मेरी पहली कहानी मै आपके लिए पेश कर रहा हूँ, मै 23 साल का लड़का हूँ,
मुम्बई के पास के पालघर तालुका में रहता हू। मेरा घर गांव में है।
यह कहानी दो साल पहले की है। मेरे घर में हम सब संयुक्त परिवार में रहते
हैं। मेरे चाचा ने छोटे बच्चे के देखबाल के लिए एक लड़की को रखा हुआ था।
चाचा-चाची दोनों काम पर जाते थे और मेरे मम्मी-पापा भी काम पर जाते हैं। घर
में सिर्फ दादा-दादी ही होते हैं इसलिए मैं हमेशा छोटू से मिलने के लिए या
खेलने के लिए वहाँ अक्सर जाता था। उस नौकरानी का नाम रूपा था, उम्र 19-20
साल होगी, दिखने में साधारण पर उभार ऐसे थे कि कामदेव ने खुद तराशे हों।
मेरे मन में उसे पाने की इच्छा जागृत हुई, वो हमेशा मुझे देख कर शरमा कर
हंसती थी। मैं चाचा के कम्प्यूटर पर हमेशा बैठा करता था लेकिन सिर्फ पढ़ाई
या गाने सुनने के लिए।
मुझे एक ख्याल आया, मैंने सुबह चाचा के कम्प्यूटर पर एक अंग्रेजी फिल्म
लगाई। रूपा उधर ही छोटू के साथ खेल रही थी। वो भी फिल्म देखने लगी।
बाद में छोटू को सोना था, इसलिए रूपा बोली- आवाज कम कर दो !
मैंने फिल्म बंद कर दी और कहा- मैं ऊपर टीवी देख लूँगा ! तुम छोटू को सुला दो।
उसने कहा- ठीक है ! पर मझे भी टीवी देखना है।
मैं बोला- तुम छोटू को सुलाकर उपर आ जाना।
वो बोली- ठीक है।
मैं अपने बेडरूम में आया, टीवी लगाकर उस पर फ़ैशन चैनल जो लॉक था, अनलॉक कर दिया और रूपा का इंतजार करने बैठ गया।
थोड़ी देर बाद रूपा आई, मैंने उसे अपने पास बाजू में बैठने को कहा तो वो बैठ गई।
तब मैंने कहा- क्या देखोगी?
उसने कहा- आप ही देखो जो देखना है।
मैंने कहा- जो मैं देखूँगा वो तुम्हें शायद पसंद न आए !
उसने सिर्फ हंस कर मेरे तरफ देखा तो मैंने फ़ैशन चैनल लगा दिया और देखने लगा। उसके चेहरे पर शर्म साफ दिख रही थी।
वो कुछ बोल नहीं रही थी।
टीवी पर बिकनी पहने मॉडल आई तो तभी मैंने कहा- तुम हंस क्यों रही हो?
उसने टीवी की तरफ़ देखा और फ़िर मेरी तरफ।
मैं समझ गया और कहा- तुम ऐसे कपड़े नही पहनती?
उसने गर्दन ना में हिलाई।
तो क्या पहनती हो?
उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे ऐसे ही कुछ सामान्य सवाल
पूछे तो वो जवाब देने लगी। आखिर मैंने पूछा- तुम्हें यह देखने में मजा आया?
उसकी गर्दन हाँ में हिलाई। वो अब खुल रही थी।
तब मैंने कहा- तुम नीचे फिल्म देख कर हंस रही थी, वो क्योंकि हीरो-हिरोइन गले लग रहे थे इसलिए या वे चूम रहे थे इसलिए?
उसने कहा- मैंने ऐसा पहले नहीं देखा था इसलिए।
मैं बोला- और देखना है?
वो हाँ बोली तो मैंने कहा- ठीक है नीचे चलो !
और हम फिर से पीसी पर वो फिल्म कम आवाज करके देखने लगे। मैंने उसे 007
के बेड सीन दिखाए और मैं रूपा को देख रहा था। तभी छोटू उठ गया और वो वहाँ
से चली गई।
मैंने उससे पूछा- अच्छा लगा? वो बोली- हाँ।
मैंने कहा- तुम कल भी देखना चाहोगी?
वो हाँ बोली तो मैंने बोला- इससे ज्यादा अच्छा पर गंदा भी है।
उसने कहा- ठीक है, मैं जरूर देखूंगी पर कहाँ?
कल छोटू सो जाने के बाद ऊपर मेरे बेडरूम में आ जाना !
