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Thursday, 26 September 2024

लांघे की लाजो

 अपने दोस्त की जिसका नाम लांघा है, लांघा भी मनाली में रहता है, बहुत बड़ा रंडीबाज़ है वो ! क्या बताऊँ उसके बारे में !

पेशे से वो ठेकेदार है। ठेकेदार है तो जाहिर सी बात है कि उसके पास मज़दूर भी होगें।

एक दिन की बात है कि वो अपने मज़दूरों से काम करवा रहा था। कि उसकी नज़र एक काम करने वाली पर पड़ी। उस दिन मैं भी उसके साथ मैं था।

वो थी ही सच में बड़ी सेक्सी !

तभी लांघा बोलने लगा- यार, यह मिल जाए तो मज़ा आ जाये !

थी भी वो 24-25 साल की।

उसे पास बुला कर कुछ देर लांघा ने उसके साथ बात की और उसके बाद हम उसकी सफारी में चले गए। शाम हो गई थी, तभी हमें हमारा दोस्त इन्घा मिल गया और हम ऐपल वैली चले गए पैग मारने के लिए !

तीन तीन पैग पीने के बाद हमें चढ़ गई और लांघा उसके ख्वाब लेने लगा। उस लड़की का नाम लाजो था। इन्घा भी बड़ा खुश हो रहा था लांघा की बातें सुन कर !

रात के साढ़े ग्यारह हो गए थे, हम लोग रात का खाना खाकर चले गए।

लांघा के खुरापाती दिमाग में अभी भी वो बिहारन लगातार घूम रही थी, वो सोच रहा था कि मैं कैसे उसकी लूँ?

सुबह हम लोग मिले और उसके मुँह पर फिर वही बात थी। लाजो की ! इन्घा भी खुश हुए जा रहा था !

उसके बाद वो अपने काम पर चला गया। आज उसकी डार्लिंग लाजो काम पर नहीं आई थी तो उसने अपने मुंशी हीरू से पूछा- अबे ओये हीरू ! वो लाजो कहाँ है?

तो वो कहता- साहब वो बीमार है, और घर पर है !

लांघा ने काम का मुयाना किया, दो चार गालियाँ मज़दूरों को बकी और चलता बना।

मन में लाजो की चाहत लिए वो लाजो की झुग्गी में पहुँच गया।

लाजो बिस्तर पर लेटी थी।

तभी उसके नज़र अपने ठेकेदार पर पड़ी, कहती- बाबू जी ! आप कैसे आ गए !

तो लांघा कहता- मैंने सोचा, चल तुझे पूछ आऊं ! कैसी है अब तबीयत ?

कहती- पहले से ठीक हूँ !

और लांघा उसके पास जा कर बैठ गया, धीरे धीरे उसकी टांगों पर हाथ फेरने लगा। उसको मौका मिल गया था, वो भी कुछ नहीं बोल रही थी।फिर क्या था मानो कुत्ते के मुँह में हड्डी आ गई हो !

फिर तो लांघा ने न तो आव देखा न ताव ! चढ़ बैठा उसके ऊपर !

लगा उसके साथ चूमाचाटी करने !

तभी उसने उसके बड़े बड़े रसदार मोमे चूसने शुरू कर दिए। साला लांघा अब उसे पूरा नंगा कर चुका था और अपना पप्पू निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया।

साला था गाण्ड का बड़ा शौकीन ! लगा वो उसकी गाण्ड को चाटने !

और फ़िर अपना लण्ड उसने उसकी गाण्ड में डाल दिया और लगा उसकी फुचक फुचक चुदाई करने !

साला था ही बहुत बड़ा गांड मारू !

तकरीबन दस मिनट तक गांड चुदाई के बाद निकाल दिया उसने अपना माल और पड़ गया लाजो की बाँहों में !

तभी लाजो बोली- बाबू जी, आपने मेरी गांड तो मार ली ! अब फुद्दी कब लोगे?

तब लांघा ठेकेदार बोला- अगली बार बेबी !

कह कर उसे सौ का नोट दिया और वहाँ से चलता बना।

पहली बार साले ने चुदाई के बाद किसी को पैसे दिए होंगे।

अब तो क्या बात थी ! लाजो बन गई थी लांघा की रानी !

उससे न काम करवाता था न कुछ और !

लाजो के भी मज़े और लांघा के भी !

लंड की करतूत

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छोटी साली के बाद रूपा

 

मेरी पहली कहानी मै आपके लिए पेश कर रहा हूँ, ‌‍मै 23 साल का लड़का हूँ, मुम्बई के पास के पालघर तालुका में रहता हू। मेरा घर गांव में है।

यह कहानी दो साल पहले की है। मेरे घर में हम सब संयुक्त परिवार में रहते हैं। मेरे चाचा ने छोटे बच्चे के देखबाल के लिए एक लड़की को रखा हुआ था। चाचा-चाची दोनों काम पर जाते थे और मेरे मम्मी-पापा भी काम पर जाते हैं। घर में सिर्फ दादा-दादी ही होते हैं इसलिए मैं हमेशा छोटू से मिलने के लिए या खेलने के लिए वहाँ अक्सर जाता था। उस नौकरानी का नाम रूपा था, उम्र 19-20 साल होगी, दिखने में साधारण पर उभार ऐसे थे कि कामदेव ने खुद तराशे हों।

मेरे मन में उसे पाने की इच्छा जागृत हुई, वो हमेशा मुझे देख कर शरमा कर हंसती थी। मैं चाचा के कम्प्यूटर पर हमेशा बैठा करता था लेकिन सिर्फ पढ़ाई या गाने सुनने के लिए।

मुझे एक ख्याल आया, मैंने सुबह चाचा के कम्प्यूटर पर एक अंग्रेजी फिल्म लगाई। रूपा उधर ही छोटू के साथ खेल रही थी। वो भी फिल्म देखने लगी।

बाद में छोटू को सोना था, इसलिए रूपा बोली- आवाज कम कर दो !

मैंने फिल्म बंद कर दी और कहा- मैं ऊपर टीवी देख लूँगा ! तुम छोटू को सुला दो।

उसने कहा- ठीक है ! पर मझे भी टीवी देखना है।

मैं बोला- तुम छोटू को सुलाकर उपर आ जाना।

वो बोली- ठीक है।

मैं अपने बेडरूम में आया, टीवी लगाकर उस पर फ़ैशन चैनल जो लॉक था, अनलॉक कर दिया और रूपा का इंतजार करने बैठ गया।

थोड़ी देर बाद रूपा आई, मैंने उसे अपने पास बाजू में बैठने को कहा तो वो बैठ गई।

तब मैंने कहा- क्या देखोगी?

उसने कहा- आप ही देखो जो देखना है।

मैंने कहा- जो मैं देखूँगा वो तुम्हें शायद पसंद न आए !

उसने सिर्फ हंस कर मेरे तरफ देखा तो मैंने फ़ैशन चैनल लगा दिया और देखने लगा। उसके चेहरे पर शर्म साफ दिख रही थी।

वो कुछ बोल नहीं रही थी।

टीवी पर बिकनी पहने मॉडल आई तो तभी मैंने कहा- तुम हंस क्यों रही हो?

उसने टीवी की तरफ़ देखा और फ़िर मेरी तरफ।

मैं समझ गया और कहा- तुम ऐसे कपड़े नही पहनती?

उसने गर्दन ना में हिलाई।

तो क्या पहनती हो?

उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे ऐसे ही कुछ सामान्य सवाल पूछे तो वो जवाब देने लगी। आखिर मैंने पूछा- तुम्हें यह देखने में मजा आया?

उसकी गर्दन हाँ में हिलाई। वो अब खुल रही थी।

तब मैंने कहा- तुम नीचे फिल्म देख कर हंस रही थी, वो क्योंकि हीरो-हिरोइन गले लग रहे थे इसलिए या वे चूम रहे थे इसलिए?

उसने कहा- मैंने ऐसा पहले नहीं देखा था इसलिए।

मैं बोला- और देखना है?

वो हाँ बोली तो मैंने कहा- ठीक है नीचे चलो !

और हम फिर से पीसी पर वो फिल्म कम आवाज करके देखने लगे। मैंने उसे 007 के बेड सीन दिखाए और मैं रूपा को देख रहा था। तभी छोटू उठ गया और वो वहाँ से चली गई।

मैंने उससे पूछा- अच्छा लगा? वो बोली- हाँ।

मैंने कहा- तुम कल भी देखना चाहोगी?

वो हाँ बोली तो मैंने बोला- इससे ज्यादा अच्छा पर गंदा भी है।

उसने कहा- ठीक है, मैं जरूर देखूंगी पर कहाँ?

कल छोटू सो जाने के बाद ऊपर मेरे बेडरूम में आ जाना !

वो बोली- ठीक है।

तभी मैंने छोटू के साथ खेलना शुरु किया। उसकी गोद में छोटू था और मैंने उसे गुदगुदी करने के बहाने रूपा के उभारों को हल्के से छू दिया। वो कुछ नहीं बोली या फिर उसे पता नहीं चला। इसलिए मैंने दोबारा वैसे ही किया पर इस बार दबाव थोड़ा बढ़ाया। फिर भी वो कुछ नहीं बोली।

मैं समझ गया और वहाँ से निकल कर ऊपर आ गया और सोचने लगा कि मेरे पास कोई ब्लू फिल्म नहीं थी क्योंकि उसको रखना खतरनाक होता है इसलिए मैंने अपनी सीडी अपने दोस्तों को दे रखी थी।

फिर मैं अपने दोस्त के घर गया और सीडी लाकर घर में छुपा कर रख दी और दूसरे दिन के सपनों में खो गया। रातभर नींद नहीं आई, पहली बार मैं किसी लड़की के साथ कुछ करने जा रहा था।

दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और तैयारी करने लगा।

पहले तो सीडी-प्लेयर में सीडी डाल दी और चला कर देख ली। फिर नहा-धोकर तैयार हुआ और मेरे खास छुपाये हुए कोंडम ड्राअर से निकाल कर रखे। दोस्तों ने कहा था कि बिना कोंडम कुछ मत करना।

आखिरकार वो छोटू को सुलाकर दोपहर को ऊपर आई। मैंने दरवाजा खुला रखा था।

वो आई और मेरी तरफ देखने लगी।

मैं बोला- टीवी देखें?

उसने कहा- हाँ। फिर पहले फ़ैशन चैनल लगाया और उससे कहा- आओ, बैठो !

वो मेरे पास आकर बैठ गई। उसका शरीर थोड़ा कांप रहा था और मेरा भी ! लेकिन मुझ से रहा नहीं जा रहा था फिर भी मै चुप रहा। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उसके हाथ के पास रखा और धीरे-धीरे उससे सटकर बैठ गया।

वो सिर्फ टीवी देख रही थी। थोड़ी देर बाद टीवी पर एक मॉडल के स्तन ड्रेस के बाहर निकले हुए देखकर मैं बोल पड़ा- वाह !

उसने मेरी तरफ देखा और बोली- तुम्हें ऐसी नंगी लडकियाँ पसंद हैं?

मैंने कहा- वो दिखा रही हैं, मै देख रहा हूँ।

उनको शर्म नहीं आती? उसने कहा।

तो मैं बोला- हर एक के पास जो है, वो है, उसमें क्या शर्माना?

वो बोली- तुम यही दिखने वाले थे या वो कल वाला जहाँ वो दोनों थे?

मैंने पूछा- कौन दोनों?

कल फिल्म में लड़का और लड़की थे, वैसे !

ठीक है, पर आज थोड़ा अलग है।

वो बोली- अलग क्या है?

तो मै बोला- देखती रहो !

और रूपा के दूसरी तरफ़ पड़ा रिमोट लिया हाथ उधर ही रख कर सीडी-प्लेयर ऑन किया। टीवी पर चैनल बदलते ही फिल्म चालू हो गई। पहले लड़का-लड़की पास आकर चूमा-चाटी करने लगे। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ से ले जाते हुए उसकी नरम जांघों पर रख दिया। उसका शरीर कांप रहा था, धड़कन तेज हो रही थी। उसकी सांसें मेरे करीब से गुजर रही थी, वो मदहोश हो रही थी।

मेरा हाथ उसकी जांघों पर धीरे-धीरे घूम रहा था।

तभी फिल्म में दोनों ने अपने कपड़े उतारे और वो प्यार करने लगे।

शायद रूपा ने मर्द का तना हुआ लंड पहली बार देखा था तो वो उसे गौर से देखने लगी।

लड़की ने उसका लंड चूसना शुरू कर दिया। वैसे ही उसने मेरे हाथ को जोर से पकड़ कर दबाया। मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा और उसके योनि को एक हाथ से सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसका स्तन पकड़ लिया।

वो सिसकारियाँ ले रही थी और मेरे लंड पर दबाव डाल रही थी। हम कपड़े पहने थे इसलिए हमारे बदन की गर्मी बढ़ने लगी, दोनों पसीने-पसीने हो गए।

टीवी पर उस लड़के ने उस लड़की को चोदना शुरू कर दिया।

मेरे पास इतनी ताकत नहीं थी कि मैं इतना दबाव पहली बार में झेल जाऊँ। मैं उसके पीछे जाकर बैठ गया, अपने पैर उसके पैरों पर रख लिए।

मेरा लंड उसकी गांड पर घिस रहा था, रगड़ खा रहा था। उसके बोबे मेरे हाथों से मसले जा रहे थे, उसकी योनि रगड़ कर मैं उसे और उत्तेजित कर रहा था।

लेकिन कुछ ही पल बाद वो मेरी बाहों में सुस्त पड़ गई, मै भी पैंट में ही झड़ गया।

हम थोड़े शांत हो गए। फिर भी टीवी पर चुसाई-चुदाई के दृश्य हमें भड़का रहे थे।

तभी मैंने उससे कहा- तुम मेरे साथ वैसा करना चाहोगी?

उसने कहा- हाँ जरूर ! जल्दी करो ! मैं बेचैन हो रही हूँ।

मैंने उसे वहीं छोड़ बाथरूम में जाकर अपना लंड साफ किया। ठंडा पानी लगते ही वो खड़ा हो गया। मेरा लंड आज पहली बार इतना ताकतवर दिख रहा था- साढ़े पाँच इन्च लम्बा और डेढ़ इन्च मोटा। फिर मैं वापिस कमरे में आया और रूपा को गले लगाया। वो भी ऐसे लिपट गई जैसे वो मेरे शरीर का हिस्सा हो।

मैंने उसके होंटों को चूमा और रगड़-रगड़ कर घायल कर दिया। फिर मैंने उसकी टॉप उतारी, ब्रा भी उतारी और उसके सफेद बड़े से बोबे देखकर मैं पागल हो गया जिन पर गुलाबी रंग के चुचूक उनकी शोभा बढ़ा रहे थे।

मैं उन्हें चूसने लगा पागलों की तरह ! उन्हीं में डूब गया ! वो अपने होंटों को चबा रही थी और मुँह से सिसकारियाँ निकाल रही थी। मैंने अपने दांत उसके चुचूक पर गड़ा दिए। वो ‘आ-आई’ करके चिल्लाई।

फिर मैंने अपनी शर्ट उतारी, पैंट भी उतारी, उसने अपनी स्कर्ट निकाली हम दोनों सिर्फ चड्डी में थे तो मैंने कहा- इसे क्यूँ रखे हो?

मैंने उसकी और उसने मेरी चड्डी उतारी !

