मेरे पापा के ऑफिस के सहकर्मी हमारे पड़ोस में ही रहते हैं.
हमारे घरों की छत आपस में मिलती है.
उनके परिवार में वे, उनकी पत्नी शिखा और एक 2 साल की बेटी है. उन दोनों की शादी को ज्यादा टाइम नहीं हुआ है.
शिखा जी की उम्र 27 साल है और वह एक स्कूल में टीचर हैं.
मैं मेडिकल की पढ़ाई कर रहा हूं. मेरा लिंग काफी बड़ा है और जब यह खड़ा होता है तो काले सांप के जैसा लगता है.
और मैं बॉडी बिल्डिंग का भी शौक रखता हूं और एक अच्छे शरीर का जवान लड़का हूं.
बात करीब एक साल पुरानी है और तब की है, जब मैंने बारहवीं की परीक्षा पास की थी और मेडिकल के एंट्रेंस की तैयारी कर रहा था.
उस समय सर्दियां चल रही थीं और मैं छत पर धूप में पढ़ाई करता था.
बाजू में छत पर शिखा भाभी की ब्रा और पैंटी सूखती थी. मैं अक्सर उस पर मुठ मारकर अपना माल उनकी ब्रा पर उनकी बोबे वाली जगह पर छोड़ दिया करता था.
अब मैं आपको शिखा भाभी के बारे में बता देता हूं. वह एकदम सेक्सी जवान औरत थीं और मुझे बड़ी भूखी नजरों से देखा करती थीं.
उनका साइज 34-28-36 का था जो मुझे बाद में चुदाई के वक्त पता चला.
उनके मम्मे और गांड की गोलाई को देखकर ही मेरा लौड़ा फनफनाने लगता था.
एक दिन मैं ऐसे ही पढ़ने के लिए छत पर गया और उनकी ब्रा को देखकर मुट्ठी मारने का मन हुआ.
मैं जैसे ही उनकी छत पर गया, मुझे वासना भरी सिसकारियों की आवाज सुनाई देने लगी.
इन आवाजों को मैं खूब पहचानता था क्योंकि ब्लू फिल्मों में चुदते वक्त लड़कियों की ऐसी आवाजों को मैंने सुना था.
एक पल को तो मैं ठिठका कि क्या करना चाहिए.
फिर मैंने उनकी छत पर जो सीढ़ियों के ऊपर शेड बनाया था, उसमें से झांक कर नीचे देखा तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.
शिखा भाभी ने अपनी सलवार घुटनों तक कर रखी थी. वह अपने एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थीं और दूसरे हाथ से अपने एक मम्मे को मसल रही थीं.
उनके मुँह से कोई नाम निकल रहा था.
मैंने ध्यान दिया तो वे बार बार मेरा नाम ही ले रही थीं.
मुझे उन्हें चोदने का ये मौका अच्छा लगा इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैं इन्हें अभी चोद दूं तो फिर मैं हमेशा इनका भोग कर सकता हूं.
मैं तुरंत उनके सामने जाकर खड़ा हो गया.
मुझे देखते ही उनके चेहरे का रंग उड़ गया.
मैं तुरंत उनके ऊपर टूट पड़ा और मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
वे भी बहुत ज्यादा गर्म थीं इसलिए वे भी मेरा साथ देने लगीं.
मैंने फटाफट अपना लोअर निकाला और अपना काला नाग उनके हाथ में रख दिया.
वे पहले तो मेरे लौड़े को देख कर डर गईं, पर उस वक्त भाभी की चूत में आग लगी हुई थी … तो वे बिना कुछ सोचे समझे मेरे लौड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं.
उनके मुँह की गर्मी पाकर मेरे लौड़े में झनझनी सी दौड़ गई और मैं उस वक्त जन्नत की सैर करने लगा था.
मैं इतना ज्यादा जोश में आ गया कि मैंने उनका मुँह पकड़ कर अपना लौड़ा उनके गले में ठूंस दिया.
भाभी की आंखों से आंसू निकल आए पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया और तेज तेज धक्के मारने लगा.
