मेरा ध्यान दूसरी स्त्रियों की ओर जाने लगा। वैसे मैं पहले भी कई स्त्रियों
को चोद चुका हूँ।
हमारे घर में काम के लिए एक नौकरानी रेखा आती थी। वह करीब 27 साल की थी।
तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद वह गोरी, सुन्दर और स्लिम थी। रेखा की
आँखें बहुत नशीली और सुन्दर थी। वह बहुत साफ़ सुफ़ रहती थी और बोल-चाल में
अच्छी थी।
धीरे-धीरे हम उसके साथ अच्छी तरह घुल मिल गए। हमारे घर में दो कमरे ऊपर की मंजिल पर भी हैं। मेरी पत्नी सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होने के कारण ऊपर बहुत कम ही आती थी। मैं अक्सर ऊपर रहता हूँ। रेखा जब ऊपर आती तो मैं उससे बातें कर लेता था।
करीब चार महीने बाद एक दिन जब रेखा रोज की तरह ऊपर आई तब मैं कंप्यूटर
पर तस्वीरें देख रहा था। मैंने उसे कुछ तस्वीरें दिखाई जिन्हें देख कर वह
बहुत खुश हुई। मैंने उसे एक कामसूत्र पेंटिंग की तस्वीर दिखाई और पूछा कि
क्या वह ऐसी और तस्वीरें देखना चाहेगी?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा।
मैंने उसे कहा- कल आने पर दिखाऊंगा।
दूसरे दिन मैंने कामसूत्र की कुछ और तस्वीरें दिखाई। तस्वीरें देख कर उसे बहुत आश्चर्य हुआ उसने कहा-ऐसी भी तस्वीरें होती हैं?
मैंने सोचा अब तो मेरे लण्ड की तमन्ना पूरी हो जाएगी, मैंने रेखा से
कहा- कल दोपहर को जब तू आयेगी तब मेरी पत्नी किट्टी पार्टी में जाने वाली
है तब मैं तुझे और भी तस्वीरें दिखाऊँगा।
उसने आने का वादा किया।
अगले दिन जब वह आई तो मैंने उसे कंप्यूटर पर आलिंगन, चूमने, नंगी और
चोदने की तस्वीरें दिखाई। लण्ड और चूत की तस्वीरें देख कर उसके मुँह से आह
निकल गई।
मैंने मौका देख कर उसके गले में हाथ डाल दिया। वो मेरे और करीब आ गई। मैंने
उसे चूम लिया तो उसके मुँह से एक और आह निकली। इस बीच हम दोनों तस्वीरें
देखते रहे।
मेरा लण्ड ख़ुशी के मारे उछल रहा था और उसमें से चिकना रस निकल रहा था।
मैंने रेखा से कहा- रेखा, क्या मैं तेरे बोबे देख सकता हूँ?
उसने शरमा कर कहा- आंटी आ जाएगी !
मैंने कहा- वो अभी दो घंटे नहीं आएगी !
और उसके दोनों बोबे भींच लिए। हम दोनों तस्वीरें देखते गए और मैंने उसके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। उसके सुडौल टेनिस बाल के आकार के उत्तेजित बोबों को देख कर मेरे होंश उड़ गए।
मैंने उससे कहा- रेखा, तेरे बोबे जैसे सुन्दर बोबे तो मैंने आज पहली बार देखे हैं।
मैं उसके बोबों को सहलाता रहा और उसे चूमता रहा। उसके मुँह से आह निकल रही थी।
जोश में आकर उसने मेरे अण्डरवीयर के अन्दर फड़फ़ड़ाते हुए लौड़े को पकड़ लिया।
मैंने कहा- रेखा, ऐसे नहीं ! उसे बाहर निकाल कर पकड़ !
उसने मेरा अण्डरवीयर निकाल दिया और लौड़े को सहलाने लगी।मेरा लण्ड देख कर रेखा ने पूछा- अंकल, साठ की उम्र में भी आप का लण्ड इतना कैसे तन जाता है?
मैंने कहा- रेखा। मैं इस उम्र में भी हफ्ते में कम से कम दो बार चुदाई करता हूँ और अपने लण्ड को रोज कसरत भी करवाता हूँ।
रेखा ने कहा- मेरा मर्द तो आठ-दस दिन में रात को दो मिनट में चोद कर चला जाता है।
अब मैं भी उसके पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। मैंने उससे कहा- मुझे अपनी चूत दिखा।
उसने कहा- आप ही खोल कर देख लो ! मुझे शर्म आती है !