हम बिल्कुल नंगे खड़े थे। वो मेरे लंड को घूर रही थी और मैं उसकी काले बालों से ढकी चूत को देखकर पगला रहा था।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके होंटों को चूमते हुए चूचियों से होते हुए उसकी चूत पर पहुँच गया और चूसने लगा।उसकी सीत्कारें बढ़ने लगी। तभी मैंने अपना लंड उसके मुँह में घुसा दिया। वो उसे चूसने लगी तो मैं भी उसके चूत में उंगली डाल कर चूसता रहा। बाद में मैंने समय न गंवाते हुए कोंडम निकाल कर पहन लिया, उसकी टाँगें ऊपर उठा कर लंड सही जगह रख कर मैंने उसका मुँह पूरा जीभ से भर कर जोर से एक धक्का मारा।

मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर दाखिल हो गया और वो मुझसे छुटने की नाकाम कोशिश करती रही।

मैंने उसके बोबे बहुत सहलाए। थोड़ी देर बाद वो कमर उठाने लगी तो तभी मैंने उसका मुँह छोड़ा और आधा लंड अंदर-बाहर करने लगा और दूसरा जोरों का धक्का दिया।

उसका मुँह हाथ से बंद करके रखा था, उसके चुचूक रगड़ रहा था, चूस रहा था।

दो मिनट बाद मैं उसे दनादन चोदने लगा और वो मुँह से आह ! अहा! आ ! आअ ! अआया ! कर रही थी। बीस मिनट की चुदाई के बाद मैं छुटने वाला था। वो भी मुझे कसकर पकड़ने लगी। कमरे में धप-धप की आवाज आ रही थी।

हम दोनों झड़ने लगे और उस स्वर्ग से एहसास के धीरे-धीरे कम होते हुए हम निढाल होकर कुछ देर उसी अवस्था में पड़े रहे।

मैं उठा, उसकी चूत से निकला खून मेरे लंड और चादर पर था।

फिर हमने अपने कपड़े पहने। उसने चादर धो दी और दूसरे दिन मिलने को कहकर उसे प्रगाढ़ चुम्बन किया।

यह थी मेरी पहली चुदाई ! हमने फिर बहुत मजे लिए, वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।

आपको मेरी कहानी कैसे लगी, मुझे बताएँ !

अब इस कहानी को पढ़ने से पहले मैं आपको याद दिला दूँ कि मेरी बीवी ने कामवाली माया की बेटी रूपा को घर के काम के लिए रख लिया था। एक रात मेरी छोटी साली ने मेरी बीवी को दवाई के सहारे सुला दिया और हम भूल गए थे कि माया की बेटी रूपा घर में थी, हम अपनी तरफ से बेफिक्र होकर मजे से नंगे एक दूसरे के जिस्मो में खोये थे, रूपा मे मुझे मेरी साली के साथ नंगे होकर चुदाई करते देख लिया।

वैसे मैंने रूपा को पहले भी देखकर जान लिया था कि वो जवान हो रही है, लेकिन जब उसने मुझे नंगा देखा, मुझ उसकी जवानी का पूरा एहसास हुआ।

साली को मैंने आराम से चोदा और अपने कमरे में जाने लगा तो सोचा एक बार देखूँ रूपा सो गई या !!

मुझे माया से कुछ दिन पहले पता चला था कि कोई लड़का रूपा को चाहता है और उसने रूपा को उसके साथ चुम्मा-चाटी करते पकड़ा था।

रूपा कुछ घबराई सी पासे पलट रही थी, वो जमीन पर सोई थी, सोई नहीं थी अभी लेटी थी। मुझे कुछ खुसर-फुसर सुनी तो देखा कि उसके हाथ में एक मोबाइल था और वो किसी से बातें कर रही थी, मैं वहीं रुक गया,

रूपा मोबाइल पर बोल रही थी- तुझे मालूम है, आज जब मैं छोटी दीदी को दूध देने गई तो वहाँ तो नज़ारा बदला हुआ था, साब जी और उनकी छोटी साली दोनों बिल्कुल नंगे थे। बोली- अमर, क्या ऐसा भी होता है कि सही जगह की बजाये उलटी जगह में कुछ हो पाता है?

पता नहीं उसको उसके यार ने क्या जवाब दिया, पर रूपा बोली- शर्म करो, मुझे ऐसी बातें पसंद नहीं हैं।

लेकिन साली एक नंबर की कुतिया थी उसका खाली हाथ कभी उसकी फुद्दी पर जाता कभी उसके मम्मों पर !

मेरे मन में आया- वाह वरिंदर वाह ! इतना करार माल घर में पल रहा है, लगा दे निशाना, पकड़ ले कमीनी को !

लेकिन फिर सोचा कि ऐसे एकदम से कहीं बात बिगड़ जाए।

उसके यार ने पता नहीं उसको क्या कहा, वो बोली- तुम बहुत शैतान हो ! लेकिन मैं इतनी जल्दी ना काबू आऊँगी !

कह कर वो अपनी फुद्दी मसलने लगी, कभी मम्मे मसलने लगती।

मेरा गोपाल पूरा खड़ा था, मैंने अपना मोबाइल निकाला और उसकी मूवी बना डाली।

अब मेरी नजर उस पर थी। सुबह जब मैंने उसको देखा, बड़े गौर से देखा मैंने, उसकी आँखों में आंखें डाल कर देखा और धीरे से आँख दबा दी।

वो शर्म से लाल हो गई, लेकिन उस वक्त सभी घर में थे।

अब मेरा निशाना रूपा की फुद्दी फाड़ने का था, हूँ तो पंजाबी जाट ! क्या हुआ कि गाजियाबाद में बस गया।

दोस्तो, एक बात मैंने नोट की है कि पंजाबी लौड़े की यहाँ औरतें दीवानी हैं, तभी तो यहाँ आकर मैं कितना बड़ा चोदू बन गया था।

रूपा रात को अकेली ही सोती थी लेकिन मोना को रोज़ नींद की दवाई देना सही नहीं था उधर पिंकी भी भारत आ गई थी अपने खसम के साथ।

मेरा दिल रूपा जैसी कमसिन लड़की को कलि से फूल बनाने का था, उसकी फ़ुद्दी के सिंदूर से लौड़े के माथे को तिलक करवाना था।

दोपहर को मौका था, मोना और छोटी साली बाज़ार जाने के लिए तैयार थी, सोचा उनको छोड़ वापस आऊँगा और रूपा से तिलक लगवाऊँगा।

मैं घर लौटा तो पिंकी वहाँ आई हुई थी, मुझे देख उसकी बांछें खिल गई, वो दौड़ी और मेरे सीने लग गई- कैसे हो वरिंदर?

“मैं बिल्कुल ठीकठाक हूँ, तुम सुनाओ? पहले आ जाती, मोना और छोटी को अभी बाज़ार में छोड़ कर आया हूँ।”

“तभी तो आई हूँ राजा ! तूने जो सुख दिया था, मैं वहाँ रहकर नहीं भूली !” मेरे होंठों पर होंठ रगड़ने लगी।

मेरा दिल ताज़ा माल खाने का था, यह बासी औरत कहाँ से आ गई।

पिंकी मुझे बाजू से पकड़ कर कमरे में ले गई और मुझसे लिपटने लगी, मेरा पौरुष जगाने लगी। उसने अपना टॉप उतार फेंका। काली ब्रा में उसके बड़े बड़े चूचे देख मैं भी उनमें खोने लगा और मम्मों को चूसने लगा, वे पहले से बढ़ गए थे।

पिंकी मेरे लौड़े से खेलने लगी, पिंकी चुद कर बोली- अब मुझे बाज़ार छोड़ दो।

“मुझे दूसरी तरफ़ जाना है, ऐसा करता हूँ, तुझे मोड़ से रिक्शा करवा देता हूँ अगर बुरा ना मानो डार्लिंग !”

“कोई बात नहीं वरिंदर, आपने मेरी बैट्री चार्ज कर दी है, रोम-रोम खिल उठा है, उस कमीने ने तो रात को पहले मुझे बीच ही रास्ते छोड़ा और मैं कुछ कह बैठी तो मेरी पिटाई से ठुकाई कर दी !”

उसको छोड़ मैं वापस घर लौट आया, रूपा रसोई में दोपहर का खाना तैयार कर रही थी।

मैं जाकर लॉबी में बैठा, वो आई पानी का ग्लास लेकर, मैंने बहुत प्यार से उसको देखा, मेरी नज़र उसकी छाती पर चली गई, अभी विकास पर थी लेकिन जल्दी एक एटम बम बन कर मतवालों के दिलों को डसने के लिए तैयार हो रही थी।

“क्या बात है रूपा, आज बहुत निखरी हुई हो? रूपा, दिन ब दिन तेरा रूप निखरता जा रहा है, बचकर रहा कर ! बाहर बहुत प्यासे घूमते हैं !”

वो शर्माने लगी।

“क्या हुआ रूपा? तूतो शर्माने लगी, मैं सच कहता हूँ, तुमने तो मुझे भी डस लिया है !”

वो शरमा कर वहाँ से भाग निकली, मुझे लगा कि यह तो साली चालू है, जिस तरह से यह रात को अपने किसी यार से बातें कर रही थी, उसकी बातें सुन सुन कर अपनी सलवार खोल कर बैठी थी, अपने मम्मे दबा रही थी, वो लड़की नाराज़ होने या गुस्से वाला चेहरा बनाने के बजाये शरमा कर हंस कर वहां से तितली की तरह उड़ गई, कहीं मेरा लौड़ा तिलक लगाने से वंचित तो नहीं रह जाएगा।

खैर देखना था किस्मत में क्या है, लाटरी लगती है या नहीं !

भगवान् का नाम लेकर मैं उठा बार में रोमिंग चेयर पर बैठ गया, ग्लास लिया उसमे पैग डाला और रूपा को बुलाया- रसोई से खट्टा मीठा भुजिया लेकर आ !

वो आई, बोली- साहब दोपहर में दारु?

“शवाब को देख शराब पीनी पड़ती है रूपा रानी !”

“नशे में आप क्या करते हो, आपको मालूम भी है?”

“क्या करता हूँ?”

“मैंने कल रात देखा !”

“वो मेरी साली है, आधी घरवाली है मेरी ! तुझे मुफ़्त में फिल्म देखने को मिली और तुझे घंटा चाहिए?” मैंने पैग खींचा, मेरा दिमाग में आया किमेरे पास तो दिल्ली से ली हुई टेबलेट्स पड़ी हैं, उठकर गया, गोली लेकर आया, कोल्ड ड्रिंक में डाल कर मिला ली।

“हे रूपा रानी, बात सुन ! क्या मुझे अकेले को बैठना पड़ेगा? मेरा साथ तो दे दे रूपा !”

मैं नी पीती !”

“क्या साथ देने के लिए शराब पीनी ज़रूरी है? सब कुछ है घर में, यह ले कोल्ड ड्रिंक पकड़, मेरे पास बैठ, तुझे देखता हूँ तो दारु का नशा बढ़ने लगता है। कितने आशिक हैं तेरे इस हुस्न के?”

“क्या आप भी कैसी गंदी बातें करने लगे?” उसने कोल्ड ड्रिंक खत्म कर दी, रसोई में जाकर आटा गूंथने लगी।

उसके हाथ आटे वाले थे, मैं धीरे गया, उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने ऊँचा सा कमीज़ पहना था, उसकी गाण्ड मुझे काफी उभरी हुई महसूस हुई। मैंने धीरे से उसकी गाण्ड को सहला दिया।

वो चौंकी- आप साब? यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने उसकी चोटी को एक तरफ़ कर अपने तपते होंठ उसके गहरे गले वाले कमीज़ दे झलकती पीठ पर रख उसके बदन को चूमा।

वो एकदम से मचल उठी, उसके मुँह से सी सी निकली- देखो साब ऐसा मत करो।

उसकी गर्दन से कमीज़ के ऊपर से उंगली फेरता हुआ नीचे आया, कमीज़ उठाया और गाण्ड पर हाथ फेरा। मैंने पीछे से खड़े होकर उसके कमीज के अंदर घुसा दिया। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उसके मम्मों पर लगी, वो तड़प उठी।

उसके हाथ खाली नहीं थे, मैंने नोट किया जब मैंने उसके मम्मे पहले पकड़े थे वो नाज़ुक थे मेरे हाथ लगते ही वो अकड़ गए, उसके निप्पल तन गए !

बिल्कुल अपनी माँ पर गई थी, मैंने नोट किया कि उसके चूतड़ भी कसाव खाने लग गए थे, गोली असर कर चुकी थी। इस गोली का तजुर्बा मैंने सबसे पहले उसकी ही माँ पर किया था चार साल पहले।

“आपको सही लग रहा है इतनी छोटी लड़की से ऐसी हरकतें करते हुए?”

“क्या करूँ रूपा रानी ! वैसे तो मैं शायद तुझ पर ध्यान न देता, लेकिन कल रात जब तेरे पीछे गया था कमरे तक, जिस तरह से तूने सलवार घुटनों तक सरकाई हुई थी, कैसे अपने मम्मे खुद दबाने में लगी थी अपने किसी यार से बातें करती करती !”

उसके रंग उड़ने लगे- ऐसा वैसा कुछ नहीं किया मैंने ! आप मुझे मुफ्त में डरा रहे हैं !

“यह मेरा मोबाइल गवाह है, इसमें तेरी मम्मे दबाई और फुद्दी मसलाई की रस्में कैद हैं, देखोगी? तब से मेरा लौड़ा अकड रहा था रूपा रानी !”

उसका जो आटा वहीं का वहीं धरा रह गया था, चुप हो दोबारा गूंथने लगी।

मैंने प्यार से अपना हाथ उसके चिकने पेट पर फेरा, वो अकड़ने लगी थी, उसकी कमीज़ उठाई और तपते हुए होंठ उसकी पीठ पर कई जगह रगड़ने लगा जिससे वो बेकाबू घोड़ी होती जा रही थी।

उसके मम्मों को दबाते दबाते पीठ पर हाथ फेरते फेरते मैं नीचे आया, धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया।

“हाय ! यह क्या किया? वापस बाँध दो, वरना आपके हाथ छोड़ते ही यह नीचे गिर जायेगी।”

“कौन है यहाँ तीसरा? मैं ही तो हूँ तेरा साईं दीवाना ! पूरी जिंदगी ऐश करवाऊँगा तुझे रूपा !”

उसके मम्मों को दबाते दबाते पीठ पर हाथ फेरते फेरते मैं नीचे आया, धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया।

“हाय ! यह क्या किया? वापस बाँध दो, वरना आपके हाथ छोड़ते ही यह नीचे गिर जायेगी।”

“कौन है यहाँ तीसरा? मैं ही तो हूँ तेरा साईं दीवाना ! पूरी जिंदगी ऐश करवाऊँगा तुझे रूपा !”

“साब, अगर कोई ऊँच-नीच हो गई तो ऐसी ऐश का क्या होगा? पहले ही गरीब को बेटी हूँ !”

“साली, अगर तेरा यार तुझे ठोकता, जिससे बात हो रही थी, क्या उसके पास इतना पैसा है जो तेरा पेट साफ़ करवा दे?”

“आपने मैडम की दोनों बहनों को भी नहीं छोड़ा?”

“वो अब बासी हैं, तू कचनार कलि है ! रूपा अगर ज़रुरत पड़ी तो मैं तुझे सबके सामने अपनाऊँगा !”

मेरा हाथ उसकी चिकनी जांघों में चलने लगा, वो भी गर्म होने लगी, मैंने जो गोली दी थी उसका असर था कि उसका जिस्म कसने लगा था।

मैं जानता था तो बस हाथ फेरता रहा।

वो बेकाबू हुई, लो हुई !

उसकी पीठ से जिप खोल दी। उसका गोरा बदन, गोरी पीठ देख मेरा पप्पू पागल हो गया था। उसके हाथ आटे वाले थे।

मैंने उसकी पीठ पर अपने होंठ रगड़े, वो सिसकारने लगी। मैंने वहीं उसकी कमीज़ उतरवा डाली रसोई में !