चूंकि मेरे अन्दर भी उत्तेजना भरी हुई तो मैं ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया और उनके गले में ही झड़ गया.
उन्होंने भी कोई प्रतिवाद नहीं किया और वे मेरे लौड़े के पूरे रस को स्वाद लेती हुई पी गईं.
उन्होंने मेरा मुरझाया हुआ लौड़ा अपने मुँह से निकाला और मेरी आंखों में देखते हुए उसे चाट चाट कर साफ कर दिया.
उनकी इस कामुक अदा को देख कर मेरे लौड़े में वापस से हल्का हल्का सा तनाव आने लगा था.
फिर हम दोनों बैठ कर बात करने लगे.
मैंने उनसे इस तरह अचानक आ जाने के लिए माफी मांगी क्योंकि मुझे लग रहा था कि कहीं वे मुझसे शिकायती लहजे में बात न करने लगें.
उन्होंने कहा- इसमें माफी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं है. ये सब मैंने जानबूझ कर ही किया था.
मुझे कुछ समझ में नहीं आया.
उन्होंने मुझे बताया कि उनके पति उन्हें ठीक से चोद नहीं पाते हैं और उनका लंड भी छोटा व पतला है. वे जल्दी झड़ भी जाते हैं.
मैं उनकी बातों को बड़ी गौर से सुन रहा था.
मैंने उनसे सवाल किया- आपको मेरा ख्याल कैसे आया? मतलब आप मेरा नाम क्यों ले रही थीं?
उन्होंने बताया कि उन्होंने मुझे उनकी ब्रा में मुठ मारते हुए देख लिया था
और उसी समय से उनको मेरा लौड़ा अपनी चूत में लेने की इच्छा थी. इसलिए आज
जानबूझ कर छत पर मेरे आने के टाइम पर आकर उन्होंने मुझे अपनी तरफ आकर्षित
करने के इस तरह से रिझाया था.
मुझे भी लगा कि अब कोई दिक्कत नहीं है. इसलिए मैं भी उनसे खुल कर बात करने लगा.
मैंने उन्हें बताया कि मैं भी आपको काफी पसंद करता हूँ और न जाने कब से आपको चोदना चाहता था.
उन्होंने भी मेरे गले में हाथ डाल कर कहा- मैं भी तेरा लौड़ा अपनी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूं मेरे राजा.
मैंने भी उनको अपनी बांहों मे कस लिया और उनके होंठों को चूमने लगा.
उसी वक्त मुझे अंकल की याद आई कि उनका क्या स्टेटस है. कहीं वे न आ जाएं.
उस पर भाभी ने मुझे बताया कि उनके पति अपने काम के सिलसिले में 4 दिन के लिए बाहर गए हैं. अब हम दोनों को किसी बात की कोई चिंता नहीं है. बस तुम अपने घर में कुछ ऐसा कह कर इंतजाम कर आओ ताकि हमारे मिलन में कोई व्यवधान न आए.
मैंने उनसे कहा- हां ठीक है, मैं भी अपने घर में कुछ इंतजाम करके आता हूँ.
छत के रास्ते से वापस अपने घर में जाकर मैंने मम्मी को बताया कि मेरे एक
दोस्त की तबियत खराब हो गई है और वह अस्पताल में भर्ती है. उसके घर वाले भी
यहां नहीं हैं, तो मुझे उसके पास जाना होगा.
मम्मी पापा ने भी मना नहीं किया और जाने का कह दिया.
मैं अपने कुछ कपड़े लेकर घर से निकला और सावधानी से अपने ही पड़ोस वाले घर में आ गया.
बस फिर क्या था, हम दोनों उनके बेडरूम में आ गए.
भाभी और मैं एक दूसरे के ऊपर टूट पड़े.
मैं भाभी के होंठों को चबा जाना चाहता था इसलिए बेदर्दी से उनके होंठों को अपने होंठों में भर कर चबाते हुए चूस रहा था.
उन्हें दर्द हो रहा था तो मैंने उन्हें छोड़ दिया.
