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Monday, 26 August 2024

गाँव की भाभी पर दिल आ गया

 

भाभी की नंगी गांड मैंने देखी उनकी सलवार का नाड़ा खोल कर! जब भाभी चूतड़ मटका कर चलती थी तो मेरा मन करता था कि भाभी को सड़क पर नंगी कर लूं.

दोस्तो,
मैं विवेक हरियाणा से हूं।
यह कहानी है मेरे गांव में मेरे घर के बिल्कुल पास रहने वाली रचना भाभी की।
कहानी काल्पनिक है; इसका किसी विषय वस्तु, किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।

रचना भाभी की उम्र 28 साल थी। उनकी शादी को 5 साल हो चुके थे।
भाभी देखने में बहुत गोरी मादक थी।

गली मोहल्ले में रचना भाभी की खूबसूरती के चर्चे थे।
भाभी के फिगर की बात करें तो भाभी की कमर बिल्कुल सुराही जैसी पतली थी कमर के ऊपर गोरी पीठ आगे की तरफ दो मोटे मोटे तने हुए खरबूजे जैसे मोटे स्तन थे।
सबसे खास चीज थी भाभी की मस्त मोटी सुडौल गदरायी गांड।
भाभी के चूतड़ों का साइज 38 था।

गली मोहल्ले में सब लड़के या यूं कहें कि की सभी भाभी के नाम की मुठ पेलते थे।

गांव में जब भाभी पानी लेने जाती थी, लड़के भाभी के पीछे पीछे जाकर उनके मस्त पिछवाड़े को निहारते थे।
मैं भी उनमें से एक था; भाभी की नंगी गांड देखें के लिए पागल था.

पर भाभी किसी को घास तक नहीं डालती थी।

मैंने सोच रखा था कि सिर्फ और सिर्फ रचना भाभी की चूत मारूंगा।
तब मेरी उम्र 21 साल थी।

रचना भाभी की जवानी ने मुझे पागल बना रखा था।

दिन हो या रात … मेरी आंखों के सामने सिर्फ रचना भाभी की मस्त गांड और उनके लंगड़े आम जैसे तने हुए चूचे दिखाई देते थे।

रचना भाभी बहुत गोरी चिट्टी थी।
गांव में भाभी दूसरी बहुओं से ज्यादा फैशनेबल थी।

मुझे ऐसा लगता था कि रचना भाभी जानबूझकर भारी पटियाला सलवार डालती हैं ताकि उनकी मस्त गांड और खूबसूरत लगे और सभी लड़के आहें भर भर कर बोलें- हाय! भाभी एक बार दे दे।

मैंने सोच लिया था कि एक बार रचना भाभी के ऊपर जरूर चढूंगा।

मैं भाभी के पीछे हाथ धोकर पड़ गया।
दिन हो या रात … हर वक्त भाभी जहां भी जाती, चाहे पानी लेने या चाहे खेत में … मैं भाभी के मोटे चूतड़ों की थिरकन देख कर उनके पीछे पीछे खिंचा चला जाता।

भाभी का यूं मटक मटक कर चलना मेरे लौड़े को हर वक्त तनाए रखता था।

अब भाभी को भी मेरे ऊपर शक होने लगा था।

एक दिन जब भाभी अपनी ननद शालू के साथ पानी भरकर आ रही थी, तब शालू मुझे देख कर मुस्कराई और बोली- भाभी, देख तेरा आशिक!

भाभी का हाथ उनके मुंह पर ह्ग्या और वे घूंघट आगे करके मुस्कुराने लगी।

उनकी मुस्कुराहट देख कर मैं तो पागल हो गया.

शाम को रोज मैं अपनी छत पर चढ़कर भाभी के आंगन में भाभी को काम करते देखता।

एक दिन भाभी शाम को अपने बाड़े में उपले लेने गई थी।
मैं भाभी के पीछे पीछे चल पड़ा।

भाभी अपनी चौड़ी गांड को मटकाती हुई गली से गुजर रही थी।

मैंने भाभी की आंखों में आंखें डालते हुए आंख मार दी।

भाभी गुस्से में मेरी तरफ देख कर अपने घर चली गई।

अगले दिन मैं शहर जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ा था, तभी भाभी के देवर और जेठ ने मेरी पिटाई कर दी।

“साले घना आशिक बने है!” यह बोलकर मेरे साथ मारपीट करने लगे।

10 दिन तक मैं चल नहीं पाया।

1 महीने के बाद जब मैं ठीक हो गया तो मैं फिर से भाभी के पीछे पड़ गया।

रचना भाभी से दो चार बार आंखें चार हुई और भाभी की ओर से ना गुस्सा ना प्यार … कुछ भी दिखाई नहीं दिया.
मैं भाभी के प्यार में पागल हो गया था।

एक दिन भाभी खेत में गई हुई थी।
मैं भाभी की ओर देख रहा था।

पहली बार भाभी ने मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और बोली- पिटने के बाद भी नहीं सुधरा। कैसे सुधरोगे?
मैंने झट से बोला- भाभी, आपका प्यार मिल जाए तब चाहे मौत आ जाए!
भाभी जोर से हंसने लगी और बोली- पागल हो आप!