और वह उठकर बाथरूम में चली गई। वापस आने पर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को निकाल दिया। अब वह बिल्कुल नंगी थी। उसकी झांट के कटे हुए बालों के झरोखे से उसकी चूत नजर आ रही थी।
मैंने उसकी चूत के पर्दों को उँगलियों से फैला के अलग किया और योनि के दर्शन किये। रेखा की चूत को देख कर मुझे स्वर्ग का आनंद हुआ। मैंने उसके दाने को मसलना शुरू किया तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।
मैंने रेखा से पूछा- क्या तूने पति के अलावा और किसी से चुदाई कराई है?
उसने कहा- हाँ ! दो और लोगों से चुदाई की है।
मुझे बहुपुरुषगामी औरतें बहुत पसंद हैं। उसकी बात सुन कर मेरा लण्ड लोहे जैसा गरम हो कर फड़फ़ड़ाने लगा। वो मेरे लण्ड को पकड़कर मुठ मार रही थी। मैं भी उसकी चूत के दाने को रगड़ रहा था।
फिर मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से चटाने लगा। उसकी चूत एकदम चिकनी और गीली हो गई थी। उसमे से एक भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी जो मुझे मदहोश किये जा रही थी।
मैंने उसकी चूत को जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उसने अपने दोनों पैर चौड़े करके फैलाये और मेरे मुँह को जोर से दबाया जिससे मेरी जीभ उसकी चूत में चली गई। फिर उसने दोनों पैर मेरे मुँह पर जकड़ दिए। मैं चूत को और जोर से चूसने लगा।
वह ख़ुशी के मारे पागल हो गई और बोली- अंकल, आज तक मेरी चूत इस तरह किसी ने नहीं चूसी।
कुछ देर बाद हम दोनों 69 के आसन में आ गये। अब उसने भी मेरा लण्ड चूसना
चालू किया। मेरा लण्ड ख़ुशी के मारे पागल हुआ जा रहा था। बहुत दिन बाद लण्ड
को ऐसा आनंद मिल रहा था।
अब मैं रेखा के ऊपर लेट गया और उसके सर से चूत तक सब अंगों को चूमने लगा।
जब मैं अपना लण्ड उसकी चूत में डालने लगा तो उसने कहा- पानी अन्दर मत छोड़ना।
मैंने उसे कहा- डरो मत मैं अपना नसबंदी का आपरेशन करा चुका हूँ, कोई खतरा नहीं है !
तब उसने लण्ड को अन्दर जाने दिया। मैंने धीरे-धीरे लण्ड को अन्दर डाला वो सिसकारियाँ भरती रही और बोली- मेरा आदमी तो बिना कुछ किये लण्ड जोर से अन्दर डाल देता है और तुरंत झड़ जाता है। आप के साथ मजा आ रहा है। पूरा लण्ड अन्दर जाने के बाद अन्दर ही रहिये।
मैं अपना 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में डाल कर उसे चूमता रहा और उसके बोबे सहलाता रहा। करीब दस मिनट हम इस तरह पड़े रहे। उसके बाद मैंने अपना लण्ड चूत में अन्दर-बाहर करना चालू किया।
पाँच मिनट बाद रेखा के मुँह से आह निकली और हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने फिर उसकी चूत को चूसा।
उसने कहा- आंटी के आने का समय हो रहा है ! बस करो !
मैंने रेखा से पूछा- तू चार-पांच लौड़ों से चुदवा चुकी है तो एक बात बता, तुम औरतों को लम्बे लौड़े पसंद हैं या मोटे?