कच्ची कलि टू पीस में थी अब !

मैंने गौर से देखा उसकी भरती जा रही छाती, उसकी गोल गोल उभरती जा रही गाण्ड को !

उसने हाथ धोये और अपने कपड़ों की तरफ बढ़ने लगी।

कपड़े मैंने उठा लिए तो बोली- साब दे दो और मुझे छोड़ो !

“साली, बहुत प्यार करने लगा हूँ तुझे !”

उसको मैंने समझाया और वहीं शेल्फ पर लिटा कर उसके मम्मों को दबाया, प्यार से देखा, क्या मम्मा था- कुंवारी कन्या का मम्मा था उसका निप्पल मानो चने का दाना हो !

मैंने उसको जीब से रगडा तो वो मचलने लगी, तड़पने लगी, फिर भी कह रही थी- साब, जाने भी दो ! मत करो मुझे बर्बाद ! मैं अपने आशिक से बहुत प्यार करती हूँ, उससे मैंने

शादी करने की कस्में खाई हैं !”

“बहन की लौड़ी, तो फिर आसान है, मैं उसको नौकरी दे दूँगा, तू भी यहीं काम करेगी, दोनों मस्त जिंदगी बिताना !”

मैंने फिर से दूसरे मम्मे को चूसा, निप्पल को चुटकी में लेकर मसला।

मैंने नीचे उसकी पैंटी के ऊपर से साथ साथ चूत रगड़नी ज़ारी रखी ताकि वो गर्म होती जाए।

वहीं घुटनों के बल बैठ गया मेरे होंठ उसकी चूत के सामने थे, मैंने उसकी पैंटी को एक तरफ़ खिसकाया और उसकी चूत देख पागल हो गया मैं।

हल्के-हल्के रोम थे उस पर भूरे से !

मैंने उसकी चूत को सूंघा और जीभ निकाल कर उस पर फेरी। अब वो बेबस हो रही थी, गोली का असर और अगर लड़की की चूत चाट लो वो मचलने लगती है, मैं वैसा ही कर रहा था।

मैंने अपना लौड़ा भी निकाल लिया, खड़ा होकर उसको हिला कर दिखाया ताकि वो मर्द का अंग भी देख ले पास से।

फिर खड़ा हुआ उसकी चूत पर सुपारा रगड़ा तो मानो उसकी चूत में आग लग गई हो !

मैंने दुबारा बैठ कर जीभ को अन्दर डाला और घुमाया तो उसकी चूत कुंवारी लग रही थी।

वो अनाप-शनाप बकने लगी- हाय साब जी ! मर जाऊँगी ! अह अह ! कुछ होता है ! मेरी चूत में आग लग रही है ! हाय मेरी फाड़ डालो !

“हाँ हाँ लाडो ! फाड़ने के लिए तो यह सब कर रहा हूँ ! और मुझे कौन सी इसकी पूजा करनी है?”

मौका सम्भालते हुए मैंने भी उसको बाँहों में उठाया अपने आलिशान बेडरूम में ले गया, बिस्तर पर पटका। नर्म नर्म बिस्तर जिस पर सोने के बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा उसने !

“साली, तेरा आशिक तुझे ऐसा कमरा देगा? मैं तुम दोनों के लिए जो सर्वेंट क्वाटर तैयार करवाऊँगा, तू सोच भी नहीं सकती !’

मैंने खुद को पूरा नंगा कर दिया उसको भी अपना लौड़ा उसके होंठों पर रगड़ा- मुँह खोल ले मेरी जान रूपा !

रूपा ने मुँह खोल लिया तो मैंने उसमें लौड़ा घुसा दिया- चूस मेरी जान !

वो पागलों की तरह मेरा लौड़ा चाटने लगी, चूसने लगी।

“और चूस ले मेरी रूपा, क्या कहती है मलाई खिलवाऊँ क्या?”

वो चुप रही लेकिन मैंने कहा- चल एक साथ मजे लेते हैं !

मैं उसकी चूत चूसने लगा, वो मेरा लौड़ा !

एक और कच्ची कलि को हलाल करने को मेरा लौड़ा तैयार था, पिंकी की ली थी, इसलिए मेरा लौड़ा इतनी जल्दी झड़ने वाला नहीं था।

रूपा नंगी पड़ी थी, मेरा सपना सच हो रहा था।

मैंने कहा- लौड़ा और चूस !

बोली- साब, मेरा मुँह दुखने लगा है ! कभी नहीं चूसा इसलिए !

“चल कोई बात नहीं ! चाट तो सकती है !”

वो जीभ निकाल-निकाल कर मेरा लौड़ा चाटने लगी।

मैंने उसकी टांगें उठवा दी और बीच में बैठ कर उस पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा।

वो मरी जा रही थी- साब, बहुत तड़पा रहे हो, जो करना है, करो ना !

मैंने सुपारा सही जगह रख उसको झटका दिया। वो दर्द से कराहने लगी।

मैं रुक गया, गीला करके डाला लेकिन उसको दर्द हो रहा था, मैंने कहा- थोड़ा चूस कर गीला कर दे !

तभी बाज़ार से फ़ोन आ गया- हम फ्री हो गए हैं, आपकी इन्तज़ार कर रहे हैं !

मैंने कहा- मैं काम में फंस गया हूँ, बस थोड़ी देर लगेगी।

मैंने रूपा के मुँह में झटके देते हुए बात की।

मैंने रूपा की टांगें फैलाई और जोर से झटका दिया।

वो चीख उठी लेकिन मैंने बिना रुके उसकी चूत फाड़ डाली जोर जोर से झटके देने लगा। मेरा लौड़ा फंस चुका था। निकाल कर फिर घुसा दिया।

उसका दर्द कम तो नहीं हुई लेकिन मैं बेरहम किस्म का बंदा हूँ, ख़ास कर के बिस्तर में !

अगर औरत को तकलीफ होती है तो मेरा जोश दुगुना हो जाता है।

“साली, बस अभी तुझे मज़ा आएगा !”

“ख़ाक मजा आ रहा है? मैं मर रही हूँ ! ज़ालिम साब जी हो आप ! जल्लाद !”

‘तेरी माँ का भोसड़ा ! देख तुझे कैसे भोगता हूँ मैं !” मैंने जोर जोर से झटके दिए, वो हिलकर रह गई।

रूपा के रूप को देख मैंने थोड़ा बहुत तरस भी खाया !

जब मेरा लौड़ा आराम से घुसने-निकलने लगा तब उसने राहत की सांस ली।

“अब क्या हुआ?” मैंने झटका लगते हुए कहा।

थोड़ी और देर लगी कि वो कूल्हे उठा उठा कर पटकने लगी, मेरा जोश बढ़ने लगा।

“साली !” मैंने उसकी चोटी को कुतिया की पूंछ की तरह पकड़ा, खींचा और तेज़ी से उसकी चूत रगड़ने लगा।

वो हाय हाय कर अब मेरा साथ दे रही थी, उसको पहली ही बार में इतना बड़ा मूसल लौड़ा मिल गया था।

कच्ची उम्र में अपनी चड्डी उतरवा वो भी मजा लेने लगी।

“साली इसको तेरी गाण्ड में भी दूँगा किसी दिन !” मैंने तेज़ी से झटके दिए क्योंकि मुझे बाज़ार भी जाना था।

जैसे मेरा निकलने वाला था, मैंने लौड़ा निकाला उसके चेहरे के करीब बैठ हाथ से दो तीन झटके दिए, मेरा माल निकलने लगा तो मैंने लौड़ा उसके मुँह में ठूंस दिया।

वो निकालना चाहती थी पर मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे। जैसे वो निकलना चाहती थी मैंने उसकी चोटी खींच दी, एक भी बूँद, कीमती बूंद जाया नहीं जाने दी।

फिर उसको शायद स्वाद लगा था तो उसने थोड़ा बहुत जो लौड़े पर लगा था, वो भी चाट लिया, उठकर कपड़े पहनने लगी।

मैंने उसको पाँच सौ का नोट दिया और कहा- एक ब्रा-पैंटी का सेट खरीद आज ही।उसके मम्मो को सही शेप देने के लिए मैंने कागज़ पर उसको लिख दिया- पुश-अप ब्रा !

इससे नीचे से पूरी राऊंड शेप मिलती है मम्मे बड़े होकर भी लटकते नहीं।

दोस्तो, रूपा को मैंने ठोक लिया था।

फ़िर उन दोनों बहनों को बाज़ार से लेने गया।

तीनों ही बहनें मेरे मूसल की गुलाम थी ! मेरी बीवी मोना थोड़ी सी बिस्तर पर ठंडी है, उसको चूसा-चुसाई का इतना शौक नहीं है, मेरे लिए चूस ज़रूर लेती है !उधर दोनों सालियाँ मेरा लौड़ा चूसने की दीवानी थी।

उधर रूपा ने मेरे कहने पर ब्रा पैंटी का सेट खरीद लिया, रूपा को देख मेरा गोपाल खिलने लगता, वो ताज़ी चीज़ थी।

शाम को थोड़ा अँधेरा हुआ था, मैं पौधों को, फूलों को पानी दे रहा था, तीनों बहनें घर में थी, बतिया रही थी।

रूपा मेरे पास आई, उसने अपनी कमीज़ उठाई, बोली- साब देखो, काली पुश-अप ब्रा !मैंने उसके अनार मसल दिए, मस्त थे।

उसने नाड़ा ढीला किया और बोली- देखो !

काली चड्डी में वो कयामत दिख रही थी।

साथ वाला प्लाट भी मेरा था, मैंने वहाँ छोटे छोटे पोर्शन बनाये थे जिनको किराए पर दिया था। आगे वाले हिस्से में मैंने सब्जियां वगैरा लगाईं थी, रोज़ वहाँ ज़रूर जाता था, वहाँ का एक सेट खाली था, मैंने मौका पाकर रूपा को वहाँ बुला लिया और उससे अपना लौड़ा चुसवाने लगा, मैंने कहा- साली लेट जा ! ब्रा पैंटी नहीं उतारना !

तभी मेरी बीवी का फ़ोन आ गया- कहाँ हो जी आप?

मैंने कहा- रूपा के साथ बाज़ार में हूँ, उसको सामान खरीदना था रसोई का ! अकेली जाने से डर रही थी तो साथ आ गया।

“ओह, ठीक है, आते वक़्त रामू के स्प्रिंग रोल पैक करवा लेना !”

इधर मेरा रोल रूपा चाट रही थी।

मैंने उसको चोदा नहीं, जल्दी थी।

सीमा ने हमें निकलते देख लिया, सीमा मेरे किरायेदार की नव-बिआही औरत थी, उसकी शादी को सिर्फ सात महीने हुए थे।

वो हमें देख कर मुस्कुराई बहुत ही सवालिया नज़र के साथ देखा उसने।

मैंने नज़रें झुका ली, निकल आया।

Wednesday, 25 September 2024

लण्ड की करतूत

 

मेरा लण्ड अब 67 साल का है। मुझे अपना लण्ड बहुत प्यारा है इसीलिए वो अब तक मेरा साथ दे रहा है। मेरी कहानी मेरे रिटायरमेंट के बाद चालू होती है जब मैं 60 साल का था।

मेरी पत्नी काफी भारी भरकम है इसलिए उसके साथ चुदाई में मजा नहीं आता। मेरा ध्यान दूसरी स्त्रियों की ओर जाने लगा। वैसे मैं पहले भी कई स्त्रियों को चोद चुका हूँ।
हमारे घर में काम के लिए एक नौकरानी रेखा आती थी। वह करीब 27 साल की थी। तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद वह गोरी, सुन्दर और स्लिम थी। रेखा की आँखें बहुत नशीली और सुन्दर थी। वह बहुत साफ़ सुफ़ रहती थी और बोल-चाल में अच्छी थी।

धीरे-धीरे हम उसके साथ अच्छी तरह घुल मिल गए। हमारे घर में दो कमरे ऊपर की मंजिल पर भी हैं। मेरी पत्नी सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होने के कारण ऊपर बहुत कम ही आती थी। मैं अक्सर ऊपर रहता हूँ। रेखा जब ऊपर आती तो मैं उससे बातें कर लेता था।

करीब चार महीने बाद एक दिन जब रेखा रोज की तरह ऊपर आई तब मैं कंप्यूटर पर तस्वीरें देख रहा था। मैंने उसे कुछ तस्वीरें दिखाई जिन्हें देख कर वह बहुत खुश हुई। मैंने उसे एक कामसूत्र पेंटिंग की तस्वीर दिखाई और पूछा कि क्या वह ऐसी और तस्वीरें देखना चाहेगी?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा।

मैंने उसे कहा- कल आने पर दिखाऊंगा।

दूसरे दिन मैंने कामसूत्र की कुछ और तस्वीरें दिखाई। तस्वीरें देख कर उसे बहुत आश्चर्य हुआ उसने कहा-ऐसी भी तस्वीरें होती हैं?

मैंने सोचा अब तो मेरे लण्ड की तमन्ना पूरी हो जाएगी, मैंने रेखा से कहा- कल दोपहर को जब तू आयेगी तब मेरी पत्नी किट्टी पार्टी में जाने वाली है तब मैं तुझे और भी तस्वीरें दिखाऊँगा।
उसने आने का वादा किया।

अगले दिन जब वह आई तो मैंने उसे कंप्यूटर पर आलिंगन, चूमने, नंगी और चोदने की तस्वीरें दिखाई। लण्ड और चूत की तस्वीरें देख कर उसके मुँह से आह निकल गई।
मैंने मौका देख कर उसके गले में हाथ डाल दिया। वो मेरे और करीब आ गई। मैंने उसे चूम लिया तो उसके मुँह से एक और आह निकली। इस बीच हम दोनों तस्वीरें देखते रहे।

मेरा लण्ड ख़ुशी के मारे उछल रहा था और उसमें से चिकना रस निकल रहा था।
मैंने रेखा से कहा- रेखा, क्या मैं तेरे बोबे देख सकता हूँ?
उसने शरमा कर कहा- आंटी आ जाएगी !
मैंने कहा- वो अभी दो घंटे नहीं आएगी !

और उसके दोनों बोबे भींच लिए। हम दोनों तस्वीरें देखते गए और मैंने उसके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। उसके सुडौल टेनिस बाल के आकार के उत्तेजित बोबों को देख कर मेरे होंश उड़ गए।

मैंने उससे कहा- रेखा, तेरे बोबे जैसे सुन्दर बोबे तो मैंने आज पहली बार देखे हैं।
मैं उसके बोबों को सहलाता रहा और उसे चूमता रहा। उसके मुँह से आह निकल रही थी।

जोश में आकर उसने मेरे अण्डरवीयर के अन्दर फड़फ़ड़ाते हुए लौड़े को पकड़ लिया।
मैंने कहा- रेखा, ऐसे नहीं ! उसे बाहर निकाल कर पकड़ !

उसने मेरा अण्डरवीयर निकाल दिया और लौड़े को सहलाने लगी।मेरा लण्ड देख कर रेखा ने पूछा- अंकल, साठ की उम्र में भी आप का लण्ड इतना कैसे तन जाता है?

मैंने कहा- रेखा। मैं इस उम्र में भी हफ्ते में कम से कम दो बार चुदाई करता हूँ और अपने लण्ड को रोज कसरत भी करवाता हूँ।
रेखा ने कहा- मेरा मर्द तो आठ-दस दिन में रात को दो मिनट में चोद कर चला जाता है।

अब मैं भी उसके पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। मैंने उससे कहा- मुझे अपनी चूत दिखा।
उसने कहा- आप ही खोल कर देख लो ! मुझे शर्म आती है !