5 महीनों के बाद हमारे परिवार में शादी थी जिसकी वजह से रचना भाभी और हमारे परिवार के बीच में फिर से बातचीत शुरू हो गई।

रचना भाभी रात को संगीत कार्यक्रम में अपने ननद शालू और सास के साथ हमारे घर आई।
भाभी ने गानों पर खूब ठुमके लगाए।

मैं भाभी की आंखों में आंखें डाल कर भाभी को बार-बार इशारे कर रहा था।
भाभी जी मुझे देख देख कर जानबूझकर अपने मोटे चूतड़ों को हिला हिला कर नाच रही थी।

मैंने झट से भाभी को आंख मारी, आंख मारते ही भाभी मुस्कुराने लगी।

थोड़ी देर के बाद जहां मैं खड़ा था, भाभी वहीं आकर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।

मेरे और भाभी के बीच बस आधे फीट का फासला था।
सभी औरतें डांस को देखने में मगन थी।

पता नहीं क्या हुआ, मैंने हिम्मत करके अपने हाथ को भाभी की गांड पर रख दिया.

भाभी एकदम से चौंकी और गुस्से से मुंह बनाते हुए मेरे हाथ झटक दिया।
परंतु वे वहां से हिली नहीं।

मैंने दोबारा से अपनी हथेली को भाभी जी ऊपर उठी हुई मांसल गांड पर रख दिया।
भाभी ने इस बार कुछ नहीं किया।

मैं धीरे-धीरे भाभी की गांड को अपने हाथों से नाप रहा था।

भाभी की गर्म गदराई गांड को मसलने से मेरा लौड़ा पूरी तरह तन चुका था।
वे सामने की ओर देखकर मुस्कुरा रही थी।

मेरा हाथ अंधेरे में था तो मुझे कोई नहीं देख सकता था।

मैंने पीछे हाथ ले जाकर भाभी की योनि को एकदम से अपनी मुट्ठी में भींच लिया।
भाभी कुछ नहीं बोली, बस सामने देखती हुई मुस्कुराने लगी जैसे उसे कुछ पता ही नहीं।

मैं भाभी की योनि को साफ महसूस कर सकता था।

मैंने धीरे से सलवार के अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो भाभी थोड़ा सा आगे सरक गई।
थोड़ी देर के बाद भाभी फिर पीछे सरक गई।

इस बार मैंने सीधा उनके कमीज को हटाकर उनके चूतड़ों को थाम लिया।
भाभी के चूतड़ इस बार बहुत ज्यादा गर्म और टाइट थे, जैसे मैं भाभी की नंगी गांड को सहला रहा हूँ.
मेरा लन्ड बिल्कुल फुंकार रहा था।

मैं धीरे से आगे बढ़ा और भाभी को बोला- आई लव यू रचना भाभी!
भाभी बस मुस्कुरा कर रह गई।

मैंने भाभी को पटाने के लिए अपना आखिरी चाल चली।
मैं देखना चाहता कि भाभी मेरी बात को मानती है या नहीं!

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, एक बार डांस कर दो ना!

मेरे इतना कहते ही भाभी झट से औरतों के बीच में चली गई और भाभी नाचने लगी.
वे मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर नाच रही थी, अपनी गांड को मटका रही थी।

भाभी की अदाओं ने मुझे पागल कर दिया।

कुछ देर नाचने के बाद भाभी फिर से मेरे पास आ गई।
तो मैंने फिर से भाभी की गांड पर हाथ रख दिया।

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, एक बार अपनी गोरी गांड को दिखा दो ना!

भाभी जी ने आंखें तरेर कर कहा- सपने लेना छोड़ दो देवर जी!