उन्होंने मुझसे कहा- बड़ा जोर से चबा लिया है राजा … मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ … आराम से करो.
मैंने उनका कहा मान लिया.
फिर हम दोनों एक दूसरे के कपड़े उतार कर नग्न हो गए और मैं भाभी की चूचियां चूसने लगा.
भाभी को भी मेरे मुँह में अपने दूध देने में बड़ा मजा आ रहा था.
उनकी चूत एकदम सफाचट थी तो मैं अपने हाथ से उनकी चूत को सहला रहा था और उसके दाने को अपनी दो उंगलियों से पकड़ कर मींज रहा था.
भाभी को नीचे और ऊपर एक साथ मजा मिल रहा था और वे काफी गर्मा गई थीं.
जल्द ही भाभी ने मेरे लौड़े को मुँह में ले लिया तो मैंने उनसे 69 की पोजिशन में आने कहा.
भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं और उन्होंने अपनी टांगें खोल कर अपनी चूत मेरे मुँह पर लगा दी.
मैं प्यासा कुत्ता सा उनकी चूत को चाटने लगा था और भाभी मेरे लौड़े को गन्ना समझ कर चूसने में लगी थीं.
भाभी अपनी चूत चटवाते समय अपने मुँह से मादक सिसकारियों की आवाज निकाल
रही थीं जिससे वे बार बार मेरे लौड़े को मुँह से निकाल कर उसे बाहर से चाटने
लगती थीं.
फिर वे मेरे टट्टों को चाटने लगी थीं.
सच में जिस तरह से वे मेरे एक टट्टे को मुँह में भर कर खींच रही थीं, उससे मेरे रक्त में उबाल आ रहा था और लौड़े में मस्त तनाव आता जा रहा था.
उसी से उत्तेजित होकर मैं उनकी चूत में अपनी पूरी जीभ घुसेड़ कर चूत की दीवारों को अपनी खुरदरी जीभ से रगड़ रहा था.
उनकी चूत का नमकीन स्वाद मुझे बड़ा बढ़िया लग रहा था.
हम दोनों कामांध हो चुके थे और हम दोनों को भी दीन दुनिया की कोई खबर नहीं रह गई थी.
हम दोनों की कामुक आवाजों का मधुर संगीत कमरे में गूंज रहा था ‘ऊऊ ऊईई ई मांआआ आआआह आआआ आराम से आआह …’
कुछ ही देर में भाभी से साहन न हुआ और वे मेरे मुँह में झड़ गईं.
मैं उनका सारा नमकीन पानी पी गया.
कुछ देर तक लगातार चूत चाटते रहने से भाभी की चूत में वापस करंट आ गया और वे चुदवाने के लिए मचलने लगीं.
अब मैं मिशनरी पोजीशन में आ गया.
उन्होंने कहा कि उनकी चूत अभी भी एक तरह से कुंवारी ही है. उनकी बेटी
ऑपरेशन से हुई है और पति का लौड़ा भी छोटा है, तो आराम से चुदाई करना.
मैंने कहा- तो आपकी चूत कुंवारी कैसे हुई? क्या लंड का पानी इंजेक्शन से अन्दर लिया है.
वे हंसने लगीं और बोलीं- चुदाई होना और लंड का पानी अन्दर जाना दो अलग अलग बातें होती हैं. पति का पतला सा लंड मेरी चूत को सही से चोद ही नहीं पाया है. तुम्हारे लौड़े के सामने मेरे पति के लंड को लुल्ली ही कहना उचित रहेगा. इसी लिए तुमसे कह रही हूँ कि मेरी चूत तुम्हारे लौड़े के लिए अभी कुंवारी ही है.
मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं आराम से करूंगा.
जबकि मेरे मन में इसका उल्टा ही चल रहा था. मुझे लड़कियों को दर्द देने में मजा आता है.
मैंने उनकी चूत पर ढेर सारा थूक गिरा दिया और अपने लौड़े को उनके मुँह में देकर उसे भी थूक से सराबोर कर लिया.
फिर मैंने उनकी चूत के छेद पर अपना लौड़ा रख कर एक धक्का मारा तो मेरे लौड़े का टोपा भाभी की चूत के अन्दर घुस गया.