वो बोली- ठीक है।
तभी मैंने छोटू के साथ खेलना शुरु किया। उसकी गोद में छोटू था और मैंने
उसे गुदगुदी करने के बहाने रूपा के उभारों को हल्के से छू दिया। वो कुछ
नहीं बोली या फिर उसे पता नहीं चला। इसलिए मैंने दोबारा वैसे ही किया पर इस
बार दबाव थोड़ा बढ़ाया। फिर भी वो कुछ नहीं बोली।
मैं समझ गया और वहाँ से निकल कर ऊपर आ गया और सोचने लगा कि मेरे पास कोई
ब्लू फिल्म नहीं थी क्योंकि उसको रखना खतरनाक होता है इसलिए मैंने अपनी
सीडी अपने दोस्तों को दे रखी थी।
फिर मैं अपने दोस्त के घर गया और सीडी लाकर घर में छुपा कर रख दी और
दूसरे दिन के सपनों में खो गया। रातभर नींद नहीं आई, पहली बार मैं किसी
लड़की के साथ कुछ करने जा रहा था।
दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और तैयारी करने लगा।
पहले तो सीडी-प्लेयर में सीडी डाल दी और चला कर देख ली। फिर नहा-धोकर
तैयार हुआ और मेरे खास छुपाये हुए कोंडम ड्राअर से निकाल कर रखे। दोस्तों
ने कहा था कि बिना कोंडम कुछ मत करना।
आखिरकार वो छोटू को सुलाकर दोपहर को ऊपर आई। मैंने दरवाजा खुला रखा था।
वो आई और मेरी तरफ देखने लगी।
मैं बोला- टीवी देखें?
उसने कहा- हाँ। फिर पहले फ़ैशन चैनल लगाया और उससे कहा- आओ, बैठो !
वो मेरे पास आकर बैठ गई। उसका शरीर थोड़ा कांप रहा था और मेरा भी ! लेकिन
मुझ से रहा नहीं जा रहा था फिर भी मै चुप रहा। थोड़ी देर बाद मैंने अपना
हाथ उसके हाथ के पास रखा और धीरे-धीरे उससे सटकर बैठ गया।
वो सिर्फ टीवी देख रही थी। थोड़ी देर बाद टीवी पर एक मॉडल के स्तन ड्रेस के बाहर निकले हुए देखकर मैं बोल पड़ा- वाह !
उसने मेरी तरफ देखा और बोली- तुम्हें ऐसी नंगी लडकियाँ पसंद हैं?
मैंने कहा- वो दिखा रही हैं, मै देख रहा हूँ।
उनको शर्म नहीं आती? उसने कहा।
तो मैं बोला- हर एक के पास जो है, वो है, उसमें क्या शर्माना?
वो बोली- तुम यही दिखने वाले थे या वो कल वाला जहाँ वो दोनों थे?
मैंने पूछा- कौन दोनों?
कल फिल्म में लड़का और लड़की थे, वैसे !
ठीक है, पर आज थोड़ा अलग है।
वो बोली- अलग क्या है?
तो मै बोला- देखती रहो !
और रूपा के दूसरी तरफ़ पड़ा रिमोट लिया हाथ उधर ही रख कर सीडी-प्लेयर ऑन
किया। टीवी पर चैनल बदलते ही फिल्म चालू हो गई। पहले लड़का-लड़की पास आकर
चूमा-चाटी करने लगे। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ से ले जाते हुए उसकी नरम
जांघों पर रख दिया। उसका शरीर कांप रहा था, धड़कन तेज हो रही थी। उसकी
सांसें मेरे करीब से गुजर रही थी, वो मदहोश हो रही थी।
मेरा हाथ उसकी जांघों पर धीरे-धीरे घूम रहा था।
तभी फिल्म में दोनों ने अपने कपड़े उतारे और वो प्यार करने लगे।
शायद रूपा ने मर्द का तना हुआ लंड पहली बार देखा था तो वो उसे गौर से देखने लगी।
लड़की ने उसका लंड चूसना शुरू कर दिया। वैसे ही उसने मेरे हाथ को जोर से
पकड़ कर दबाया। मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा और उसके योनि को एक हाथ से
सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसका स्तन पकड़ लिया।
वो सिसकारियाँ ले रही थी और मेरे लंड पर दबाव डाल रही थी। हम कपड़े पहने
थे इसलिए हमारे बदन की गर्मी बढ़ने लगी, दोनों पसीने-पसीने हो गए।
टीवी पर उस लड़के ने उस लड़की को चोदना शुरू कर दिया।
मेरे पास इतनी ताकत नहीं थी कि मैं इतना दबाव पहली बार में झेल जाऊँ। मैं उसके पीछे जाकर बैठ गया, अपने पैर उसके पैरों पर रख लिए।
मेरा लंड उसकी गांड पर घिस रहा था, रगड़ खा रहा था। उसके बोबे मेरे हाथों
से मसले जा रहे थे, उसकी योनि रगड़ कर मैं उसे और उत्तेजित कर रहा था।
लेकिन कुछ ही पल बाद वो मेरी बाहों में सुस्त पड़ गई, मै भी पैंट में ही झड़ गया।
हम थोड़े शांत हो गए। फिर भी टीवी पर चुसाई-चुदाई के दृश्य हमें भड़का रहे थे।
तभी मैंने उससे कहा- तुम मेरे साथ वैसा करना चाहोगी?