इतना कहते ही भाभी शालू और अपनी सास के साथ अपने घर चली गई।

अगले दिन फिर से संगीत का प्रोग्राम होने वाला था.
अबकी बार यह प्रोग्राम हमारी छत पर था।

मैं बेसब्री से मेरी जान रचना भाभी का इंतजार कर रहा था।

थोड़ी देर के बाद शालू और भाभी छत पर आ गई।
आज भाभी क़यामत लग रही थी।

भाभी ने हरे रंग का पटियाला सूट पहन रखा था।
नीचे पांव में पायल, हाथों में चूड़ा, गले में मंगलसूत्र और ढेर सारे सोने के जेवर!

भाभी को देखते ही मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।

भाभी मेरी और देख के मुस्कुराती हुई बोली- क्या हुआ? भूत देख लिया क्या!?
मैंने कहा- नहीं भाभी, भूत नहीं … हूर की परी देख ली।

थोड़ी ही देर में भाभी का नंबर आया नाचने का!

भाभी आज कयामत करने वाली थी।
उन्होंने अपने साथ लाए हुए बैग से अपनी नाभि के चारों तरफ घुंघरू वाली तागड़ी बांधी।

भाभी ने मुझसे कहा- अमित, वह छम छम बाजे तागड़ी वाला गाना लगा दो.
मैंने झट से वह गाना लगा दिया।

और गाना लगते ही भाभी झूम उठी।
आज भाभी अपनी पतली कमर की जान निकाल देने वाली थी।

भाभी के मोटे विशाल चूतड कयामत ढा रहे थे।
उनकी बालों की चोटी इधर उधर गान्ड के उपर नागिन की तरह फिर रही थी।

थोड़ी देर में नाचने के बाद मैंने भाभी को इशारा देकर छत के अपने पास कमरे में बुला लिया।
भाभी पानी पीने के बहाने नीचे आ गई।

मैं रसोई में था।
भाभी पानी पीने लगी.

तभी मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी बोली- क्या कर रहे हो अमित, छोड़ो मुझे!
मैं बोला- भाभी, आई लव यू!
“ओके देवर जी, अब छोड़ो मुझे. कोई आ जाएगा!” भाभी के चेहरे पर मुस्कान थी।

मैं रचना भाभी के पीछे चिपका हुआ था।
भाभी की उठी हुई गांड मेरे लन्ड से सटी हुई थी.
मेरा लिंग भाभी के चूतड़ों पर ठोकर मार रहा था।

2 मिनट ऐसे ही रहने के बाद भाभी ने मुझसे कहा- पानी तो पीने दो!
मैंने भाभी को पकड़े पकड़े ही फ्रिज की तरफ धकेल दिया।
फ्रिज का दरवाजा खोल के एक पानी की बोतल भाभी को दी।

भाभी मेरी बाहों में मेरे सहारे पानी पीने लगी।

मैंने वापस फ्रिज में ही रख दिया.

पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने फ्रिज से एक अंगूर का गुच्छा निकाल लिया और भाभी के होठों पर रख दिया.
भाभी मेरी आंखों में देख मुस्कराई।

मैंने इशारे से खाने को कहा।
भाभी ने एक अंगूर को अपने गुलाबी होठों से तोड़ लिया।

फिर मैंने कुछ एक अंगूर को अपने होठों में ले लिया.
इस तरह से 10 मिनट तक हम एक दूसरे की बाहों में एक एक करके कभी भाभी कभी मैं अंगूर खाते रहे।

अचानक किसी के आने की आहट हुई तो मैंने भाभी को एकदम से छोड़ दिया।
भाभी एकदम भाग कर ऊपर चली गई।

अगले 2 दिन तक शादी के कारण कुछ नहीं हुआ।

शादी के बाद सभी रिश्तेदार अपने अपने घर चले गए.

मैं भाभी को शादी में एक बार फिर पकड़ना चाहता था, पर भाभी ने कोई मौका नहीं दिया।

अगले दिन दोपहर को जब मैं घर पर अकेला था।

किसी ने डोर बेल बजाई तो मैंने देखा.

ओह माय गॉड … मेरी जान रचना भाभी दरवाजे पर खड़ी थी।

मैंने दरवाजा खोलने की बजाए अंदर से ही बोल दिया- आ जाओ!

भाभी ने दरवाजे की कुंडी लगाई और अंदर आ गई।

वे जैसे ही अंदर आई, मैंने उनको पकड़ लिया।
भाभी मुस्कुरा कर बोली- तुम्हें कुछ और काम नहीं है क्या?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपसे प्यार करता हूं।
भाभी हंसने लगी, बोली- मुझे पता है तू कितना प्यार करता है। मेरे से अगर प्यार करता है तो मुझे छोड़!

मैंने झट से भाभी को छोड़ दिया और दूर खड़ा हो गया.