उनकी तेज आह निकल गई तो मैं रुक गया.
उन्होंने दर्द भरी आवाज में मुझसे कहा कि आराम से डालो ना!
मैंने अपना लौड़ा पीछे खींच कर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा पूरा लौड़ा जड़ तक उनकी चूत में घुसता चला गया.
भाभी ‘ऊऊ ऊईई ई मांआआ … मर गई … फट गई मेरी … साले आराम से कर … आह फाड़ दी कुत्ते ने … ऊऊ ऊईई ई मांआआ आआआह आआआ आराम से आआह …’ चिल्लाने लगीं.
भाभी की चूत के चिथड़े उड़ गए और उनकी आंखों से आंसू निकल आए.
वह छटपटाती हुई कहने लगीं- आंह इसे बाहर निकालो ऊऊ ऊईई ई मांआआ … आआआह आआआ मैं मर गई … ऊऊ ऊईई ई मांआआ … मर गई …
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनकी आवाज को बंद कर दिया.
थोड़ी देर में ही वे शांत हो गईं और मैंने झटके देने शुरू कर दिए.
वे अपने मुँह से मादक आहें निकालने लगी थीं.
‘आह आआह आह … उफ़्फ़फ्फ ऊऊ … ऊह हहह … ऊऊ ऊईई ई मांआआ … मर गई … आराम से करो!’
मैं पेलने में लगा रहा. भाभी की चूत एकदम किसी कुंवारी नवयौवना के जैसी लग रही थी.
मेरे लौड़े को ऐसा लग रहा था मानो उसे किसी शिकंजे ने जकड़ा हुआ हो.
करीब 20 मिनट तक हमारी चुदाई चली और फिर मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.
अगले चार दिन तक मैंने उन्हें अलग अलग पोजिशन में बहुत चोदा और उनकी चूत का भोसड़ा बना दिया.
उनके मम्मों को काट काट कर लाल कर दिया. वे ठीक से चल तक नहीं पा रही थीं.
फिर मैं अपने घर वापस आ गया और अब हम दोनों को जब भी टाइम मिलता, हम सेक्स करने लगे.
हमारी पहली चुदाई के बाद हम बैठ कर बातें करने लगे थे.
शिखा- तो तुमने इससे पहले किस किसको चोदा है?
मैं- मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को एक बार चोदा है लेकिन मुझे उसे चोदने में
ज्यादा मजा नहीं आया क्योंकि उसे बहुत दर्द हुआ. फिर मुझे मुठ मार कर अपने
आपको शांत करना पड़ा.
शिखा- मेरा पति भी मुझे कभी ठीक से चोद नहीं पाया और मेरी बेटी भी
ऑपरेशन से ही हुई है. तो मेरी चूत अभी कुंवारी जैसी ही है. लेकिन आज तुमने
मुझे चुदाई का असली मजा दिया है. अब मैं तुम्हारी पर्सनल रखैल बन कर
रहूंगी.
मैं- अरे आप तो मेरी रानी हैं और हमेशा मेरे लौड़े को खुश रखने वाली रांड बन कर रहेंगी.
हमारी बातें अभी चालू ही थीं कि तभी उनकी बेटी रोने लगी.
वे उसे गोद में लेकर उसे दूध पिलाने लगीं.
उनका एक थन उनकी बेटी चूस रही थी.
यह देख कर मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं उनका दूसरा थन चूसने लगा.
साथ ही मैं अपनी एक उंगली से उनकी चूत के दाने को भी कुरेदने लगा.
आंटी के मुँह से ‘आह्हह आआह्ह मम्मी ईई आह्हह ओओह … बसस्स आंह्ह … रुको ना…’ जैसी आवाजें निकलने लगीं.
पर मैं नहीं रुका.
वे जल्दी ही बहुत गर्म हो गईं और उन्होंने अपनी बेटी को गोद से उतार कर बिस्तर पर लेटा दिया.
फिर वे उसके ऊपर घोड़ी जैसे झुक कर उसे दूध पिलाने लगीं.