उसने कहा- हाँ जरूर ! जल्दी करो ! मैं बेचैन हो रही हूँ।
मैंने उसे वहीं छोड़ बाथरूम में जाकर अपना लंड साफ किया। ठंडा पानी लगते
ही वो खड़ा हो गया। मेरा लंड आज पहली बार इतना ताकतवर दिख रहा था- साढ़े पाँच
इन्च लम्बा और डेढ़ इन्च मोटा। फिर मैं वापिस कमरे में आया और रूपा को गले
लगाया। वो भी ऐसे लिपट गई जैसे वो मेरे शरीर का हिस्सा हो।
मैंने उसके होंटों को चूमा और रगड़-रगड़ कर घायल कर दिया। फिर मैंने उसकी
टॉप उतारी, ब्रा भी उतारी और उसके सफेद बड़े से बोबे देखकर मैं पागल हो गया
जिन पर गुलाबी रंग के चुचूक उनकी शोभा बढ़ा रहे थे।
मैं उन्हें चूसने लगा पागलों की तरह ! उन्हीं में डूब गया ! वो अपने
होंटों को चबा रही थी और मुँह से सिसकारियाँ निकाल रही थी। मैंने अपने दांत
उसके चुचूक पर गड़ा दिए। वो ‘आ-आई’ करके चिल्लाई।
फिर मैंने अपनी शर्ट उतारी, पैंट भी उतारी, उसने अपनी स्कर्ट निकाली हम दोनों सिर्फ चड्डी में थे तो मैंने कहा- इसे क्यूँ रखे हो?
मैंने उसकी और उसने मेरी चड्डी उतारी !
हम बिल्कुल नंगे खड़े थे। वो मेरे लंड को घूर रही थी और मैं उसकी काले बालों से ढकी चूत को देखकर पगला रहा था।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके होंटों को चूमते हुए चूचियों से
होते हुए उसकी चूत पर पहुँच गया और चूसने लगा।उसकी सीत्कारें बढ़ने लगी। तभी
मैंने अपना लंड उसके मुँह में घुसा दिया। वो उसे चूसने लगी तो मैं भी उसके
चूत में उंगली डाल कर चूसता रहा। बाद में मैंने समय न गंवाते हुए कोंडम
निकाल कर पहन लिया, उसकी टाँगें ऊपर उठा कर लंड सही जगह रख कर मैंने उसका
मुँह पूरा जीभ से भर कर जोर से एक धक्का मारा।
मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर दाखिल हो गया और वो मुझसे छुटने की नाकाम कोशिश करती रही।
मैंने उसके बोबे बहुत सहलाए। थोड़ी देर बाद वो कमर उठाने लगी तो तभी
मैंने उसका मुँह छोड़ा और आधा लंड अंदर-बाहर करने लगा और दूसरा जोरों का
धक्का दिया।
उसका मुँह हाथ से बंद करके रखा था, उसके चुचूक रगड़ रहा था, चूस रहा था।
दो मिनट बाद मैं उसे दनादन चोदने लगा और वो मुँह से आह ! अहा! आ ! आअ !
अआया ! कर रही थी। बीस मिनट की चुदाई के बाद मैं छुटने वाला था। वो भी मुझे
कसकर पकड़ने लगी। कमरे में धप-धप की आवाज आ रही थी।
हम दोनों झड़ने लगे और उस स्वर्ग से एहसास के धीरे-धीरे कम होते हुए हम निढाल होकर कुछ देर उसी अवस्था में पड़े रहे।
मैं उठा, उसकी चूत से निकला खून मेरे लंड और चादर पर था।
फिर हमने अपने कपड़े पहने। उसने चादर धो दी और दूसरे दिन मिलने को कहकर उसे प्रगाढ़ चुम्बन किया।
यह थी मेरी पहली चुदाई ! हमने फिर बहुत मजे लिए, वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।
आपको मेरी कहानी कैसे लगी, मुझे बताएँ !
अब इस कहानी को पढ़ने से पहले मैं आपको याद दिला दूँ कि मेरी बीवी ने
कामवाली माया की बेटी रूपा को घर के काम के लिए रख लिया था। एक रात मेरी
छोटी साली ने मेरी बीवी को दवाई के सहारे सुला दिया और हम भूल गए थे कि
माया की बेटी रूपा घर में थी, हम अपनी तरफ से बेफिक्र होकर मजे से नंगे एक
दूसरे के जिस्मो में खोये थे, रूपा मे मुझे मेरी साली के साथ नंगे होकर
चुदाई करते देख लिया।
वैसे मैंने रूपा को पहले भी देखकर जान लिया था कि वो जवान हो रही है,
लेकिन जब उसने मुझे नंगा देखा, मुझ उसकी जवानी का पूरा एहसास हुआ।
साली को मैंने आराम से चोदा और अपने कमरे में जाने लगा तो सोचा एक बार देखूँ रूपा सो गई या !!