भाभी बोली- सच में प्यार करते हो क्या?
मैंने कहा- हां भाभी, आई लव यू! मैं आपके बिना नहीं जी सकता।

भाभी मुस्कुराई और मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।

उन्होंने चैन वाला कमीज पहना था।
भाभी की नंगी पीठ को देख कर मेरा मन हुआ कि मैं भाभी को पकड़ लूं।
पर भाभी ने कहा था कि मुझसे दूर होकर बात करो।

भाभी- सच बताओ क्या चाहिए? झूठ मत बोलो!
मैंने कहा- भाभी. मुझे आप चाहियें।

भाभी ने कहा- आ जाओ लाडले देवर जी अपनी लाडली भाभी के पास!

मैं झट से भाई के पास गया।

भाभी ने भी अपनी दोनों बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर डाल के बोली- अमित तुम्हें क्या चाहिए, मुझे पता है। पर मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। पर तुम जो चाहते हो, उसके लिए मना भी नहीं कर सकती।

मैंने अपने दोनों होठों को भाभी की गर्दन पर रख दिया।
भाभी की सांसें गर्म हो चली थी। उनकी दोनों मोटी मोटी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से उनको पकड़ लिया, उनको दबाने लगा.
भाभी तेजी से सांस ले रही थी- हमें छोड़ो ना अमित … आह नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

मैंने भाभी की पूरी की पूरी गर्दन को अपनी जीभ से चाट चाट के लाल कर दिया।
भाभी ने कहा- अभी कोई आ जाएगा, तुम फिर आ जाना। तुम कहो तो मैं अपने रूम में बुला लूंगी. रात को मैं ऊपर सोती हूं। आपके भैया रात को ड्यूटी करने जाते हैं; तब आ जाना।

पर मैं कहां मानने वाला था; मैंने कहा- नहीं भाभी, प्लीज अब मत जाओ।
भाभी ने कहा- अमित प्लीज जाने दो मुझे. तुम कहोगे ना मैं तुम्हें बुला लूँगी।

मैंने कहा- ठीक है. तो मुझे आपके दो अनमोल रत्न देखने हैं।
भाभी एकदम से मुस्कुरायी- क्या? कौन से रत्न हैं मेरे पास?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपके पिछवाड़े पर मरता हूं. बस एक बार दिखा दो।
भाभी ने कहा- बदमाश हो तुम देवर जी। पर ठीक है, प्रॉमिस करो कि उससे आगे नहीं जाओगे।

मैंने कहा- नहीं भाभी, दिखा दो ना प्लीज।
भाभी बोली- ठीक है दिखा दूंगी, पर तंग मत करना। तुम दूसरे मर्द हो जिसको मैं अपने दो अनमोल रत्न दिखा रही हूं। इस गांड पर सिर्फ आपके भैया का हक है।
मैंने कहा- भाभी, क्या मेरा हक नहीं है?

भाभी 5 कदम आगे जाकर सामने रखी मेज पर घोड़ी बन गई और मेरी तरफ देख कर बोली- तुमने अपना हक बना लिया है अमित. तभी तो देखो मैं घोड़ी बन गई।

भाभी ने जैसे ही एक हाथ से अपने सलवार के नाड़े को खोलना चाहा.
मैंने भाभी को टोकते हुए कहा- भाभी, यह नाड़ा खोलने का सौभाग्य तो दे दो मुझे!

भाभी एकदम से मुस्कराई और बोली- हां चलो दे दिया हक! पर नाड़ा खोलने के बाद वहीं पर जाकर खड़े हो जाना। आज से दूर से दीदार कराऊंगी।

मैं धड़कते दिल से भाभी के पास गया और कांपते हाथों से भाभी का नाड़ा खोल दिया।

नाड़ा खुलते ही घोड़ी बनी भाभी के चूतड़ों के ऊपर से सलवार फिसल गई।
मैं चार कदम पीछे हट गया और भाभी की गांड को निहारने लगा।

भाभी ने नीचे से पेंटी नहीं पहन रखी थी.
उनके मोटे गदराये चूतड़ मेरे सामने थे।

Bhabhi Ki Nangi Gand
Bhabhi Ki Nangi Gand

उन्होंने अपनी योनि को पूरी तरह से वैक्स किया हुआ था।
भाभी के चूतड़ ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रहे थे।

मैं चाहता था कि भाभी के पास जाऊं उनके दोनों चूतड़ों को चूम लूं।
मेरा लौड़ा पजामे में तंबू बना हुआ था।