उसने कहा- मोटे लौड़े अच्छे होते हैं, मोटे लौड़े चूत में कस कर फिट हो जाते हैं और आगे पीछे धक्के लगते समय चूत की दीवार अच्छी पकड़ बनाये रखती है जिससे औरत को बहुत मजा आता है। लम्बे लौड़े चूत में ढीले रहते हैं और ज्यादा अन्दर जाने से दर्द होता है। लौड़े पतले होने से चूत में घर्षण ठीक से नहीं होता और अन्दर हवा चली जाने से लौड़े पर चूत की पकड़ कम होती है इसलिए मजा कम आता है।कहानी जारी रहेगी।
जैसे जैसे दिन बीतते गए हमारी नजदीकियां बढ़ती गईं। अब मैं रेखा को रोज चूमता और आलिंगन करता।
एक दिन रेखा ने कहा कि उसे सर दर्द हो रहा है तो मैंने तुरंत उसके सर पर बाम लगा कर उसका सर दबाया और कमर और पीठ की मालिश भी कर दी।
उसने कहा- बहुत अच्छा लग रहा है।
उसने मुझे चूम लिया और अपनी बाँहों में कस कर पकड़ लिया।
इस तरह जब वह रोज काम पर आती तो कभी-कभी मैं उसकी कमर और पीठ की मालिश कर देता और उसे भींच कर चूम लेता। हफ़्ते में एक दो बार हम चुदाई भी कर लेते थे।
एक दिन मैंने रेखा से कहा- तुम्हारी आंटी 4-5 दिन के लिए अपनी बहन के यहाँ दूसरे शहर जा रही है। हम दोनों 4-5 दिन खूब मस्ती करेंगे।
यह सुनकर वह बहुत खुश हुई और पूछने लगी- आंटी कब जा रही हैं?
मैंने कहा- कल !
दूसरे दिन मेरी पत्नी को स्टेशन छोड़ने के बाद मैं घर आया। थोड़ी देर में
रेखा भी आई। मैं बाज़ार से नाश्ता लेकर आया था। हम दोनों ने नाश्ता किया और
ऊपर अपने चुदाई क्षेत्र में आ गये।
मैंने रेखा को बाँहों में भींच लिया। उसे चूमा और दोनों बोबे हाथ में पकड़ लिए।
मैंने रेखा से कहा- आज ऐसे नहीं, हम दोनों पहले बाथरूम में साथ नहायेंगे।
वह मान गई।
मैंने टब में पानी भरना चालू किया, इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े
उतारने शुरू किये। हम दोनों बाथरूम के बाहर ही नंगे हो गए और आइने के
सामने खड़े होकर दोनों शरीरों को देखते रहे। मैंने रेखा से कहा- तुम बिल्कुल
अप्सरा लग रही हो !
और उसे बाँहों में जकड़ लिया। मैं सर से पैर तक उसे चूमता रहा।
मैंने रेखा से कहा- तुम पैर फैला कर खड़ी हो जाओ।
मैं उसके नीचे बैठ गया और उसे कहा- पेशाब करना चालू करो, मैं उसमें नहाना चाहता हूँ,
वह शरमा गई और बोली- मैं ऐसा नहीं कर सकती !
मैंने कहा- तुम्हें मेरी कसम ! करना पड़ेगा !
वह मुश्किल से मान गई और उसने पेशाब करना शुरू किया। मैंने उसके गरम-गरम
मूत्र-स्नान का आनंद लिया और अपने लंड को उसके मूत्र की धार से अभिषेक
कराया।
फिर मैंने रेखा से कहा- रेखा, तुम्हारी झांटे बहुत बढ़ गई हैं, आओ मैं काट देता हूँ।
पहले तो वह शरमाई और मना करने लगी। बहुत मनाने पर वह मान गई।
मैंने रेज़र से उसकी झांटें साफ़ की और उसकी चूत को साबुन से धोकर चूमना चालू किया।
मैंने उसे कहा- महीने- बीस दिन में मैं तेरी झांटें काट दिया करूँगा।
उसके मुँह से आहें निकलने लगी। मेरा लंड भी खड़ा होकर उसकी चूत को सलामी देने लगा। उसने मुझे बताया कि उसके पति ने कभी उसकी झांट साफ़ नहीं की और न ही वह कभी चूत चूमता है। आज ये दोनों बातें आप कर रहें हैं, मुझे इतना मजा आ रहा है कि मैं बयान नहीं कर सकती। मैं अपने आप को भाग्यशाली समझती हूँ।
हम दोनों की सांसें फूलने लगी। उसकी चूत और मेरे लंड से चिकना पानी निकलने लगा।
आवेश में उसकी चूत की दोनों फांकें तितली के पंखों की तरह खुलने और बंद होने लगी। इधर टब में पानी भर चुका था।
मैं पहले टब में लेट गया और अपने ऊपर रेखा को बैठने के लिए इशारा किया।
वह मेरे ऊपर लेट गई। हम एक दूसरे को चूमते रहे और पानी से खेलते रहे। मेरा लंड गर्म पानी में उछलने लगा, रेखा भी उफान पर आ गई।
मैंने रेखा से पूछा- कैसा लग रहा है?उसने कहा- मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं।
फिर मैंने उसे कहा- अब तुम लंड को अपनी चूत में डाल कर मेरे ऊपर बैठ जाओ।
वह बैठ तो गई मगर बोली- ऊपर से बैठने से लंड अन्दर गड़ता है।मैंने कहा- तुम
मेरे ऊपर लेट जाओ और जितना लंड अन्दर लेना चाहती हो ले लो।
हम दोनों इस तरह एक दूसरे पर पानी में पड़े रहे। कुछ देर बाद उत्तेजना में रेखा ने चूत को आगे पीछे करना चालू किया, मैंने भी लंड से झटके देने शुरू किये।
दस मिनट में हम दोनों झड़ गए। हम लोग टब से बाहर निकले और एक दूसरे को
नहलाने लगे। मैंने उसकी पीठ और उसने मेरी पीठ पर साबुन मला और हम शावर के
नीचे खड़े हो गए। फिर हम दोनों ने एक दूसरे के शरीर तौलिए से पोंछे और
बिस्तर में आकर लेट गए।
रेखा बोली- दो और लोगों से चुदवा चुकी हूँ मगर आज जैसा मजा कभी नहीं आया।
उसने कहा- आज मुझे ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग का आनंद भोग रही हूँ !