मुझे माया से कुछ दिन पहले पता चला था कि कोई लड़का रूपा को चाहता है और उसने रूपा को उसके साथ चुम्मा-चाटी करते पकड़ा था।
रूपा कुछ घबराई सी पासे पलट रही थी, वो जमीन पर सोई थी, सोई नहीं थी अभी
लेटी थी। मुझे कुछ खुसर-फुसर सुनी तो देखा कि उसके हाथ में एक मोबाइल था
और वो किसी से बातें कर रही थी, मैं वहीं रुक गया,
रूपा मोबाइल पर बोल रही थी- तुझे मालूम है, आज जब मैं छोटी दीदी को दूध
देने गई तो वहाँ तो नज़ारा बदला हुआ था, साब जी और उनकी छोटी साली दोनों
बिल्कुल नंगे थे। बोली- अमर, क्या ऐसा भी होता है कि सही जगह की बजाये उलटी
जगह में कुछ हो पाता है?
पता नहीं उसको उसके यार ने क्या जवाब दिया, पर रूपा बोली- शर्म करो, मुझे ऐसी बातें पसंद नहीं हैं।
लेकिन साली एक नंबर की कुतिया थी उसका खाली हाथ कभी उसकी फुद्दी पर जाता कभी उसके मम्मों पर !
मेरे मन में आया- वाह वरिंदर वाह ! इतना करार माल घर में पल रहा है, लगा दे निशाना, पकड़ ले कमीनी को !
लेकिन फिर सोचा कि ऐसे एकदम से कहीं बात बिगड़ जाए।
उसके यार ने पता नहीं उसको क्या कहा, वो बोली- तुम बहुत शैतान हो ! लेकिन मैं इतनी जल्दी ना काबू आऊँगी !
कह कर वो अपनी फुद्दी मसलने लगी, कभी मम्मे मसलने लगती।
मेरा गोपाल पूरा खड़ा था, मैंने अपना मोबाइल निकाला और उसकी मूवी बना डाली।
अब मेरी नजर उस पर थी। सुबह जब मैंने उसको देखा, बड़े गौर से देखा मैंने, उसकी आँखों में आंखें डाल कर देखा और धीरे से आँख दबा दी।
वो शर्म से लाल हो गई, लेकिन उस वक्त सभी घर में थे।
अब मेरा निशाना रूपा की फुद्दी फाड़ने का था, हूँ तो पंजाबी जाट ! क्या हुआ कि गाजियाबाद में बस गया।
दोस्तो, एक बात मैंने नोट की है कि पंजाबी लौड़े की यहाँ औरतें दीवानी हैं, तभी तो यहाँ आकर मैं कितना बड़ा चोदू बन गया था।
रूपा रात को अकेली ही सोती थी लेकिन मोना को रोज़ नींद की दवाई देना सही नहीं था उधर पिंकी भी भारत आ गई थी अपने खसम के साथ।
मेरा दिल रूपा जैसी कमसिन लड़की को कलि से फूल बनाने का था, उसकी फ़ुद्दी के सिंदूर से लौड़े के माथे को तिलक करवाना था।
दोपहर को मौका था, मोना और छोटी साली बाज़ार जाने के लिए तैयार थी, सोचा उनको छोड़ वापस आऊँगा और रूपा से तिलक लगवाऊँगा।
मैं घर लौटा तो पिंकी वहाँ आई हुई थी, मुझे देख उसकी बांछें खिल गई, वो दौड़ी और मेरे सीने लग गई- कैसे हो वरिंदर?
“मैं बिल्कुल ठीकठाक हूँ, तुम सुनाओ? पहले आ जाती, मोना और छोटी को अभी बाज़ार में छोड़ कर आया हूँ।”
“तभी तो आई हूँ राजा ! तूने जो सुख दिया था, मैं वहाँ रहकर नहीं भूली !” मेरे होंठों पर होंठ रगड़ने लगी।
मेरा दिल ताज़ा माल खाने का था, यह बासी औरत कहाँ से आ गई।
पिंकी मुझे बाजू से पकड़ कर कमरे में ले गई और मुझसे लिपटने लगी, मेरा
पौरुष जगाने लगी। उसने अपना टॉप उतार फेंका। काली ब्रा में उसके बड़े बड़े
चूचे देख मैं भी उनमें खोने लगा और मम्मों को चूसने लगा, वे पहले से बढ़ गए
थे।
पिंकी मेरे लौड़े से खेलने लगी, पिंकी चुद कर बोली- अब मुझे बाज़ार छोड़ दो।
“मुझे दूसरी तरफ़ जाना है, ऐसा करता हूँ, तुझे मोड़ से रिक्शा करवा देता हूँ अगर बुरा ना मानो डार्लिंग !”