मैंने कहा- भाभी पास आ जाऊं क्या?
भाभी ने कहा- सब्र रखो अमित … सब्र का फल मीठा होता है. अब जाने दो. मैं तुम्हें कल टाइम लगते ही बुला लूंगी।

इतना बोल कर भाभी ने अपनी सलवार नीचे से उठा ली और अपना नाड़ा बांधने लगी।

मैं झट से भाभी के पास गया और भाभी का नाड़ा पकड़ लिया।

मैंने भाभी से कहा- लाओ, मैं बांध देता हूं।

तब मैंने भाभी की गांड से अपने लिंग को सटा कर बड़े प्यार से भाभी को नाड़ा बांध दिया।

भाभी से बोला- भाभी, मैं चाहता हूं कि आप बिल्कुल सज संवर कर मुझे अपना प्यार दें।
उन्होंने पूछा- बोलो क्या पहनूं देवर जी के लिए?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपको ब्लैक सूट में देखना चाहता हूं।
भाभी ने कहा- ठीक है. मैं तुम्हें बुला लूंगी. पर यह सब किसी को पता नहीं लगना चाहिए।

अगले दिन भाभी ने मुझे बता दिया कि रात के 10:00 बजे आ जाना।

बड़ी बेसब्री से मैंने रात होने का इंतजार किया।

रात को 10:00 बजे मैं भाभी के घर की दीवार को फांद कर चुपके से भाभी के कमरे की तरफ जो कि ऊपर था वहां पर पहुंच गया।

सावधानी से मैंने दरवाजा खोला।
मैंने देखा रचना भाभी बेड पर लेटी हुई थी।

जैसे ही हमारी नजरें मिली, भाभी ने एकदम कहा- 2 मिनट बाद आना!

मैं 2 मिनट के बाद अंदर गया तो देखा कि भाभी ने घूंघट किया हुआ था और बेड पर बैठी थी।
मैंने दरवाजे की कुंडी लगा दी।

मैं कांपती टांगों से भाभी के बेड पर चला गया.
मैंने देखा भाभी ने ब्लैक कलर का पटियाला सलवार सूट पहना हुआ था।
भाभी ने अपने हाथों में काले रंग की चूड़ियां से अपनी कलाइयों को भर रखा था।
उन्होंने अपने पांव में पाजेब डाल रखी थी।

मैं भाभी के पास बैठ गया, भाभी के घूंघट के अंदर झांकने लगा.

भाभी ने एक बार मेरी तरफ देखा, मुस्कुराई और अपनी गर्दन नीचे कर ली।

तब मैं भाभी के बिल्कुल पास बैठा था।

भाभी बोली- देवर जी, मुझे मेरा मुंह दिखाई चाहिए।
मेरे पास भाभी को देने के लिए कुछ नहीं था तो मैंने कहा- मेरे पास तो कुछ भी नहीं है देने को!

भाभी मुस्कुरा कर बोली- जी, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, बस आपका प्यार चाहिए.

इतना कहते ही मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया।

मेरा एक हाथ भाभी के के चूतड़ों के पास था।
भाभी के मस्त मोटे मोटे चूतड़ों को मेरी उंगलियां छू रही थी।

मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया।
भाभी के मोटे मोटे उरोज मेरी छाती से लग रहे थे।

मैंने एक हाथ भाभी के चूतड़ों पर रख दिया, उन्होंने दबाने लगा.
भाभी सीसी करने लगी।

मैं भाभी के मोटे मोटे चूतड़ों को सहलाने की बजाय उनको फुटबॉल की तरह दबा रहा था।

भाभी को नशा सा हो रहा था- उफ्फ देवर जी … ऐसे ना छेड़ो … आई उफ्फ!
वे मेरी बांहों में छटपटा रही थी।

इस छटपटाहट में मेरा मोटा तना हुआ लौड़ा भाभी के हाथ से लग रहा था।
या यूं कहूं कि भाभी जानबूझ के मेरे लौड़े से खेल रही थी।

भाभी बोली- उफ्फ मोटा है देवर जी! नही … मेरी लाडो फट जाएगी।

मैंने भाभी के हाथ को पकड़ कर अपने तने हुए लौड़े पे रख दिया।
भाभी ने झट से किसी डंडे की तरह मेरे लौड़े को पकड़ लिया और अपनी आंखें बंद करके लौड़े को सहलाने लगी।

मैं जल्द से जल्द भाभी की सलवार खोलना चाहता था।
भाभी के मोटे और कसे हुए चूतड़ों का कब से दीवाना था मैं!