और वह उठकर बाथरूम में चली गई। वापस आने पर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को निकाल दिया। अब वह बिल्कुल नंगी थी। उसकी झांट के कटे हुए बालों के झरोखे से उसकी चूत नजर आ रही थी।

मैंने उसकी चूत के पर्दों को उँगलियों से फैला के अलग किया और योनि के दर्शन किये। रेखा की चूत को देख कर मुझे स्वर्ग का आनंद हुआ। मैंने उसके दाने को मसलना शुरू किया तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

मैंने रेखा से पूछा- क्या तूने पति के अलावा और किसी से चुदाई कराई है?
उसने कहा- हाँ ! दो और लोगों से चुदाई की है।

मुझे बहुपुरुषगामी औरतें बहुत पसंद हैं। उसकी बात सुन कर मेरा लण्ड लोहे जैसा गरम हो कर फड़फ़ड़ाने लगा। वो मेरे लण्ड को पकड़कर मुठ मार रही थी। मैं भी उसकी चूत के दाने को रगड़ रहा था।

फिर मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से चटाने लगा। उसकी चूत एकदम चिकनी और गीली हो गई थी। उसमे से एक भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी जो मुझे मदहोश किये जा रही थी।

मैंने उसकी चूत को जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उसने अपने दोनों पैर चौड़े करके फैलाये और मेरे मुँह को जोर से दबाया जिससे मेरी जीभ उसकी चूत में चली गई। फिर उसने दोनों पैर मेरे मुँह पर जकड़ दिए। मैं चूत को और जोर से चूसने लगा।

वह ख़ुशी के मारे पागल हो गई और बोली- अंकल, आज तक मेरी चूत इस तरह किसी ने नहीं चूसी।

कुछ देर बाद हम दोनों 69 के आसन में आ गये। अब उसने भी मेरा लण्ड चूसना चालू किया। मेरा लण्ड ख़ुशी के मारे पागल हुआ जा रहा था। बहुत दिन बाद लण्ड को ऐसा आनंद मिल रहा था।
अब मैं रेखा के ऊपर लेट गया और उसके सर से चूत तक सब अंगों को चूमने लगा।

जब मैं अपना लण्ड उसकी चूत में डालने लगा तो उसने कहा- पानी अन्दर मत छोड़ना।
मैंने उसे कहा- डरो मत मैं अपना नसबंदी का आपरेशन करा चुका हूँ, कोई खतरा नहीं है !

तब उसने लण्ड को अन्दर जाने दिया। मैंने धीरे-धीरे लण्ड को अन्दर डाला वो सिसकारियाँ भरती रही और बोली- मेरा आदमी तो बिना कुछ किये लण्ड जोर से अन्दर डाल देता है और तुरंत झड़ जाता है। आप के साथ मजा आ रहा है। पूरा लण्ड अन्दर जाने के बाद अन्दर ही रहिये।

मैं अपना 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में डाल कर उसे चूमता रहा और उसके बोबे सहलाता रहा। करीब दस मिनट हम इस तरह पड़े रहे। उसके बाद मैंने अपना लण्ड चूत में अन्दर-बाहर करना चालू किया।

पाँच मिनट बाद रेखा के मुँह से आह निकली और हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने फिर उसकी चूत को चूसा।
उसने कहा- आंटी के आने का समय हो रहा है ! बस करो !

मैंने रेखा से पूछा- तू चार-पांच लौड़ों से चुदवा चुकी है तो एक बात बता, तुम औरतों को लम्बे लौड़े पसंद हैं या मोटे?

उसने कहा- मोटे लौड़े अच्छे होते हैं, मोटे लौड़े चूत में कस कर फिट हो जाते हैं और आगे पीछे धक्के लगते समय चूत की दीवार अच्छी पकड़ बनाये रखती है जिससे औरत को बहुत मजा आता है। लम्बे लौड़े चूत में ढीले रहते हैं और ज्यादा अन्दर जाने से दर्द होता है। लौड़े पतले होने से चूत में घर्षण ठीक से नहीं होता और अन्दर हवा चली जाने से लौड़े पर चूत की पकड़ कम होती है इसलिए मजा कम आता है।
कहानी जारी रहेगी।

जैसे जैसे दिन बीतते गए हमारी नजदीकियां बढ़ती गईं। अब मैं रेखा को रोज चूमता और आलिंगन करता।

एक दिन रेखा ने कहा कि उसे सर दर्द हो रहा है तो मैंने तुरंत उसके सर पर बाम लगा कर उसका सर दबाया और कमर और पीठ की मालिश भी कर दी।
उसने कहा- बहुत अच्छा लग रहा है।
उसने मुझे चूम लिया और अपनी बाँहों में कस कर पकड़ लिया।

इस तरह जब वह रोज काम पर आती तो कभी-कभी मैं उसकी कमर और पीठ की मालिश कर देता और उसे भींच कर चूम लेता। हफ़्ते में एक दो बार हम चुदाई भी कर लेते थे।

एक दिन मैंने रेखा से कहा- तुम्हारी आंटी 4-5 दिन के लिए अपनी बहन के यहाँ दूसरे शहर जा रही है। हम दोनों 4-5 दिन खूब मस्ती करेंगे।
यह सुनकर वह बहुत खुश हुई और पूछने लगी- आंटी कब जा रही हैं?
मैंने कहा- कल !

दूसरे दिन मेरी पत्नी को स्टेशन छोड़ने के बाद मैं घर आया। थोड़ी देर में रेखा भी आई। मैं बाज़ार से नाश्ता लेकर आया था। हम दोनों ने नाश्ता किया और ऊपर अपने चुदाई क्षेत्र में आ गये।
मैंने रेखा को बाँहों में भींच लिया। उसे चूमा और दोनों बोबे हाथ में पकड़ लिए।
मैंने रेखा से कहा- आज ऐसे नहीं, हम दोनों पहले बाथरूम में साथ नहायेंगे।
वह मान गई।

मैंने टब में पानी भरना चालू किया, इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किये। हम दोनों बाथरूम के बाहर ही नंगे हो गए और आइने के सामने खड़े होकर दोनों शरीरों को देखते रहे। मैंने रेखा से कहा- तुम बिल्कुल अप्सरा लग रही हो !
और उसे बाँहों में जकड़ लिया। मैं सर से पैर तक उसे चूमता रहा।
मैंने रेखा से कहा- तुम पैर फैला कर खड़ी हो जाओ।
मैं उसके नीचे बैठ गया और उसे कहा- पेशाब करना चालू करो, मैं उसमें नहाना चाहता हूँ,
वह शरमा गई और बोली- मैं ऐसा नहीं कर सकती !
मैंने कहा- तुम्हें मेरी कसम ! करना पड़ेगा !

वह मुश्किल से मान गई और उसने पेशाब करना शुरू किया। मैंने उसके गरम-गरम मूत्र-स्नान का आनंद लिया और अपने लंड को उसके मूत्र की धार से अभिषेक कराया।
फिर मैंने रेखा से कहा- रेखा, तुम्हारी झांटे बहुत बढ़ गई हैं, आओ मैं काट देता हूँ।
पहले तो वह शरमाई और मना करने लगी। बहुत मनाने पर वह मान गई।

मैंने रेज़र से उसकी झांटें साफ़ की और उसकी चूत को साबुन से धोकर चूमना चालू किया।
मैंने उसे कहा- महीने- बीस दिन में मैं तेरी झांटें काट दिया करूँगा।

उसके मुँह से आहें निकलने लगी। मेरा लंड भी खड़ा होकर उसकी चूत को सलामी देने लगा। उसने मुझे बताया कि उसके पति ने कभी उसकी झांट साफ़ नहीं की और न ही वह कभी चूत चूमता है। आज ये दोनों बातें आप कर रहें हैं, मुझे इतना मजा आ रहा है कि मैं बयान नहीं कर सकती। मैं अपने आप को भाग्यशाली समझती हूँ।

हम दोनों की सांसें फूलने लगी। उसकी चूत और मेरे लंड से चिकना पानी निकलने लगा।

आवेश में उसकी चूत की दोनों फांकें तितली के पंखों की तरह खुलने और बंद होने लगी। इधर टब में पानी भर चुका था।
मैं पहले टब में लेट गया और अपने ऊपर रेखा को बैठने के लिए इशारा किया।
वह मेरे ऊपर लेट गई। हम एक दूसरे को चूमते रहे और पानी से खेलते रहे। मेरा लंड गर्म पानी में उछलने लगा, रेखा भी उफान पर आ गई।

मैंने रेखा से पूछा- कैसा लग रहा है?उसने कहा- मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं।
फिर मैंने उसे कहा- अब तुम लंड को अपनी चूत में डाल कर मेरे ऊपर बैठ जाओ।
वह बैठ तो गई मगर बोली- ऊपर से बैठने से लंड अन्दर गड़ता है।मैंने कहा- तुम मेरे ऊपर लेट जाओ और जितना लंड अन्दर लेना चाहती हो ले लो।

हम दोनों इस तरह एक दूसरे पर पानी में पड़े रहे। कुछ देर बाद उत्तेजना में रेखा ने चूत को आगे पीछे करना चालू किया, मैंने भी लंड से झटके देने शुरू किये।

दस मिनट में हम दोनों झड़ गए। हम लोग टब से बाहर निकले और एक दूसरे को नहलाने लगे। मैंने उसकी पीठ और उसने मेरी पीठ पर साबुन मला और हम शावर के नीचे खड़े हो गए। फिर हम दोनों ने एक दूसरे के शरीर तौलिए से पोंछे और बिस्तर में आकर लेट गए।
रेखा बोली- दो और लोगों से चुदवा चुकी हूँ मगर आज जैसा मजा कभी नहीं आया।
उसने कहा- आज मुझे ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग का आनंद भोग रही हूँ !

मैंने उससे कहा- मुझे भी ऐसा ही लगा ! करीब एक घंटा हम दोनों चादर ओढ़े नंगे पड़े रहे और एक दूसरे के शरीर सहलाते रहे। मैं उसकी चूत की फांकें और वह मेरा लंड चूसते रहे। हम दोनों एक बार फिर बहुत उत्तेजित हो गए। मैंने फिर अपना लंड उसकी चूत में डाल कर पिस्टन की तरह चलाना चालू किया और हम दोनों झड़ गए।

रेखा ने मुझसे कहा- अंकल, मुझे आपकी एक बात बहुत अच्छी लगी है, आप गुदा में लंड नहीं डालते। मेरा पति इसके लिए जिद करता है तो मैं उसे मना कर देती हूँ। मुझे बहुत गन्दा लगता है।

रेखा ने कहा- मैं जिन दूसरे दो लोगों से चुदवाती हूँ उन्हें भी पहले ही साफ़-साफ़ कह दिया है कि अगर वो मेरे साथ ऐसा करना चाहेंगे तो मैं उनका साथ छोड़ दूँगी।

मैंने कहा- वह तो गन्दी बात है ही। भगवान ने लंड के लिए इतनी सुन्दर चूत दी है उसे छोड़ कर हम क्यों गन्दा काम करें।

यह सुनकर वह बहुत खुश हुई और कहा- मेरे पिछले जन्म के पुण्य से ही आप मुझे मिले। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ।

मैंने उससे कहा- कल हम समुन्दर के किनारे बालू में लंड और चूत का खेल खेलेंगे।
वह हंस दी और बाय कह कर चली गई।दूसरे दिन सुबह सात बजे रेखा मेरे साथ सैर को जाने के लिए तैयार हो कर आई, आते ही वह बोली- जाने से पहले मुझे नहाना है।

मैं बहुत खुश हुआ, मैंने कहा- मुझे भी नहाना है, चलो दोनों एक साथ ही नहायेंगे !

हम दोनों बाथरूम में गए और एक दूसरे के कपड़े उतारने के बाद शावर के नीचे खड़े हो गए और एक दूसरे को चूमने लगे। उसके बाद मैंने रेखा को और उसने मुझे साबुन लगाया, हम दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर फिसलते गए।

मैंने रेखा को लिटाकर उसकी चूत को साबुन लगाकर साफ किया और रेखा ने मेरे लंड की सफाई की। फिर मैं पागलों की तरह रेखा की चूत चाटता और चूमता रहा।
मेरा लंड खड़ा होकर उछलने लगा, रेखा ने लंड को पकड़ कर चूसना चालू किया। हमारे ऊपर शावर का पानी लगातार पड़ रहा था। हम दोनों स्वर्ग का आनन्द महसूस कर रहे थे।
रेखा ने कहा- अब नहीं रहा जाता, लंड को जल्दी अन्दर डालो।

चूँकि हमें समंदर के किनारे जाना था, मैंने अधिक समय न गंवाते हुए लंड को एक झटके में चूत के अन्दर धकेल दिया। रेखा के मुँह से आहें निकलने लगी, उसने भी चूतड़ हिला कर साथ देना चालू किया। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झर गए।

नहाना समाप्त कर हम दोनों तैयार होने लगे. दोनों ने अपने नहाने के कपड़े, तौलिया वगैरा बैग में रख लिए। मैंने अपना स्विमिंग कॉस्ट्यूम लिया और रेखा से कहा- तेरे लिए मैं टू-पीस स्विमिंग सूट रख लेता हूँ। वह बोली- मुझे स्विमिंग सूट पहनने में शर्म आयेगी, मैंने पहले ऐसे कपड़े नहीं पहने।

मैंने कहा- शर्म की कोई बात नहीं, समंदर में साड़ी या सलवार पहन कर जाने से तुझे बहुत दिक्कत होगी, दूसरी बात जहाँ हम जा रहे हैं वहाँ कोई और नहीं होगा।

मैंने उसके लिए टू-पीस रख लिया। इसके अलावा हमने अपने साथ दरी, पानी, चाय और खाने पीने की चीजें रख ली।

सब सामान कार में रखने के बाद हम दोनों बीच की ओर चल दिए। करीब एक घंटे की ड्राइव के दौरान मैं रेखा से उसके चुदाई के अनुभवों के बारे में पूछता रहा।उसने बताया कि उसकी पहली चुदाई गाँव में खेत पर एक लड़के ने की तब वह भी 18 साल की थी।

उसने बताया 19 साल की उम्र में उसकी पहली शादी हुई और 21 साल की उम्र में दूसरी। इसके अलावा फिलहाल उसके एक और आदमी से सम्बन्ध हैं। ये सब अपने आप में कहानियाँ हैं जोकि मैं बाद में लिखूँगा। उसने बताया कि उसे बचपन से लंड देखने में बहुत मजा आता है। गाँव में वह घोड़ों, गधों और दूसरे जानवरों के देखा करती थी और सोचती थी ये लम्बे गुब्बारे जैसे बाहर कैसे निकल जाते हैं और किस लिए होते हैं?

इस तरह बातें करते करते हम बीच पर पहुँच गए। मैंने कार काजू के पेड़ों की छाया में पार्क की और थोड़ी दूर पर केसुरिना के झुरमुट में हमने दरी बिछा दी। चूँकि वह एक वर्किंग डे था इसलिए हमारे आस-पास कोई नहीं था, दूर झुरमुट में सिर्फ वहाँ एक और युगल था।

मैंने अपने सब कपड़े उतार दिए और रेखा से कहा- तुम भी सब कपड़े उतार दो।

वह शर्माने लगी तब मैंने उसकी सलवार कुर्ती उतार दी, फिर उसकी ब्रा और पेंटी भी उतार दी।

रेखा के बोबे और चूत धूप में बहुत सुन्दर लग रहे थे।

मैंने रेखा को सिर से पैर तक चूमना चालू किया, उसके दोनों बोबों की हल्के-हल्के मालिश शुरू की। धीरे धीरे उसकी सुन्दर चूत को सहलाने लगा।
इतने में वह बोली- भूख लगी है, नाश्ता कर लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है !