“कोई बात नहीं वरिंदर, आपने मेरी बैट्री चार्ज कर दी है, रोम-रोम खिल
उठा है, उस कमीने ने तो रात को पहले मुझे बीच ही रास्ते छोड़ा और मैं कुछ कह
बैठी तो मेरी पिटाई से ठुकाई कर दी !”
उसको छोड़ मैं वापस घर लौट आया, रूपा रसोई में दोपहर का खाना तैयार कर रही थी।
मैं जाकर लॉबी में बैठा, वो आई पानी का ग्लास लेकर, मैंने बहुत प्यार से
उसको देखा, मेरी नज़र उसकी छाती पर चली गई, अभी विकास पर थी लेकिन जल्दी एक
एटम बम बन कर मतवालों के दिलों को डसने के लिए तैयार हो रही थी।
“क्या बात है रूपा, आज बहुत निखरी हुई हो? रूपा, दिन ब दिन तेरा रूप निखरता जा रहा है, बचकर रहा कर ! बाहर बहुत प्यासे घूमते हैं !”
वो शर्माने लगी।
“क्या हुआ रूपा? तूतो शर्माने लगी, मैं सच कहता हूँ, तुमने तो मुझे भी डस लिया है !”
वो शरमा कर वहाँ से भाग निकली, मुझे लगा कि यह तो साली चालू है, जिस तरह
से यह रात को अपने किसी यार से बातें कर रही थी, उसकी बातें सुन सुन कर
अपनी सलवार खोल कर बैठी थी, अपने मम्मे दबा रही थी, वो लड़की नाराज़ होने या
गुस्से वाला चेहरा बनाने के बजाये शरमा कर हंस कर वहां से तितली की तरह उड़
गई, कहीं मेरा लौड़ा तिलक लगाने से वंचित तो नहीं रह जाएगा।
खैर देखना था किस्मत में क्या है, लाटरी लगती है या नहीं !
भगवान् का नाम लेकर मैं उठा बार में रोमिंग चेयर पर बैठ गया, ग्लास लिया
उसमे पैग डाला और रूपा को बुलाया- रसोई से खट्टा मीठा भुजिया लेकर आ !
वो आई, बोली- साहब दोपहर में दारु?
“शवाब को देख शराब पीनी पड़ती है रूपा रानी !”
“नशे में आप क्या करते हो, आपको मालूम भी है?”
“क्या करता हूँ?”
“मैंने कल रात देखा !”
“वो मेरी साली है, आधी घरवाली है मेरी ! तुझे मुफ़्त में फिल्म देखने को
मिली और तुझे घंटा चाहिए?” मैंने पैग खींचा, मेरा दिमाग में आया किमेरे पास
तो दिल्ली से ली हुई टेबलेट्स पड़ी हैं, उठकर गया, गोली लेकर आया, कोल्ड
ड्रिंक में डाल कर मिला ली।
“हे रूपा रानी, बात सुन ! क्या मुझे अकेले को बैठना पड़ेगा? मेरा साथ तो दे दे रूपा !”
मैं नी पीती !”
“क्या साथ देने के लिए शराब पीनी ज़रूरी है? सब कुछ है घर में, यह ले
कोल्ड ड्रिंक पकड़, मेरे पास बैठ, तुझे देखता हूँ तो दारु का नशा बढ़ने लगता
है। कितने आशिक हैं तेरे इस हुस्न के?”
“क्या आप भी कैसी गंदी बातें करने लगे?” उसने कोल्ड ड्रिंक खत्म कर दी, रसोई में जाकर आटा गूंथने लगी।
उसके हाथ आटे वाले थे, मैं धीरे गया, उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने ऊँचा
सा कमीज़ पहना था, उसकी गाण्ड मुझे काफी उभरी हुई महसूस हुई। मैंने धीरे से
उसकी गाण्ड को सहला दिया।
वो चौंकी- आप साब? यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने उसकी चोटी को एक तरफ़ कर अपने तपते होंठ उसके गहरे गले वाले कमीज़ दे झलकती पीठ पर रख उसके बदन को चूमा।
वो एकदम से मचल उठी, उसके मुँह से सी सी निकली- देखो साब ऐसा मत करो।
उसकी गर्दन से कमीज़ के ऊपर से उंगली फेरता हुआ नीचे आया, कमीज़ उठाया और
गाण्ड पर हाथ फेरा। मैंने पीछे से खड़े होकर उसके कमीज के अंदर घुसा दिया।
जैसे ही मेरी उंगलियाँ उसके मम्मों पर लगी, वो तड़प उठी।
उसके हाथ खाली नहीं थे, मैंने नोट किया जब मैंने उसके मम्मे पहले पकड़े
थे वो नाज़ुक थे मेरे हाथ लगते ही वो अकड़ गए, उसके निप्पल तन गए !
बिल्कुल अपनी माँ पर गई थी, मैंने नोट किया कि उसके चूतड़ भी कसाव खाने
लग गए थे, गोली असर कर चुकी थी। इस गोली का तजुर्बा मैंने सबसे पहले उसकी
ही माँ पर किया था चार साल पहले।
“आपको सही लग रहा है इतनी छोटी लड़की से ऐसी हरकतें करते हुए?”