मैंने एक उंगली भाभी के लटकते हुए नाड़े में फंसाई और एक ही झटके में भाभी की काली सलवार का नाड़ा खोल दिया।

सलवार अपने आप भाभी की चिकनी चौड़ी फैली हुई गांड से फिसल कर नीचे सरक गई।

अब भाभी के सुडौल चूतड़ों पे मात्र काली छोटी सी पैंटी बची थी।

मैं पागलों की तरह भाभी के मोटे दूधिया या ये कहूं लालिमा लिए हुए पुष्ट कूल्हों को काली कसी हुई पैंटी में निहार रहा था।

मैंने कांपते हाथों से भाभी की चिकनी गांड को छुआ तो मेरे हाथ अपने आप फिसल कर नीचे पैंटी से टकरा गए।

मेरी हालत को देख कर भाभी ने मेरे लन्ड पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी और जोर जोर से उसको सहलाने लगी।

मैंने भाभी के कमोज को उतारने के लिए इशारा किया तो भाभी मुस्करा दी और खुद अपना सूट उतार दिया।

अब भाभी मात्र काली डिजाइनर ब्रा और पैंटी में थी।
मैं भाभी को देख कर पागल सा हो गया था।

भाभी का मंगलसूत्र भाभी की 36 साइज की गोरी तनी हुई चूचियों में फंसा हुआ था।

उन्होंने आज मेरी फरमाइश पर लाल की बजाय काले रंग की चूड़ियां को अपनी कोहनियों तक डाला हुआ था।

भाभी की पतली नागिन सी बल खाती हुई कमर पर चांदी की घुंगरुओं वाली तागड़ी थी जो भाभी के थोड़ा सा भी हिलने पर आवाज कर रही थी।
नीचे भाभी ने पांवों में पायल पहनी हुई थी।

भाभी के आगे रंभा, उर्वशी, मेनका जैसी स्वर्ग लोक को अप्सरा भी फीकी पड़ जाएं भाभी का रूप और यौवन देख कर!

उनके चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे जिनमें से भाभी का लाल गोरा दमकता हुआ चेहरा चमक रहा था।

भाभी ने मेरी तरफ मुस्करा कर देखा और कहा- लाडले देवर जी, देखने से मन भर गया हो तो आ जाओ अपनी लाडली भाभी के पास!

मैंने अपने कपड़े उतारे और सिर्फ अंडरवियर में अपने तने हुए तंबू को लेकर भाभी के डबल बेड पर भाभी के करीब जाकर भाभी को अपनी बाहों की गिरफ्त में ले लिया।

मैंने भाभी के चांद से रोशन चेहरे को देखते हुइ अपने होठों को भाभी के गुलाबी होठों पे रख दिया।
भाभी मेरे निचले होठ को अपने होठों में दबा कर चूस रही थी।

मेरा एक हाथ भाभी की चिकनी कमर को दबोचे हुए था और एक हाथ पैंटी के ऊपर से भाभी की गोल मांसल गांड पे फेर रहा था।
भाभी मस्ती से अपनी गांड को हिला रही थी।

कभी मैं, कभी भाभी एक दूसरे की जीभ को चूस रहे थे।

मैंने एक हाथ भाभी की पैंटी में डाल दिया।
पैंटी में हाथ जाते ही मैंने पाया कि भाभी की योनि से काम रस की नदियां बहती हुई प्रतीत हो रही थी।
मेरा पूरा हाथ भाभी के काम रस से भीग चुका था।

भाभी का चेहरा और आँखें वासना से गुलाबी हो चुके थे।

मैंने भाभी की कमर के पीछे हाथ ले जाकर भाभी की काले रंग की ब्रा का हुक खोल दिया।

भाभी की ब्रा के खुलते ही दो सफेद कबूतर आजाद हो गए।
उनके दोनों चूचे बिलकुल तने हुए थे।
मोटे गोरे चूचों पर दो ब्राउन रंग के तने हुए निप्पल थे।

मैं जरा भी देर ना करते हुए भाभी की चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। मैं चूचियों को बदल बदल के चूस रहा था।

भाभी पागल सी हो गई थी।
रचना भाभी ने मेरे लौड़े को अंडरवियर में हाथ डालकर पकड़ लिया और उसको मुठियाने लग गई।

भाभी के लन्ड के मुठियाने और मेरे चूचियों को चूसने के कारण भाभी की चूड़ियों, पायल, कमर में बंधी तागड़ी की आवाज कमरे में म्यूजिक का काम कर रही थी।
छन छन की आवाज से कमरे का माहौल और मादक हो गया था।