आंटी ने मुझसे कहा- अब सही आसन बन गया है. तुम मुझे चोद दो.
मैं उनके मुँह के पास आकर अपना लंड उनके होंठों पर छुलाने लगा.
वे मेरा इशारा समझ गईं और उन्होंने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया.
क्या मस्त नजारा था.
बेटी मां का थन चूस रही थी और मां मेरा लौड़ा चूस रही थी!
अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनके मुँह से लौड़ा निकाल कर चूत के पास आ गया.
वैसे तो मैंने अभी बस उनको एक ही बार चोदा था इसलिए उनकी चूत अभी भी कसी हुई थी.
फिर भी मैंने उनकी चूत को अपनी दो उंगलियों से खोल कर उसमें अपना लौड़ा फिट कर दिया.
उन्होंने मुझसे कहा- आराम से डालना.
पर मुझे औरतों को दर्द देने में मजा आता है.
मैंने उनकी कमर को पकड़ कर हल्का सा धक्का लगाया और मेरा सुपारा उनकी चूत में घुस गया.
उनके मुँह से ‘आह्हह आआह्ह मम्मीईई आह्हह ओओह … बसस्स आंह्ह मम्मीई ईईइ ईईई मर गई …’ की आवाज निकल गई.
मैंने उनकी कमर को पकड़ कर एक जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लौड़ा उनकी चूत में जड़ तक समा गया.
इस हमले को वे झेल नहीं पाईं और बिस्तर पर गिर गईं.
उनकी बेटी उनके नीचे दब गई.
आंटी दर्द से तड़फ उठीं- मम्मीई ईईइ मर गई … आआह बचा लो आआह मैं मर जाऊंगी आह निकाल लोओ … आह मेरी फट गई आंह!
उनकी इन आवाजों से मुझे खुशी मिल रही थी और मेरा लौड़ा उनकी चूत में घुसा रहा.
थोड़ी देर बाद वे उठीं और आंखों में आंसू लिए फिर से घोड़ी बन गईं.
मैंने उनसे माफी मांगी और अपनी चुदाई चालू कर दी.
थोड़ी देर बाद उन्हें भी मजा आने लगा.
नीचे उनकी बेटी उनका दूध पी रही थी और पीछे मैं उनकी चूत मार रहा था.
उनके मुँह से धीमी आवाज निकल रही थी- आह्हह आआह्ह मम्मीईई आह्हह ओओह … बसस्स आंह्ह!
इस दोहरे मजा को वह ज्यादा देर झेल नहीं पाईं और झड़ गईं.
अब उनकी बेटी भी सो चुकी थी तो वे उससे अलग होकर बिस्तर पर सीधी लेट गईं.
मैं भी उनकी टांगों के बीच में आ गया और उनकी चूत में लंड सैट करके चुदाई करने लगा.
वे भी ‘आआहा आह …’ की मादक आवाजें निकालती हुई मेरा साथ देने लगीं.
थोड़ी देर बाद मैं उनके नीचे आ गया और वे मेरे लौड़े पर बैठ कर लंड की सवारी करने लगीं.
मैंने उन्हें झुका कर उनका एक दूध अपने मुँह में ले लिया.
उनका दूध कुछ ज्यादा ही निकलता था और काफी मीठा था.
इसी तरह करीब एक घंटा तक मैंने उन्हें अलग अलग आसान में जबरदस्त चोदा.
वे भी इस चुदाई में कई बार झड़ीं.
इसके बाद हम दोनों में ही ताकत नहीं बची थीं तो हम दोनों थक कर पसीने से सराबोर होकर वहीं सो गए.
करीब दो घंटे बाद मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि आंटी टांगें खोल कर सो रही थीं, उनकी चूत सूज कर कचौड़ी सी दिख रही थी.
उनकी डबल रोटी जैसी सूजी चूत देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लौड़ा फिट करके उनकी चूत की गहराई में उतार दिया.