“क्या करूँ रूपा रानी ! वैसे तो मैं शायद तुझ पर ध्यान न देता, लेकिन कल
रात जब तेरे पीछे गया था कमरे तक, जिस तरह से तूने सलवार घुटनों तक सरकाई
हुई थी, कैसे अपने मम्मे खुद दबाने में लगी थी अपने किसी यार से बातें करती
करती !”
उसके रंग उड़ने लगे- ऐसा वैसा कुछ नहीं किया मैंने ! आप मुझे मुफ्त में डरा रहे हैं !
“यह मेरा मोबाइल गवाह है, इसमें तेरी मम्मे दबाई और फुद्दी मसलाई की
रस्में कैद हैं, देखोगी? तब से मेरा लौड़ा अकड रहा था रूपा रानी !”
उसका जो आटा वहीं का वहीं धरा रह गया था, चुप हो दोबारा गूंथने लगी।
मैंने प्यार से अपना हाथ उसके चिकने पेट पर फेरा, वो अकड़ने लगी थी,
उसकी कमीज़ उठाई और तपते हुए होंठ उसकी पीठ पर कई जगह रगड़ने लगा जिससे वो
बेकाबू घोड़ी होती जा रही थी।
उसके मम्मों को दबाते दबाते पीठ पर हाथ फेरते फेरते मैं नीचे आया, धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया।
“हाय ! यह क्या किया? वापस बाँध दो, वरना आपके हाथ छोड़ते ही यह नीचे गिर जायेगी।”
“कौन है यहाँ तीसरा? मैं ही तो हूँ तेरा साईं दीवाना ! पूरी जिंदगी ऐश करवाऊँगा तुझे रूपा !”
उसके मम्मों को दबाते दबाते पीठ पर हाथ फेरते फेरते मैं नीचे आया, धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया।
“हाय ! यह क्या किया? वापस बाँध दो, वरना आपके हाथ छोड़ते ही यह नीचे गिर जायेगी।”
“कौन है यहाँ तीसरा? मैं ही तो हूँ तेरा साईं दीवाना ! पूरी जिंदगी ऐश करवाऊँगा तुझे रूपा !”
“साब, अगर कोई ऊँच-नीच हो गई तो ऐसी ऐश का क्या होगा? पहले ही गरीब को बेटी हूँ !”
“साली, अगर तेरा यार तुझे ठोकता, जिससे बात हो रही थी, क्या उसके पास इतना पैसा है जो तेरा पेट साफ़ करवा दे?”
“आपने मैडम की दोनों बहनों को भी नहीं छोड़ा?”
“वो अब बासी हैं, तू कचनार कलि है ! रूपा अगर ज़रुरत पड़ी तो मैं तुझे सबके सामने अपनाऊँगा !”
मेरा हाथ उसकी चिकनी जांघों में चलने लगा, वो भी गर्म होने लगी, मैंने जो गोली दी थी उसका असर था कि उसका जिस्म कसने लगा था।
मैं जानता था तो बस हाथ फेरता रहा।
वो बेकाबू हुई, लो हुई !
उसकी पीठ से जिप खोल दी। उसका गोरा बदन, गोरी पीठ देख मेरा पप्पू पागल हो गया था। उसके हाथ आटे वाले थे।
मैंने उसकी पीठ पर अपने होंठ रगड़े, वो सिसकारने लगी। मैंने वहीं उसकी कमीज़ उतरवा डाली रसोई में !
कच्ची कलि टू पीस में थी अब !
मैंने गौर से देखा उसकी भरती जा रही छाती, उसकी गोल गोल उभरती जा रही गाण्ड को !
उसने हाथ धोये और अपने कपड़ों की तरफ बढ़ने लगी।
कपड़े मैंने उठा लिए तो बोली- साब दे दो और मुझे छोड़ो !
“साली, बहुत प्यार करने लगा हूँ तुझे !”
उसको मैंने समझाया और वहीं शेल्फ पर लिटा कर उसके मम्मों को दबाया,
प्यार से देखा, क्या मम्मा था- कुंवारी कन्या का मम्मा था उसका निप्पल मानो
चने का दाना हो !
मैंने उसको जीब से रगडा तो वो मचलने लगी, तड़पने लगी, फिर भी कह रही थी-
साब, जाने भी दो ! मत करो मुझे बर्बाद ! मैं अपने आशिक से बहुत प्यार करती
हूँ, उससे मैंने
शादी करने की कस्में खाई हैं !”
“बहन की लौड़ी, तो फिर आसान है, मैं उसको नौकरी दे दूँगा, तू भी यहीं काम करेगी, दोनों मस्त जिंदगी बिताना !”