रेखा ने नाश्ते के लिए ब्रेड पर जैम और मक्खन लगाया और चाय के कप भर दिए।
हम ब्रेड स्लाइस और चाय के कप अदल बदल कर खाते पीते रहे।

मैंने रेखा से कहा- तुम अब लेट जाओ !

फिर मैंने उसकी की चूत पर मक्खन और जैम मिला कर चुपड़ दिया, वह बोली- ये क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- देखती जाओ।

फिर मैंने बटर और जाम अपने लौड़े पर चुपड़ा जो अब तक फुदकने लगा था, रेखा की चूत पर लगे हुए जैम को मैंने चाटना शुरू किया, रेखा की चूत के रस के साथ मक्खन और जैम का स्वाद दुगुना हो गया।

मैं मदहोश होकर उसकी चूत चाटता रहा, रेखा आनंद के मारे किलकारियाँ मार रही थी, उसने उठ कर मेरे लंड के ऊपर लगा माल चाटना शुरू किया। फिर हम दोनों 69 की दशा में एक दूसरे को चाटने लगे, मैंने अपने लंड पर और जैम लगा कर रेखा की चूत में डाल दिया।

रेखा चीखने लगी- हाय राम ! ऐसा मजा तो पहले कभी नहीं आया, चोदो ! चोदो ! यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर रेखा की चूत के दाने को फिर चूसना चालू किया तो वह एकदम से झर गई। अब रेखा ने मुझे लेटने को कहा, उसने फिर लंड पर जैम लगाकर चाटना शुरू किया, दूसरी तरफ से मैं उसकी चूत चाट रहा था। अब रेखा ने चुदवाने के लिए मेरे ऊपर बैठ कर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया, फिर वह मेरे ऊपर झुक गई और मुझे चूमने लगी। अब हम एक दूसरे को चूम रहे थे और रेखा मेरे लंड पर कूदें लगा कर चुदाई कर रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों फिर झर गए। इस तरह हमारा डेढ़ घंटा कैसे बीता, पता नहीं चला।

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने रेखा से कहा- चलो अब समंदर में नहाते हैं !

स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहनकर हम दोनों समंदर में गए। लहरों के थपेड़ों में हम दोनों एक दूसरे को आलिंगन करते चूमते-नहाते रहे। एक जगह पत्थरों की ओट में हम दोनों स्विमिंग कॉस्ट्यूम उतार कर लेट गए हमारे ऊपर लहरें आती तो हम एक दूसरे से लिपट जाते।

मैंने रेखा से कहा- चलो। हम अब यहाँ पर लहरों में चुदाई करते हैं।

थोड़ी देर चूत और लंड से खेलते-खेलते रेखा फिर मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चुदाई करने लगी। बीच-बीच में लहरे आकार हमें धक्का दे जाती थीं। पानी में हमने आधा घंटे चुदाई की और फिर झर गए।

बाहर आकर हम दोनों ने एक दूसरे को तौलिए से पोंछा और फिर खाना खाने नंगे ही बैठ गए। खाने के बाद हम आराम करने लेट गए। करीब एक घंटे बाद हम एक दूसरे को चूमते हुए उठे।

रेखा आज जो हुआ उस को सोच कर बहुत अचंभित और खुश थी, उसने कहा- जीवन का यह सबसे सुखद दिन है।

जैम लगाकर चटाने की बात पर उसे बहुत हंसी आ रही थी, उसने कहा- मैंने पहले कभी ऐसा न तो सोचा, न किया।

मैंने कहा- मेरे लिए भी इतने लम्बे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है।

मैंने उससे कहा- लौटने के पूर्व मैं एक और नई चीज करना चाहता हूँ जो तुमने पहले नहीं की होगी।

उसने पूछा- वह क्या है?

मैंने कहा- तुम्हारी चूत समंदर के पानी से खारी हो गई है, पहले मैं इसे साफ पानी से धो देता हूँ, फिर देखना।

मैंने चूत धोकर रुमाल से पोंछ दी. फिर बैग से एक केला निकला उसे छील कर रेखा से कहा- अब तुम अपने दोनों पैर फैलाओ मैं केला तुम्हारी चूत में डालूँगा।

वह बोली- किसलिए?
मैंने कहा- देखो !

और केला उसकी चूत में डाल कर लंड जैसे आगे पीछे करने लगा।

रेखा बोली- यह तो लंड जैसा ही लग रहा है।

फिर मैंने केला बाहर निकाल कर रेखा को दिखाकर एक टुकड़ा खाया।
रेखा आश्चर्य से चीख उठी- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मैं इसे चूत के रस के साथ खा रहा हूँ, तुम भी खाकर देखो, कोई नुकसान नहीं होगा।

पहले तो उसने मना किया पर समझाने पर मान गई, उसने भी एक टुकड़ा खाया और बोली- ऊपर से थोड़ा नमकीन है, शायद समंदर का पानी होगा।

मैंने कहा- नहीं पगली ! यह नमकीन स्वाद चूत से निकलने वाली चिकनाई का है। जब दिमाग में सेक्स के विचार आते हैं तब यह पानी निकलता है। देख, मेरे लंड से भी पानी के रंग का चिकना रस निकल रहा है, इसे चख कर देख यह भी नमकीन लगेगा।
उसने मेरे लंड से निकलता हुआ चिकना रस चाट कर देखा और कहा- सच, यह पानी चिकना और थोड़ा नमकीन है।

मैंने बाकी केला फिर चूत में डाला और कुछ धक्के लगाये फिर उसे निकाल कर हम दोनों ने केला खा लिया।
अब तक चार बज चुके थे हम दोनों ने आखिरी बार लंड और चूत का खेल खेला और अपने घर लौट आए।

दोस्तो, यह मेरी इस कड़ी की आखिरी कहानी है। अपनी पसंद-नापसंद जरूर लिखें।

Monday, 23 September 2024

तीन भाभियों की किस्मत मेरे हाथ

 

कहानी कई साल पहले की है जब मैं अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया काशी राम चौथी शादी करने की सोच रहे थे।

हम सब राजकोट से पचास किलोमीटर दूर एक छोटे से गाँव में ज़मीदार हैं एक सौ बीघा की खेती है और लंबा चौड़ा व्यवहार है हमारा। गाँव में चार घर और कई दुकानें है। मेरे माता-पिताजी जब मैं दस साल का था तब मर गए थे। मेरे बड़े भैया काशी राम और भाभी सविता ने मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया।

भैया मुझसे तेरह साल बड़े हैं, उनकी पहली शादी के वक़्त में आठ साल का था। शादी के पाँच साल बाद भी सविता भाभी को संतान नहीं हुई। कितने ही डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सब बेकार गया। भैया ने दूसरी शादी की चम्पा भाभी के साथ! तब मेरी आयु तेरह साल की थी।

लेकिन चम्पा भाभी को भी संतान नहीं हुई। सविता और चम्पा की हालत बिगड़ गई, भैया उनके साथ नौकरानियों जैसा व्यवहार करने लगे। मुझे लगता है कि भैया ने दोनों भाभियों को चोदना चालू रखा था संतान की आस में।

दूसरी शादी के तीन साल बाद भैया ने तीसरी शादी की सुमन भाभी के साथ। उस वक़्त मैं सोलह साल का हो गया था और मेरे बदन में फ़र्क पड़ना शुरू हो गया था। सबसे पहले मेरे वृषण बड़े हो गये बाद में कांख में और लौड़े पर बाल उगे और आवाज़ गहरी हो गई। मुँह पर मूछें निकल आई, लौड़ा लंबा और मोटा हो गया, रात को स्वप्न-दोष होने लगा, मैं मुठ मारना सीख गया।

सविता और चम्पा भाभी को पहली बार देखा तब मेरे मन में चोदने का विचार तक आया नहीं था, मैं बच्चा जो था। सुमन भाभी की बात कुछ और थी। एक तो वो मुझसे चार साल ही बड़ी थी, दूसरे वो काफ़ी ख़ूबसूरत थी, या कहो कि मुझे ख़ूबसूरत नज़र आती थी। उनके आने के बाद मैं हर रात कल्पना किए जाता था कि भैया उसे कैसे चोदते होंगे और रोज़ उसके नाम पर मुठ मार लेता था। भैया भी रात-दिन उसके पीछे पड़े रहते थे, सविता भाभी और चम्पा भाभी की कोई क़ीमत रही नहीं थी।

मैं मानता हूँ कि भैया बदलाव के वास्ते कभी कभी उन दोनों को भी चोदते थे। ताज्जुब की बात यह है कि अपने में कुछ कमी हो सकती है ऐसा मानने को भैया तैयार नहीं थे। लंबे लण्ड से चोदे और ढेर सारा वीर्य पत्नी की चूत में उड़ेल दे, इतना काफ़ी है मर्द के वास्ते बाप बनाने के लिए, ऐसा उनका दृढ़ विश्वास था। उन्होंने अपने वीर्य की जाँच करवाई नहीं थी।

उमर का फ़ासला कम होने से सुमन भाभी के साथ मेरी अच्छी बनती थी, हालांकि वो मुझे बच्चा ही समझती थी। मेरी मौजूदगी में कभी कभी उनका पल्लू खिसक जाता तो वो शरमाती नहीं थी। इसीलिए उनके गोरे-गोरे स्तन देखने के कई मौक़े मिले मुझे। एक बार स्नान के बाद वो कपड़े बदल रही थी और मैं जा पहुँचा। उनका अर्धनग्न बदन देख मैं शरमा गया लेकिन वो बिना हिचकिचाहट के बोली- दरवाज़ा खटख़टा कर आया करो।

दो साल यूँ ही गुज़र गए। मैं अठारह साल का हो गया था और गाँव के स्कूल में 12वीं में पढ़ता था। भैया चौथी शादी के बारे में सोचने लगे। उन दिनो में जो घटनाएँ घटी, आपके सामने बयान कर रहा हूँ।

बात यह हुई कि मेरी उम्र की एक नौकरानी बसंती, हमारे घर काम पर आया करती थी। वैसे मैंने उसे बचपन से बड़ी होते देखा था। बसंती इतनी सुंदर तो नहीं थी लेकिन दूसरी लड़कियों के मुकाबले उसके स्तन काफ़ी बड़े-बड़े और लुभावने थे। पतले कपड़े की चोली के आर-पार उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ साफ़ दिखाई देती थी। मैं अपने आप को रोक नहीं सका, एक दिन मौक़ा देख मैंने उसके स्तन थाम लिए। उसने ग़ुस्से से मेरा हाथ झटक डाला और बोली- आइंदा ऐसी हरकत करोगे तो बड़े सेठ को बता दूँगी।

भैया के डर से मैंने फिर कभी बसंती का नाम ना लिया।

एक साल पहले बसंती को ब्याह दिया गया था। एक साल ससुराल में रह कर अब वो दो महीनों के वास्ते यहाँ आई थी। शादी के बाद उसका बदन और भर गया था और मुझे उसको चोदने का दिल हो गया था लेकिन कुछ कर नहीं पाता था। वो मुझसे क़तराती रहती थी और मैं डर का मारा उसे दूर से ही देख लार टपकाता रहता था।

अचानक क्या हुआ क्या मालूम!

लेकिन एक दिन माहौल बदल गया। दो चार बार बसंती मेरे सामने देख मुस्कराई। काम करते करते मुझे गौर से देखने लगी। मुझे अच्छा लगता था और दिल भी हो जाता था उसके बड़े-बड़े स्तनों को मसल डालने को। लेकिन डर भी लगता था। इसी लिए मैंने कोई प्रतिभाव नहीं दिया। वो नखरे दिखाती रही।

एक दिन दोपहर को मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। मेरा कमरा अलग मकान में था, मैं वहीं सोया करता था। उस वक़्त बसंती चली आई और रोनी सूरत बना कर कहने लगी- इतने नाराज़ क्यूं हो मुझसे मंगल?

मैंने कहा- नाराज़? मैं कहाँ नाराज़ हूँ? मैं क्यूँ होने लगा नाराज़?

उसकी आँखों में आँसू आ गये, वो बोली- मुझे मालूम है उस दिन मैंने तुम्हारा हाथ जो झटक दिया था ना? लेकिन मैं क्या करती? एक ओर डर लगता था और दूसरे दबाने से दर्द होता था। माफ़ कर दो मंगल मुझे।

इतने में उसकी ओढ़नी का पल्लू खिसक गया, पता नहीं कि अपने आप खिसका या उसने जानबूझ कर खिसकाया। नतीजा एक ही हुआ, गहरे गले की चोली में से उसके गोरे-गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिखाई दिया। मेरे लौड़े ने बग़ावत की पुकार लगाई।

मैं- उसमें माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है, मैं नाराज़ नहीं हूँ, माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए थी।

मेरी हिचकिचाहट देख वो मुस्करा गई और हंस कर मुझसे लिपट गई और बोली- सच्ची? ओह, मंगल, मैं इतनी ख़ुश हूँ अब। मुझे डर था कि तुम मुझसे रूठ गये हो। लेकिन मैं तुम्हें माफ़ नहीं करूंगी जब तक तुम मेरी चूचियों को फिर नहीं छुओगे।

शर्म से वो नीचे देखने लगी, मैंने उसे अलग किया तो उसने मेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ अपने स्तन पर रख दिया और दबाए रखा।

छोड़, छोड़ पगली, कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

तो होने दो मंगल, पसंद आई मेरी चूची? उस दिन तो ये कच्ची थी, छूने पर भी दर्द होता था। आज मसल भी डालो, मजा आता है।

मैंने हाथ छुड़ा लिया और कहा- चली जा, कोई आ जाएगा।’

वो बोली- जाती हूँ लेकिन रात को आऊँगी। आऊँ ना?

उसका रात को आने का ख़याल मात्र से मेरा लौड़ा तन गया, मैंने पूछा- ज़रूर आओगी?

और हिम्मत जुटा कर बसन्ती के स्तन को छुआ।

विरोध किए बिना वो बोली- ज़रूर आऊँगी। तुम ऊपर वाले कमरे में सोना। और एक बात बताओ, तुमने किस लड़की को चोदा है?’ उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मगर हटाया नहीं।

नहीं तो! कह कर मैंने स्तन दबाया।
ओह, क्या चीज़ था वो स्तन!