इस अचानक हुए हमले से उनकी नींद टूट गई और उनके मुँह से एक तेज स्वर में शोर निकला- आआह बचा लो … आआह मैं मर जाऊंगी आह निकाल लो..ओ आह मेरी फट गई आंह … कैसा जालिम है आह आह आआह्ह मम्मीईई ऊफ्फ!
वह मना करती रहीं मगर मैंने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें काफी देर तक लगातार चोदा.
उनकी चूत से रस और मेरा वीर्य मिक्स होकर निकलने लगा.
उनसे उठा भी नहीं जा रहा था.
मैं ही उन्हें उठा कर बाथरूम में लेकर गया और उन्हें गर्म पानी से नहलाया.
उनकी चूत की सिकाई की, फिर उन्हें लाकर बिस्तर पर लिटाया.
मैंने उनसे पूछा कि आप क्या खाएंगी?
उन्होंने कहा- जो भी मंगवाना चाहो.
मैंने बाहर से खाना ऑर्डर कर दिया.
तब तक मैंने अपने घर पर भी बात कर ली और उन्होंने भी अपने पति से बात की.
फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया.
उसके बाद मैंने टीवी पर एक रोमांटिक पिक्चर लगा दी.
हम दोनों इस पूरे टाइम नंगे ही थे.
कुछ देर बाद उन्होंने अपनी बेटी को दूध पिलाया और सुला दिया.
मैं उन्हें बेडरूम में ले जाने लगा.
उन्होंने कहा- मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा है और आज रात चूत नहीं चुदवा पाऊंगी.
मैंने उनसे कहा- आप आओ तो सही, मैं आपकी सिकाई कर देता हूँ और आप बेफिक्र रहें. मैं आज आपकी चूत नहीं चोदूंगा.
जब मैं यह कह रहा था, तब मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था.
उधर बाथरूम में ही एक सरसों के तेल की शीशी रखी थी, जिसमें दबाने से एक पतली धार से तेल बाहर आता था. उसे देख कर मेरी आंखें चमकने लगीं.
मैं उन्हें बेडरूम में लेकर गया और उनकी चूत की सिकाई करने लगा.
मैं धीरे धीरे अपनी उंगली उनकी चूत में देकर उनके जी प्वाइंट को कुरेदने लगा.
उनके दूध मसलने और पीने लगा.
ऐसे ही मैं धीरे धीरे उन्हें गर्म करने लगा.
फिर मैंने उन्हें उल्टा कर दिया और उनकी पीठ चूमने लगा.
ऐसे ही मैं उनके ऊपर लेट गया.
अब वह मेरे नीचे औंधी लेटी हुई थीं और मैं उनकी गर्दन चूमने लगा.
कुछ देर बाद मैं अपना एक हाथ नीचे ले गया और उनकी गांड की दरार में उंगली को लगा कर उस भाग को सहलाने लगा.
जब उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैं उनकी गांड में उंगली करने लगा.
उन्हें समझ आ गया कि मैं क्या करना चाहता हूँ.
वह मना करने लगीं कि जब आगे इतना दर्द हुआ तो पीछे तो मैं सहन ही नहीं कर पाऊंगी.
मैंने बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाया कि चूत से ज्यादा गांड चुदाई में मजा आता है.
बड़ी मिन्नतों के बाद वह मानी.
उन्होंने मुझसे कहा कि अगर ज्यादा दर्द हुआ तो मैं नहीं करूँगी.
मैंने उनकी बात मान ली और फिर से उन्हें गर्म करने लगा.
तब मैंने उनसे गांड की दरार खोलने को कहा.
उन्होंने अपने दोनों हाथों से चूतड़ों को फैलाया और मुझे उनकी गांड का गुलाबी छेद दिखने लगा.
मैंने उस छेद पर पहले अपना थूक गिराया और एक उंगली से गांड को खोला.
उन्हें अच्छा लगने लगा. मैंने इस बार तेल की शीशी का मुँह उनकी गांड के छेद में किया और शीशी दबा दी.
काफी सारा तेल उनकी गांड में चला गया. अब मैं अपना लौड़ा सैट करके उनके ऊपर लेट गया.