मैंने फिर से दूसरे मम्मे को चूसा, निप्पल को चुटकी में लेकर मसला।
मैंने नीचे उसकी पैंटी के ऊपर से साथ साथ चूत रगड़नी ज़ारी रखी ताकि वो गर्म होती जाए।
वहीं घुटनों के बल बैठ गया मेरे होंठ उसकी चूत के सामने थे, मैंने उसकी पैंटी को एक तरफ़ खिसकाया और उसकी चूत देख पागल हो गया मैं।
हल्के-हल्के रोम थे उस पर भूरे से !
मैंने उसकी चूत को सूंघा और जीभ निकाल कर उस पर फेरी। अब वो बेबस हो रही
थी, गोली का असर और अगर लड़की की चूत चाट लो वो मचलने लगती है, मैं वैसा ही
कर रहा था।
मैंने अपना लौड़ा भी निकाल लिया, खड़ा होकर उसको हिला कर दिखाया ताकि वो मर्द का अंग भी देख ले पास से।
फिर खड़ा हुआ उसकी चूत पर सुपारा रगड़ा तो मानो उसकी चूत में आग लग गई हो !
मैंने दुबारा बैठ कर जीभ को अन्दर डाला और घुमाया तो उसकी चूत कुंवारी लग रही थी।
वो अनाप-शनाप बकने लगी- हाय साब जी ! मर जाऊँगी ! अह अह ! कुछ होता है ! मेरी चूत में आग लग रही है ! हाय मेरी फाड़ डालो !
“हाँ हाँ लाडो ! फाड़ने के लिए तो यह सब कर रहा हूँ ! और मुझे कौन सी इसकी पूजा करनी है?”
मौका सम्भालते हुए मैंने भी उसको बाँहों में उठाया अपने आलिशान बेडरूम
में ले गया, बिस्तर पर पटका। नर्म नर्म बिस्तर जिस पर सोने के बारे में कभी
सोचा भी नहीं होगा उसने !
“साली, तेरा आशिक तुझे ऐसा कमरा देगा? मैं तुम दोनों के लिए जो सर्वेंट क्वाटर तैयार करवाऊँगा, तू सोच भी नहीं सकती !’
मैंने खुद को पूरा नंगा कर दिया उसको भी अपना लौड़ा उसके होंठों पर रगड़ा- मुँह खोल ले मेरी जान रूपा !
रूपा ने मुँह खोल लिया तो मैंने उसमें लौड़ा घुसा दिया- चूस मेरी जान !
वो पागलों की तरह मेरा लौड़ा चाटने लगी, चूसने लगी।
“और चूस ले मेरी रूपा, क्या कहती है मलाई खिलवाऊँ क्या?”
वो चुप रही लेकिन मैंने कहा- चल एक साथ मजे लेते हैं !
मैं उसकी चूत चूसने लगा, वो मेरा लौड़ा !
एक और कच्ची कलि को हलाल करने को मेरा लौड़ा तैयार था, पिंकी की ली थी, इसलिए मेरा लौड़ा इतनी जल्दी झड़ने वाला नहीं था।
रूपा नंगी पड़ी थी, मेरा सपना सच हो रहा था।
मैंने कहा- लौड़ा और चूस !
बोली- साब, मेरा मुँह दुखने लगा है ! कभी नहीं चूसा इसलिए !
“चल कोई बात नहीं ! चाट तो सकती है !”
वो जीभ निकाल-निकाल कर मेरा लौड़ा चाटने लगी।
मैंने उसकी टांगें उठवा दी और बीच में बैठ कर उस पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा।
वो मरी जा रही थी- साब, बहुत तड़पा रहे हो, जो करना है, करो ना !
मैंने सुपारा सही जगह रख उसको झटका दिया। वो दर्द से कराहने लगी।
मैं रुक गया, गीला करके डाला लेकिन उसको दर्द हो रहा था, मैंने कहा- थोड़ा चूस कर गीला कर दे !
तभी बाज़ार से फ़ोन आ गया- हम फ्री हो गए हैं, आपकी इन्तज़ार कर रहे हैं !
मैंने कहा- मैं काम में फंस गया हूँ, बस थोड़ी देर लगेगी।
मैंने रूपा के मुँह में झटके देते हुए बात की।
मैंने रूपा की टांगें फैलाई और जोर से झटका दिया।
वो चीख उठी लेकिन मैंने बिना रुके उसकी चूत फाड़ डाली जोर जोर से झटके देने लगा। मेरा लौड़ा फंस चुका था। निकाल कर फिर घुसा दिया।
उसका दर्द कम तो नहीं हुई लेकिन मैं बेरहम किस्म का बंदा हूँ, ख़ास कर के बिस्तर में !
अगर औरत को तकलीफ होती है तो मेरा जोश दुगुना हो जाता है।
“साली, बस अभी तुझे मज़ा आएगा !”
“ख़ाक मजा आ रहा है? मैं मर रही हूँ ! ज़ालिम साब जी हो आप ! जल्लाद !”