मैंने उससे कहा- मुझे भी ऐसा ही लगा ! करीब एक घंटा हम दोनों चादर ओढ़े नंगे पड़े रहे और एक दूसरे के शरीर सहलाते रहे। मैं उसकी चूत की फांकें और वह मेरा लंड चूसते रहे। हम दोनों एक बार फिर बहुत उत्तेजित हो गए। मैंने फिर अपना लंड उसकी चूत में डाल कर पिस्टन की तरह चलाना चालू किया और हम दोनों झड़ गए।
रेखा ने मुझसे कहा- अंकल, मुझे आपकी एक बात बहुत अच्छी लगी है, आप गुदा में लंड नहीं डालते। मेरा पति इसके लिए जिद करता है तो मैं उसे मना कर देती हूँ। मुझे बहुत गन्दा लगता है।
रेखा ने कहा- मैं जिन दूसरे दो लोगों से चुदवाती हूँ उन्हें भी पहले ही साफ़-साफ़ कह दिया है कि अगर वो मेरे साथ ऐसा करना चाहेंगे तो मैं उनका साथ छोड़ दूँगी।
मैंने कहा- वह तो गन्दी बात है ही। भगवान ने लंड के लिए इतनी सुन्दर चूत दी है उसे छोड़ कर हम क्यों गन्दा काम करें।
यह सुनकर वह बहुत खुश हुई और कहा- मेरे पिछले जन्म के पुण्य से ही आप मुझे मिले। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ।
मैंने उससे कहा- कल हम समुन्दर के किनारे बालू में लंड और चूत का खेल खेलेंगे।वह हंस दी और बाय कह कर चली गई।दूसरे दिन सुबह सात बजे रेखा मेरे साथ सैर को जाने के लिए तैयार हो कर आई, आते ही वह बोली- जाने से पहले मुझे नहाना है।
मैं बहुत खुश हुआ, मैंने कहा- मुझे भी नहाना है, चलो दोनों एक साथ ही नहायेंगे !