उसने पूछा- मुझे चोदना है?
सुनते ही मैं चौंक पड़ा।
‘उन्न..ह..हाँ..! लेकिन?
‘लेकिन वेकिन कुछ नहीं। रात को बात करेंगे।

धीरे से उसने मेरा हाथ हटाया और मुस्कुराती चली गई।

रात का इंतज़ार करते हुए मेरा लण्ड खड़ा का खड़ा ही रहा, दो बार मुठ मारने के बाद भी। क़रीब दस बजे वो आई।

सारी रात हमारी है, मैं यहाँ ही सोने वाली हूँ! उसने कहा और मुझसे लिपट गई, उसके कठोर स्तन मेरे सीने से दब गये। वो रेशम की चोली, घाघरी और ओढ़नी पहने आई थी। उसके बदन से मादक सुवास आ रही थी।

मैंने ऐसे ही उसको अपने बाहुपाश में जकड़ लिया।

‘हाय दैया, इतना ज़ोर से नहीं! मेरी हड्डियाँ टूट जाएंगी। वो बोली।

मेरे हाथ उसकी पीठ सहलाने लगे तो उसने मेरे बालों में ऊँगलियाँ फिरानी शुरू कर दी। मेरा सर पकड़ कर नीचा किया और मेरे मुँह से अपना मुँह मिला दिया।

उसके नाज़ुक होंठ मेरे होंठों से छूते ही मेरे बदन में झुरझुरी फैल गई और लौड़ा अकड़ने लगा। यह मेरा पहला चुंबन था, मुझे पता नहीं था कि क्या किया जाता है। अपने आप मेरे हाथ उसकी पीठ से नीचे उतर कर उसके कूल्हों पर रेंगने लगे। पतले कपड़े से बनी घाघरी मानो थी ही नहीं। उसके भारी गोल-गोल नितंब मैंने सहलाए और दबोचे। उसने नितंब ऐसे हिलाए कि मेरा लण्ड उसके पेट साथ दब गया।

थोड़ी देर तक मुँह से मुँह लगाए वो खड़ी रही। अब उसने अपना मुँह खोला और ज़बान से मेरे होंठ चाटे। ऐसा ही करने के वास्ते मैंने मुँह खोला तो उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरी जीभ से उसकी जीभ खेली और वापस चली गई। अब मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली। उसने होंठ सिकोड़ कर मेरी जीभ को पकड़ा और चूसा।

मेरा लण्ड फटा जा रहा था। उसने एक हाथ से लण्ड टटोला। मेरे लण्ड को उसने हाथ में लिया तो उत्तेजना से उसका बदन नर्म पड़ गया। उससे खड़ा नहीं रहा गया। मैंने उसे सहारा देकर पलंग पर लेटाया।

चुंबन छोड़ कर वो बोली- हाय मंगल, आज पंद्रह दिन से मैं भूखी हूँ! पिछले एक साल से मेरे पति मुझे हर रोज़ एक बार चोदते हैं लेकिन यहाँ आने के बाद मैं नहीं चुदी। मुझे जल्दी से चोदो, मैं मरी जा रही हूँ।

मुसीबत यह थी कि मैं नहीं जानता था कि चुदाई में लण्ड कैसे और कहाँ जाता है। फिर भी मैंने हिम्मत करके उसकी ओढ़नी उतार फेंकी और पाजामा निकाल कर उसकी बगल में लेट गया। वो इतनी उतावली हो गई थी कि चोली-घाघरी निकाल ही नहीं रही थी, फटाफट घाघरी ऊपर उठाई और…

मैंने ओढ़नी उतार फेंकी, पजामा निकाल कर उसकी बगल में लेट गया। वो इतनी उतावली हो गई कि चोली-घाघरी निकाली ही नहीं फटाफट घाघरा ऊपर उठाकर जांघें चौड़ी कर मुझे ऊपर खींच लिया।

यूँ ही मेरे कूल्हे हिल पड़े थे और मेरा आठ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लण्ड अंधे की लकड़ी की तरह इधर उधर सर टकरा रहा था, कहीं जा नहीं पा रहा था। उसने हमारे बदन के बीच हाथ डाला और लण्ड को पकड़ कर अपनी भोंस पर टिका लिया। मेरे कूल्हे हिलते थे और लण्ड चूत का मुँह खोजता था। मेरे आठ दस धक्के ख़ाली गए, हर बार लण्ड फिसल जाता था, उसे चूत का मुँह मिला नहीं।

मुझे लगा कि मैं चोदे बिना ही झड़ जाने वाला हूँ। लण्ड का अग्रभाग और बसंती की भोंस दोनों कामरस से तर-बतर हो गए थे। मेरी नाकामयाबी पर बसंती हंस पड़ी। उसने फिर से लण्ड पकड़ा और चूत के मुँह पर रख कर अपने चूतड़ ऐसे उठाए कि आधा लण्ड वैसे ही चूत में घुस गया।

तुरंत ही मैंने एक धक्का जो मारा तो पूरा का पूरा लण्ड उसकी योनि में समा गया। लण्ड की टोपी खिंच गई और चिकना सुपारा चूत की दीवालों ने कस कर पकड़ लिया। मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं रुक नहीं सका। आप से आप मेरे कूल्हे झटके देने लगे और मेरा लण्ड अंदर-बाहर होते हुए बसंती की चूत को चोदने लगा।
बसंती भी चूतड़ हिला-हिला कर लण्ड लेने लगी और बोली- ज़रा धीरे चोद, वरना जल्दी झड़ जाएगा।

मैंने कहा- में नहीं चोद रहा, मेरा लण्ड चोद रहा है और इस वक़्त मेरी सुनता नहीं है।

मार डालोगे आज मुझे! कहते हुए उसने चूतड़ घुमाए और चूत से लण्ड दबोचा। दोनों स्तनों को पकड़ कर मुँह से मुँह चिपका कर मैं बसंती को चोदते चला गया।

धक्कों की रफ़्तार मैं रोक नहीं पाया। कुछ बीस-पच्चीस झटकों बाद अचानक मेरे बदन में आनन्द का दरिया उमड़ पड़ा। मेरी आँखें ज़ोर से मुंद गई, मुँह से लार निकल पड़ी, हाथ पाँव अकड़ गए और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गए, लण्ड चूत की गहराई में ऐसा घुसा कि बाहर निकलने का नाम लेता ना था। लण्ड में से गरमा गरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियाँ छुटी, हर पिचकारी के साथ बदन में झुरझुरी फैल गई। थोड़ी देर मैं होश खो बैठा।

जब होश आया तब मैंने देखा की बसंती की टाँगें मेरी कमर के आस-पास और बाहें गर्दन के आसपास जमी हुई थी। मेरा लण्ड अभी भी तना हुआ था और उसकी चूत फट फट फटके मार रही थी। आगे क्या करना है वो मैं जानता नहीं था लेकिन लण्ड में अभी गुदगुदी हो रही थी। बसंती ने मुझे रिहा किया तो मैं लण्ड निकाल कर बसन्ती के ऊपर से उतरा।

बाप रे! वो बोली- इतनी अच्छी चुदाई आज कई दिनों के बाद हुई।
मैंने तुझे ठीक से चोदा?
बहुत अच्छी तरह से!

हम अभी पलंग पर लेटे थे। मैंने उसके स्तन पर हाथ रखा और दबाया। पतले रेशमी कपड़े की चोली आर पार उसके कड़े चुचूक मैंने मसले। उसने मेरा लण्ड टटोला और खड़ा पाकर बोली- अरे वाह, यह तो अभी भी तैयार है! कितना लंबा और मोटा है मंगल, जा तो, इसे धो के आ।

मैं बाथरूम में गया, पेशाब किया और लण्ड धोया। वापस आकर मैंने कहा- बसंती, मुझे तेरे स्तन और चूत दिखा। मैंने अब तक किसी की देखी नहीं है।

उसने चोली घाघरी निकाल दी। मैंने पहले बताया था कि बसंती कोई इतनी ख़ूबसूरत नहीं थी। पाँच फ़ीट दो इंच की उँचाई के साथ पचास किलो वज़न होगा। रंग सांवला, चहेरा गोल, आँखें और बाल काले। नितंब भारी और चिकने। सबसे अच्छे थे उसके स्तन। बड़े-बड़े गोल-गोल स्तन सीने पर ऊपरी भाग पर लगे हुए थे, मेरी हथेलियों में समाते नहीं थे। दो इंच के एरेयोला और छोटे छोटे काले रंग के चुचूक थे। चोली निकलते ही मैंने दोनों स्तनों को पकड़ लिया, सहलाया, दबोचा और मसला।

उस रात बसंती ने मुझे अपने बदन के बारे में यानि लड़की के बदन के बारे में पूरा पाठ पढ़ाया। टांगें पूरी फ़ैला कर भोंस दिखाई, बड़े होंठ, छोटे होंठ, भगनासा, योनि, मूत्र-द्वार सब दिखाया। मेरी दो ऊँगलियाँ चूत में डलवा के चूत की गहराई भी दिखाई, अपना जि-स्पॉट भी दिखाया। वो बोली- यह जो भगनासा है वो मर्द के लण्ड बराबर होती है, चोदते वक़्त यह भी लण्ड के माफ़िक कड़ी हो जाती है। दूसरे, तूने चूत की दिवालें देखी? कैसी करकरी है? लण्ड जब चोदता है तब ये करकरी दीवालों के साथ घिसता है और बहुत मजा आता है। हाय, लेकिन बच्चे का जन्म के बाद ये दिवालें चिकनी हो जाती है चूत चौड़ी हो जाती है और चूत की पकड़ कम हो जाती है।

मुझे लेटा कर वो बगल में बैठ गई।

मेरा लण्ड ठोड़ा सा नर्म होने चला था, उसने मेरे लण्ड को मुट्ठी में लिया, टोपी खींच कर मटका खुला किया और जीभ से चाटा। तुरंत लण्ड ने ठुमका लगाया और तैयार हो गया।

मैं देखता रहा और उसने लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मुँह में जो हिस्सा था उस पर वो जीभ फ़िरा रही थी, जो बाहर था उसे मुट्ठी में लिए मुठ मार रही थी। दूसरे हाथ से मेरे वृषण टटोलती थी। मेरे हाथ उसकी पीठ सहला रहे थे।

मैंने हस्त-मैथुन का मजा लिया था, आज एक बार चूत चोने का मजा भी लिया। इन दोनों से अलग किस्म का मजा आ रहा था लण्ड चूसवाने में। वो भी जल्दी से उत्तेजित हो चली थी। उसके थूक से लड़बड़ लण्ड को मुँह से निकाल कर वो मेरी जांघों पर बैठ गई, अपनी जांघें चौड़ी करके भोंस को लण्ड पर टिकाया। लण्ड का मटका योनि के मुख में फँसा ही था कि बसन्ती ने नितंब नीचे करके पूरा लण्ड योनि में ले लिया। उसके चूतड़ मेरी जांघों से जुड़ गए।

‘उहहहहह! मजा आ गया। मंगल, जवाब नहीं तेरे लण्ड का। जितना मीठा मुँह में लगता है इतना ही चूत में भी मीठा लगता है!

कहते हुए उसने नितंब गोल घुमाए और ऊपर नीचे कर के लण्ड को अंदर-बाहर करने लगी। आठ दस धक्के मारते ही वो तक गई और ढल पड़ी।

मैंने उसे बाहों में लिया और घूम कर उसके ऊपर आ गया। उसने टाँगें पसारी और पाँव उठा लिए। अवस्था बदलते मेरा लण्ड पूरा योनि की गहराई में उतर गया। उसकी योनि फट फट करने लगी।

सिखाए बिना मैंने आधा लण्ड बाहर खींचा, ज़रा रुका और एक ज़ोरदार धक्के के साथ चूत में घुसेड़ दिया। मेरे वृषण बस्नती की गांड से टकराए। पूरा लण्ड योनि में उतर गया। ऐसे पाँच-सात धक्के मारे। बसंती का बदन हिल पड़ा, वो बोली- ऐसे, ऐसे, मंगल, ऐसे ही चोदो मुझे! मारो मेरी भोंस को और फाड़ दो मेरी चूत को!

भगवान ने लण्ड क्या बनाया है चूत मारने के लिए कठोर और चिकना! भोंस क्या बनाई है मार खाने के लिए गद्दी जैसे बड़े होंठों के साथ। जवाब नहीं उनका।

मैंने बसंती का कहा माना। फ़्री स्टाईल से ठपाठप मैं उसको चोदने लगा। दस पंद्रह धक्कों में वो झड़ पड़ी। मैंने उसे चोदना चालू रखा। उसने अपनी उंगली से अपनी भगनासा को मसला और दूसरी बार झड़ गई।

उसकी योनि में इतनी ज़ोर से संकुचन हुए कि मेरा लण्ड दब गया, आते जाते लण्ड की टोपी ऊपर नीचे होती चली और मटका और तन कर फूल गया। मेरे से अब ज़्यादा बरदाश्त नहीं हो सका। चूत की गहराई में लण्ड दबाए हुए मैं ज़ोर से झड़ गया। वीर्य की चार-पाँच पिचकारियाँ छुटी और मेरे सारे बदन में झुरझुरी फैल गई। मैं ढल गया।

आगे क्या बताऊँ? उस रात के बाद रोज़ बसंती चली आती थी। हमें आधा एक घंटा समय मिलता था जब हम जम कर चुदाई करते थे। उसने मुझे कई तरीके सिखाए और आसन सिखाए। मैंने सोचा था कि कम से कम एक महीना तक बसंती को चोदने का लुत्फ़ मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक हफ़्ते में ही वो ससुराल वापस चली गई।

बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ। मैं हर रोज़ उसकी चूत याद करके मुठ मारता रहा। चौथे दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। लेकिन एक हाथ में लण्ड पकड़े हुए! और तभी सुमन भाभी वहाँ आ पहुंची। झटपट मैंने लण्ड छोड़ कपड़े ठीक किए और सीधा बैठ गया।

वो सब कुछ समझती थी इसलिए मुस्कुराती हुई बोली- कैसी चल रही है पढ़ाई देवरजी? मैं कुछ मदद कर सकती हूँ?
भाभी, सब ठीक है! मैंने कहा।

आँखों में शरारत भर कर भाभी बोली- पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया?
नहीं, कुछ नहीं, ये तो! ये! मैं आगे बोल ना सका।
तो मेरा लण्ड था, यही ना? उसने पूछा।

वैसे भी सुमन मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से लण्ड सुन कर मैं उत्तेजित होने लगा पर शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका, कुछ बोला नहीं।

उसने धीरे से कहा- कोई बात नहीं! मैं समझती हूँ! लेकिन यह बता कि बसंती को चोदना कैसा रहा? पसंद आई उसकी काली चूत? याद आती होगी ना?

सुन कर मेरे होश उड़ गए कि सुमन को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता दिया होगा?

मैंने इन्कार करते हुए कहा- क्या बात करती हो? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है।
अच्छा? वो मुस्कराती हुई बोली- क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?
वो यहाँ आई ही नहीं! मैंने डरते डरते कहा।

सुमन मुस्कुराती रही।
तो यह बताओ कि उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा कर पूछा- यह निक्कर किसकी है, तेरे पलंग से मिली है?

मैं ज़रा जोश में आ गया और बोला- ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी निक्कर पहनी ही नहीं!
मैं रंगे हाथ पकड़ा गया।

मैंने कहा- भाभी, क्या बात है? मैंने कुछ ग़लत किया है?
उसने कहा- वो तो तेरे भैया फ़ैसला करेंगे।

भैया का नाम आते ही मैं डर गया। मैंने सुमन को गिड़गिड़ा कर विनती की कि भैया को यह बात ना बताएँ।
असली खेल अब शुरू हुआ।
मुझे क्या पता कि इसके पीछे सुमन भाभी का हाथ था!
तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल दिया।

सुमन ने बताया कि भैया के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे, भैया इससे अनजान थे। भैया तीनों भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक़्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे। लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता। सुमन चाहती थी कि भैया चौथी शादी ना करें। वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी। इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूर कहाँ थी, मैं जो मौज़ूद था!

सुमन ने तय किया कि वो मुझसे चुदवाएगी और माँ बनेगी।
अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का।
मैं कहीं ना बोल दूं तो? भैया को बता दूं तो? मुझे इसी लिए बसंती के जाल में फंसाया गया था।

सारा बखान सुन कर मैंने हंस कर कहा- भाभी, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो मैं तुझे चोदने से इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त है।

उसका चहेरा लाल हो गया, वो बोली- रहने भी दो! झूठे कहीं के। आए बड़े चोदने वाले। चोदने के वास्ते लण्ड चाहिए और बसंती तो कहती थी कि अभी तो तुम्हारी नुन्नी है, उसको चूत का रास्ता मालूम नहीं था। सच्ची बात ना?’

मैंने कहा- दिखा दूं अभी कि नुन्नी है या लण्ड?

ना बाबा, ना। अभी नहीं। मुझे सब सावधानी से करना होगा। अब तू चुप रहना! मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाऊँगी और हम तय करेंगे कि तेरी नुन्नी है या लण्ड!

दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गए तीन दिन के लिए। उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई। मैं कुछ पूछूँ इससे पहले वो बोली- कल रात तुम्हारे भैया ने मुझे तीन बार चोदा है। सो आज मैं तुम से गर्भवती हो जाऊँ तो किसी को शक नहीं पड़ेगा और दिन में आने की वजह भी यही है कि कोई शक ना करे।

वो मुझसे चिपक गई और मुँह से मुँह लगा कर चूमने लगी। मैंने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिए, मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई। मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चूसने लगी। मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे। भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी ऊपर उठाने लगा। एक हाथ से वो मेरा लण्ड सहलाती रही। कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पाजामा का नाड़ा खोल उसने नंगा लण्ड मुट्ठी में ले लिया।

मैं उसको पलंग पर ले गया और गोद में बिठा लिया। लण्ड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने चूमना चालू रखा। मैंने ब्लाऊज़ के हुक खोले और ब्रा ऊपर से स्तन दबाए। लण्ड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हुक खोल कर ब्रा उतार फेंकी। उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। शंकु के आकार के सुमन के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़े थे। एरेयोला भी छोटा सा था जिसके बीच नोकदार चुचूक था।

मैंने चुचूक को चुटकी में लिया तो सुमन बोल उठी- ज़रा होले से! मेरे चुचूक और भग बहुत नाजुक हैं, उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती।

उसके बाद मैंने चुचूक मुँह में लिया और चूसने लगा।

मैं आपको बता दूँ कि सुमन भाभी कैसी थी। पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो, बदन पतला और गोरा था, चहेरा लम्बा-गोल थोड़ा सा नरगिस जैसा, आँखें बड़ी बड़ी और काली, बाल काले, रेशमी और लंबे, सीने पर छोटे-छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी, पेट बिल्कुल सपाट था, हाथ पाँव सुडौल थे, नितंब गोल और भारी थे, कमर पतली थी। वो जब हंसती थी तब गालों में गड्ढे पड़ते थे।

मैंने स्तन पकड़े तो उसने लण्ड थाम लिया और बोली- देवर जी, तुम तो अपने भैया जैसे बड़े हो गए हो। वाकई यह तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लण्ड है और वो भी कितना तगड़ा! हाय राम, अब ना तड़पाओ, जल्दी करो।

मैंने उसे लेटा दिया। ख़ुद उसने घाघरा ऊपर उठाया, जांघें चौड़ी की और पाँव उठा लिए। मैं उसकी भोंस देख कर दंग रह गया। स्तन के माफ़िक सुमन की भोंस भी चौदह साल की लड़की की भोंस जितनी छोटी थी। फ़र्क इतना था कि सुमन की भोंस पर काली झांटें थी और भग लंबी और मोटी थी। भैया का लण्ड वो कैसे ले पाती थी, यह मेरी समझ में आ ना सका।

मैं उसकी जांघों के बीच आ गया। उसने अपने हाथों से भोंस के होंठ चौड़े करके पकड़ लिए तो मैंने लण्ड पकड़ कर भोंस पर रग़ड़ा। उसके नितंब हिलने लगे। अब की बार मुझे पता था कि क्या करना है। मैंने लण्ड का अग्र भाग चूत के मुँह में घुसाया और लण्ड हाथ से छोड़ दिया। चूत ने लण्ड पकड़े रखा। हाथों के बल आगे झुक कर मैंने मेरे कूल्हों से ऐसा धक्का लगाया कि सारा लण्ड चूत में उतर गया। जांघों से जांघें टकराई, लण्ड ठुमक-ठुमक करने लगा और चूत में फटक-फटक होने लगा।

मैं काफ़ी उत्तेजित था इसलिए रुक नहीं सका। पूरा लण्ड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुमन को चोदना शुरू किया। अपने चूतड़ उठा-उठा कर वो सहयोग देने लगी, चूत में से और लण्ड में से चिकना पानी बहने लगा। उसके मुँह से निकलती आह-आह की आवाज़ और चूत की पच्च पच्च सी आवाज़ से कमरा भर गया।

पूरे बीस मिनट तक मैंने सुमन भाभी की चूत मारी। इस दरमियान वो दो बार झड़ी। आख़िर उसने चूत ऐसी सिकौडी कि अंदर-बाहर आते-जाते लण्ड की टोपी उतर-चढ़ करने लगी, मानो कि चूत मुठ मार रही हो।

यह हरकत मैं बरदाश्त नहीं कर सका, मैं ज़ोर से झड़ गया। झड़ते वक़्त मैंने लण्ड को चूत की गहराई में ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खिंच गई थी कि दो दिन तक लौड़े में दर्द रहा। वीर्य को भाभी की योनि में छोड़ कर मैंने लण्ड निकाला, हालांकि वो अभी भी तना हुआ था। सुमन टाँगें उठाए लेटी रही, कोई दस मिनट तक उसने चूत से वीर्य निकलने ना दिया।

बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ। मैं हर रोज़ उसकी चूत याद करके मुठ मारता रहा। चौथे दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। लेकिन एक हाथ में लण्ड पकड़े हुए! और तभी सुमन भाभी वहाँ आ पहुंची। झटपट मैंने लण्ड छोड़ कपड़े ठीक किए और सीधा बैठ गया।

वो सब कुछ समझती थी इसलिए मुस्कुराती हुई बोली- कैसी चल रही है पढ़ाई देवरजी? मैं कुछ मदद कर सकती हूँ?
भाभी, सब ठीक है! मैंने कहा।

आँखों में शरारत भर कर भाभी बोली- पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया?
नहीं, कुछ नहीं, ये तो! ये! मैं आगे बोल ना सका।
तो मेरा लण्ड था, यही ना? उसने पूछा।

वैसे भी सुमन मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से लण्ड सुन कर मैं उत्तेजित होने लगा पर शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका, कुछ बोला नहीं।

उसने धीरे से कहा- कोई बात नहीं! मैं समझती हूँ! लेकिन यह बता कि बसंती को चोदना कैसा रहा? पसंद आई उसकी काली चूत? याद आती होगी ना?

सुन कर मेरे होश उड़ गए कि सुमन को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता दिया होगा?

मैंने इन्कार करते हुए कहा- क्या बात करती हो? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है।
अच्छा? वो मुस्कराती हुई बोली- क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?
वो यहाँ आई ही नहीं! मैंने डरते डरते कहा।

सुमन मुस्कुराती रही।
तो यह बताओ कि उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा कर पूछा- यह निक्कर किसकी है, तेरे पलंग से मिली है?

मैं ज़रा जोश में आ गया और बोला- ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी निक्कर पहनी ही नहीं!
मैं रंगे हाथ पकड़ा गया।

मैंने कहा- भाभी, क्या बात है? मैंने कुछ ग़लत किया है?
उसने कहा- वो तो तेरे भैया फ़ैसला करेंगे।

भैया का नाम आते ही मैं डर गया। मैंने सुमन को गिड़गिड़ा कर विनती की कि भैया को यह बात ना बताएँ।
असली खेल अब शुरू हुआ।
मुझे क्या पता कि इसके पीछे सुमन भाभी का हाथ था!
तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल दिया।

सुमन ने बताया कि भैया के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे, भैया इससे अनजान थे। भैया तीनों भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक़्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे। लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता। सुमन चाहती थी कि भैया चौथी शादी ना करें। वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी। इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूर कहाँ थी, मैं जो मौज़ूद था!

सुमन ने तय किया कि वो मुझसे चुदवाएगी और माँ बनेगी।
अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का।
मैं कहीं ना बोल दूं तो? भैया को बता दूं तो? मुझे इसी लिए बसंती के जाल में फंसाया गया था।

सारा बखान सुन कर मैंने हंस कर कहा- भाभी, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो मैं तुझे चोदने से इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त है।

उसका चहेरा लाल हो गया, वो बोली- रहने भी दो! झूठे कहीं के। आए बड़े चोदने वाले। चोदने के वास्ते लण्ड चाहिए और बसंती तो कहती थी कि अभी तो तुम्हारी नुन्नी है, उसको चूत का रास्ता मालूम नहीं था। सच्ची बात ना?’

मैंने कहा- दिखा दूं अभी कि नुन्नी है या लण्ड?

ना बाबा, ना। अभी नहीं। मुझे सब सावधानी से करना होगा। अब तू चुप रहना! मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाऊँगी और हम तय करेंगे कि तेरी नुन्नी है या लण्ड!

दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गए तीन दिन के लिए। उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई। मैं कुछ पूछूँ इससे पहले वो बोली- कल रात तुम्हारे भैया ने मुझे तीन बार चोदा है। सो आज मैं तुम से गर्भवती हो जाऊँ तो किसी को शक नहीं पड़ेगा और दिन में आने की वजह भी यही है कि कोई शक ना करे।

वो मुझसे चिपक गई और मुँह से मुँह लगा कर चूमने लगी। मैंने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिए, मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई। मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चूसने लगी। मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे। भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी ऊपर उठाने लगा। एक हाथ से वो मेरा लण्ड सहलाती रही। कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पाजामा का नाड़ा खोल उसने नंगा लण्ड मुट्ठी में ले लिया।

मैं उसको पलंग पर ले गया और गोद में बिठा लिया। लण्ड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने चूमना चालू रखा। मैंने ब्लाऊज़ के हुक खोले और ब्रा ऊपर से स्तन दबाए। लण्ड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हुक खोल कर ब्रा उतार फेंकी। उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। शंकु के आकार के सुमन के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़े थे। एरेयोला भी छोटा सा था जिसके बीच नोकदार चुचूक था।

मैंने चुचूक को चुटकी में लिया तो सुमन बोल उठी- ज़रा होले से! मेरे चुचूक और भग बहुत नाजुक हैं, उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती।

उसके बाद मैंने चुचूक मुँह में लिया और चूसने लगा।

मैं आपको बता दूँ कि सुमन भाभी कैसी थी। पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो, बदन पतला और गोरा था, चहेरा लम्बा-गोल थोड़ा सा नरगिस जैसा, आँखें बड़ी बड़ी और काली, बाल काले, रेशमी और लंबे, सीने पर छोटे-छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी, पेट बिल्कुल सपाट था, हाथ पाँव सुडौल थे, नितंब गोल और भारी थे, कमर पतली थी। वो जब हंसती थी तब गालों में गड्ढे पड़ते थे।

मैंने स्तन पकड़े तो उसने लण्ड थाम लिया और बोली- देवर जी, तुम तो अपने भैया जैसे बड़े हो गए हो। वाकई यह तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लण्ड है और वो भी कितना तगड़ा! हाय राम, अब ना तड़पाओ, जल्दी करो।

मैंने उसे लेटा दिया। ख़ुद उसने घाघरा ऊपर उठाया, जांघें चौड़ी की और पाँव उठा लिए। मैं उसकी भोंस देख कर दंग रह गया। स्तन के माफ़िक सुमन की भोंस भी चौदह साल की लड़की की भोंस जितनी छोटी थी। फ़र्क इतना था कि सुमन की भोंस पर काली झांटें थी और भग लंबी और मोटी थी। भैया का लण्ड वो कैसे ले पाती थी, यह मेरी समझ में आ ना सका।

मैं उसकी जांघों के बीच आ गया। उसने अपने हाथों से भोंस के होंठ चौड़े करके पकड़ लिए तो मैंने लण्ड पकड़ कर भोंस पर रग़ड़ा। उसके नितंब हिलने लगे। अब की बार मुझे पता था कि क्या करना है। मैंने लण्ड का अग्र भाग चूत के मुँह में घुसाया और लण्ड हाथ से छोड़ दिया। चूत ने लण्ड पकड़े रखा। हाथों के बल आगे झुक कर मैंने मेरे कूल्हों से ऐसा धक्का लगाया कि सारा लण्ड चूत में उतर गया। जांघों से जांघें टकराई, लण्ड ठुमक-ठुमक करने लगा और चूत में फटक-फटक होने लगा।

मैं काफ़ी उत्तेजित था इसलिए रुक नहीं सका। पूरा लण्ड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुमन को चोदना शुरू किया। अपने चूतड़ उठा-उठा कर वो सहयोग देने लगी, चूत में से और लण्ड में से चिकना पानी बहने लगा। उसके मुँह से निकलती आह-आह की आवाज़ और चूत की पच्च पच्च सी आवाज़ से कमरा भर गया।

पूरे बीस मिनट तक मैंने सुमन भाभी की चूत मारी। इस दरमियान वो दो बार झड़ी। आख़िर उसने चूत ऐसी सिकौडी कि अंदर-बाहर आते-जाते लण्ड की टोपी उतर-चढ़ करने लगी, मानो कि चूत मुठ मार रही हो।

यह हरकत मैं बरदाश्त नहीं कर सका, मैं ज़ोर से झड़ गया। झड़ते वक़्त मैंने लण्ड को चूत की गहराई में ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खिंच गई थी कि दो दिन तक लौड़े में दर्द रहा। वीर्य को भाभी की योनि में छोड़ कर मैंने लण्ड निकाला, हालांकि वो अभी भी तना हुआ था। सुमन टाँगें उठाए लेटी रही, कोई दस मिनट तक उसने चूत से वीर्य निकलने ना दिया।

उस दिन के बाद भैया आने तक हर रोज़ सुमन मेरे से चुदवाती रही। नसीब का करना था कि वो गर्भ से हो गई परिवार में आनन्द ही आनन्द हो गया। सबने सुमन भाभी को बधाई दी। भैया सीना तान कर मूंछ मरोड़ते रहे। सविता भाभी और चम्पा भाभी की हालत औरर बिगड़ गई। इतना अच्छा था कि गर्भ के बहाने सुमन ने भैया से चुदवाने से मना कर दिया था, भैया के पास दूसरी दोनों को चोदने दे सिवा कोई चारा ना था।

जिस दिन भैया सुमन भाभी को डॉक्टर के पास ले गए उसी दिन शाम वो मेरे पास आई, घबराती हुई वो बोली- मंगल, मुझे डर है कि सविता और चम्पा को शक पड़ता है हमारे बारे में।

सुन कर मुझे पसीना आ गया। भैया जान जाएँ तो अवश्य हम दोनों को जान से मार डालें!
मैंने पूछा- क्या करेंगे अब?
एक ही रास्ता है! वो सोच कर बोली।
रास्ता है?
तुझे उन दोनों को भी चोदना पड़ेगा। चोदेगा?

भाभी, तुझे चोदने के बाद दूसरी को चोदने का दिल नहीं होता। लेकिन क्या करें? तू जो कहे, वैसा मैं करूँगा। मैंने बाज़ी सुमन के हाथों छोड़ दी।

सुमन ने योजना बनाई। रात को जिस भाभी को भैया चोदें, वो दूसरे दिन मेरे पास चली आए। किसी को शक ना पड़े इसलिए तीनो एक साथ मेरे वाले घर आएँ लेकिन मैं चोदूँ एक को ही।

थोड़े दिन बाद चम्पा भाभी की बारी आई। माहवारी आए तेरह दिन हुए थे। सुमन और सविता दूसरे कमरे में बैठी और चम्पा मेरे कमरे में चली आई।

आते ही उसने कपड़े उतारने शुरू किए।
मैंने कहा- भाभी, यह मुझे करने दे।

आलिंगन में लेकर मैंने भाभी को चूमा तो वो तड़प उठी। समय की परवाह किए बिना मैंने उसे ख़ूब चूमा। उसका बदन ढीला पड़ गया। मैंने उसे पलंग पर लेटा दिया और होले होले सब कपड़े उतार दिए। मेरा मुँह उसके एक चुचूक पर टिक गया, एक हाथ स्तन दबाने लगा, दूसरा भग के साथ खेलने लगा।

थोड़ी ही देर में वो गर्म हो गई, उसने ख़ुद टांगें उठाई और चौड़ी करके अपने हाथों से पकड़ ली।

मैं बीच में आ गया। एक दो बार भोंस की दरार में लण्ड का मटका रग़ड़ा तो चम्पा भाभी के नितंब डोलने लगे। इतना होने पर भी उसने शर्म से अपनी आँखें बन्द की हुई थी। ज़्यादा देर किए बिना मैंने लण्ड पकड़ कर चूत पर टिकाया और होले से अंदर डाला। चम्पा की चूत सुमन की चूत जितनी सिकुड़ी हुई ना थी लेकिन काफ़ी कसी थी और लण्ड पर उसकी अच्छी पकड़ थी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए चम्पा को आधे घंटे तक चोदा। इस दौरान वो दो बार झड़ी। मैंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाई तो चम्पा भाभी मुझसे लिपट गई और मेरे साथ साथ ज़ोर से झड़ी।थकी हुई वो पलंग पर लेटी रही, मैं कपड़े पहन कर खेतों में चला गया।

दूसरे दिन सुमन अकेली आई, कहने लगी- कल की तेरी चुदाई से चम्पा बहुत ख़ुश है! उसने कहा है कि जब चाहे!