‘तेरी माँ का भोसड़ा ! देख तुझे कैसे भोगता हूँ मैं !” मैंने जोर जोर से झटके दिए, वो हिलकर रह गई।
रूपा के रूप को देख मैंने थोड़ा बहुत तरस भी खाया !
जब मेरा लौड़ा आराम से घुसने-निकलने लगा तब उसने राहत की सांस ली।
“अब क्या हुआ?” मैंने झटका लगते हुए कहा।
थोड़ी और देर लगी कि वो कूल्हे उठा उठा कर पटकने लगी, मेरा जोश बढ़ने लगा।
“साली !” मैंने उसकी चोटी को कुतिया की पूंछ की तरह पकड़ा, खींचा और तेज़ी से उसकी चूत रगड़ने लगा।
वो हाय हाय कर अब मेरा साथ दे रही थी, उसको पहली ही बार में इतना बड़ा मूसल लौड़ा मिल गया था।
कच्ची उम्र में अपनी चड्डी उतरवा वो भी मजा लेने लगी।
“साली इसको तेरी गाण्ड में भी दूँगा किसी दिन !” मैंने तेज़ी से झटके दिए क्योंकि मुझे बाज़ार भी जाना था।
जैसे मेरा निकलने वाला था, मैंने लौड़ा निकाला उसके चेहरे के करीब बैठ
हाथ से दो तीन झटके दिए, मेरा माल निकलने लगा तो मैंने लौड़ा उसके मुँह में
ठूंस दिया।
वो निकालना चाहती थी पर मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे। जैसे वो निकलना
चाहती थी मैंने उसकी चोटी खींच दी, एक भी बूँद, कीमती बूंद जाया नहीं जाने
दी।
फिर उसको शायद स्वाद लगा था तो उसने थोड़ा बहुत जो लौड़े पर लगा था, वो भी चाट लिया, उठकर कपड़े पहनने लगी।
मैंने उसको पाँच सौ का नोट दिया और कहा- एक ब्रा-पैंटी का सेट खरीद आज
ही।उसके मम्मो को सही शेप देने के लिए मैंने कागज़ पर उसको लिख दिया-
पुश-अप ब्रा !
इससे नीचे से पूरी राऊंड शेप मिलती है मम्मे बड़े होकर भी लटकते नहीं।
दोस्तो, रूपा को मैंने ठोक लिया था।
फ़िर उन दोनों बहनों को बाज़ार से लेने गया।
तीनों ही बहनें मेरे मूसल की गुलाम थी ! मेरी बीवी मोना थोड़ी सी बिस्तर
पर ठंडी है, उसको चूसा-चुसाई का इतना शौक नहीं है, मेरे लिए चूस ज़रूर लेती
है !उधर दोनों सालियाँ मेरा लौड़ा चूसने की दीवानी थी।
उधर रूपा ने मेरे कहने पर ब्रा पैंटी का सेट खरीद लिया, रूपा को देख मेरा गोपाल खिलने लगता, वो ताज़ी चीज़ थी।
शाम को थोड़ा अँधेरा हुआ था, मैं पौधों को, फूलों को पानी दे रहा था, तीनों बहनें घर में थी, बतिया रही थी।
रूपा मेरे पास आई, उसने अपनी कमीज़ उठाई, बोली- साब देखो, काली पुश-अप ब्रा !मैंने उसके अनार मसल दिए, मस्त थे।
उसने नाड़ा ढीला किया और बोली- देखो !
काली चड्डी में वो कयामत दिख रही थी।
साथ वाला प्लाट भी मेरा था, मैंने वहाँ छोटे छोटे पोर्शन बनाये थे जिनको
किराए पर दिया था। आगे वाले हिस्से में मैंने सब्जियां वगैरा लगाईं थी,
रोज़ वहाँ ज़रूर जाता था, वहाँ का एक सेट खाली था, मैंने मौका पाकर रूपा को
वहाँ बुला लिया और उससे अपना लौड़ा चुसवाने लगा, मैंने कहा- साली लेट जा !
ब्रा पैंटी नहीं उतारना !
तभी मेरी बीवी का फ़ोन आ गया- कहाँ हो जी आप?
मैंने कहा- रूपा के साथ बाज़ार में हूँ, उसको सामान खरीदना था रसोई का ! अकेली जाने से डर रही थी तो साथ आ गया।
“ओह, ठीक है, आते वक़्त रामू के स्प्रिंग रोल पैक करवा लेना !”
इधर मेरा रोल रूपा चाट रही थी।
मैंने उसको चोदा नहीं, जल्दी थी।
सीमा ने हमें निकलते देख लिया, सीमा मेरे किरायेदार की नव-बिआही औरत थी, उसकी शादी को सिर्फ सात महीने हुए थे।
वो हमें देख कर मुस्कुराई बहुत ही सवालिया नज़र के साथ देखा उसने।
मैंने नज़रें झुका ली, निकल आया।