हम दोनों बाथरूम में गए और एक दूसरे के कपड़े उतारने के बाद शावर के नीचे खड़े हो गए और एक दूसरे को चूमने लगे। उसके बाद मैंने रेखा को और उसने मुझे साबुन लगाया, हम दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर फिसलते गए।
मैंने रेखा को लिटाकर उसकी चूत को साबुन लगाकर साफ किया और रेखा ने मेरे
लंड की सफाई की। फिर मैं पागलों की तरह रेखा की चूत चाटता और चूमता रहा।
मेरा लंड खड़ा होकर उछलने लगा, रेखा ने लंड को पकड़ कर चूसना चालू किया।
हमारे ऊपर शावर का पानी लगातार पड़ रहा था। हम दोनों स्वर्ग का आनन्द महसूस
कर रहे थे।
रेखा ने कहा- अब नहीं रहा जाता, लंड को जल्दी अन्दर डालो।
चूँकि हमें समंदर के किनारे जाना था, मैंने अधिक समय न गंवाते हुए लंड को एक झटके में चूत के अन्दर धकेल दिया। रेखा के मुँह से आहें निकलने लगी, उसने भी चूतड़ हिला कर साथ देना चालू किया। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झर गए।
नहाना समाप्त कर हम दोनों तैयार होने लगे. दोनों ने अपने नहाने के कपड़े, तौलिया वगैरा बैग में रख लिए। मैंने अपना स्विमिंग कॉस्ट्यूम लिया और रेखा से कहा- तेरे लिए मैं टू-पीस स्विमिंग सूट रख लेता हूँ। वह बोली- मुझे स्विमिंग सूट पहनने में शर्म आयेगी, मैंने पहले ऐसे कपड़े नहीं पहने।
मैंने कहा- शर्म की कोई बात नहीं, समंदर में साड़ी या सलवार पहन कर जाने से तुझे बहुत दिक्कत होगी, दूसरी बात जहाँ हम जा रहे हैं वहाँ कोई और नहीं होगा।
मैंने उसके लिए टू-पीस रख लिया। इसके अलावा हमने अपने साथ दरी, पानी, चाय और खाने पीने की चीजें रख ली।
सब सामान कार में रखने के बाद हम दोनों बीच की ओर चल दिए। करीब एक घंटे की ड्राइव के दौरान मैं रेखा से उसके चुदाई के अनुभवों के बारे में पूछता रहा।उसने बताया कि उसकी पहली चुदाई गाँव में खेत पर एक लड़के ने की तब वह भी 18 साल की थी।
उसने बताया 19 साल की उम्र में उसकी पहली शादी हुई और 21 साल की उम्र में दूसरी। इसके अलावा फिलहाल उसके एक और आदमी से सम्बन्ध हैं। ये सब अपने आप में कहानियाँ हैं जोकि मैं बाद में लिखूँगा। उसने बताया कि उसे बचपन से लंड देखने में बहुत मजा आता है। गाँव में वह घोड़ों, गधों और दूसरे जानवरों के देखा करती थी और सोचती थी ये लम्बे गुब्बारे जैसे बाहर कैसे निकल जाते हैं और किस लिए होते हैं?
इस तरह बातें करते करते हम बीच पर पहुँच गए। मैंने कार काजू के पेड़ों की छाया में पार्क की और थोड़ी दूर पर केसुरिना के झुरमुट में हमने दरी बिछा दी। चूँकि वह एक वर्किंग डे था इसलिए हमारे आस-पास कोई नहीं था, दूर झुरमुट में सिर्फ वहाँ एक और युगल था।
मैंने अपने सब कपड़े उतार दिए और रेखा से कहा- तुम भी सब कपड़े उतार दो।
वह शर्माने लगी तब मैंने उसकी सलवार कुर्ती उतार दी, फिर उसकी ब्रा और पेंटी भी उतार दी।
रेखा के बोबे और चूत धूप में बहुत सुन्दर लग रहे थे।
मैंने रेखा को सिर से पैर तक चूमना चालू किया, उसके दोनों बोबों की
हल्के-हल्के मालिश शुरू की। धीरे धीरे उसकी सुन्दर चूत को सहलाने लगा।
इतने में वह बोली- भूख लगी है, नाश्ता कर लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है !
रेखा ने नाश्ते के लिए ब्रेड पर जैम और मक्खन लगाया और चाय के कप भर दिए।
हम ब्रेड स्लाइस और चाय के कप अदल बदल कर खाते पीते रहे।
मैंने रेखा से कहा- तुम अब लेट जाओ !
फिर मैंने उसकी की चूत पर मक्खन और जैम मिला कर चुपड़ दिया, वह बोली- ये क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- देखती जाओ।
फिर मैंने बटर और जाम अपने लौड़े पर चुपड़ा जो अब तक फुदकने लगा था, रेखा की चूत पर लगे हुए जैम को मैंने चाटना शुरू किया, रेखा की चूत के रस के साथ मक्खन और जैम का स्वाद दुगुना हो गया।
मैं मदहोश होकर उसकी चूत चाटता रहा, रेखा आनंद के मारे किलकारियाँ मार रही थी, उसने उठ कर मेरे लंड के ऊपर लगा माल चाटना शुरू किया। फिर हम दोनों 69 की दशा में एक दूसरे को चाटने लगे, मैंने अपने लंड पर और जैम लगा कर रेखा की चूत में डाल दिया।
रेखा चीखने लगी- हाय राम ! ऐसा मजा तो पहले कभी नहीं आया, चोदो ! चोदो ! यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर रेखा की चूत के दाने को फिर चूसना चालू किया तो वह एकदम से झर गई। अब रेखा ने मुझे लेटने को कहा, उसने फिर लंड पर जैम लगाकर चाटना शुरू किया, दूसरी तरफ से मैं उसकी चूत चाट रहा था। अब रेखा ने चुदवाने के लिए मेरे ऊपर बैठ कर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया, फिर वह मेरे ऊपर झुक गई और मुझे चूमने लगी। अब हम एक दूसरे को चूम रहे थे और रेखा मेरे लंड पर कूदें लगा कर चुदाई कर रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों फिर झर गए। इस तरह हमारा डेढ़ घंटा कैसे बीता, पता नहीं चला।
थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने रेखा से कहा- चलो अब समंदर में नहाते हैं !