मैं समझ गया।

अपनी बारी के लिए सविता को पंद्रह दिन इन्तज़ार करनी पड़ी।

आख़िर वो दिन आ भी गया। सविता को मैंने हमेशा माँ के रूप में देखा था इसलिए उसकी चुदाई का ख्याल मुझे अच्छा नहीं लगता था। लेकिन दूसरा चारा कहाँ था?

सुमन और चम्पा मिल कर सविता भाभी को मेरे कमरे में लाई और छोड़ कर चली गई। अकेले होते ही सविता ने आँखें मूँद ली। मैंने भाभी को नंगा किया और मैं भाभी की चूचियाँ चूसने लगा। मुझे बाद में पता चला कि सविता की चाबी उसके स्तन थे। इस तरफ़ मैंने स्तन चूसना शुरू किया तो उस तरफ़ उसकी भोंस ने कामरस का फ़व्वारा छोड़ दिया। मेरा लण्ड कुछ आधा तना था और ज़्यादा अकड़ने की गुंजाइश ना थी। लण्ड चूत में आसानी से घुस ना सका। हाथ से पकड़ कर धकेल कर मटका चूत में सरकाया कि सविता ने चूत सिकोड़ी। ठुमका लगा कर लण्ड ने जवाब दिया। इस तरह का प्रेमालाप लण्ड और चूत के बीच होता रहा और लण्ड ज़्यादा से ज़्यादा अकड़ता रहा।

आख़िर जब वो पूरा तन गया तब मैंने सविता भाभी के पाँव अपने कंधों पर लिए और तल्लीनता से उसे चोदने लगा। सविता की चूत इतनी कसी नहीं थी लेकिन संकोचन करके लण्ड को दबाने की कला सविता अच्छी तरह जानती थी। बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ी। मैंने भी पिचकारी छोड़ दी और भाभी के बदन से नीचे उतर गया।

अगले दिन सुमन वही संदेशा लाई जो चम्पा ने भेजा था। तीनो भाभियों ने मुझे चोदने का इशारा दे दिया था।

अब तीन भाभियाँ और चौथा मैं!

हम चारों में एक समझौता हुआ कि कोई यह राज़ खोलेगा नहीं। सुमन ने भैया से चुदवाना बंद कर दिया था लेकिन मुझसे नहीं।

एक के बाद एक ऐसे मैं अपनी तीनों भाभियों को चोदता रहा। भगवान की कृपा से बाकी दोनों भाभियाँ भी गर्भवती हो गई। भैया के आनन्द की सीमा ना रही।

समय आने पर सुमन और सविता ने लड़कों को जन्म दिया तो चम्पा ने लड़की को। भैया ने बड़ी दावत दी और सारे गाँव में मिठाई बाँटी। अच्छा था कि कोई मुझे याद करता नहीं था।

भाभियों की सेवा में बसंती भी आ गई थी और हमारी नियमित चुदाई चल रही थी। मैंने शादी ना करने का निश्चय कर लिया।

सब का संसार आनन्द से चलता है लेकिन मेरे वास्ते एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है भैया सब बच्चों को बड़े प्यार से रखते है लेकिन कभी कभी वो जब उनसे मार पीट करते है तब मेरा ख़ून उबल जाता है और मुझे सहन करना मुश्किल हो जाता है। दिल करता है कि उसके हाथ पकड़ लूं और बोलूं- रहने दो! ख़बरदार, मेरे बच्चे को हाथ लगाया तो।

ऐसा बोलने की हिम्मत अब तक मैं जुटा नहीं पाया।
कैसी लगी मेरी हिंदी सेक्सी स्टोरी मुझे मेल करके बताएँ!

कुवां मां डूब जाऊंगी

 

कहानी शुरु करने से पहले मैं कुछ बातें बताना चाहूँगा। मुझे कई मेल ऐसे आये हैं जिनमें कहा गया है कि मुझे कोई तरकीब बताओ।

मैं इस बारे में कहना चाहूँगा कि सेक्स एक ऐसी चीज़ है जैसे कि अपना आहार। सभी लोगों का अपना अलग-अलग आहार होता है, किसी को तीखी चीज़ें अच्छी लगती हैं तो किसी को मीठी चीज़ें, किसी को साफ़ सुथरा खाना अच्छा लगता है तो किसी को गन्दा। सेक्स बिल्कुल ऐसा ही है।

किसी को साफ सुथरा सेक्स अच्छा लगता है, जैसे कि आदमी औरत की चूत को चाटना तो दूर उसकी चूत को हाथ तक नहीं लगाता, और औरत भी आदमी के लंड को चूसना तो दूर, उसे पकड़ती भी नहीं है, बस ऐसे ही बच्चे पैदा हो जाते हैं। अगर ऐसा ही साफ़ सुथरा सेक्स होगा तो गांड मारना तो दूर की बात है।

किसी को गंदा सेक्स अच्छा लगता है, जैसे कि मैं। या दूसरे लफ़्ज़ों में कहूँ तो ऐसा सेक्स जो साफ़ सुथरा ना हो। जिसमें आदमी और औरत एक दूसरे के अंगों को चाटते हैं, एक दूसरे की गांड में उंगली डालते हैं, एक दूसरे की बगलों को चाटते हैं, आदमी औरत की चूत को मसल-मसल कर चाटता है, और ऐसे चाटता है कि जैसे एक प्यासा पानी के नल को चाटे, वो अपनी पूरी ज़ुबान उसकी चूत में अन्दर तक डाल देता है और अपनी ज़बान से उसकी चूत को चोदता है। (इसका मज़ा ही कुछ और है) उसी तरह, अपनी ज़ुबान उसकी गांड में भी डालता है और उसे चाटता है, जैसे कि कोई बर्फ का गोला हो।

इसी तरह औरत भी कोई कमी रहने नहीं देती, वो भी आदमी के लंड को पूरा अपने मुँह में ले लेती है, उतना अन्दर की लंड हलक तक पहुँच जाये और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसती है, इस बीच अगर आदमी अपना पानी छोड़ दे तो वो उसे आम के रस की तरह पी जाती है, इतना ही नहीं, वो भी आदमी की गांड को चाटती है। आप कहेंगे कि यह सब तो होता रहता है, लेकिन गंदा सेक्स इससे भी आगे है। कई बार आदमी अपने पेशाब से औरत को नहलाता है, और कई बार औरत वो पी भी जाती है।

तो दोस्तो, सेक्स के बारे में जितना बताओ उतना कम है, लेकिन हाँ, अगर आप चाहो तो मैं आपको सेक्स के कुछ आसन बता सकता हूँ, मुझे मेल करना।

तो मैं अपनी कहानी शुरु करने जा रहा हूँ।

मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी अपने बेटे के पास राजकोट गई थी और मेरा लंड था कि तड़प रहा था।

इस पर एक गाना याद आ रहा है : (जो मैंने थोड़ा बदल डाला है)

हाथों की हथेली को हथियार बना लेते हैं, दर्द जब हद से गुज़रता है हाथ में थाम लेते हैं।

मैंने अपने दोस्त से यह बात कही, उसने कहा- चल यार, कोई प्रोग्राम बनाते हैं किसी को चोदने का।

मैंने उससे पूछा- तू किसी को जानता है?

उसने कहा- सब इन्तज़ाम हो जाएगा, तू बस हाँ बोल दे।

मैंने कहा- यह भी कोई पूछने की बात है !

फ़िर दो दिन बाद उसका फोन आया, उसने कहा- जीतू, आ जा इन्तज़ाम हो गया है।

मैंने कहा- वाह यार ! तूने तो काम बना दिया !

उसने कहा- लेकिन वो 250 रुपये लेगी।

मैंने कहा- यार, अगर माल अच्छा होगा तो मैं 500 भी देने को तैयार हूँ।

उसने कहा- ठीक है, तो कल सुबह दस बजे मेरे घर आ जाना।

दूसरे दिन रविवार था, मैं ठीक दस बजे उसके घर पहुँच गया, साथ में एक पेप्सी की बोतल, कुछ बिस्किट और एक व्यस्क फ़िल्म की डीवीडी भी ले गया।

मेरा दोस्त रवि, एक फ़्लैट में रहता था, मैं जब उसके फ्लैट में गया तो वहाँ बिल्कुल शांति थी।

मैंने दरवाज़ा खटखटाया, रवि ने दरवाज़ा खोला। मैं अन्दर गया, घर में कोई नहीं था।

मैंने पूछा- यार, कहाँ गये सब?उसने कहा- सब द्वारका गये हैं और पूरे फ़्लैट में हमारे अलावा कोई नहीं है।

मैंने कहा- वाह ! क्या मौका है। कहाँ है माल…॥

उसने कहा- थोड़ी देर ठहर ! दोनों आती ही होगीं।

मैंने पूछा- यार वो दोनों हैं कौन?

उसने कहा- एक तो हमारे यहाँ काम करने आती है और दूसरी ऊपर वाले के यहाँ जाती है।

मैंने कहा- अरे यार ! यह कैसी कामवाली तूने ढूंढी? तुझे और कोई नहीं मिली क्या?

मैं थोड़ा उस पर गुस्सा हो गया और कहा- मैं जा रहा हूँ।

उसने कहा- यार, एक बार तू उसे देख तो ले, बाद में चले जाना।

मैं मान गया।

दस मिनट बाद दरवाज़े पर घण्टी बजी, रवि ने आवाज़ दी- दरवाज़ा खुला है, आ जाओ !

मैं क्या देखता हूँ- एक पटाखा ! वाह, क्या बड़े-बड़े स्तन थे उसके, क्या मस्त ग़ांड थी उसकी ! जैसे नमिता ही देख ली हो।

रवि बोला- दूसरी कहाँ है?

वो बोली- वो आज नहीं आ सकी।

रवि बोला- क्यों?

वो बोली- अभी उसका महीना चल रहा है।

रवि बोला- तो अब हमारा क्या होगा?

वो बोली- क्यों मैं एक काफी नहीं हूँ क्या दो लौड़ों के लिए?

मैंने कहा- कभी एक साथ दो लौड़े लिये हैं क्या?

वो बोली- लिये तो नहीं हैं, लेकिन आज ले लूंगी।

तो फिर मैंने कहा- ठीक है, देखते हैं।

मैंने सोफे पर उसको अपने पास बैठाया और उसका नाम पूछा।

उसने बताया- गीता।

अपनी भाषा से वो पढ़ी-लिखी लग रही थी।

मैंने पूछा- कितना पढ़ी हो?

वो बोली- बी ए दूसरे साल तक !

मैंने पूछा- आगे क्यों नहीं पढ़ी?वो बोली- पैसे के लिये ! घर में मैं एक ही हूँ कमाने वाली।

मैं समझ गया।

थोड़ी इधर-उधर की बातें हुई, बाद में वो बोली- मुझे यहाँ क्या बातें करने के लिये बुलाया है या लौड़े लेने के लिये……?

मैं उसकी इस बात से बहुत खुश हो गया, मैंने कहा- तो फिर शुरु हो जाओ !

मैंने रवि से कहा- यार अब इस फ्लैट में कोई आने वाला तो नहीं है, क्यों ना इस चुदाई को और मज़ेदार बनाया जाये।

उसने कहा- हाँ बोल ! क्या करना है?

मैंने कहा- कोई मज़ेदार सा देसी गाना लगा दे, जैसे कि “कुवां मां डूब जाऊंगी”……

वो बोला- समझ गया, बड़ा अच्छा सोचा है।

उसने गाना चालू किया और मैंने गीता को खड़ा कर के कहा- चलो, अब नाचना शुरु कर दो।

वो भी समझ गई लेकिन बोली- इस ड्रेस में मज़ा नहीं आयेगा।

रवि बोला- अन्दर जाओ और अलमारी खोलो, अन्दर मेरी भाभी के कपड़े हैं, वो पहन लो।

वो अन्दर गई और थोड़ी देर बाद लाल रंग की साड़ी पहन कर आ गई और आते ही अपनी गाण्ड हिलानी शुरु कर दी। मैं और रवि भी उसके साथ नाचने लगे। थोड़ी देर ऐसे ही नाचते रहने के बाद मैंने अपने दोनों हाथ उसके वक्ष पर रख दिये और उसको साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा। उसने भी अपना हाथ मेरे लौड़े पर रखा और दबाने लगी। हम लोग अभी भी नाच रहे थे।

अब रवि ने उसकी साड़ी उतार दी और अपना टी-शर्ट भी उतार दिया। अब मेरी बारी थी, मैंने उसकी चोली उतारनी शुरु की, उसने अन्दर सफेद रंग की ब्रा पहनी थी, मैंने अपना शर्ट भी उतार दिया। हम अभी भी गाने पर झूम रहे थे और वो भी अपनी गांड और चूचियाँ हिला रही थी। बाद में मैंने उसकी घघरी उतार दी, रवि ने अपनी पैन्ट उतार दी, मैंने भी अपनी पैन्ट उतार दी। अब हम सब सिर्फ अन्डरवीयर में थे।

मैं नाचता हुआ गीता के पीछे गया और पीछे से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और अपना लौड़ा उसकी ग़ांड पर मसलने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब रवि आगे से आया और नाचते हुए उसकी चूत पर हाथ फ़िराने लगा।

मैंने पीछे से उसकी ब्रा खोल दी और आगे आ गया।

वाह क्या स्तन थे उसके……॥

और उछ्लते हुए तो वो और भी कामुक लग रहे थे। मैंने दोनों को अपने हाथों में लिया और दबाने लगा। इसी बीच वो झुकी और मेरा अण्डर्वीयर उतारने लगी और वो भी इस तरह कि उसकी गांड अभी भी ऊपर ही थी। अण्डरवीयर उतारते ही उसने मेरे लौड़े को चूम लिया। अब रवि ने पीछे से उसकी पैन्टी उतार दी और अपना अण्डरवीयर भी उतार दिया।

वाह क्या चूत थी उसकी ! बिल्कुल साफ़ ! उस पर एक भी बाल नहीं था। अब हम तीनों बिल्कुल नंगे नाच रहे थे। मेरा और रवि का लौड़ा हमारे साथ उछ्ल रहा था तो गीता के दोनों स्तन भी ऊपर नीचे हो रहे थे……

दोस्तो उसके आगे क्या हुआ वो तो आपको मालूम ही होगा।

मेरी नौकरानी सरोज

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ज्योतिषी बन कर भाभी को बच्चा दिया

  मेरे पास जॉब नहीं थी, मैं फर्जी ज्योतिषी बनकर हाथ देख कर कमाई करने लगा. एक भाभी मेरे पास बच्चे की चाह में आई. वह माल भाबी थी. भाभी की रंड...