भाभी ने एकदम से मुझे नीचे गिरा लिया और भूखी शेरनी की तरह से मेरे लौड़े को अंडरवियर से आजाद कर दिया और उसपे टूट पड़ी।

कभी अपने गोरे गर्म गालों को मेरे लन्ड पे रगड़ती, कभी उसको मुठिया के अपने दोनों चूचों के बीच भरती।

दो मिनट के बाद भाभी ने मेरे सात इंची लन्ड के टोपे पे अपने गुलाबी हाथ रख दिए।
जिसके परिणाम स्वरूप मेरा लन्ड उत्तेजना से प्रीकम उगलने लगा।

भाभी प्रीकम को अपनी नुकीली जीभ से चाट चाट कर तुरंत साफ करने लगी।
उनकी इस हरकत से मैं अपनी कमर को उछलने लगा।

भाभी ने अपना पूरा मुंह खोलकर मेरे मोटे लन्ड का स्वागत किया।
वे ज्यादा से ज्यादा मेरे लौड़े को मुंह में लेने को कोशिश कर रही थी।

कभी टोपे को कभी अंडकोष को मुंह में भरकर चूसने से मेरा लौड़ा अब वीर्य उगलने वाला था।
मैंने भाभी को इशारा भी किया कि मेरा वीर्य निकलने वाला है।

भाभी बोली- लाडले देवर के यास का टेस्ट करके रहूंगी। आह आजा देवर जी … उगल दो वीर्य!

“उफ्फ भाभी आह … सी आई आई”
मेरे लन्ड से पिचकारी सीधी भाभी के गले में उतर गई।

भाभी ने एक बूंद को भी बाहर नहीं आने दिया; सारा का सारा वीर्य घूंट घूंट कर भाभी अपने गले में उतार गई।

वीर्य की दो बूंद उनकी ठोढ़ी पे लगी हुई थी जिससे उनका चेहरा और भी मादक लग रहा था।

अब मेरी बारी थी; मैं बेड से नीचे उतरा और भाभी को घोड़ी बना दिया।

मैं भाभी के चूतड़ों के पीछे आ गया।
भाभी के मोटे चूतड़ों के दोनों पट काफी विशाल थे।

उनकी कमर में बंधी चांदी की तागड़ी भाभी की कमर और चूतड़ों को और कामुक बना रही थी।

इन विशाल चूतड़ों की सबसे बड़ी खासियत थी उनका गोरापन … और उनके ऊपर एक बड़ा कला सा तिल।

भाभी की काली पैंटी उनकी गान्ड की दरार में फंसे होने के कारण पूरी तरह से काम रस में भीगी हुई थी।

मैं किसी सांड की तरह अपने मुंह को भाभी की गान्ड के पास ले गया और अपने नाक को बदहवास होकर भाभी के चूतड़ों की गहरी खाई में घिसने लगा।
मुझे एक मादक गंध ने मदहोश कर दिया था।

मैंने एक झटके में भाभी पैंटी को भाभी के चूतड़ों से अलग कर दिया।

उनके मोटे चूतड़ों से जैसी ही पैंटी अलग हुई, भाभी की योनि के दर्शन मात्र से मेरा लौड़ा पागल हो गया था।

भाभी की योनि के दोनों होठ बहुत मोटे और गुलाबी रंगत लिए हुए थे।

योनि के बीचों बीच डेढ़ इंच का एक चीरा था जो गहरा गुलाबी था जिस पर भाभी के योनिरस की बूंदें चमक रही थी।

मुझसे अब और इंतजार नहीं हो रहा था।

मैं अपने चेहरे को भाभी की चिकनी डबल रोटी जैसी योनि के पास ले गया और किसी कुत्ते की तरह जीभ निकाल कर भाभी के योनि द्वार से छेड़छाड़ करने लगा।

मेरी इस हरकत से भाभी सिर से लेकर पांव तक कांप गई।

मैं अपनी जीभ से उनके मोटे गोरे मांसल चूतड़ों को चाटने लग गया था।
पूरे के पूरे चूतड़ चाट चाट कर लाल बना दिए।

मैं घोड़ी बनी भाभी की गान्ड के बीचों बीच अपनी जीभ को फेर रहा था।
भाभी की योनि के मोटे होठों को कुरेद कुरेद कर भाभी को उत्तेजित कर रहा था।

वे धीरे धीरे अपनी कमर और गांड को हिला रही थी।

अब मैंने अपनी पूरी जीभ भाभी की योनि में डाल दी थी।
भाभी ज्यादा से ज्यादा अपनी गांड को मेरे मुंह पर धकेल रही थी।