स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहनकर हम दोनों समंदर में गए। लहरों के थपेड़ों में हम दोनों एक दूसरे को आलिंगन करते चूमते-नहाते रहे। एक जगह पत्थरों की ओट में हम दोनों स्विमिंग कॉस्ट्यूम उतार कर लेट गए हमारे ऊपर लहरें आती तो हम एक दूसरे से लिपट जाते।
मैंने रेखा से कहा- चलो। हम अब यहाँ पर लहरों में चुदाई करते हैं।
थोड़ी देर चूत और लंड से खेलते-खेलते रेखा फिर मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चुदाई करने लगी। बीच-बीच में लहरे आकार हमें धक्का दे जाती थीं। पानी में हमने आधा घंटे चुदाई की और फिर झर गए।
बाहर आकर हम दोनों ने एक दूसरे को तौलिए से पोंछा और फिर खाना खाने नंगे ही बैठ गए। खाने के बाद हम आराम करने लेट गए। करीब एक घंटे बाद हम एक दूसरे को चूमते हुए उठे।
रेखा आज जो हुआ उस को सोच कर बहुत अचंभित और खुश थी, उसने कहा- जीवन का यह सबसे सुखद दिन है।
जैम लगाकर चटाने की बात पर उसे बहुत हंसी आ रही थी, उसने कहा- मैंने पहले कभी ऐसा न तो सोचा, न किया।
मैंने कहा- मेरे लिए भी इतने लम्बे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है।
मैंने उससे कहा- लौटने के पूर्व मैं एक और नई चीज करना चाहता हूँ जो तुमने पहले नहीं की होगी।
उसने पूछा- वह क्या है?
मैंने कहा- तुम्हारी चूत समंदर के पानी से खारी हो गई है, पहले मैं इसे साफ पानी से धो देता हूँ, फिर देखना।
मैंने चूत धोकर रुमाल से पोंछ दी. फिर बैग से एक केला निकला उसे छील कर रेखा से कहा- अब तुम अपने दोनों पैर फैलाओ मैं केला तुम्हारी चूत में डालूँगा।
वह बोली- किसलिए?
मैंने कहा- देखो !
और केला उसकी चूत में डाल कर लंड जैसे आगे पीछे करने लगा।
रेखा बोली- यह तो लंड जैसा ही लग रहा है।
फिर मैंने केला बाहर निकाल कर रेखा को दिखाकर एक टुकड़ा खाया।
रेखा आश्चर्य से चीख उठी- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मैं इसे चूत के रस के साथ खा रहा हूँ, तुम भी खाकर देखो, कोई नुकसान नहीं होगा।
पहले तो उसने मना किया पर समझाने पर मान गई, उसने भी एक टुकड़ा खाया और बोली- ऊपर से थोड़ा नमकीन है, शायद समंदर का पानी होगा।
मैंने कहा- नहीं पगली ! यह नमकीन स्वाद चूत से निकलने वाली चिकनाई का
है। जब दिमाग में सेक्स के विचार आते हैं तब यह पानी निकलता है। देख, मेरे
लंड से भी पानी के रंग का चिकना रस निकल रहा है, इसे चख कर देख यह भी नमकीन
लगेगा।
उसने मेरे लंड से निकलता हुआ चिकना रस चाट कर देखा और कहा- सच, यह पानी चिकना और थोड़ा नमकीन है।
मैंने बाकी केला फिर चूत में डाला और कुछ धक्के लगाये फिर उसे निकाल कर हम दोनों ने केला खा लिया।
अब तक चार बज चुके थे हम दोनों ने आखिरी बार लंड और चूत का खेल खेला और अपने घर लौट आए।
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