मैंने उनसे पूछा कि डालूं?
तो उन्होंने हां कह दिया.
मैंने कहा- जरा गांड को ढीली किए रहना.
उन्होंने अपनी गांड को ढील दी और उसी समय मैंने थोड़ा सा जोर लगा दिया.
तेल की वजह से मेरा सुपारा गांड के पहले छल्ले के अन्दर फंस गया.
उनके मुँह से ‘उन्ह आआह आह दर्द हो रहा है … आह निकाल लो मैं मर जाऊंगी
आह निकाल लोओ … आह मेरी फट जाएगी … आंह.’ की आवाजें निकालने लगीं.
मैंने झट से शीशी का मुँह लंड और गांड के जोड़ पर लगा दिया और तेल टपकाने लगा.
आंटी की गांड इतनी ज्यादा टाइट थी कि मेरा सुपाड़ा छिल गया था और मुझे तेज जलन सी हो रही थी.
मैं थोड़ी देर रुक गया.
थोड़ी देर बाद जब वे थोड़ी सामान्य हुईं, तो उन्होंने मुझसे धीरे धीरे करने को कहा.
पर मैंने एक जोर का शॉट मारा और मेरा पूरा लौड़ा उनकी गांड में जड़ तक घुसता चला गया.
उनकी आंखें लाल हो गईं और वे लगभग बेहोश हो गईं.
मगर मैंने कोई दया नहीं दिखाई और अपना लौड़ा आधा बाहर निकाल कर फिर से उसे अन्दर ठूंस दिया. साथ ही तेल की शीशी से तेल टपकाता गया.
इस बार के दर्द की वजह से उनमें थोड़ी हलचल हुई और वे सुबकने लगीं.
मगर तेल ने गजब का काम किया था तो उन्हें लंड की मोटाई से मीठा मजा भी आने लगा था.
हालांकि आंटी मुझसे तेज स्वर में बोलीं- अपना लंड बाहर निकालो … मैं मर जाऊंगी … आ आहा आह आह्ह मम्मीई उफ्फ.
मगर मैं लंड को यूं ही गांड में हिलाते हुए उसे सैट करने लगा और तेल की चिकनाई भरने लगा.
फिर थोड़ी देर बाद वह जब सामान्य हुईं तो मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
उन्हें हार्ड गांड सेक्स में अब भी दर्द हो रहा था, पर वह मेरा साथ देती रहीं.
उनकी गांड के कसाव को मेरा लौड़ा झेल नहीं पाया और मैं कुछ ही मिनट में ही झड़ गया.
जब मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला तो मेरा वीर्य और खून उनकी गांड से रिसने लगा.
थोड़ी देर बाद मैं उन्हें बाथरूम लेकर गया क्योंकि उनसे तो उठा भी नहीं जा रहा था.
फिर हम दोनों सो गए.
उस रात मैंने एक बार और उनके साथ हार्ड गांड सेक्स किया.
दूसरे दिन से हमारे बीच चुदाई का वह खेल शुरू हुआ कि अगले तीन दिनों तक नहीं रुका.
उन 4 दिन हम दोनों ने कोई कपड़ा नहीं पहना. लगभग घर के हर हिस्से में चुदाई की, चाहे वह बाथरूम हो या किचन.
हम दोनों में से किसी को याद नहीं कि हमने कितनी बार चुदाई की.
उसके बाद मैं अपने घर आ गया और उनके भी पति आ गए.
मगर मुझे जब भी मौका मिलता, मैं उनकी चूत और गांड चोद देता हूँ.
अब तो वे भी चूत और गांड चुदाई में एक नम्बर की रंडी बन गई हैं. वे भी हर समय लौड़ा लेने के लिए बेताब रहती हैं.
हमारा ये चुदाई का सिलसिला आज भी चल रहा है. पर अब मुझे उनमें ज्यादा मजा नहीं आता.
अब मैं कोई नई माल ढूंढ रहा हूँ. जब नई चुत मिलेगी तो उसकी चुदाई की कहानी बाद में लिखूंगा.
यह हार्ड गांड सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?धन्यवाद.
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