मैं उनकी योनि के अंगूर के दाने को अपने दोनों होठों में दबा कर चूस रहा था।

भाभी जोर जोर से अपनी गांड को मेरे मुंह पर मार मार कर बड़बड़ा रही थी- आह्ह देवर जी … उफ्फ गई … आह उफ्फ! देवर जी आह … सी आई उफ्फ! गई मैं!
ये बोल कर भाभी ने ढेर सारा पानी मेरे मुंह पर छोड़ दिया।

मैंने अभी भाभी की रसीली योनि को छोड़ा नहीं था।
मैं पागल हो गया था।
एक पल भी मैं रचना भाभी को छोड़ना नहीं चाहता था।

पांच मिनट योनि चाटने के बाद भाभी फिर से बड़बड़ाने लगी- डाल दे ना मूसल लौड़ा अब … आह्ह्ह डाल दो ना लाडले देवर जी! चोदो ना अभी चुड़ककड़ भाभी को! लव यू देवर जी … चौड़ी कर दो मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से!

मैंने झट से भाभी की कमर को थाम लिया।
लन्ड का टोपा भाभी की गोरी और चिकनी चूत पे सेट किया और एक झटके में आधे से ज्यादा लन्ड भाभी की चूत में डाल दिया।

मेरे इस प्रकार लन्ड की चोट के लिए भाभी तैयार नहीं थी- उई मां देवर जी … आह्ह हआ धीरे से देवर जी!

मैंने किसी बात की परवाह नही की बल्कि भाभी की कहराती आवाज ने मुझे हौंसला दिया और जालिम तरीके से भाभी को पेलने लगा।
भाभी भी गांड उठा उठा के मेरे लौड़े पर पटकने लगी।
वे अपनी कमर को हिला हिला कर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी थी।

भाभी की पहनी गई चूड़ियों, पायल ने कमरे में एक तरह का म्यूजिक चला दिया था।

मैं अपनी घोड़ी का घुड़सवार बन गया था।

भाभी के मोटे विशाल चूतड़ मेरी जांघों से टकराने पर पूरे कमरे में पटापट की आवाजें आ रहीं थीं।

पांच मिनट में घोड़ी बना कर चोदने के बाद भाभी बोली- देवर जी, मुझे भी अब सवारी करने दो।

भाभी का मतलब मैं समझ गया और भाभी झट से मेरे ऊपर आकर मेरे लौड़े पर बैठ कर उछलने लगी।
पूरा का पूरा लौड़ा भाभी ने अपनी चिकनी चूत के अंदर ले लिया था।

“अह्ह देवर जी … आई लव यू! उफ्फ … सीआई!” भाभी पागलों की तरह मेरे लौड़े पर उछल उछल कर चुदवा रही थी।
मेरे दोनों हाथ भाभी की गोरी गांड को दबोचे हुए थे।

मैं नीचे से भाभी को चोद रहा था और उपर से भाभी अपनी विशाल गांड को पटक रही थी।
भाभी के मोटे चूचे हवा में झूल रहे थे।

चार मिनट की इस चुदाई के बाद भाभी गर्र गर्र करती हुई झड़ गई और मेरे ऊपर ढेर हो गई।

मैं अभी फारिग नही हुआ था।
मैंने भाभी को मिशनरी पोजीशन में लिया और योनिरस से सने लन्ड को भाभी की चूत में डाल दिया।

मैं कमर को उचका कर धक्कों को रफ्तार से भाभी की योनि में लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था।

मैंने भाभी की हिलती चूचियों को अपने मुंह में जितनी आ सकती थी, उतनी भर लिया।

मैं भाभी को चोदने के साथ साथ उनकी मस्त चूचियों का रसपान कर रहा था।

भाभी अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लौड़ा सटासट अंदर ले रही थी- रज्जा आ आई आआई आई … चोदो मेरे बलम … मेरे सैंया … आई … गई सी …आई उफ्फ श्सह देवर जी चोदो … बना लो अपनी! आह देवर जी, आपके मोटे लौड़े से फाड़ दो मेरी चूत!

उनके इतना बोलते ही मैं और भाभी दोनों एक साथ झड़ने लग गए।

मैं निढाल हो कर भाभी की मस्त चूचियों के ऊपर सिर रख कर भाभी के सीने से चिपक गया.
भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

पूरी रात हमने जमकर चुदाई की।

इसके बाद जब भी मौका मिलता, मैं और भाभी एक दूसरे से मिलते और सेक्स का मजा लेते.

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली सेक्स स्टोरी?

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